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Waterproofing Ka Sach Indias Most Mishandled Construction Material

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TITLE: Waterproofing Ka Sach: India Ka Sabse Mishandled Construction Material | 14 Lakh Repair Bill | EP160 CHANNEL: The CODE DATE: 2026-06-20 ---TRANSCRIPT--- 2019 दिल्ली वसंत कुंज रिया मेरे दोस्त के पापा मैं उन्हें शर्मांक बुलाता हूँ। उन्होंने अपना सपना पूरा किया। फोर बीएचके का। 1 ब्रांड न्यू घर लिया। सारी जिंदगी की और उम्र की पूरी कमाई उस घर में लगा दी। इम्पोर्ट इटालियन मार्बल वो वाला यूपी वी सी जिसका भ्रूषण 6 महीने तक शर्मांक की कॉफी टेबल पर पड़ा रहा, गृह प्रवेश हुआ। पंडित जी, आए पूरे मोहल्ले को बुलाया मेरे फादर भी गए। बोले यार, ये तो पहले जैसा है। टू थाउजंड। ट्वेंटी फोर से घर मास्टर बेड रूम के कोर में ब्लैक किचन की सीलिंग से पानी टपक रहा है। कहाँ से ऊपर वाले बाथरूम से ड्राइंग रूम की दीवार पेंट छिल कर गिर रहा है। जैसे सूखी रोटी। पूरा घर डैम स्मेल से भरा हुआ है। रिपेयर का एस्टीमेट आया, पता कितना 14 लाख रूपए। शर्मा अंकल ने 5 साल में अपने ही घर का इतना ग्रोस डैमेज देखा की उन्होंने कंफेसकियामेरेफादर को की यार गलती कहाँ हो गयी। मुझसे और गलती का नाम था वो मटेरियल जो इंडिया में सबसे ज्यादा मिस हैंडल्ड। होता है कंस्ट्रक्शन में वो मटीरियल और तकनीक जिसका नाम आपने शायद टीवी आयड्स में तो जरूर सुना है वो मटेरियल जिसका बजट टोटल कंस्ट्रक्शन कॉस का मात्र 2 परसेंट होता है। लेकिन अगर वो तकनीक या मटेरियल फेल हो जाए तो 10 गुना ज्यादा पैसा खा जाता है। प्लस हेल्थ प्लस मेंटल पीस प्लस शादी सुदा जिंदगी में वो डेली की फाइट की बोला था। न कांट्रेक्टर को ठीक से काम करवाओ। जिसकी मैं बात कर रहा हूँ वो है वाटरप्रूफिंग। अब रुको। आप सोच रहे हो यार, ये तो सब जानते हैं। वाटर प्रूफिंग इम्परटेंट है नहीं सर आप जानते हो आपका कॉन्ट्रेक्टर जानता है, आपका आखेटक जानता है। लेकिन सबको पता होने के बाद भी इंडिया में वाटर प्रूफिंग फेल क्यों होती है। ये 1 मिस्ट्री है जिसका जवाब आप आज। इस 5 से 10 मिनट के एपिसोड में समझोगे और 1 बोनस में आपको 1 घर की कहानी सुनाऊंगा। पूने से जहाँ इंस्पेक्शन में कोंक्रीट का स्ट्रेंथ चेक किया गया। डिजाइन था। ट्वेंटी न्यूटन पर स्कोर साइट पर निकला टेन प्वाइंट सेवन थ्री आधी। वो भी 1 वर्कमैनशिप डिजास्टर था। लेकिन पहले वाटर प्रूफ कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में 1 फ्रेमवर्क है जिसे मैं द टू परसेंट रूल कहता हूँ। टोटल कंस्टरक्शन कॉस्ट का सिर्फ 2 परसेंट पैसा लगता है। वाटर 1 करोड़ रूपए का घर बन रहा है। 