The Fake Wealth Dream Indians Were Sold Is Finally Cracking Ravi Sinha
read summary →TITLE: The Fake Wealth Dream Indians Were Sold Is Finally Cracking - Ravi Sinha CHANNEL: Sheeba Aslam Fehmi DATE: 2026-05-22 ---TRANSCRIPT--- आपने ईरान पर सैंक्शन लगा है। आपने समझा की आपने ईरान को पूरी तरह खत्म कर दिया है। ईरान आज भी ग्लोबल आई क्यू में नंबर फोर है, विजिट है पूरे मिडी लिस्ट को हम 80 नंबर पर है। तो आपका जो सबसे बड़ा यूएसपी था कि हम सेफ हेवन है उसपे बॉम्बिंग हो चुकी है। अब दुबई आज की तारीख में ऑफिसियली एडमिट नहीं करेगा। लेकिन दुबई के प्रॉपर्टी मार्केट का क्रैश? 1 नज़र हम देखे हम 2000 8 वाले फेज में आ चुके हैं। कहा जाता है कि भारत सोने की चिड़िया थी, इसको लूटा गया है। भारत को बाहर से आकर कम लोगों ने लूटा है। यहाँ के रूलिंग क्लास से ज्यादा लूटा है। आज भी आप देखें ज्यादातर मिनिस्टर्स सेंटर से लेकर स्टेट तक में आप देख ले। ज्यादातर मिनिस्टर जो हैं उनके अपने बच्चे तो यूएस में यूरोप में सेटल है। उनकी वो प्रायरटी नहीं है, जितने बड़े कॉरपोरेट्स है। उनकी फैमिली तो एब्रॉड में सेटल है, वो उनकी प्रायरटी नहीं। 1 नारायण मूर्ति, निकालेंगे पूरी बेशर्मी के साथ अपने आप को उनकी वाइफ भी सिंपल। मूर्ति, बताएंगे पूरी बेशर्मी के साथ। कहेंगे 70 घंटे युद्ध को काम करना चाहिए। उनका ग्रैंडसन यूके में वर्ण होगा, ढाई सौ करोड़ को वर्ण होने का रिवार्ड उसको ढाई सौ करोड़ मिल जाएगा। इंडिया में टू थर्ड माल्स ऐसे है जिसको हम लोग टेक्निकली रियल, स्टेट की भाषा में घोस्ट माल्स कहते हैं। लोग कहते हैं न कॉमर्शियल प्रॉपर्टी में ज्यादा रिटर्न मिलता है, रेजिडेंसियल ऐसी कम रिस्की होता है। मैं कहता हूँ कॉमर्शियल प्रॉपर्टी से ज्यादा रिस्की कुछ नहीं होता है। 1 नया चीज देखने लगा है की स्केलेशन क्लॉज डाल देंगे। स्केलेशन क्लॉज क्या है। अगर किसी वजह से प्रोजेक्ट हमें टेंडर एवार्ड हो गया और 2 साल हमारा टेंडर रुका रहा पब्लिक प्रोटेस्ट की वजह से किसी वजह से तो हम इसका इस कलेशन क्लॉज है की हम उतना पैसा लेंगे गवरमेंट। उसके बाद मुझे टेंडर मिल गया, मैंने अपने ही किसी चवन्नी छाप एनजीओ से 1 पी गई, लुलवा दिया 2 साल के लिए रुका रहा उसका पैसा मुझे एक्स्ट्रा मिल रहा है, ये करप्शन का 1 ब्रांड न्यू लेवल है, बात कर रहे है खुद अपने प्रोजेक्ट में अड़ंगा लगा कर 23 साल उसको डिले करा। 2 ये भी हो रहा है। हम कोशिश करते हैं कि हमारा हर एपिसोड आपकी जानकारियों में इजाफा करे, नए नजरिए दे और इमीडिएट सेंस में भी आपके लिए फायदेमंद हो। अगर आपको हमारा काम अच्छा लगता है तो प्लीज इसको लाइक कीजिए सब्स्क्राइब कीजिए और भी कई तरीके हैं आप हमारी मदद कर सकते हैं, हमें मजबूत कर सकते हैं। रवि सेना साहब बहुत शुक्रिया किन्तु परंतु को दोबारा वक्त देने के लिए। और जब से ये वार शुरू हुई और दुबई में हमने देखा क्या हाल हुआ है, लोग परेशान हैं, वापस आ रहे हैं। तो जो बड़े बड़े लोग दुबई चले गए थे उन्होंने वहां इन्वेस्ट किया था, अगर नहीं भी गए थे तो इन्वेस्टमेंट बहुत हो गया था भारतीय लोगों के लिए नेक्स्ट गो टू प्लेस दुबई बन गया था। तो मुझे ये ख्याल आया कि इससे पहले जब हम 1 बार बातचीत कर रहे थे तो आपने कहा था यह भी 1 बबल है। और तब वार की कोई संभावना नहीं थी। और ये लगता था दुबई तो आईलैंड ऑफ पीस है और वो न किसी पंगे में फंसते हैं, न वो किसी धार्मिक उन्माद में फंसते हैं। उनके यहाँ सेकुलरिज्म सबसे टाइट है, उनके यहाँ लॉ एंड ऑर्डर सबसे टाइट है, तो वो सबसे सेफ जगह है और सेफ टी की तलाश में लोग वहाँ जा रहे हैं। ऐसा लग रहा था चीजें बहुत बदल गई है, बहुत बहुत स्वागत। अब बताइए क्या है? क्रिया शिवाजी दुबई को समझने के लिए और खासकर दुबई में इंडियंस के इन्वेस्टर को समझने के लिए हमें सबसे पहले यह देखना पड़ेगा कि हम प्री वार रियलिटी पर बात कर लेते हैं। पोस्ट वार की रियलिटी तो पूरी तरह से बदल गई है और उसका जो एग्जैक्ट डेटा प्वाइंट है वो शायद जून एंड तक आएगा उस क्वार्टर का हम प्रॉपर्टी मार्केट में बबल किसे कहते हैं जब कोई भी मार्केट अपने फंडामेंटल्स के अगेंस्ट चला जाए, जब ओवर इन्वेस्टमेंट हो, जब प्राइस का इकॉनमिक नेशनल से कट ऑफ हो जाए तो 1 बबल बनना शुरू हो जाता है। मैं कुछ डेटा प्वाइंट वाइज बात करता हूँ की दुबई में जो नॉन अरब्स का इन्वेस्टमेंट है, मतलब दुबई के लिए जो फॉरन इन्वेस्टमेंट है, प्रॉपर्टी मार्केट में आमतौर पर सालाना वन फॉट्टी बिलियन डॉलर का रहा है। ये 2025 में बढ़ कर टू फिफ्टी बिलियन डॉलर पहुँच गया और इसमें 22 परसेंट कनट्रब्यूशन इंडियंस का था। मतलब अगर मैं रूपए में बात करूँ तो 2000 पचीस में 1 लाख करोड़ का इन्वेस्टमेंट चला गया। प्रॉपर्टी प्राइसेज सिक्स्टी पर्सेंट बढ़ गई। दुबई में। अगर हम हाउसिंग के एब्जॉर्बशन को देखे तो रफली 25 से 30 हजार यूनिट्स वहाँ पर एब्जॉर्व होते हैं साल में, लेकिन पाइपलाइन में 2025, 26, 27, 28 में 60 हजार 70 हजार यूनिट पाइपलाइन में है। इतना ज्यादा जो एबजोबशननहीं होगा तो 1 बबल बना हुआ था। सवाल ये नहीं उठता है कि बबल अभी पूरा वर्स्ट हुआ है या नहीं हुआ है। सवाल है कि बबल तो है। और प्रॉपर्टी मार्केट के इस बबल को वार ने एक्सिलरेट कर दिया। क्योंकि दुबई का सबसे बड़ा जो यू एस पी था वो था दुबई का सेफ हैवेन का। 1 स्टेटस लोग मानकर चलते थे कि यहां पे पीसफुल इन्वॉल्मेंट है, लॉयन ऑर्डर सही है, कोई एक्सटरनल थ्रेट नहीं है और यहाँ पे 1 बिजनेस फ्रेंडली एटमॉस्फेयर है। सबसे पहले यह वक्त आ गया है कि दुबई यूएई को भी 1 बात समझना पड़ेगा की उनके मार्केट को अमेरिका ने नहीं संभाला था, उनके मार्केट को संभाला था इंडिया चाइना यू के अफ्रीकन कंट्रीज ने, सारा इन्वेस्टमेंट यहाँ से आ रहा था। यूएई ने जो सबसे बड़ी गलती की जिसको उन्होंने रिसेंटली एडमिट भी किया, उन्होंने कहा की हम समझते थे अमेरिका हमारी हिफाजत कर रहा है, हम अमेरिका की हिफाजत कर रहे थे। तो आपका जो सबसे बड़ा यूएसपी था की हम सेफ हेवन है उसपे बॉम्बिंग हो चुकी है। अब दुबई आज की तारीख में ऑफिसियली एडमिट नहीं करेगा। लेकिन दुबई की प्रॉपर्टी मार्केट का क्रैश 1 नज़र हम देखे हम 2000 8 वाले फेज में आ चुके हैं और मैं क्रैश क्यों कहता हूँ लोग कहते है 10 परसेंट पंद्रह पर्सेंट की गिरावट हुई है प्रॉपर्टी प्राइसेज में दुनिया में कहीं भी 10 पंद्रह परसेंट की जो प्राइसेज डिफ्रेंस आते हैं प्राइस रिड्यूस होता है वो 1 हेल्दी कनेक्शन माना जाता है प्राइस क्रैश की तरफ हम तब पढ़ते हैं जब 20 25 पर्सेंट से ज्यादा का प्राइस ड्रॉप होता है। अभी दुबई में किसी किसी माइक्रो मार्केट में कहीं कहीं प्रॉपर्टी 40 परसेंट तक ड्रॉप हो गया है और सारे लोग वहाँ से निकाल कर दुसरे सेफ हेवन की तरफ जा रहे हैं और मैं नॉन और इंडियंस वगैरह की बात क्यों करूँ। अब तो रिपोर्ट ये आ रही है की जो अरब रहते हैं दुबई में वो अपना पैसा स्विस बैंक में पार्क कर रहे हैं। तो 1 ऐसे माहौल में जब आपके अपने नेशनल आप पर भरोसा नहीं कर रहे हैं तो प्रॉपर्टी मार्केट आगे क्रैश होना ही होना है। इतना मार्केट ऐप जॉब अगर वार नहीं होता तब भी आप जॉब नहीं कर पाता। तो मुझे लगता है हमें जून एंड तक देखना होगा और जून एंड में जब अगर सही रिपोर्ट निकलकर आती है। क्योंकि अभी देखिये हमारे पास जो भी डेटा प्वाइंट मैंने आपको बताया उ मार्च तक का है उसके बाद हमारे ग्राउंड लेवल पर लोगों से बात हो रही है कोई डेटा प्वाइंट नहीं है जून एंड के बाद हो सकता है दुबई के प्रॉपर्टी मार्केट की वो ग्राउंड रियलिटी आपको देखने को मिले जो 2000 8 के फाइनेंसिल क्रैश में हुई थी। 1 नॉर्मेटिव विज्डम जिसको हम कहते हैं इन्वेस्टमेंट की वो ये है कि जब शेयर मार्केट गिरे तो पैसा लगाओ, जब भाव गिरे तो पैसा लगाओ, तो ये जो वहाँ भाव गिरा हुआ है, यह समय क्या पैसा लगाने का है या अब जितना नुकसान हुआ हुआ उसको बचाने का है। यह बहुत कुछ इस बात पर डिपेंड करता है कि आप कौन हैं एन इन्वेस्टर आप कौन है। देखिये इंडियन इन्वेस्टर को मैं 23 लेवल पे रखता, हूँ, 1 एच एन इज है जिनके कई दुनिया के कई शहरों में प्रॉपर्टीज हैं और जिनके लिए पैसा पार्क करना 1 तरह की सरदर्दी है वो ऑपोर्चुनिस्टिक बाइक के लिए दुबई की तरफ अभी भी देख सकते हैं लेकिन वो हैं कितने वो गिने चुने एचएनआई वैसे हैं ज्यादातर जो दुबई में इन्वेस्टमेंट हो रहा था। ये कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स थे या छोटे छोटे बिजनेस वहां सेटल करने वाले लोग थे, ये उनकी कहानी नहीं है, उनके लिए उनका पूरा असेट ही प्रोपर्टी मार्केट में पार्क था और उसमें 25 से 40 पर्सेंट का जो प्राइस कनेक्शन हुआ है तो वो 1 डिस्ट्रेस में है। अब उनके लिए एग्जिट लेना मुश्किल हो रहा है और यहाँ पर मैं 1 चीज और बता दूं कि प्रॉपर्टी मार्केट में वर्ल्ड ओवर क्राइसिस है। दुबई की प्रॉपर्टी मार्केट एक्सपोज हो गई है क्योंकि वहाँ पे वार के हालात हैं। 