2 लाख। 1 50 लाख का घर बन रहा है सिर्फ 1 लाख। लेकिन अगर ये 2 परसेंट का काम गलत हो गया न। तो पोस्ट कंस्ट्रक्शन रिपेयर्स वास्ट मेजोरिटी है। ऑफ़ ऑल कंस्ट्रक्शन रिलेटेड कम्पलेंट्स पोस्ट हैंडओवर। लीगल केसेज एंड हेल्थ रिलेटेड इशूज इन इंडियन होम्स। इंडस्ट्री डेटा कंफर्म करता है कि अर्ली स्टेज वाटरप्रूफिंग प्लानिंग लाइफ साइकिल मेंटनेंस कॉस्ट को 40 पर्सेंट से ज्यादा रिड्यूस कर सकती है। इसका मतलब अगर आप 2 लाख आज ठीक से खर्च करते हो तो आप 10 साल में 20 लाख बजाते हो। शर्मा अंकल वाला 14 लाख का रिपेयर। ये छोटा एग्जाम्पल मैं आपको बिल्डिंग इंजीनियरिंग वाला स्टेटिस्टिक बताता हूँ। रिसर्च कहती है। की बिल्डिंग फेलियर्स में 25 पर्सेंट मटेरियल प्रॉब्लम है, 25 परसेंट कंस्ट्रक्शन प्रॉब्लम है और 25 परसेंट डिजाइन प्रॉब्लम होती है। मतलब 3 पिलर्स, मटीरियल, कंस्ट्रक्शन और डिजाइन फिफ्टी परसेंट बिल्डिंग के कोलाब के पीछे ये तीनों ही होते है और वाटर प्रूफिंग। ये तीनों में साइमल्टेनियस ली गलती करने की गोल्डन ओपोर्चुनिटी है। इसका सलेक्शन भी गलत होता है, इसका डिजाइन भी मिस होता है और इसका कंस्ट्रक्शन भी नाकाम होता है। तो वाटर प्रूफिंग फेल होती क्यों है। क्योंकि इंडिया में हम 8 सिस्टेमिक गलतियां करते हैं, 11 करके सुनो जल्दी नंबर वन डिजाइन प्लानिंग है ही नहीं। वाटरप्रूफिंग को घर के ब्लू प्रिंट का हिस्सा नहीं बनाया जाता। यह 1 आफ्टर थॉट होता है। प्लास्टर के बाद देखेंगे वहीं से सब खराब हो जाता है। गलती नंबर, टू, वन, साइज, फिट्स, ऑल, अप्रोच सेम प्रोडक्ट, बेसमेंट में भी बात, रूम में भी टेरेस, पे भी। भाई। हर जोन के लिए डिफ्रेंट कैमेस्ट्री होती है। क्रिस्टलाइन अलग, पॉली, युरिथेन अलग, बिटूमिनस अलग। गलती नंबर 3 शॉप कीपर की सलाह पर भरोसा आप लोकल हार्डवेयर वाले से पूछते हो भैया, कौन सा लगा। वो वो बेचता है जिसमें उसका मार्जन बेस्ट है। ये सर्टिफाइड स्पेशलिस्ट नहीं है। ट्रेडर गलती नंबर 4 सर्फेस प्रेपरेशन से काम चलाना। ये सबसे बड़ी गलती है। कंस्ट्रक्शन केमिकल इंडस्ट्री में 1982 ऐसे काम कर रहे वेटर एक्सपर्ट्स ने साफ़ लिखा है की नंबर ऑन कार्स ऑफ, वाटर प्रूफिंग, फेलियर इन इंडिया, इज, नोट प्रोडक्ट, क्वालिटी, इट, इज, सबस्ट्रेट प्रेपरेशन। गलती नंबर 5 अंस्किललेबर आम मेशन केमिकल एप्लीकेशन के लिए ट्रेन नहीं होते। आप