1 नजर हम ग्लोबल प्रॉपर्टी मार्केट में देखे चाइना का मार्केट क्रैश हुआ है। यू एस में स्लो डाउन है, यूके में स्लो डाउन है, इंडिया में डीप डिस्ट्रेस है। दुबई की बात हम कर चुके हैं। कोई ऐसा प्रॉपर्टी मार्केट नहीं बचा है जहाँ मुझे बहुत प्रोमिसिंग लग रहा है। अब सवाल ये उठता है क्या दुबई में अपर्चुनिस्ट्रिक बाइंग करनी चाहिए। मेरा 1 फंडामेंटल सवाल है कि 1 अपर्चुनिस्ट्िक बाइंग की जब हम बात करते हैं तो हमे दूसरे असेट क्लासेज से उसे कंपेयर भी करना होगा। आज की तारीख में वर्ल्ड ओर 1 नया ट्रेंड निकल कर आया है। ओवरसीज इन्वेस्ट इंडिया में भी देखें। हालांकि इंडिया में गवर्नमेंट लेवल पर बहुत सारे रेस्ट्रिक्शंस है। इंडिविजुअल के लिए जो एल एस लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम वो 1 लिमिट है 2 लाख 50 हजार डॉलर की चलिए वो फिर भी ठीक है। ढाई करोड़ रूपए से ज्यादा एवरेज इंडिया नहीं इनवेस्ट करते। म्यूचुअल फण्ड के लिए भी 1 कैपिंग है सेवन बिलियन डॉलर की, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के लिए एडिशनल वन बिलियन डॉलर की कैपिंग है। अगर हम इस तरीके से देखे तो दुनिया भर के इन्वेस्टर प्रॉपर्टी से अपना ध्यान हटा रहे हैं। बात चाइना की हो, यू एस की हो, यूके की हो। और वो ऐसा क्यों हो रहा है। क्योंकि हम 1 थर्ड वर्ल्ड वार के स्टेज में है। बहुत सारे लोग कहेंगे नहीं ये थर्ड वर्ल्ड वार कैसे हो सकता है। यह रिजनल कॉन्फ्लिक्ट है। देखिये हर वर्ल्ड वार का 1 अपना कैरेक्टर होता है। हम इसे वर्ल्ड वार अगर नहीं भी मानते हैं। लेकिन वर्ल्ड वार के बाद क्या होता है, फाइनेंसियल रीसेट होता है। दुनिया में जब भी कोई फाइनेंसियल क्राइसिस आया है, अचानक आया है। चाहे हम नाइनटीन ट्वेंटी नाइन के ग्रेड डिप्रेशन की बात करे या 2000, 8 के लेमन क्राइसिस की बात कर ले या कोविद की बात कर ले। लेकिन इस वार का जो पूरा माहौल है वो ग्रेजुअल बिल्ड अप होता गया है। वार तो ध्यान अटेंशन डायवर्ट करने का टूल बन गया है। यू एस का इस समय जो डेट है वो 40 ट्रिलियन डॉलर है। तो हम पूरी दुनिया बढ़ रही है 1 फाइनेंसियल रिसेट की तरफ और जब दुनिया फाइनेंसियल रिसेट की तरफ बढ़ रही है तो हर 1 आम आदमी हर 1 इन्वेस्टर देखता है की हमारे लिए हाई वैल्यू लिक्विड असेट क्या है। हाई वैल्यू लिक्विड असेट में आपका रियल स्टेट नहीं हो सकता है क्योंकि रियल स्टेट को कभी भी आप बेचना चाहेंगे तो वो आसानी से बेच नहीं सकते हैं। इसीलिए आप देखें गे वर्ल्ड ओवर 2 चीजों पर लोगों का रुझान बढ़ रहा है। 1 तो ओवरसीज इन्वेस्टमेंट पर ओवरसीज इन्वेस्टमेंट के फायदे क्या होते है कि मान लिया म्यूचुअल फंड के रास्ते में, वर्ल्ड के कई कंट्रीज में इनवेस्टेड हूँ यूएस का मार्केट गिरेगा तो यूरोप का उठेगा, यूरोप का गिरेगा तो चाइना का मार्केट उठेगा। इसीलिए ओवरसीज इन्वेस्टमेंट बढ़ रहा है। दूसरा फोकस गोल्ड पे जा रहा है और गोल्ड बहुत ही अंडरवैल्यूड असेट है। दुनिया की जो टोटल वेल्थ है फोर्थ सेवेंटी फॉर ट्रिलियन डॉलर उसमें गोल्ड अभी भी सेल्फ 27 ट्रिलियन डॉलर है। मतलब तकरीबन दुनिया भर की वेल्थ का सिर्फ 6 परसेंट गोल्ड में है और जितनी गोल्ड माइनिंग हो सकती थी दुनिया में उसका एटी फाइव परसेंट के आस पास तक हो चूका है। तो 1 इन्वेस्टर वेल इन फॉर्म होता है। देखिये पैसा जिसको इन्वेस्ट करना होता है उसके पास 50 कंसल्टेंट होते हैं। वो इस समय हाई वैल्यू लिक्विड असेट की तरफ जाएगा और हाई वैल्यू लिक्विड असेट की। जब वो बात करेगा तो वो देखेगा की हम गोल्ड में जायेंगे। हम इंटरनेशनल मार्केट में अपना एक्सपोजर ऐसे बढाएंगे की कोई 1 मार्केट गिरा तो दूसरा मुझे कम्पेनसेट कर देगा। एफ आई आई इंडिया में क्यों आते थे, एफआईआर सिर्फ 1 वजह से आते थे की इंडियन मार्केट में ग्रोथ रेट फास्ट है। ग्रोथ रेट इसलिए फास्ट है की यु एस में यू के में आप देखेंगे। 2 परसेंट 3 परसेंट का रिटर्न है। हमारे यहाँ 67 पर्सेंट का रिटर्न होता है इसलिए एफआईआर आते थे। लेकिन जैसे ही हमारी करेंसी गिरती चली गयी वैसे ही एफ आई एच भागने लगे। क्योंकि फिर उनको पूरे कॉस्ट बेनिफिट एनालिसिस में कॉस्ट ज्यादा दिखने लगा, उससे ज्यादा लुक्रेटिव उनको यूएस मार्केट दिखने लगा। अब आपने दुबई की बात की। दुबई में मुझे खतरा इस बात पर नजर नहीं आ रहा है। 1 इंडियन के नजरिए से मुझे दुबई में खतरा ये नजर नहीं आ रहा है की प्रॉपर्टी मार्केट क्रैश हो रहा है। मुझे सबसे बड़ा जो खतरा नजर आ रहा है। इंडिया का ट्रेड डेफिसिट देखिये रुपया हमारा लगातार कमजोर हो रहा है। हमारा जो पूरा ट्रेड डेफिसिट है हम आज वर्ल्ड में बैलेंस ऑफ पेमेंट क्राइसिस जो 1 बार नाइनटी वन में हुई थी उस क्राइसिस ऐसी क्यों नहीं गुजर रहे हैं। जबकि हमारा ट्रेड डेफिसिट आज कितना है। 120 बिलियन डॉलर। हर साल का इसको कौन कम्पेनसेट कर रहा है, इसको कम्पेनसेट कर रहा है। आपका जो फौरन रेमिटेंसेज आते हैं। दुबई से हमारे यहाँ टोटल जो इंडिया में रेमिटेंस आते है वो है वन थर्टी ए बिलियन डॉलर, साल का। इसमें फिफ्टी बिलियन डॉलर आपको मिड लिस्ट से आ रहा है। और जब हम मेडलिस्ट की बात करते हैं तो मेनली दुबई है। अब ये जो रेमिटेंस है 2016 17 में टोटल रेमिटेंस का। फोर्टी सेवन परसेंट मिड लिस्ट से आ रहा था। ये आज गिर कर के करीब करीब थर्टी सेवन पर्सेंट रह गया है। और इस वार के बाद जो रेमिटेंसेज कम होंगे मुझे उससे खतरा ज्यादा नजर आता है। प्रॉपर्टी मार्केट में जिनका पैसा इनवेस्टेड है क्रैश की वजह से वो एग्जिट नहीं कर पाएंगे या वो डिस्टेंस में बेचेंगे वो 1 इंडिविजुअल की रियलिटी है। पूरे देश की रियलिटी तो ये है की अगर मेडल लिस्ट से हमारे रेमिटेंसेज कम होते चले गए। दूसरी तरफ हमारा ट्रेड डेफिसिट बढ़ रहा है। इसका असर यह होगा की रुपया और कमजोर होगा रुपया और कमजोर होगा का मतलब है हमारे पूरे देश में महंगाई बढ़ेगी। इस इन्फ्लेशन को हम कैसे हैंडल। करेंगे गवर्नमेंट लेवल पर अभी भी डिनायल में रहने की आदत है। लेकिन सच यह है कि पूरे मेडलिस्ट की वजह से हम लोग सीरियस क्राइसिस में है। मेडिलिस्ट जाने वाले जो लोग थे वो तो अब रुक गए हैं। वापस आने का सिलसिला भी शुरू हो रहा है। औ और उसके साथ साथ देखिये जो छोटे टिकट साइज में जो इन्वेस्टमेंट हो रहा था वहां पर वो लोग सबसे ज्यादा डिस्ट्रेस में आ गए, उनको नहीं समझ में आ रहा है। क्योंकि ज्यादातर तो रेंट इनकम जनरेट करना चाहते थे, वहां से ही रहेंगे यहां। लेकिन अगर 10 करोड़ एक्स्ट्रा है, 5 करोड़ एक्स्ट्रा है। उन्होंने लगा दिया और अच्छी प्रॉपर्टी ले लिए वहां पर रेंट जाएगा। अभी वो जो रेंट इनकम आनी थी वो तो रोकी गई है। साथ ही साथ प्रॉपर्टी बी डी वैल्यू हो गई है। ऐसे समय में 1 आम भारतीय जो खाता पिता परिवार है और इस तरह वेल्थ मैनेजमेंट करना चाहता है, वो अब किस तरफ देखेगा। देखिये दुबई में 1 चीज बता देता हूँ। दुबई में इन्वेस्टमेंट 3 वजहों से होता था। यह सेफ हेवन का जो परसेप्शन है वो अपनी जगह है। मैं सिर्फ फाइनेंसियल फंडामेंटल पर बात करता हूँ। पहला तो इनका सबसे बड़ा यह था कि वहां रेंटल वैल्यू बहुत हाई है। 6 से 9 पर्सेंट के बीच डिपेंडिंग ऑन माइक्रो मार्केट। दूसरा 1 बहुत बड़ा फैक्टर और भी था। करेंसी डेप्रिसिएशन इंडिया का इंडिया का करेंसी युएई के मुकाबले में लगातार डेप्रिसिएट कर रहा था। लेकिन जिस तरीके से पेट्रो डॉलर सिस्टम खत्म हो रहा है, अब यूएई की करेंसी भी वीक पढ़ने जा रही है। तो आपको जो करेंसी एप्रीशिएशन का फायदा हो रहा था वो भी नहीं मिल रहा है। और इसी लिए आज अगर हम इंडियंस का इन्वेस्टमेंट पैट्रन देखे। अचानक से आप देखेंगे कि हर इंडियन जो है वो ग्लोबल मार्केट में एक्सपोजर ले रहा है। आज अगर सरकार 7 बिलियन डॉलर की जो कैपिंग है साल की म्यूचुअल फंड की वो हटा दे। तो आप देखेंगे कि तक़रीबन हर कोई ओवरसीज मार्केट में इन्वेस्ट करेगा। कैपिटल मार्केट की तरफ जाने के 23 फायदे हैं। पहला तो यह कि हमें करेंसी एप्रीशिएशन मिलेगा, दूसरा यह कि रिस्क डायवर्सिफिकेशन है। 1 मार्केट अगर अच्छा परफॉर्म नहीं किया तो दूसरे से हम बेनिफिट ले लेंगे। तीसरा सबसे बड़ा फैक्टर है कि जब भी हमें लिक्विडिटी की जरुरत पड़ेगी, हम लेकर निकाल लेंगे। मेरे ख्याल से यूएई गवर्नमेंट ने त 34 जो फंडामेंटल गल्तियां की हैं। पहली गलती ये की है कि उन्होंने यह एज्यूम कर लिया था कि अमेरिका एलायंस उनके फेवर में है, वो उनके फेवर में नहीं था। वो एलायंस पूरी तरह से अमेरिकन इंट्रेस्ट को सर्व कर रहा था। दूसरी गलती उन्होंने यह की है कि किसी भी इकॉनमी में रियल स्टेट 1 ग्रोथ ड्राइवर तो हो सकता है इकॉनमी का मेन इंजन नहीं होता है। आज आप देखे यहीं पर विजन की बात आती है। आप चाइना को देख ले। लोग कह रहे हैं चाइना प्रॉपर्टी मार्केट में भी स्लो डाउन है, हैं हो रहा है। लेकिन क्यों हो रहा है। जब चाइना में गवर्नमेंट ने देखा की प्रॉपर्टी में ग्रोथ ड्राइवर बन गया है तो उन्होंने थ्री रेड लाइन पॉलिसी लेकर आए। ये थ्री रेड लाइन पॉलिसी क्या थी। बेसिकली वो रेड लाइन पॉलिसी यह थी की आप इस लाइन को क्रॉस नहीं कर सकते। इस लाइन को, इस लाइन को और वो क्या था आपका डेट इक्विटी रेश्यो को कंट्रोल किया। 1 डेवलपर उसके डेट इक्विटी में सेवेंटी पर्सेंट से ऊपर नहीं जा सकता है। अब हम इंडिया और दुबई के अगर डेवलपर्स को देखे और उनके डेट इक्विटी रेश्यो को देखे तो शायद 500 परसेंट से ज्यादा है। वो उनके पास अपना कुछ नहीं है लेकिन बिल्ड करते चले जा रहे हैं। दुबई में ऐसी ऐसी स्कीम्स आने लगी थी जो स्कीम कहती थी कि आपको 1 पर्सेंट पैसा देना है। मतलब की अगर 1 करोड़ की प्रॉपर्टी है तो आपको सिर्फ 1 लाख रुपए देने हैं और सौ महीने तक हमें पेमेन्ट करें। घर आपका ये जो ओवर लिवरेज गेम चल रहा था ये गेम कहीं न कहीं जाकर। 1 बबल बस्ट होना था। आज दुबई की हालत यह हो गई है की वो खास कर इंडियंस को इन्वाइट करने के लिए। अब ये ऑफर लेकर आ रहे है और मुझे लगता है ये भी 1 शॉर्ट साइटेड विजन है। अब वो ये ऑफर लेकर आ रहे हैं कि आपको हमें 2 साल की रेजिडेंसी के लिए जो 7 लाख 50 हजार दिरहम की बात थी की इतना इन्वेस्ट करना होगा। मतलब तकरीबन 2 करोड़ रूपए। अब वो कह रहे हैं कुछ भी इन्वेस्ट करो हम आपको 2 साल की रेजिडेंसी देने को तैयार है। ये भी 1 शोर्टसाइटेड विजन है। सी दुनिया भर में 1 पैट्रन देखा गया है। रियल स्टेट का साइकिल जब भी कभी वो आपका ग्रोथ का मेन इंजन बन जाता है तो वहाँ पर क्रैश आता है। यहाँ पर पूरी दुनिया को चाइना से सीखने की जरुरत है। आप कहेंगे की चाइना में रियल स्टेट देखो। आज सच तो यह है कि चाइना में 2000 5 के लेवल पे प्रॉपर्टी मार्केट आ गयी है। मतलब जिन लोगों ने 20 साल में जो वेल्थ क्रिएट किया था वो वाइप आउट हो गई है। लेकिन वो गवर्नमेंट के इंटरवेंशन की वजह से है। क्यूंकि वो 1 बात समझ गए थे। 1 एवरेज चाइनीज ओवर लिवरेज हो रहा था और उसका पूरा का पूरा सेट ही रियल स्टेट में जा रहा था। तो उसको उन्होंने कर्म किया। पॉलिसी इंटरवेंशन ऐसे कर्म किए। दुबई गलती यह कर रहा है की अभी और फर्दर इन्वाइट कर रहा है। मुझे लगता है कि दुबई को भी 1 स्ट्रक्चरल रिफॉर्म की जरूरत है और ये वार जो है दुबई को पॉलिटिकल लेवल पे इकॉनमी के लेवल पर, हर लेवल पर 1 री थिंकिंग का मौका दे रहा है। अगर वो नहीं संभालते हैं तो मुझे लगता है कि दुबई शायद 2000 8 से ज्यादा बुरे दौर में जाएगा और इंडियंस के लिए दुबई कहीं से लुक्रेटिव नहीं है। अनलेसनंटिलआप वो इंडियन हैं जो वर्ल्ड के कई हिस्से में पैसा पार्क करते हैं तो आज दुबई सस्ता मिल रहा है। लेकिन ऐसे इंडियन्स कितने हैं तो दुबई अगर अभी भी अट्रैक्ट कर रहा है और बुलाने की कोशिश कर रहा है। इन्वेस्टर को और खासकर रियल स्टेट इन्वेस्टर को तो यह क्यों न करे क्योंकि अब तो उनके हां प्रॉपर्टी खाली पड़ी है। अब तो कोई पूछ ही नहीं रहा होगा। यह बहुत डिमांड में फर्क आया होगा और बार्गेनिंग पावर परचेजर की बायर की बढ़ गई है तो ये सही वक्त नहीं रहेगा। 1 इकॉनमी अगर खुद को इस तरीके से डायवर्सीफाई कर सकता है कि वो वाइल वेस्ट इकॉनमी से बिजनेस बेस्ट इकॉनमी बन जाए, टूरिज्म वेस्ट इकॉनमी बन जाए तो वो यही मॉडल रियल स्ट्रेट के साथ क्यों नहीं फॉलो कर सकता है आप रियल स्ट्रेट को जो पूरे दुनिया के लोगों का पैसा पार्क करने का अन्य बना रहे हैं? चलिए मैं 1 चीज कहता हूँ, मैं अगर दुबई के पॉलिसी मेकर्स को एडवाइज कर रहा हूँ तो मैं तो सबसे पहले एडवाइज करूँगा की आप फौरन इन्वेस्टर की तरफ क्यों देख रहे हैं। आपके जो अरब नेशनल स्विस बैंक में पैसा डाल रहे हैं। मतलब की आपके सिस्टम पर आपके अपने लोगों का भरोसा नहीं है। यह बिल्कुल वैसा ही मॉडल है जैसे हम इंडिया में देखते है की आप फारनर्स को इन्वाइट करना चाहते है, फौरन इन्वेस्टमेंट की बात करना चाहते हैं और हर साल थ्री फिफ्टी मिलियन कॉर्प डॉलर का यहाँ के कार्पोरेट्स फौरन में जाकर इन्वेस्ट कर रहे हैं। अगर हमारे को अपनी गवर्नमेंट में ही भरोसा नहीं है तो हम फॉर्नर्स कैसे उम्मीद करेंगे कि फॉरनर्स आके हमारी इकॉनमी पर भरोसा करे। दुबई वही गलती कर रहा है जो गलती आज इंडिया में भी मैं देखता हूँ। आप सोचते है की हमे एफ आई आई आएगा देखिये पिछले कुछ सालो में एफ आई आर लगातार वापस गए डिनायल में रहना 1 बात है की हमारा डी आई आई इन्वेस्टर बेस बहुत स्ट्रॉंग हुआ है। डी आई आई बेस स्ट्रोंग हुआ है उसकी आप फंडामेंटल समझिए ये पैसा एस आई पी से आ रहा था। एस आई पी से जो पैसा आता है वो पैसा ब्लाइंड इन्वेस्टमेंट होता है। 1 एफ आई आई जो होता है वो आपके मार्केट के वैलुएशन को देखता है, मार्केट के फंडामेंटल को देखता है। अभी डी आई आर में जो हो रहा है वो ये हो रहा है कि एस आई पी के फण्ड के पास पैसा आएगा उसको मार्केट में डिप्लॉय करना है। इस वजह से बहुत सारे खासकर पेनी स्टॉक्स जो है या मिडसाइज स्टॉक्स हैं वो अपने मार्केट फंडामेंटल से बहुत आगे निकल गए हैं। अब क्या यही गलती दुबई नहीं कर रहा है? क्या दुबई को ये देखने की जरुरत नहीं है की उनके नेशनल जो है वो जाकर सुच बैंक में पैसा रख रहे हैं। क्या दुबई को ये देखने की जरुरत नहीं है। रियल स्टेट को छोड़ दीजिये। आपका दुबई फाइनेंसियल मार्केट में रियलिटी इंडेक्स 30 परसेंट डाउन है। सवाल यह उठता है की आप हमेशा फौरन नेशनल को जो इन्वाइट करते हैं उससे पहले आप अपने कंट्री की इकॉनमी में कंट्री के लोगो का ट्रस्ट तो बनाये यही फर्क हो जाता है दुबई इंडिया वर्सेस चाइना में, तो जो भारत के लोग वहाँ पर इन्वेस्ट कर रहे हैं उन्होंने ये सवालों को तो कभी सोचा ही नहीं होगा की वो ये देखे की दुबई के अमीर कहाँ इन्वेस्ट कर रहे हैं। दुबई में दुबई के लोगों का कितना भरोसा है ये तो वो नहीं रहे थे, वो तो सिर्फ ये देख रहे थे कि भारत से बेहतर परिस्थितियां हैं। और यूरोप क्योंकि इजाजत नहीं देता है, वाइट वेस्ट, इजाजत नहीं देता है, तो वाइट वेस्ट की सारी सुविधाएं यहाँ पर हैं, हम यहाँ चले जाते हैं, अच्छा वहाँ का सेकुलरिज्म भी बहुत इम्प्रेस करता है कि वो उनको कोई मतलब नहीं है। आप किसी भी धर्म के होले सड़क पर मत लाइए अपना धर्म, तो ये ये वाली बात भी हमें क्या। हम लोग दुबई जैसे लाइन ऑर्डर, दुबई जैसे सेकुलर, दुबई जैसे सिक्योर, इक्वालिटी, बिफोर ला और लाइन डर की जो उनके 1 समझ है कि आपने 1 बार गलती की वो माफ़ नहीं करते। क्या हम भारत को आसान बना सकते की भारत का पैसा दुबई न जाए, भारत में ही रह जाए। सवाल उठता है क्या हम वैसा बनना चाहते भी हैं। यही मेरा सवाल है, हमारी वो ालिटी है जो पढ़े लिखे लोग, जो बहुत वोकल लोग हैं, जो अपने बच्चों को विदेश भेज रहे हैं, जो अपना पैसा दुबई जैसी जगहों पर लगा रहे हैं। मेरा ये सवाल है की ऐसा क्यों हुआ कि इतना बड़ा भूभाग जिसको जो दुबई तो देखिये, बहुत फीका है प्रकृति के तौर पर। अगर आप देखे हमारे आगे कुछ नहीं है। वो भारत जैसे रिच कंट्री को जिसको कुदरत ने सब कुछ दिया वैसा हम हमारी एम्बिशन वैसा बनने की है ही नहीं। यह ऐसा कैसे हुआ हमेशा हमेशा। 1 बात कहा जाता है की भारत से सोने की चिड़िया थी, इसको लूटा गया है भारत को बाहर से आकर कम लोगों ने लूटा है, यहाँ के रूलिंग क्लास से ज्यादा लूटा है। आज भी आप देखें ज्यादातर मिनिस्टर्स, सेंटर से लेकर स्टेट तक में आप देखें ज्यादातर मिनिस्टर जो हैं उनके अपने बच्चे तो यूएस में, यूरोप में सेटल है, उनकी वो प्रायरिटी नहीं है, जितने बड़े कॉरपोरेट्स है, उनकी फैमिली तो एब्रॉड में सेटल है, वो उनकी प्रायरिटी नहीं है, और जिनकी प्रायरिटी है वो उसको अपनी प्रायरिटी बनाने की बजाय। 11 कल्चरल नेशनलिज्म के नाम पर 1 अलग ही नशे में जी रहे हैं, 5 किलो अनाज में ही खुश हो रहे हैं, तो ऐसे में कुछ नहीं किया जा सकता। लेकिन जहाँ तक इन्वेस्टमेंट की बात है 1 बात तो तय है, किसी भी कंट्री में फॉरन इन्वेस्टमेंट को अट्रैक्ट करने के पहले आपको अपने लोगों के इन्वेस्टमेंट के कॉन्फिडेंस को बढ़ाना पड़ेगा। यही गलती देखिये, दुबई ने जो गलती की है वो गलती आज की नहीं है। पेट्रो डॉलर सिस्टम आने के बाद से ही पूरा मिडिल लिस्ट जो है वो अमेरिका का कॉलोनी बन कर रह गया था। मैं तो 1 लेवल पर कहता हूँ की ईरान ने बहुत सही किया है कि ईरान ने पूरे एक्सपोज करके रख दिया है। पूरी ग्लोबल इकॉनमी आपने ईरान पर सैंक्शन लगाए है। आपने समझा कि आपने ईरान को पूरी तरह खत्म कर दिया है। ईरान आज भी ग्लोबल आई क्यू में नंबर फोर है। और ईरान आज भी पूरे मिडी लिस्ट को हम 80 नंबर पर है। हाँ हाँ हम 80 नंबर पर है और मैं अभी अगर अलग अलग रैंकिंग बताऊंगा हम हैप्पीनेस इंडेक्स में वन फॉर्टी थर्ड नंबर पर है। हम वर्ल्ड में कहीं स्टैंड नहीं करते हैं, तने बुद्धू हैं हम। हाँ हम सिर्फ आत्म मुग्ध हो सकते हैं कि हम बहुत महान है, हम चढ़के है, विश्व गुरु है, हम विश्व गुरु हैं, लेकिन वो विश्व नंबर पे है। हम विश्व वो विश्वगुरु हैं जो क्लास में 180 लोगों के बीच में 80 नंबर पर खड़ा है। लेकिन पूरा मेडिलिस्ट ने जो गलती की थी चौथे नंबर पर, चौथे नंबर पर, ईरान ने तो रास्ता दिखाया है। पूरे मिड लिस्ट को देखिये अगर ग्लोबल फाइनेंसियल रीसेट होता है जो कि अब होकर रहेगा तो इसके लिए सबसे बड़ा क्रेडिट जाएगा लोग कहेंगे की ट्रंप की गलतियों को नहीं। पहली बात तो यह है की आज जो यूएस डॉलर के साथ हो रहा है वो ट्रंप की गलती नहीं है। वो गलती जो बाइडन की है आप पूरी जियो इकॉनमी को समझे। जो बाइडन ने जब 2022 में रशिया युक्रेन वार के बाद रशिया पर सैंक्शन लगा के उनके फौरन असेट्स को फ्रीज किया था, उसने रशिया और चाइना को मौका दे दिया पूरी दुनिया को समझाने के लिए कि तुम्हारे साथ भी ऐसा हो सकता है। तो आज जो हो रहा है ट्रंप। तो 1 ऐसा लगता है कि दिन में 2 ड्रिंक लगाकर आते हैं, कुछ बोल देते हैं, शाम के 2 ड्रिंक के बाद कुछ और बोल देते है जो वाइडन की गलती की वजह से पूरी दुनिया में ग्लोबल फाइनेंसियल रिसेट हो रहा है और इस ग्लोबल फाइनेंसियल रिसेट को सही डायरेक्शन में ला रहा है। ईरान। रही बात मेडलिस्ट की तो मेडलिस्ट को ईरान ने समझा दिया है की पूरे तुम लोगों ने जो पेट्रोल डॉलर की गलती की थी मिडी लिस्ट आज भी वर्ल्ड का हर कोने से आ रहा, इन्वेस्टमेंट पर टिका हुआ है। ईवन सऊदी अरब दुबई मॉडल को कॉपी कर रहा था। लेकिन अब जो हालात बन रहे हैं उस हालत में आपका इन्वेस्टमेंट बंद हो जाएगा। दुनिया क्लीन एनर्जी की तरफ जैसे जैसे बढ़ेगी वैसे वैसे आपके पेट्रोलियम प्रोडक्ट की डिमांड भी कम होगी। तो आपके लिए सर्वाइवल का बहुत सिम्पल यह है की आप इस ग्लोबल फाइनेंसियल रिसेट का हिस्सा बनिए और ये ग्लोबल फाइनेंशियल रिसर्च में मैं ये नहीं कह रहा हूँ की डॉलर अचानक ऐसी खत्म हो जाएगा। लेकिन 1 बात तो तय है की अब यूनिपोलर वर्ल्ड नहीं हमें फाइनेंसियल सिस्टम वाइज बात कर रहा हूँ की मल्टीपोलर वर्ल्ड बनेगा ब्रिक्स करेंसी की भी बात हुई थी, शायद दोबारा उस पर बात होनी शुरू हो जाए। युआन बहुत तेजी से इंटरनेशलाइजेशन की तरफ पुश कर रहा है। तो ऐसे माहौल में आपको इंडियंस को बहुत केयरफुल रहने की जरुरत है और यही वजह है की जो इंडियंस थोड़ा भी मार्केट को समझ रहे हैं वो उन म्यूचुअल फंड में जा रहे हैं जो मल्टी सेट फण्ड है। मल्टी असेट फण्ड। क्या होता है कि वो फण्ड वो म्यूचुअल फंड जो थोड़ा पैसा गोल्ड में डालते हैं, थोड़ा अमेरिकन मार्केट में डालेंगे थोड़ा यूरोपियन मार्केट में डालेंगे इंडियंस के लिए इस समय सबसे सेफ बेट वो है। जहाँ तक प्रॉपर्टी मार्केट की बात है दुबई आपने देख लिया आपका जो डेस्टिनेशन प्वाइंट होता था 1 सवाल बार बार उठता है कि क्या उससे पैसा इंडियन प्रॉपर्टी में मार्केट में वापस आने लगा है और मेरे पास इसका सिर्फ 1 जवाब है की अगर किसी ने प्राइवेट जेट से गोलिया डॉलर बरसाया हो इंडिया में तो मैं नहीं कह सकता क्योंकि फौरन रेमिटेंसेज के जितने फीगर आ रहे हैं, हमारा रेमिटेंस कम हो रहा है तो इंडियन प्रॉपर्टी मार्केट में नहीं आएगा। इंडियन प्रॉपर्टी मार्केट को लेकर वर्ल्ड ओवर। अब ये लोग एक्सेप्ट कर चुके है की