उनसे सिमेट वर्क करवा लीजिये, टाइल्स भी करवा लीजिये। लेकिन पॉली यूरेथेन की मेंबरेन बस, ये स्पेशलिस्ट का काम है। गलत आदमी से करवाया तो पैसा पूरा बर्बाद गल्ती नंबर 6 एक्सपेंशन जॉइंट्स को इगनोर कर देना। नॉर्थ इंडिया का टेम्परेचर 5 डिग्री से 45 डिग्री तक चला जाता है। मटीरियल फैलते हैं, सुकड़ते है एक्सपेंशन जॉइंट्स के थ्रू अगर ये जॉइंट्स वाटर प्रूफ नहीं किए। पहले ही मानसून में क्रैक आ जाएगा। गलती नंबर 7, रूफ स्लोप गलत, ये सबसे कॉमन मिस्टेक है और ये सबसे बेसिक चीज है। लेकिन लोग ये करते है। टेरेस फ्लैट होना चाहिए, नाइजर स्लाइटली स्लोप होना चाहिए। पानी बाहर निकालने के लिए, बिना स्लोप के पानी जमता है। जमने वाले पानी वाटर प्रूफ लेयर। को यूवी, एक्सपोजर और स्टैगनेशन से खा जाते हैं। जल्दी नंबर 8 वलनरेबल एरियाज को मिस कर देना। बाल और फ्लोर की जंक्शन प्लम्बिंग फिक्चर्स के आसपास पाइप पेनेटरेशन। यहीं से एटी परसेंट लीग्स आते हैं और यहीं पर कॉन्ट्रेक्टर सबसे ज्यादा लैप्स कर जाते हैं। यहाँ मैं आपको 1 और कहानी बताना चाहता हूँ। ये पूने की कहानी है। 1 पार्किंग स्लैब थी विजुअल इन्स्पेक्शन में इंजीनियर ने देखा की कंटीन्यूस लीकेज हो रही है। हनी को वो कैविटीज जहाँ से आप एग्रीगेट देख सकते हो। कोंक्रीट के अंदर साफ़ सिग्नल की वाटर प्रूफिंग पहले ही हार चुकी है। और 1 और साइट खेद में रेजिडेंशल एन डी टी टेस्टिंग, नॉन डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग करवाई गई कांक्रीट पे डिजाइन स्ट्रेंस चाहिए थी। 20 न्यूटन पर स्कोर साइट स्ट्रेंथ ने के लिए टेन प्वाइंट सेवन थ्री न्यूटन पर स्कोर। लगभग आधी कारण कांट्रेक्टर ने सांड की जगह स्टोन ग्रिड को यूज किया था। ये सिर्फ वर्क में शिप इशु नहीं है। यह 1 फ्रॉड है। और जब यह मटीरियल इतना कमजोर है तो वोटर ग्राफिंग क्या बचाएगा। आप 1 डूंड स्ट्रक्चर को कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट दे रहे हो। ये 1 लाइफ सेफ्टी का इशू है। सिर्फ डैमेज नहीं, यही रीजन है। जो में रिपीट करता हूँ की बिल्डिंग के 3 पिलर्स, मटेरियल, कंस्ट्रक्शन और डिजाइन सब इंडिपेंडेंटली फेल कर सकते हैं। तो अगर शौक की भी सलाह नहीं लेना तो कैसे किसकी एडवाइस लेना। ये एरिया स्पेसिफिक मेट्रिक्स है। इसे याद करो। बेसमेंट क्रिस्टलाइन या सिमेंटेशन वाटरिंग क्यूँ अंडरग्राउंड हाइड्रो स्टेटिक प्रेशर रजिस्ट करता है। पानी ऊपर से नीचे नहीं, नीचे से ऊपर पुश करता है। बाथरूम और बैलकनी पॉलियूरिथेन बेस्ट क्यूँ फ्रीक्वेंट डायरेक्ट वाटर एक्सपोजर