इंडिया का प्रॉपर्टी मार्केट स्टॉक मार्केट से भी ज्यादा ओवरवैल्यूड है। इंडिया अकेला ऐसा केस स्टडी है जहाँ प्रॉपर्टी मार्केट स्टॉक मार्केट से ज्यादा ओवरवैल्यूड है तो 1 ऐसे ओवरवैल्यूड प्रॉपर्टी मार्केट में कौन आना चाहेगा। दूसरी तरफ इंडियंस को बहुत सारे कंट्री जैसे साइप्रस वगैरह है वो रेजिडेंसी देने को तैयार है। तो रिच इंडियंस का पैसा जो इंडिया से बाहर गया है वो तो नहीं आ रहा है। अब जो अभी लगातार फौरन असेट्स में पैसा जा रहा है वो भी 1 चिंता की वजह है और इंडियन प्रॉपर्टी मार्केट, स्टॉक मार्केट दोनों बहुत ओवरवैल्यूड है। इंडिया में सिर्फ 1 गोल्ड जो है वो सेफ असेट है। अब गोल्ड में भी मुझे 1 फेयर फैक्टर नजर आता है। अब बहुत सारे लोग मुझे कहेंगे की आप हर असेट क्लास में डर दिखाते हो। मैं सिर्फ आईना दिखाता हूँ की देखिये सच्चाई ये है मैं कोई सेवी रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर नहीं हूँ, आपको जो डिसीजन लेना है वो डिसीजन आपका। मैं सिर्फ आपको 1 आईना दिखाता हूँ। पिछले दिनों बहुत गोल्ड खरीदा है भारतीयों ने, गोल्ड खरीदा है भारतीयों ने, लेकिन 1 बहुत बड़ी गलती भी हमें उसे नजर आ रही है। जिसको लोग नहीं समझ पा रहे हैं। ये जो पेपर गोल्ड की तरफ लोगों का रुझान बढ़ा है। देखिये पेपर गोल्ड का अगर मैं प्योरली इकोनोमिक्स के प्वाइंट ऑफ से बात करूँ तो वन इनटू ट्वेंटी समझ में आता है। आरोप 1 ग्राउंड फिजिकल गोल्ड के मुकाबले मार्केट में 20 ग्राम का पेपर गोल्ड का होना लेकिन वर्ल्ड ओवर शिफ्ट ये हुआ है कि 50 ऐसी हंड्रेड टाइम्स ये बढ़ गया है एग्जैक्ट कितना इंडिया में है यह फिगर कोई रिलीज नहीं करेगा लेकिन जो पेपर गोल्ड बढ़ रहा है उसमे 23 प्रॉब्लम है। ये ट्रस्ट बेस्ट सिस्टम है न की असेट बेस्ट सिस्टम है। यह तब तक चलेगा जब तक कि सब लोग 1 साथ अपना पैसा मांगने नहीं आएंगे। अचानक अगर ग्लोबल फाइनेंसियल क्रैश हो गया रिसेट हो गया तो वैसे में क्या होगा कि आपका जो पेपर गोल्ड है 1 तो वो उसकी वैलुएशन कम हो जाएगी, फिजिकल गोल्ड पर प्रीमियम बढ़ जाएगा और मैं कोई हाइपोथेटिकल बात नहीं कर रहा हूँ। कोबिड के टाइम में फिजिकल गोल्ड की प्रीमियम मार्केट में बढ़ गई थी। जायल्स ये कहने लगे थे आम इंडियंस को कि जो कॉमेक्स पर रेट चल रहा है, हम उसमे ऐसी नोर्मली 3 परसेंट 5 परसेंट डिडक्ट करते हैं। हम उस पर हजार 5 सौ का प्रीमियम देंगे, आप हमें दे। 2 तो ये ऑलरेडी 1 बार हो चूका है। तो अब अगर कोई फाइनेंसियल क्रैश होता है, कुछ होता है तो आपके पास जो पेपर गोल्ड है वो उसकी आपको डिलीवरी नहीं मिलेगी, वो कुछ समय के लिए फ्रीज भी हो सकते हैं। अब आप कहेंगे कि ये कैसे हो सकता है। इन सब पे सोवरन गारंटी है। इंडिया में सुवर्ण गारंटी की कीमत ये है कि सोवरन गोल्ड बॉन्ड पे सरकार अपने वादे से मुकर चुकी है। पहले आपने यह कहा था कि सोवेरन गोल्ड बॉन्ड पर कोई टैक्स नहीं होगा। लास्ट बजट में आपने ये कहा कि हाँ हमने कहा था। लेकिन जिन्होंने डायरेक्ट गवर्नमेंट से खरीदा है और 8 साल पूरा होल्ड करेंगे उनके लिए है। ये तो आप इंडिया में 1 इन्वेस्टमेंट कम होने का 1 डर यह भी है की यहाँ रेट्रोस्पेक्टिव चेंजेस हो जाते हैं। टैक्सेसन में। इसीलिए मुझे लगता है कि गोल्ड को भी लेकर इंडियन को बहुत केयरफुल रहने की जरुरत होगी। फिजिकल गोल्ड को मैं रियल असेट आज भी मानता हूँ फिजिकल गोल्ड रियल असेट है। जहाँ तक रियल स्टेट की डिमांड की बात होती है, अनफॉर्चुनेटली रियल स्टेट का मतलब लोग अपार्टमेंट समझते हैं। आज भी मैं कहता हूँ की रियल स्टेट में लैंड ज्यादा कीमती असेट है। शहरों में आपको जो चमचमाती बिल्डिंग दिख रही है वो सेट नहीं है, वो लाइबिलिटी है क्यूँकि? अगर प्राइस क्रैश होता है या कोई भी फाइनेंसियल रिसेट होता है तो आपको उसके मेंटेनेंस के पैसे भरते रहना है। लेकिन उसमें न आपको कोई टिनेंट मिलेगा न आप, उसे बेच कर निकाल पाएंगे। तो इस समय पूरा का पूरा ग्लोबल इकॉनमी में 1 डर है। उस डर के माहौल में इंडिया बहुत वलनरेबल हाल खड़ा है। और इसीलिए जो लोग कहते हैं की इंडिया में दुबई से पैसा निकलेगा तो आएगा। तो मैं पूछता हूँ कहाँ आएगा रियल स्टेट ओवरवैल्यूड है। स्टॉक मार्केट अपने फंडामेंटल से बहुत आगे निकलता दिख रहा है। तो ये पैसा आयेगा कहां? और दूसरा अगर आ रहा है तो किस रास्ते आ रहा है। रेमिटेंस के फिगर तो नहीं दिखा रहे हैं। हां अगर कोई प्राइवेट जेट से गोल्ड और डॉलर यहाँ पर आकर बरसा रहा हो तो मुझे नहीं पता है, लेकिन 1 डर है भारत के लोग भारत में जब ट्रस्ट नहीं कर रहे हैं और 1 ग्लोबल सेंटीमेंट है भारत के हवाले से कि हमारा रुपया भी वैल्यू हो रहा है, हमारे टैरिफ की मार हम झेल रहे हैं, नुफैक्चरिंग सेक्टर हमारा डाउन हुआ हुआ है, सर्विस सेक्टर में हमारे यहां बदहाली है और वो भी बहुत खास इलाकों तक सीमित थे क्षेत्रों तक। तो भारत की इकॉनमी इस समय और ए्मिटेंसेस का आपने जैसे बताया भारत की इकॉनमी इस समय कहाँ खड़ी है। इंडियन इकॉनमी को अगर समझना है तो आपको कई लेवल पे देखना पड़ेगा। हमारे जॉब मार्केट के डेटा प्वाइंट्स देखे जॉब्स लगातार कम हो रहे हैं। कंजमशन लगातार गिर रहा है। कॉरपोरेट अर्निंग लगातार कम हो रही है और उनके स्टॉक के वैलुएशन बढ़ रहे हैं। ये सारे क्लियर बबल के इंडिकेटर्स होते हैं। तो इंडियन इकॉनमी में बहुत साफ 1 बबल का इंडिकेटर दिख रहा है। डी आई आई इन्वेस्टमेंट जो हो रहा है अभी वो डी आई आई इन्वेस्टमेंट। हालांकि डीमेट अकाउंट लगातार बंद हो रहे हैं। डीमैट अकाउंट का जो क्लोजर रेशियो है, मार्च के महीने में हंड्रेड परसेंट चला गया। इसका मतलब ये होता है की अगर 10 नए अकाउंट खोल रहे हैं तो 10 बंद भी हो रहे हैं। ये 1 स्ट्रेस दिखाता है लोगो के पास, परचेज पॉवर हिट हुई है, यहाँ पर लोग डेट ट्रैप में फंसते चले जा रहे हैं, उसमें आप आपने 1 नहीं मल्टीपल लेवल पर गलती है। आपके पास 1 गोल्डन अपॉर्चुनिटी था, आपने अभी जो मैनुफैक्चरिंग की बात की है। इंडिया के पास 1 गोल्डन अपॉर्चुनिटी था जो इंडिया ने मिस कर दिया। अमेरिका ने बहुत तेजी से यह पूरे, वर्ल्ड को समझाया था कि चाइना प्लस वन पॉलिसी की जरुरत है। कोबिड के दरमियान क्यूंकि अलिगेशंसये लगे थे की कोबिड स्प्रेड करने में, चाइना के लैब से ये स्प्रेड हुआ है और हमे पूरा जो सप्लाई चैन है, 1 कंट्री पर नहीं रखना चाहिए। ठीक है। अभी अमेरिकन कॉमर्स सेक्रेटरी इंडिया में आकर बोल देते हैं की हम चाइना के साथ जो गलती कर चुके हैं इंडिया के साथ नहीं करेंगे। क्यूंकि इंडिया के पास जो कोबिड से अभी तक का जो 1 विंडो स्पेस था उसका हमने फायदा नहीं उठाया। हम मैनुफेक्चरिंग के नाम पे, सिर्फ और सिर्फ, हमारे सियासतदानों ने पब्लिक का बेवकूफ बनाया है, बनाने के नाम पर और कुछ नहीं किया है। और हम छोटे छोटे कंट्री वियतनाम वगैरह कंट्री बंग्लादेश हमसे मैनुफेक्चरिंग में आगे निकलते चले गए। दूसरी बात यह कि चाइना प्लस वन स्ट्रैटजी को पूरी दुनिया समझ ही नहीं पाई की ये गेम किसका था। लोग समझते है की ये अमेरिका का गेम था। सच्चाई यह है कि अब मैं जो कहने जा रहा हूँ, बहुत सारे लोग कहेंगे ये कांस्पीरेसी थ्योरी है। सच्चाई यही है कि अमेरिका में जो चाइना का 1 अपना डीप स्टेट है, जो चाइना की अपनी लॉबी है, यह उसका खेला हुआ खेल था, क्योंकि चाइना पूरी दुनिया का ध्यान भटका रहा था की मेरे यहाँ से मैनुफेक्चरिंग शिफ्ट हो रहा है और चाइना को टाइम चाहिए था। लो एंड मैनुफेक्चरिंग से हाई एंड मैनुफेक्चरिंग पे जाने के लिए। आज चाइना पूरी तरह से हाई एंड मैनुफेक्चरिंग पर शिफ्ट हो गया है। आपको क्या लगता है क्या चाइनीज पॉलिसी मेकर और 1 बात समझिए चाइनीज पॉलिसी मेकर के उनके पास डेमोक्रेसी नहीं है, उनको किसी को अकाउंटेबल नहीं है, अगले इलेक्शन में, उसके बाद भी उन्होंने जो थ्री रेड लाइन पॉलिसी के तहत रियल स्टेट पर क्रैक डाउन किया है, क्या वो नहीं जान रहे थे कि ये टेम्परेरी 1 चेकअप होगा? क्यूँकि वो उन्होंने अपनी इकॉनमी का पूरा डायरेक्शन ही बदल दिया है? वो हाई एंड मैनुफेक्चरिंग पे चले गए हैं। क्योंकि चाइना ने 1 चीज रियलाइज कर लिया था। कि चाइना यंग पॉपुलेशन नहीं है, चाइना एजिंग पॉपुलेशन है, तो एजिंग पॉपुलेशन में उनके पास जो है। लेवर फोर्स कम होता जाएगा। तो जब आपके पास लेबर फोर्स कम होगा तो आप मास प्रोडक्शन की बजाय क्वालिटी प्रोडक्शन की तरफ जाएंगे। इंडिया ने अपना आज तक स्ट्रेस ही नहीं समझा। 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद क्या बात हो रही थी। इंडिया सबसे यंग पॉपुलेशन है, तभी ये मैनुफेक्चरिंग, मेडन इंडिया, ये सब की बात हुई थी, आज हम 10 साल उससे निकाल चुके है। आज इंडिया का एवरेज एज जो है, ट्वेंटी नाइन यर्स हो गया है। अगले 78 सालों में 10 सालों में हम भी एजिंग पॉपुलेशन हो जायेंगे। हम भी उस मोड़ पर पहुँच जायेंगे जहाँ आज जापान पहुँच चूका है। हमने अपने स्ट्रेंग्थ को कभी समझा ही नहीं है। हम 1 फेक नैरेटिव में, 1 आत्म मुग्धता में ऐसे फंसे रहे हैं कि हमने अपने कभी भी न अपने विकनेसेजपेकाम किया, न हमने अपने स्ट्रेंथ को समझा। और इसलिए मुझे लगता है इंडियन इकॉनमी बहुत वलनरेबल है। मैं यह बात किसी 1 पॉलिटिकल पार्टी के खिलाफ नहीं बोल रहा हूँ। मैं साफ़ कह रहा हूँ की इंडिया के पॉलिसी मेकर्स में, इंडिया के पूरे पॉलिटिकल क्लास में इकॉनमी को लेकर के कोई विजन ही नहीं है। अगर आपके पास इकॉनमी को लेकर विजन होता तो आज इंडियन, इकॉनमी, इतनी, वलरनेबल हालत नहीं खड़ी होती। मैं आम लोगों से मिलता हूँ और यह बात मैं बोल रहा हूँ। ये रिजोनेट करेगा, एवरेज ऑडियंस से आप सोच कर। देखिये, पिछले 10 सालों में आपकी आमदनी कितनी बढ़ी है और घर के खर्चे कितने बढ़े हैं। इससे हो क्या रहा है। इससे हो यह रहा है कि ये वेल्थ इन क्वालिटी बढ़ रही है। क्योंकि जिनके पास असेट्स हैं, उनका असेट प्राइस का 1 ओवर वैलुएशन हो रहा है। आज इंडिया का वन परसेंट वेल्थ 40 पर्सेंट के पास है। बॉटम फिफ्टी परसेंट के पास, सिर्फ पंद्रह परसेंट वेल्थ रह गया है। एवरेज हाउसहोल्ड, आज डेट में है। तो ऐसे हालत में हम इन्वेस्टमेंट की बात करें या सर्वाइवल की बात करें। हमे तो च्वाइस तो इस समय यह करना है कि सर्वाइवल की बात करे, बाप रे मैं क्या सवाल करूँ। मैं हाँ पर अच्छा ये बताइए जिस भारतीय के पास और ऐसे भारतीय कम है, बहुत कम हैं जिनके पास 1 करोड़ रुपए अपनी जरूरतों को पूरी करने के बाद, अपने सारे डेट्स लोन, क्लियर करने के बाद 1 करोड़ मान लीजिये बचा हुआ है। वो दुबई में इनवेस्ट करे या इंडिया में इनवेस्ट करे कहाँ जाए। वो दोनो ही जगह नहीं, दोनों ही जगह सेफ नहीं है। आज अगर आपके पास पैसा है तो अगेन 1 कैबिनेट के साथ बोल रहा हूँ, डिस्क्लेमर के साथ बोल रहा हूँ की मैं कोई सेवी रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर नहीं हूँ। अगर मेरे पास 1 करोड़ रूपए है, मैं पार्टली गोल्ड में रखूंगा, पार्टली में, उस मल्टी, असल म्यूचुअल फण्ड में जाऊंगा जिसका की ग्लोबल एक्सपोजर है। क्योंकि जैसा मैंने कहा आपसे कि ये जो 1 कंट्री के इकॉनमी का साइकिल नीचे जाएगा तो दूसरे का ऊपर जाएगा तो इस समय ज्यादातर कंट्री में वन चाइना में आप। देखिए एवरेज चाइनीज का जो इन्वेस्टमेंट था चूंकि दुबई की, हम बात कर रहे थे और दुबई की प्रॉपर्टी में इंडियंस के बाद चाइना का 1 बहुत बड़ा सेगमेंट है। आज सारे लोग इंटरनेशनल एक्सपोजर ले रहे हैं, लिक्विड फण्ड फॉरन असेट्स को देख रहे हैं। जहाँ तक बात है इंडिया में इन्वेस्ट करने का इंडिया में आज कोई ऐसा सेट नहीं दिख रहा है जिसको मैं सेफ कहूँ अगर अगर वो आप अपने लाइफ टाइम के लिए ढूंढ रहे हैं। हाँ अगर आप ये सोच रहे है की मेरे पास 1 करोड़ रूपए में ऐसी जगह इन्वेस्ट कर दू की मेरा ग्रैंडसन बोले की मेरे दादा बहुत विजनरी हैं। तब आप जाइए बहुत सारे इमर्जिंग एरियाज हैं, ऑर्गेनाइजेशन बढ़ रहा है। लेकिन 1 जो मिथ है इंडिया को लेकर और इस मिथ पर मैं कई फोरम पर बात कर चुका हूँ। हम लोग हमेशा खुद को चाइना के पैरलर रख कर बात क्यों करते हैं कि हमारे पास भी उतना बड़ा मार्केट है। मार्केट सिर्फ पॉपुलेशन से नहीं बनता है। मार्केट मार्केट में लोगों के परचेज पॉवर से बनता है। इसको आप ऐसे समझे की आप 1 हाई एंड मॉल में जा रहे हैं। वहाँ पर फुटबॉल से क्या ये डिसाइड हो जाता है की वहाँ पर सेल कितनी हो रही है। विंडो शॉपिंग कर के लोग आ रहे हैं। लोगों के पास परचेज पॉवर नहीं है। मैं आम तौर पर ट्रस्ट मी ये में इंडियन इकॉनमी को समझने के लिए करता हूँ। मैं मॉल्स में जाकर अलग अलग मॉल्स में जाकर टाइम स्पेंड करता हूँ। और मैं 11 रिटेल आउटलेट्स को गौर से देखता हूँ। मुझे रिटेल ग्रॉसरी से ज्यादा कहीं आपको शॉपिंग एक्टिविटी नहीं दिखती है। और यही वजह है जो बहुत सारे लोग नहीं जानते हैं। आज जो रिटेल के चेंज है नाम लेकर मैं किसी को प्रमोट नहीं करूंगा। जो रिटेल के मेजर चेंज है। आज वो इस बारगेनिंग पेस में आ चुके हैं की हर मॉल में वो बिल्डर से कहते हैं हम कोई आपको यहाँ का रेंटल नहीं देंगे, हम रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर आयेंगे। अगर आपको स्पेस देना है तो आप 2 और जितने फूड आउटलेट्स हैं जितने ग्रोसरी के आउटलेट्स बड़े चेन्स है सब बिल्डर के साथ प्रॉफिट शेयरिंग पर आ रहे हैं। है। आपको देखकर लगता होगा की 1 बड़ा चैन है, कल तक वो किसी और नाम से किसी और ओनर का था। आज 1 कॉरपोरेट के पास है, उसके यहाँ हर मॉल में उसका प्रेजेंस बन गया है, क्या वो रेंटल दे रहे हैं। 10 साल पहले लोग कह रहे थे की इन्वेस्टमेंट के लिए की आप माल्स के शॉप्स वगैरह में इन्वेस्ट करिए। लेकिन धराधर मॉल्स भी बंद हुए और विदिन माल्स कुछ फ्लोर शुरुआत ही नहीं कर पाये हैं, फर्स्ट फ्लोर, सेकेंड फ्लोर और फिर सीधे फूड। कोर्ट इंडिया में टू थर्ड माल्स ऐसे है जिसको हम लोग टेक्निकली रियल स्टेट की भाषा में घोस्ट माल्स कहते हैं। देखिये मॉल लोग कहते हैं न कॉमर्शियल प्रॉपर्टी में ज्यादा रिटर्न मिलता है रेसिडेंसियल से कम रिस्की होता है। मैं कहता हूँ कॉमर्शियल प्रॉपर्टी से ज्यादा रिस्क कुछ नहीं होता है। हाँ हाई रिस्क हाई रिटर्न का गेम है। वो अगर वो रिटेल स्पेस या बिजनेस सेंटर चल निकला तो 7 परसेंट 6 परसेंट का आपको रेंटल रिटर्न मिल जाएगा। रेसिडेंसिल में 2 पर्सेंट मिलेगा। लेकिन रेसिडेंसियल अगर पिट भी गया तो किसी को रहने के लिए छत चाहिए। 2 पर्सेंट नहीं। 1 पर्सेंट का रिटर्न मिल जाएगा। वहाँ पे अगर वो रिटेल चेन पिट गया तो आपको कुछ भी नहीं मिलेगा। आपको कहने के लिए वो आपका है रिटेल में, मॉल्स में, ऑफिस स्पेस में इन्वेस्टमेंट 1 एवरेज इंडियन की रियलिटी नहीं है। वो डी पॉकेट इन्वेस्टर की रियलिटी हो सकती है। और डीप पॉकेट इन्वेस्टर के प्रोफाइल पर आने से पहले मैं। 1 चीज बता दूं की आप जहाँ भी, किसी भी बड़े मॉल में जितने बड़े रिटेल स्टोर्स। आज देख रहे हैं, सब के सब अब प्रोफिट सेंटर में आ गए हैं। नोएडा ग्रेटर नोएडा के बॉर्डर पर। 1 बहुत बड़ा रिटेल चेन आया। ऑफिस स्पेस है, स्टूडियो अपार्टमेंट भी साथ में है। उसकी रियलिटी ये है की 1 बड़ा कॉरपोरेट उससे 9 साल के लीज करता है, इस शर्त पर करता है। जो लोग इस एरिया के रियल स्टेट को जानते हैं वो समझ जायेंगे। मैं किसकी बात कर रहा हूँ। वो चाहे तो कमेंट में नाम लिख सकते हैं। इस शर्त पे वो डील करता है की शुरू के 3 साल में हम आपको सिर्फ मेंटेनेंस देंगे। अगले 3 साल फिफ्टी परसेंट देंगे। लास्ट के 3 साल में जो रेंटल वैल्यू आज का है वो हम देंगे। इन्फ्लेशन को आप भूल जाइए। तो ये जो आपको जितना भी रिटेल स्टोर दिख रहा है वो रिटेल स्टोर सिर्फ इसलिए दिख रहा है कि प्रॉफिट शेयरिंग में है। कॉमर्शियल प्रॉपर्टी बहुत रिस्की है। इंडिया में आम तौर पर लोग नहीं समझ पाते हैं और लोगों को लगता है कि यहाँ पर ज्यादा रिटर्न मिलेगा। इंडियंस के लिए। इस समय इन्वेस्टमेंट बहुत ही सोच समझ कर करने का समय है। क्यूंकी 1 ऐसा फाइनेंसियल रिसेट में देख रहा हूँ। 1 ऐसा फाइनेंसियल रिसेट होगा जो शायद 1 पूरी तरह से फाइनेंस क्रैश के रास्ते से होकर गुजरेगा और उम्र क्रैश के रास्ते में आपके पास सर्वाइवल के लिए हाई वैल्यू लिक्विड सेट ही काम आएगा। और हाई वैल्यू लिक्विड से की बात करता हूँ तो मुझे फिजिकल गोल्ड के अलावा कुछ दिखता ही नहीं है। अब यहाँ पर मैं कोई ये नहीं समझा कि मैं गोल्ड को प्रमोट कर रहा हूँ। चांदी वैसे लोग कहते हैं कि कॉपर और अल्मुनियम तक मतलब हालाँकि उसको आप कितना स्टोर करेंगे स्टोरिंग। कॉल अपने आप में अजीब है उसकी। लेकिन क्या चांदी को इसमें ऐड कर? देखिये, चांदी को एड में इसलिए नहीं करता इसकी वजह बताता हूँ। स्टोरिंग तो 1 प्रॉब्लम है, वो अलग है, चांदी हाई वॉलेटाइल सेट है। चांदी 1 दिन 4 लाख रूपए किलो है तो अगले दिन ढाई लाख रूपए भी जा सके। अभी अभी 2 महीने पहले दूसरा चांदी की डिमांड अगर चांदी की यूटिलिटी देखे सिल्वर की यूटिलिटी गोल्ड से ज्यादा है। क्योंकि सोलर, पैनल, इंडस्ट्रील, यूज सब में सिल्वर का यूज है। लेकिन सिल्वर की माइनिंग पे वो कैपिंग नहीं है और अभी नहीं हो सकती है। गोल्ड में जितना हो सकता था। एटी फाइव परसेंट के आस पास तक हो चूका है। चांदी में वो कैपिंग नहीं है। दूसरा कल को कोई टेक्नोलॉजी शिफ्ट हो गए कि चांदी की जगह में कोई और मेटल आ गया। और ऐसा ऐसा ये हाइपोथेटिकल नहीं है। चाइना इस खेल को समझ रहा है। तभी चाइना ने रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर इतना अपना एक्सपोर्ट रोल स्टाइट किया है। तो कल को आपके पास कोई भी ऐसा असेट जिस असेट का ऑल्टरनेट आ सकता हो, वो असेट वॉलेटाइल भी है, रिस्की भी है। गोल्ड का इस समय इसलिए नहीं हो सकता है कि देखिये हम आज जो सेकेंड वोल्ड वार के बाद की इकॉनमी में है और हम अब एंटर करने जा रहे हैं थर्ड वर्ल्ड वार की इकॉनमी में। तो ये जो ब्रिटन ट्रीटी हुई थी की डॉलर ग्लोबल करेंसी होगी और कुस ग्लोबल करेंसी को हम गोल्ड ऐसी बैक करेंगे जिसको की नाइनटीन सेवेंटी वन आते आते तक अमेरिकन प्रेसिडेंट निक्सन ने चेंज कर दिया। क्यूंकी सेकेंड वर्ल्ड वार को अगर हम देखे तो सेकेंड वर्ल्ड वार में अमेरिका का कोई मेजर लॉस नहीं था। 1 पल हार्वर को छोड़ दे तो कोई लॉस नही हुआ था। और उन्होंने 22 न्यूक्लियर बम गिराकर अपना 1 मोडपोलीवो्ल्ड के ऊपर बना लिया। तो और सबसे बड़ी गलती, सबसे बड़ी गलती ये रही की मेडलिस्ट के कंट्रीज ने नहीं समझा कि तुम्हे इजरायल ऐसी अमेरिका नहीं बचा रहा है, इजरायल को प्रोक्सी करके अमेरिका तुम्हारे साथ पेट्रोल डॉलर का खेल खेल गया है। तो हम सेकेंड वर्ल्ड वार की इकॉनमी से निकलकर थर्ड वर्ल्ड वार की इकॉनमी में जायेंगे। यह स्मूथ ट्रांजीशन नहीं है। ये ट्रांजीशन कितना प्रोब्लेमेटिक होगा, बहुत पेनफुल हो, कितना पेनफुल होगा, अभी कहना मुश्किल है। लेकिन हाँ, आम तौर पर हम लोगों का काम है लोगों को, कंजयूमर्स को अवेयर रखना। तो हम यही अवेयर रख रहे हैं कि आप 1 सेफ्टी वॉल तैयार रखिये। क्यूंकि ट्रांजीशन का मतलब है अगले 23 साल के लिए मेजर फाइनेंसियल क्राइसिस होगी। और 1 बात हमेशा याद रखियेगा जब फाइनेंसियल क्राइसिस आती है न, तो वहाँ पर पॉलिटिकल लॉयल्टी काम नहीं करती है, वहाँ फिर पब्लिक उस सरकार के खिलाफ खड़ी हो जाती है जिसकी ये आइडियोलॉजी के वो दीवाने रहे हैं। हंगरी में विक्टर ओरबान को लेकर, उनकी आइडियोलॉजी को लेकर पब्लिक कितनी दीवानी थी। लेकिन क्या वही पब्लिक उनके खिलाफ नहीं उतरी। और मैं उसको पैरलल इंडिया से भी करके देखता हूँ। क्या नोएडा के वो फैक्ट्री वर्कर ट्रस्ट मी मैं। उस दिन प्रोटेस्ट के समय वहाँ पर था। जो लोग सड़क पर उतर कर तोड़ फोड़ कर रहे हैं वो वही चेहरे थे, वहीं यंग लड़के थे जो इसी रूलिंग पॉलिटिकल क्लास की आइडियोलॉजी के दीवाने रहे हैं। क्योंकि जब बात पेट पर पड़ती है न, जब भूख सताती है तो कोई आइडियोलॉजी काम नहीं करती है। इसलिए मैं कह रहा हूँ की ये जो ट्रांजीशन होगा ये फाइनेंसियल ट्रांजीशन बहुत पेनफुल हो सकता है। मैं मतलब दुआ करता हूँ की ये न हो, मैं चाहता हूँ की मेरा असेस्मेंट पूरी तरह गलत हो, लेकिन ये 1 फाइनेंसियल ट्रांजीशन बहुत पेनफुल हो सकता है। इसलिए इन्वेस्टमेंट के लिहाज से आपको सिर्फ और सिर्फ हाई वैल्यू लिक्विडिटी की तरफ ध्यान देना चाहिए। अगर आपके पास बहुत कम पैसे हैं मैं तो गोल्ड रखूंगा, अगर मेरे पास उससे ज्यादा है तो मैं इंटरनेशनल एक्सपोजर देखूंगा। लेकिन में लैंड में और खासकर शहरों के ओवर प्राइज लैंड में या अपार्टमेंट में उस टाइप के स्टेट में नहीं जाऊंगा। रही बात जहाँ तक दुबई की है, दुबई अपने जिस कॉलिंग कार्ड पर खेल रहा था, वही उसका सबसे वीक प्वाइंट साबित हुआ कि आप सेफ हेवन है। जब तक आप अमेरिका के साये में है, अमेरिका और इजरायल के साये में रहकर कोई भी सेफ बन हो ही नहीं सकता है। अब तो ये लग रहा है की अमेरिका ने तो उन्हीं को अंडर द बस फेंका है, गर्ल्फकंटरीजको ही उनको किसी भी तरह की सुरक्षा को दे ही नहीं पाए। तो जो भी सेटेलाइट्स थे, जो उनके बचाव के तंत्र थे वो सारे के सारे 1 ही झटके में 1 मतलब, 1 हफ्ते में ही ईरान ने उसको एक्सपो अमेरिका के पास देने को बचा क्या है। 