पी यू मेंबरेन फ्लेक्सिबल होती है। क्रैक्स के साथ मूव करती है। रूफ और टेरिस बि ट्यू मिनस या इलास्टोमेरिक यू वी एक्सपोजर हैंडल करना, थर्मल साइकलिंग मानसून की डायरेक्ट हिट। यह मटीरियल स्पेसिफिकली इंजीनयर है। फॉर दी, असॉल्ट, फ्रॉम अभाव और प्रोटोकॉल एकदम स्ट्रेट रखना है। सर्फेस प्रेपरेशन क्लीन एंड ड्राई प्राइमड, सर्फेस टू क्रैक रिपेयर। हर एग्जिस्टिंग क्रैक को पहले ट्रीट करेंगे। फ्री एप्लिकेशन स्प्रे या रोलर मैनिफेक्चरर की स्पेसिफिकेशन के अकॉर्डिंग फॉर क्यूरिंग टाइम। यह कभी भी रस नहीं करना। इसको आराम से 24 घंटे मतलब, 24 घंटे। आखिरी बात सुनने से पहले आप सोच रहे हो यार अब तो कांट्रेक्टर को बोल दूंगा प्रॉपरली करवाने के लिए काम कल सोच आप। आखिरी चेक पॉइंट कांट्रेक्टर पर भरोसा नहीं कर। हा बस वेरीफाई भी करना प्लीज। कैसे पोंटिंग टेस्ट टेरेस वाटर प्रूफिंग कम्पलीट होने के बाद पानी भर। 2 24 से 48 घंटे छोड़ 2 अगर। नीचे की सीलिंग पर 1 भी नमी का स्पॉट आया। पेमेंट रोक। 2 यह आपका राइट है। ये स्टैंडर्ड प्रैक्टिस है। ग्लोबली और दूसरी चीज ज्वाइंट वारेंटी मटीरियल। मेनुफेक्चुरर की वारेंटी अलग, एप्लीकेटर की वारेंटी अलग। ये ज्वाइंट वारंटी लो सेम डॉक्यूमेंट में 5 से 10 साल मिनिमम। और इसको प्रॉपर्टी पेपर्स के साथ सेफ रखो। ये कल आपका सबसे बड़ा वैपन है। तो मैं आज के इस एपिसोड को क्लोज करता हूँ। 1 बात के साथ कि शर्मा अंकल अभी भी उसी घर में रहते हैं। लेकिन जो मास्टर बेडरूम है, अब बेडरूम नहीं रहा, वो स्टोर रूम बन गया। क्यूंकि रिपेयर करवाना। इतना डिस्क्रप्टिव है की उन्होंने विचारों ने हार ही मान ली। उनका बिग रिगरेट क्या है, ये नहीं कि पैसा खर्च हुआ, यह नहीं की टाइम वेस्ट हुआ। उनका रिग्रेट ये है की उन्होंने कंस्ट्रक्शन के टाइम पर वाटर प्रूफिंग को 2 परसेंट वाला काम समझा था। आज वो 2 परसेंट वाला काम उनके घर के 30 परसेंट एरिया को अनयूजेबल बना चुका है। अपने घर का 2 पर्सेंट मत बचाइए उसको स्पेंड करिए, उसको अच्छे से स्पेंड करिए। स्पेंडेड वित द राइट, स्पेशलिस्ट स्पेंडेड वि द राइट, प्रोडक्ट फॉर द राइट। जोन क्यूंकी घर 1 बार बनता है और लीक हर मानसून में याद दिलाता है की आपने सस्ता काम करवाया था। अगला एपिसोड वो आपको बताएगा 1 पब्लिश रिसर्च की कहानी जहाँ 1 फैमिली का 5 करोड़ का घर 9 करोड़ रुपए में जाके खत्म हुआ और 1 फैमिली का ढाई करोड़ रुपए का घर फाइव प्वाइंट थ्री फाइव करोड़ रूपए में जाके खत्म हुआ। 114 परसेंट ओवर बजट कहा जाता है। यह पैसा अगले एपिसोड में मिलते हैं।