40 ट्रिलियन डॉलर के खुद डेट में है। आज अमेरिका का डेट इतना बढ़ गया है, ये जो भी ट्रंप कर रहे हैं वो बेसिकली अटेंशन डायवर्ट करने का खेल खेल रहे हैं। और सच यह है कि ट्रंप भी फंसे हुए हैं पूरी दुनिया। और यह बात मैं बहुत जिम्मदारी से कह रहा हूँ की पूरी दुनिया की ह्यूमैनिटी के लिए आज अगर कुछ खतरा है तो वो इजरायल है, ट्रंप भी उसमे फंसे हुए हैं। और मैं यहाँ पर वो सब एपस्टीन फाइल वो की बात भी नहीं कर रहा हूँ। मैं कह रहा हूँ की ट्रंप अमेरिका को 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज से बाहर कैसे निकालेंगे। मुझे लगता है की किसी को ये कर्ज से बाहर आने की फिक्र नहीं है, चाइना के ऊपर भी कर्ज है, अमेरिका पर भी कर्ज है, जितनी भी बड़ी इकॉनमी है सब पर कर्ज है। तो ये तो आपस में इसी तरह से ये साइकिल चलती रहती है। लोगों की ये बदर करते है की ये जो मतलब देशों पर जो कर्जे हैं इसका क्या निकलेगा देखिये। 2 चीजें हैं अमेरिका का कर्ज और चाइना या किसी और कंट्री का डेट। 2 अलग चीजें हैं, वजह बता देता हूँ। यू एस के साथ सबसे बड़ा कॉलिंग कार्ड ये था की डेट बढ़ता जायेगा, हम डॉलर छापते जायेंगे। क्योंकि डॉलर को किसी अंडरलाइन असेट से बैकिंग की जरूरत नहीं रह गई थी। तो इसलिए यूएस का वो डेट बढ़ता गया। बाकी दुसरे कंट्री का जो डेट बढ़ रहा है। किसी भी कंट्री का डेट या आप कहिए हमारे आपके घर का ही कर्ज। जब तक हम उस कर्ज का इंट्रेस्ट सर्व करने की हालत में है तब तक वो टॉलरेंस जोन में होता है। आज इंडिया के मिडल क्लास की क्या क्रिसिस हो रही है के डेट सर्व नहीं कर रहे हैं, क्रेडिट कार्ड डिफॉल्ट हो रहे हैं तो यही इंटरनेशनली भी चलता है। भारत का डेट इतना बढ़ा है। मोदी काल में। उस समय यही मोदी साहब भारत के डेट का जिक्र करते थे जब सिर्फ फिफ्टी सिक्स लैक्स था। अभी इतना बढ़ गया है। 3 के आस पास पहुँच, 300 के आस पास पहुँच रहा है। ठीक है भारत के लिए इसके क्या मायने है इस डेट के। ऐसा नहीं है की इंडिया इस डेट साइकिल से नहीं निकाल सकता। आज भी इतना डेट बढ़ने के बाद भी, जबकि मोदी गवर्नमेंट के टाइम में फोर टाइम्स बढ़ा है, आज भी आप इस डेट को मैनेज कर सकते हैं। देखिये आपको मैंने आपसे पहले किसी एपिसोड में भी यह कहा था कि हमारी प्रोब्लम पूरी टैक्सेशन को लेकर है। इंडिया का टैक्स टू जीडीपी रेशियो कितना है, 17, 18 परसेंट है और हम कॉम्पीट किससे करना चाहते हैं यू एस यू के से, वहाँ पर यह 40 परसेंट है। अब आप सोचेंगे कि मैं टैक्स बढ़ाने की बात रहा हूँ, नहीं कर रहा हूँ मैं उस जितने वेलफेयर कंट्रीज है, स्कैंडिनेवियन कंट्रीज वगैरह में भी देख लिए 40 परसेंट का है। जब मैं टैक्स टू जी डी पी रेशो बढ़ाने की बात कर रहा हूँ तो मैं आम जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ाने की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं तो उल्टा ये कह रहा हूँ की जो रिग्रेसिव टैक्सेसन है जी एस टी उसको खत्म कर। 2 प्रोग्रेसिव टैक्सेसन को आपको आम जनता पर बोझ डालने की जरुरत नहीं है। अगर हम इंडिया में वेल्थ टैक्स लगा दे, अगर हम इंडिया में इन्हेरिटेंस टैक्स लगा दे तो हमारी सेवेंटी पर्सेंट प्रॉब्लम इन 2 जगहों से सॉल्व हो सकती है। प्रॉब्लम यह है कि जो देश देश के वेल्दी हैं, जो कॉर्पोरेट्स हैं, वो ये कहेंगे की हम आपको पोलिटिकल चंदा दे या वेल्थ टैक्स दे। समस्या। यहाँ पर ये आ रही है कि हम आपको फाइनेंस करे या उसको करे। तो इसलिए इंडिया में ये नहीं हो पा रहा है। लेकिन अगर मैं आज भी इंडिया में अगर रूलिंग क्लास चाहे तो इंडिया का डेट ऐसा नहीं है जो मैनेजेबल नहीं है। हाँ उसके लिए आपको उन वेल्दी इंडियनस को चेकअप करना पड़ेगा जो आपको पैट्रनाइज कर रहे हैं, जिनके फेवर में पॉलिसी बन रही हैं। और पॉलिसी तो इस हद तक बन रही है कि अभी मैं किसी लॉयर से बात कर रहा था, वो बता रहे थे कि देखिये 1 तो आप समझिए की इंडिया में जो परसेप्शन बना है, यह करप्शन कम हो गया है, यह परसेप्शन क्यों बना है, ये यूँ प्रिसेप्शन कहाँ बना है? आम आदमी नहीं, परेशान है आम आदमी। मैं बताता हूँ कहाँ से आम आदमी को जो 1 सर्टेन आइडियोलॉजी वाले हैं उसको कैसे जस्टिफाई करते हैं। आप ड्राइविंग लाइसेंस बनाने चले जाए, पासपोर्ट बनाने चले जाए, ऐसी जगहों पर आपको पैसा देना पड़ता था, अब नहीं है उतना पहले तो हर विंडो में पैसा देना, जिटल वजह से होतो है। यहाँ पर करप्शन कम हुआ है डिजिटल की वजह से, लेकिन जो ऊपर लेवल फोर एग्जाम्पल 1 टेंडर फ्लोट होता है उस टेंडर की। पहले तो पूरी शर्तें ऐसी होती है कि 23 लोग ही क्वालीफाई करेंगे। उसके बाद उसमें क्या होता है की 1 नया चीज देखने लगा है की स्केलेशन क्लॉज डाल देंगे। स्केलेशन क्लॉज क्या है। अगर किसी वजह से प्रोजेक्ट हमें टेंडर एवार्ड हो गया और 2 साल हमारा टेंडर रुका रहा पब्लिक प्रोटेस्ट की वजह से किसी वजह से तो हम इसका स्केलेशन क्लॉज है कि हम उतना पैसा लेंगे गवर्नमेंट से। उसके बाद मुझे टेंडर मिल गया। मैंने अपने ही किसी चवन्नी छाप एनजीओ से 1 पीआईएल डलवा दिया। 2 साल के लिए रूका रहा उसका पैसा मुझे एक्स्ट्रा मिल रहा है। वह ये करप्शन का 1 ब्रांड न्यू लेवल है। बात कर रहे हैं है दूसरा मतलब पहले वो क्लास डलवाओ और उस क्लास को एक्चुलाइज करने के लिए कहीं से हाँ मुकदमेबाजी शुरू कराओ। खुद अपने प्रोजेक्ट में अड़ंगा लगाकर 23 साल उसको डिले करा 2 यह भी हो रहा है। गजब है। उसके अलावा प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट का जो सेक्शन सेवेंटीन था उसको डायल्यूट कर दिया गया। वो क्या था वो ये था कि अब पहले क्या था कि कोई भी करप्ट ऑफिसर के खिलाफ कम्पलेंट आने पर एक्शन डायरेक्ट हो सकता था। अब आप आपको मिनिस्टर के लेवल से आपको अप्रूवल चाहिए होता है करप्शन के खिलाफ एक्शन ले, एक्शन लेने के लिए। और अरुण जेटली ने जब वित्त मंत्री थे उन्होंने इसको ये कह कर जस्टिफाई किया था की हम ये इसलिए सेक्शन सेवेंटीन हटा रहे हैं क्योंकि इससे ऑनेस्ट ऑफिसर डिसीजन लेने में डरते हैं। और जिस दिन ये करप्शन का सेवेंटीन हटा था आईएस ऑफिसर एसोसिएशन के लोग उनको भूखे दे रहे थे। तो आपने खत्म कर दिया। वो रास्ता आरटीआई डालने पर 1 ही कॉमन जवाब मिलेगा। इनफॉर्मेशन यू हैव साउट इज नोट इन पब्लिक इंटरेस्ट। 1 सेक्शन थर्टीन डी था कि आपको अगर आपने कम्पलेंट डाला कहीं पर पुलिस में यहाँ वहाँ किसी के करप्शन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है तो आप मजिस्ट्रेट के पास चले जायेंगे। उसको डायल्यूट कर दिया गया है। तो ऊपर बीएलबएडलीआईएल को तो कोर्ट। अब आपका 1 तो इंडिया के अगेन मैं किसी कोर्ट का कंटेट कोर्ट नहीं कर रहा हूँ। लेकिन कोर्ट ऐसे ऐसे सवाल पूछने लगे हैं। ये कौन है, इसका वेस्टरडइनटरेस्ट क्या है? इसके पास ये इतना फालतू टाइम है कि ये पीआईएल लेकर आ गया। कई केसेज में पी आई एल डालने वाले पर उल्टा फाइन लगा दिया गया है। तो आपने सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। और फिर हम बात करते है की इंडिया में इन्वेस्टमेंट नहीं आ रहा। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, इज ऑफ डूइंग बिजनेस। क्या है भाई? ईज ऑफ डूइंग बिजनेस। तो तब होता ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के नाम पर आपने क्या किया? ईज ऑफ डूइंग बिजनेस ये हो गया कि जो बड़े कॉरपोरेट्स हैं उनके लिए पॉलिसी को हमने गवर्नमेंट फ्रेंडली पॉलिसी कर दिया। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का सही मायने में मतलब होता है। लेवल प्लेइंग फील्ड क्रिएट कर देना कि कोई भी आकर उस बिजनेस में उसी तरीके। से ऑपरेट करता है जिस तरीके से कोई बड़ा प्लेयर कर रहा है। क्या इंडिया में यह हुआ है। का। 1 ये भी है की एनवायरमेंटल लॉस को आप फ्लांट करे, आप लेबर सिक्योरिटी लेबर लॉ को आप फ्लाउंडकरे, ये इन दोनों से आप मुक्ति पा ले। ठीक है। और फिर आप इस ऑफ़ बिजनेस के नाम पर आप जो काम कर रहे हैं, जो आपने बताया वह तो अलग है। वही मैं कह रहा हूँ की इंडियन इकॉनमी में आप अपने स्ट्रेंथ को और अपने वीकनेस को आइडेंटीफाई कहाँ कर रहे हैं। देखिये हम जब बार बार आज डर रहे हैं, थर्ड वर्ल्ड वार के बाद की ग्लोबल इकॉनमी कैसी होगी। 23 चीजें हैं जो फंडामेंटल है जो हर किसी के लिए दुनिया इधर से उधर बदल जाए, कोई फाइनेंसियल वर्ल्ड ऑर्डर आ जाए। 1 चीज कभी नहीं बदलेगा लोगों के खाने की जरूरत। और ये इंडिया का 1 सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट हो सकता था। फूड सिक्यूरिटी भी हमारी जोहडाइजडहैहातो आपने अपने सबसे बड़ी जो गलती की है की आपका जो सबसे बड़ा कॉलिंग कार्ड बन सकता था, इंडिया फूड सिक्यूरिटी बन सकता था। मतलब बोल ऑफ द वर्ल्ड बन सकता था कि पूरी दुनिया को हम फूड सप्लाई कर सकते हैं। आपने उस पर कभी फोकस ही नहीं किया, आपकी कोई बजट की पॉलिसी कभी उसकी तरफ नहीं गई है। आप ऐसे देखिए कि आज भी इंडिया में फिफ्टी परसेंट लेबर फोर्स जो है एग्रीकल्चर पर डिपेंडेंट है जी डी पी का। आप कहते हैं कि हमारा तो अब वन थर्ड ही रह गया है, वन थर्ड रह गया है। फॉर एग्जाम्पल आईटी इंडस्ट्री 5 परसेंट कंट्रीब्यूट कर रहा है लेकिन नौकरी कितने लोगो को दे रहा है। 50 लाख लोगों को टेक्सटाइल जो है, 2 पर्सेंट भी कंट्रीब्यूट कर रहा है तो ढाई करोड़ लोगों को नौकरी दे रहा है। तो आपको इंडिया में फूड सिक्यूरिटी पर अगर इन लोगों ने ध्यान दिया होता, एग्रीकल्चरल रिफॉर्म्स पर ध्यान दिया होता। अब एग्रीकल्चरल रिफॉर्म्स के नाम पर वो नहीं जो आप बिल लेकर आए थे, जिसको की कोई किसान मानने को तैयार नहीं था। रवि साहब लोग बताते हैं जो अभी भी कृषि से जुड़े हुए हैं। वो यह बताते है की हमारे लिए इतना महंगा हो गया है। जो कुछ भी चीजें उसमें लगती हैं। यूरिया या डीएपी डीओपी कुछ होता है, वो जो भी दवाएं उसमे चाहिए होती है। जो इंफ्रास्ट्रक्चर उसमें चाहिए बिजली चाहिए। सब कुछ इतना महंगा हो गया है उनके लिए घाटे का सौदा है। अब वो और जिस तरह का मौसम मार पड़ रही है, बे मौसम की बरसाते है, बोले है। ये सब है क। अगर 23 बार किसी किसान को ये नुकसान झेलना पड़ा और आपने जो इंशोरेंस पॉलिसी है वो सारी की सारी करप्शन से लिडेन है। आपके आपको जो पेपर्स चाहिए कि आपदा आई है और आपके यहाँ विनाश हो गया। आपकी फसल खराब हुई है। उसका जो सर्टिफिकेट हमें लोकल अथॉरिटी से चाहिए उसमे पैसा चलता है यानि अभी पैसा तो बाद में कभी आएगा। लेकिन ये सर्टिफिकेट प्रोक्योर करने के लिए ही पैसा देना पड़ता। है। किसान को तो ऐसा किसान अगर 23 फसल नहीं गया, उसके बाद वो कहाँ रह जाएगा, वो मजदूरी करेगा। उसके पास और कुछ चारा नही है और न बचेगा। अपनी जमीन को तो बहुत बुरा हाल है। अनफॉर्चुनेटली इस देश का सबसे बड़ा किसान जो बन जाता है उसको फर्क नहीं पड़ता। फॉर एग्जाम्पल क्या अमिताभ बच्चन इस देश का सबसे बड़ा किसान है। लेकिन वो एग्रीकल्चरल दिखाकर टैक्स में छूट लेते हैं। 1 एवरेज फार्मर इंडिया में आज भी 2 एकड़ से ज्यादा जमीन उसके पास नहीं है। आपकी पॉलिसी उसके लिए क्या है कि क्या करें, आप कॉरपोरेटाइज करना चाहते हैं, आप चाहते हैं कि कोई बड़े कार्पोरेट सेक्टर की एंट्री हो। पंजाब हरियाणा में फार्मर बिल आता है, उसके पहले 1 कॉरपोरेट हाउस का साइलोज बनना शुरू हो जाता है की हम यहाँ फूड स्टोर करेंगे। तो क्या वो पॉलिसी किसी कॉर्पोरेट हाउस के ऑफिस में बैठकर बन रही है। आपको? 1 बात समझना है की आपका जो इनहेरेंट स्ट्रेट था आपने उस स्ट्रंक पर काम नहीं किया है, ठीक है, मैं मानता हूँ आपने मनुफेक्रिंगजैसे चाइना ने किया था, मैनुफेक्चरिंग पर काम किया। अब चाइना ने देखा कि देखो एजिंग पॉपुलेशन है, तो धीरे से हाईएंड पर शिफ्ट हो गया, रियल स्टेट को थोडा सा कर्ब कर दिया, उसमें कई लोगों के साथ नुकसान हुआ। कुछ लोगों की जो पिछले 20 साल का इन्फ्लेटेड प्राइस वैल्यू था, वो कम हुआ। लेकिन कंट्री की ओवरऑल इकॉनमी के लिए, लॉंगटर्म के लिए वो बुरा स्टेप नहीं था। यहाँ सबसे बड़ी चीज है की आपने मैनुफेक्चरिंग पर ध्यान नहीं दिया है, आपने एग्रीकल्चर पर ध्यान नहीं दिया है, आपने सिर्फ 1 विंडो ड्रेसिंग की थी। आई टी के सहारे, वो आईटी इंडिया में इसलिए आया था कभी भी आपको किसी यूएस यूके में बैठे बड़े आईटी सेक्टर वालों से बात करनी होगी। वो तो इनको कोडिंग कोडिंग कोली कहते हैं, वो इससे ज्यादा इंडियन टैलेंट को कुछ नहीं मानता। और जितने बड़े आईटी के प्लेयर्स यहाँ पर बैठे हैं वो चाहते भी नहीं थे। इनोवेट करे क्योंकि इनोवेशन करने का मतलब था वो अपने ग्लोबल क्लाइंट को नाराज करते। उनको तो इंडियन वर्क फोर्स को आप जितना निचोड़ सकते हो। निचोड़ना था बिल्कुल। आज आई टी वाले कह रहे है की ए आई की वजह से हमारी जॉब चली जाएगी, मैं सहमत नहीं हूँ। इस बात से। जब ट्रेक्टर आया था तो बैल गाड़ी चलाने वाले यही कहते थे। जब कर आई थी तो बैल गाड़ी चलाने वालों को लगता था कर आने की वजह से जब भी इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन होता है, ग्रोथ होता है। और मैं उस दौर की बात कर रहा हूँ जिस दौर में बैलगाड़ी से कार का सफर जब हुआशांग। वालों ने बकाया। तो अब देखिये यस समय रिक्शा तांगा में कितने लोग एम्प्लॉयर थे और आज फिर ऑटो मोबाइल में कितने ज्यादा ही हुए हैं। वालुम में तो ए आई की वजह से नौकरी नहीं जा रही है, नौकरी इसलिए जा रही है कि आप अपने को बदलते टेक्नोलॉजी से एडाप्ट करके आप नई चीजें लेकर आने की हालत में नहीं हो। आप ये मानने को तैयार नहीं हो कि हमारे पूरे इकॉनमी में 1 स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम है। मैं खासकर ये बात आई टी इंडस्ट्री वालों से करता हूँ। क्योंकि देखिये हम लोगों के बीच में आईटी इंडस्ट्री वाले ज्यादा भरे पड़े हैं। चूंकि हम लोग थोड़ा सा अपर मिडल क्लास में मूव करते है। आज भी वो ये मानने को तैयार नहीं है कि कंट्री के इकॉनमी में स्ट्रक्चरल प्रॉब्लम है, पॉलिसी में प्रॉब्लम है। नहीं यह ए आई की वजह से है। तो फिर तो टाइम्स में कहने पर मजबूर हो जाता हूँ की यू डिजर्व इट, क्योंकि आपने वही चुना है। हमारी जो सबसे बड़ी आईटी कंपनी है उनके यहाँ आर एन डी है ही नहीं। 1 पॉडकास्ट में में इसका जिक्र कर रही थी और एक्सपर्ट जो गेस्ट थे उन्होंने यही बताया कि वो तो सिर्फ आउटसोर्सिंग एजेंट्स बने हुए हैं, यहां का आदमी यहीं बना रहे और यहीं बैठ करके फौरन कंपनी उस को सर्व करे। इसके अलावा कोई ऑब्जेक्टिव नहीं था अच्छा ये बताइए कमिंग बैक टू रियल स्टेट जो बहुत आम आदमी है, क्या इस क्रैश होती हुई मार्केट में क्या अब उसका सपना पूरा हो जाएगा कि उसको 1 मकान मिल जाए। 1 चीज तो यह लेकिन अब 1 मकान किस शहर में चाहिए। ये वाला बड़ा बुनियादी सवाल है। क्या उसको अपने छोटे से छोटे से शहर में 1 मकान चाहिए? या ये जो जहाँ उसको नौकरी मिलेगी वहाँ पर उसको 1 मकान मिल जाएगा। देखिये यह बहुत ब्रॉड डिस्कशन इंडिया का रहा है की अगर इस देश में हर आम आदमी को मतलब 1 एवरेज फैमिली को 1000 स्कवायर फीट का घर दिया जाए तो टोटल इंडिया के अवेलेबल लैंड का वो सिर्फ वन परसेंट होगा। बताइए ये सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि आपने पूरा जो कंसेंट्रेशन है वो टॉप टेन सीरीज में रखा है। उसके बियोंड आप जा नहीं रहे हैं। उसके बियोंड जो नए शहर आपने बसाने की भी बात की। कोई भी नागपुर को उठाकर देख ले। जहाँ मिहान आया था या वृंदावन को उठाकर ेखिये लो एग्जिस्टिंग सिटीज है, उन्हीं को ये कनवर्ट कर नहीं सुनार बना रहे। में भी प्रॉब्लम है वो भी नहीं बने। नहीं। स्मार्ट सिटीज का तो ये है की वो डंब सिटीज बनकर रह गए हैं। उसकी तो बात ही नहीं कर रहा हूँ। मैं कह रहा हूँ की 1 शहर एग्जिस्टिंग जो टॉप टेन सिटीज है उसके जो शहर आपने बसाने की कोशिश की है। मतलब पुराने शहरों को मोडरनाइज करना, आप नागपुर में ले ले, जहाँ मिहान मल्टी मॉडल इंटरनेशनल कार्गो हब वगैरह बनाये या अभी वृंदावन को लेले अयोध्या को ले ले। मेरा 1 सीधा सा सवाल है। कोई पॉलिसी अनाउंस होने के पहले लैंड बैंकिंग कैसे शुरू हो जाती है। सही तो आपने तो आम आदमी के लिए वहाँ भी नहीं छोड़ा है। आप करते क्या है? देखिये फॉर एग्जाम्पल। मैंने कई फोरम पर ये कहा है कि 1 कोई भी नया शहर बसाना हो। जैसे अभी हम बैठे है, हम बात करे, नोएडा कंजेस्टेड हो रहा है, ग्रेटर नोएडा कंजस्टेड हो रहा है। तो 1 पॉलिसी आई के न्यू नोएडा बनायेंगे दादरी एरिया को 80 गाँव को हम एक्वायर करेंगे। अब ये खबर पब्लिक में अनाउंस बाद में होती है, बिल्डर्स के हाँ उसकी चर्चा पहले हो जाती है। कहीं से तो कोई इन्फॉर्मेशन लीक हुई है। और ये 1 ऐसा करप्शन है जहाँ मनी एक्सचेंज नहीं हो रहा है। करप्शन आप तब पकड़ेंगे न जब पैसा एक्सचेंज हुआ हो। ये तो सिर्फ 1 इन्फॉर्मेशन लीक हुई है। बिल्डर के लोगों ने वहाँ पर पहले एक्वायर करके रखना शुरू कर दिया है। तो ये जो आपका पूरा अपने करप्शन को इंस्टीट्यूशनलाइज करके रखा हुआ है। लैंड हम उतना ही रिलीज करेंगे जितना कि हमारा कॉर्पोरेट सेक्टर हमारे बिल्डर एबजॉर्ब कर सके उतना नहीं रिलीज करेंगे जितने की जरुरत आम इंसान को है। यह कवरेज इंडियन को है। ऐसे में रियल स्टेट इंडिया में हमेशा हाईली ओवर प्राइस रहेगा। और मैं कहता हूँ चलिए आप वो भी करो, आप कॉर्पोरेट को भी फायदा पहुँचाओ, फिर आप रेंटल पॉलिसी को लेकर आ जाओ। आम आदमी को कुछ तो आप प्रोवाइड कराएंगे, मोडलटनेंसीएक्ट ऐसी लेकर रेंटल, हाउसिंग पॉलिसी। ये सब हमने बजट में 1 बार नहीं मल्टीपल। टाइम सुना है। 1 आम इन्सान बता दे उसको इसकी कितनी समझ मिली है या उसको इसका कितना फायदा मिला है। ये जो टॉप 8 सिटीज हैं, जहां पर रोजगार है, जहां आना पड़ता है हमारे युवाओं को काम करने के लिए, ये जो बबल बस्ट हो रहा है, ये जो मार्केट क्रैश हो रहा है वहां पर उन लोगों के लिए कोई संभावना है कि अब वो ओनरशिप में आ जायेंगे, हाउस होल्डर, हाउस होल्डर हो जाएंगे। देखिये आप 1 बात समझिए जब बबल बोस्ट होता है। ये किसी भी इकॉनमी में बहुत गलत परसेप्शन है कि बबल बस्ट का मतलब है की चीजें सस्ती होंगी और 1 आम आदमी आकर खरीद लेगा। जब इकॉनमी में बबल बोस्ट होगा, इंडिया में असेट प्राइस का बबल बोस्ट होगा तो सब चीजों के प्राइस कम होगी, इन्फ्लेशन बढेगा आपकी अर्निंग कम हो जाएगी। क्या उस दौर में आप कुछ खरीदने की हालत में होंगे जापान का एग्जाम्पल ले लीजिये। जापान से बड़ा क्लासिक के जापान आप देखिये सेकेंड वर्ल्ड वार के बाद तक देखिये सबसे फर्स्ट टेस्ट ग्रोइंग इकॉनमी था। आज जापान में इंडिया से सस्ते सस्ते घर मिल रहे हैं। क्यूंकि इकॉनमी वहाँ की जब बबल ब्रस्ट होता है। असेट प्राइस का जो बबल ब्रस्ट होता है तो सब लोग बर्बाद हो जाते हैं। उसमे क्या होता है कि इम्प्लॉयमेंट पर असर पड़ता है, जॉब्स कम हो जाते हैं, लोगों की परचेज पॉवर कम हो जाती है, इन्फ्लेशन बढ़ जाता है। 1 बात हमेशा याद रखिएगा, किसी भी इकॉनमी में इन्फ्लेशन जब ग्रोथ ड्रिवन इन्फ्लेशन होता है। जब चीजें ग्रोथ कर रही होती है तो इन्फ्लेशन फर्क नहीं पड़ता उसका 1 एक्जाम्पल देता हूँ। मनमोहन सिंह की सरकार में 2000, 567 में अगर हम देखे इन्फ्लेशन हाई था, डबल डिजिट इनफ्लेशन था। लेकिन असेट क्रिएशन लोगों का क्यों हो रहा था। क्योंकि जब आपका इन्फ्लेशन ग्रोथ ड्रिवन इन्फ्लेशन है, ये चीजें महंगी हो रही है, क्योंकी ग्रोथ भी साथ में हो रहा है। अभी जो हो रहा है उसको इकोनॉमिक में स्टैगफ्लेशन कहते हैं सब कुछ स्टेगनेंट है, इन्फ्लेशन बढ़ता जा रहा है। तो ये जब बबल पोस्ट होगा तो सबसे बड़ी मार तो पड़ेगी लेवर क्लास पे और कॉमन इंडियंस पे जो एलिटिस्ट क्लास है, जो एच एन ई क्लास है वो तो उसके मेनिफीसिलही रहेंगे क्योंकि उनके लिए पूरा ग्लोबल मार्केट है। और यह कैसे होता है। इसको भी जापान से ही समझाता हूँ की जापान में पूरी दुनिया में आप इंडिया में भी सुनते होंगे की इस कंपनी में जापान के सॉफ्ट बैंक ने इन्वेस्ट किया है। बहुत सारी इंडिया की कंपनी है जिसमें जापान का इन्वेस्टमेंट है, वो कौन है सॉफ्ट बैंक के पास किसका पैसा है। उन्ही लोगो का पैसा है जो जापान में जब बबल बस्ट हुआ असेट का उसके बेनिफिसरी रहे, उन्होंने अपने आप को इमीडिएटली मूव कर लिया, ग्लोबल मार्केट की तरफ बल्कि। कहा तो यह भी जाता है की जापान में कुछ लोगों ने इसका इतना फायदा उठाया खासकर जो मनी क्लास था की जब बैंक वहाँ पर जीरो पर्सेंट के इंटरेस्ट पर पैसा देने लगे तो जापान के बैंक से पैसा उठाया यूएस के मार्केट में इन्वेस्ट किया। तो ये जो हम कह रहे हैं की असल बबल ब्रस्ट होगा, इसमें वेल्दी क्लास को फर्क नहीं पड़ेगा। मार पड़ेगी इंडिया के नाइनटी फाइव परसेंट पे क्यूंकि इंडिया में 1 मोटा एग्जाम्पल आप। ऐसा समझ लीजिये की अगर आप महीने के पचीस हजार कमाते हैं तब आप ग्राफि टॉप टेन परसेंट में है तो आप समझिए की फायदा कौन उठाएगा। टॉप के 12 परसेंट लोग ही तो फायदा उठायेंगे। यह बताइए दुनिया में 8 बिलियन की पॉपुलेशन है और सिर्फ 300 3000 बिलियनेयर्स हैं। अब ऐसे में ये जो बिलिनियर्स के पास पैसा है जो सब तरफ से निकाल के इकटठा हो गया है। और इसमें हमारे दुनिया के नेचुरल रिसोर्सेज का भी बहुत बड़ा योगदान है। वहां पर भी बहुत एक्वीजीशन हुआ है और एक्सप्लाटेशन हुआ है। इकॉनमी को करेक्शन की तरफ कैसे लाया जाए। हर साल इंडिया में फिर जब रिलीज होती है। इतने बिलियनर बढ़ गए, मैं उन लोगों से ही सवाल पूछ लेता हूँ की अच्छी खबर है। यह बुरी खबर है। बिलियनर का बढ़ना किसी भी सोसाइटी में और इंडिया इन, ट्रांस ऑफ बिलियनर, आज वर्ल्ड में नंबर थ्री है तो किसी भी इकॉनमी में बिलियनर का बढ़ना अच्छी खबर नहीं होती है। ये वेल्थ इन क्वॉलिटी का सिम्बल होता है। इसीलिए मैंने आपसे ही सवाल और या आपका। सवाल यह है कि इसको कैसे कंट्रोल किया जाए। इसको कंट्रोल करने का उपाय तो यही है की आपको वेल्थ टैक्स लगना पड़ेगा इनहेरिटेंस टैक्स लगना पड़ेगा नहीं तो क्या था भारत में है नहीं तो क्या होगा? 1 नारायण मूर्ति निकालेंगे पूरी बेशर्मी के साथ अपने आप को उनकी वाइफ भी सिंपल। मूर्ति बताएंगे पूरी बेशर्मी के साथ कहेंगे 70 घंटे युद्ध को काम करना चाहिए। उनका ग्रैंडसन यूके में बर्न होगा। ढाई सौ करोड़ को बर्न होने का रिवार्ड उसको ढाई सौ करोड़ मिल जाएगा तो आप अगर वेल्दी पे, वेल्थ टैक्स नहीं लगाएंगे। इन हेरिटेंस 1 लड़का जो पैदा हुआ है, पहली सांस लिया है, उसको ढाई सौ करोड़ मिल गया है, उस पर इनहेरिटेंस टैक्स क्यों नहीं होगा। और अगर आप इनहेरिटेंस टैक्स नहीं लगाएंगे, वेल्थ टैक्स नहीं लगाएंगे तो टैक्स टू जीडीपी रेशियो बहुत कम है। मैं आम तौर पर जब कह देता हूँ, पब्लिक में के टैक्स, टू जीडीपी रेशियो कम है। तो लोग कहते हैं पहले से इतना टैक्स का बोझ है। आप बढ़ाने की बात कर रहे हो। मैं बिल्कुल कह रहा हूँ, आम आदमी पे नहीं, वेल्दी पर पढाई, इन्हेलटेंस पर बढाइए। आम आदमी पर तो आपको जितना रिग्रेसिव टैक्सेशन है। देखिये, लोग कहते हैं बहुत सारे लोग कहेंगे एक्सपेंडिचर पर टैक्स लगा, अरे भाई, 1 मजदूर 5 रुपए के बिस्कुट खा रहा है, आप उस पर टैक्स लोगे ले ही रहे हैं, आप ले रहे हैं। लेकिन 1 एलिटिस्ट क्लास का सौ करोड़ का की फैमिली में पैदा हुआ बच्चा भी अगर दूध पी रहा है, उस पर भी वही टैक्स दे रहा है, जो 1 रिक्शे वाले का बच्चा दे रहा है। तो जरूरत तो वहाँ खत्म करने की है, न वेल्थ टैक्स और इनहेरिटेंस टैक्स पे सीरियस डेलिब्रेशन का टाइम आ गया है। अनफॉर्चुनेटली इनमें से ज्यादातर लोग वो हैं, जो और में देखिये, कोई 1 पार्टी की बात नहीं कर रहा हूँ। आपको क्या लगता है की आज बी जे पी को ये लोग फण्ड कर रहे हैं, कल किसी और पार्टी की सरकार आएगी ये लोग क्वालिटी शिफ्ट नहीं करेंगे? जैसे ही सरकार बदलेगी, सब के सब अपना लॉयल्टी शिफ्ट कर लेंगे, सम्बन्ध खराब नहीं करेंगे, थोड़ा इधर भी देते रहेंगे, बाकी भी ये लोग क्रंबिंग तो कर ही रहे होंगे, बाकी पार्टियों को क्रम तो दे ही रहे होंगे की वो अगर नहीं दे रहे होते, अगर नहीं दे रहे होते तो ऐसे भी दे रहे है। इसका एडीआर की रिपोर्ट में है कि हर पार्टी को मिल रहा है। अगर नहीं दे रहे होते तो बाकी पार्टीज पॉलिटिकल फंडिंग का विरोध क्यों नहीं करती है? खुल कर सही कह रहे हैं। आप ये बिल्कुल अगरीकरए्च्वली क्या होता है की ये जो अपोजिशन में भी बैठे होते हैं, इनको यह पता होता है की ठीक है। अभी हम अपोजिशन में है, जब हम रूलिंग पार्टी में आयेंगे, अभी तुमने उधर जितना ज्यादा दिया है, उतना हम कंपेंसेट कर लेंगे। तो इसलिए वेल्दी पे, वेल्थ टैक्स और इन्हेरिटंस टैक्स लगने से ये लोग बचते हैं जी। लेकिन इसको क्या पब्लिक में यह आवाज नहीं उठानी चाहिए। एग्जैक्ट ली, मैंने पिछली बार भी मैंने बात की थी, और ये जो अबाध झूठ है, कोई रोक टोक ही नहीं की आप कितना भी एक्वायर कर सकते हैं, कितना भी अमीर हो सकते हैं। उसने न सिर्फ ये की कार्पोरेट तो यही किया है। हमारे यहाँ के जो अधिकारी गण है, जो बेरोक्रसीहैउस लपेट लिया है और उनके पास इतना कांस्टेबल के पास सौ करोड़ निकाल रहा है। आप बताइए कभी करप्शन का लेवल यह होता था कि किसी के पास करोड़ 2 करोड़ है तो बहुत करब्टआदमीहैआज 50 करोड़ सौ करोड़ लोगों के घर से कैश मिल रहे हैं। करप्शन का लेवल इतना बढ़ जाता है की किसी ब्यूरोक्रेट के किसी प्राइवेट घर में जो केयर टेकर लड़का है वो भाग जाता है। 50 करोड़ रूपए कैश लेकर भागता है। अब उसकी एफ आई आर भी नहीं हो सकती है जी, क्योंकि वो पैसा लेकिन पुलिस उसे ढूंढ रही है, ऑफिसियली ढूंढ रही है। तो करप्शन का लेवल तो इतना बढ़ गया है। अब ये वो चीजें हैं जो हम लोग आम तौर पर न्यूज इंडस्ट्री में होने की वजह से सुनते हैं। एविडेंस नहीं होता है। हम खुल कर कोई नाम नहीं ले सकते। लेकिन हम जानते हैं की करप्शन का लेवल क्या है। करप्शन के। जब मैं आपको मैंने एग्जाम्पल दिया, सेक्शन सेवेंटीन मैं तो पूछता हूँ की जिस दिन सेवेंटीन एट डायलूट हो रहा था, आमतौर पर पार्लियमेंट में कुर्सियां चलती है, लड़ाई झगड़े होते हैं, लोग वेल में आ जाते हैं। जब सेक्शन सेवेंटीन डायलूट हो रहा था तो पोजीशन क्या कर रही थी? जी, क्योंकि कहीं न कहीं 1 टैसिट अंडरस्टैंडिग सर्टेन चीजों पर सबके बीच में है। आज मैं अपने वालों को बचा रहा हूँ, कल तुम भी तो अपने वालों को बचाओगे कोई ऐसी अच्छी बात मैं सुनना चाहती हूँ अपने दर्शकों के लिए कि जिससे उनका उत्साह वर्धन हो। थोड़ा वो अच्छा फील करें। अब जब इकॉनमी खराब होती है तो कोई सेक्टर तो ऐसा होता होगा जहाँ आप जा कर के कुछ अपने लिए व्यवस्था कर सके। मिसाल के तौर पर अगर महामारी आई हुई है तो अस्पतालों को और कफन की दुकानों को तो फायदा ही हुआ था न। ऐसा कोई सेक्टर है। कोई तो देखिये ये पैरलल ही गलत होगा। क्योंकि कोविड के टाइम में जो हॉस्पिटल्स को फायदा हुआ वो फायदा नहीं था। वो एक्सप्लोइटेशन था किसी भी क्राइसिस में फायदा होना और किसी 1 सेक्टर का दूसरे को एक्सप्लायट करना, पब्लिक को एक्सप्लॉइट करना। ये दोनों 2 अलग चीजें होती है। कोई सिल्वर लाइनिंग, सिल्वर लाइनिंग। इस समय अगर मैं पूरी इकॉनमी को देखा तो 1 ही सिल्वर लाइनिंग है। क्या आप इवोल्विंग इकॉनमी के लिए नॉलेज ड्रिवेन डोमेन के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं? क्या आप फाइनेंसियल नॉलेज अपनी बढ़ा रहे हैं? ट्रस्ट में अगला गेम चेंजर, 1 एवरेज इंडियन के लिए जो खानदानी पैसा लेकर नहीं आया है उसके लिए अगर कुछ गेम चेंजर है तो फाइनेंसियल नॉलेज और अवेयरनेस है। लेकिन फाइनेंसियल नॉलेज और अवेयरनेस में भी 1 चीज के लिए केयरफुल रहना है कि फाइनेंसियल वर्ल्ड चुकी। आगे चलकर बहुत लुक्रेटिव होता जा रहा है। तो इसमें भी वेस्टेड इंटरेस्ट और मिस इनफॉर्मेशन बहुत है। आपको फाइनेंसियल ली खुद को अवेयर करना है, ग्लोबली रेलिवेंट बनाना है क्यूंकि नेक्स्ट जो वेव आएगा नेक्ट जो इकॉनमिक साइकिल होगी वो हो सकता है पूरी ग्लोबल इकॉनमी की साईकिल हो और उस ग्लोबल इकॉनमी साइकिल के लिए आपको ग्लोबली रेलीवेंट होना होगा। आपको फाइनेंस में स्टॉक मार्केट से लेकर जितनी इन्वेस्टमेंट की चीजें हैं उसको सीखनी पड़ेगी यंग लॉट के लिए ए आई जो है वो नए ऑपर्चुनिटीज भी लाएगा जॉब्स कम होंगी। का रोना मत रोइए। आप ये देखिए कि जो नए इवॉल्विंग जॉब्स होंगे, फॉर एग्जाम्पल कॉम्यूनिकेशन हमेशा रहेगा सेल्स हमेशा रहेगा उसी तरीके से और भी नई चीजें इवॉल्व होंगी, आप क्या उसके लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। 1 बात याद रखियेगा हमारे एकेडमिक इंस्टिट्यूशन तैयार नहीं कर पा रहे हैं, आपको खुद को तैयार करना पड़ेगा मतलब मुझे अंदाजा था कि कुछ बहुत पॉजिटिव चीजें हमारे पास है नहीं बात करने के लिए और वही लग रहा है बहुत शुक्रिया आने के लिए और दुबई को लेकर के ओवर ऑल जो पिक्चर खड़ी हुई है हम नहीं सोच पा रहे कि हम अपने देश में कहाँ पर इन्वेस्ट करे हैं। इस वजह से लोग बाहर जा रहे हैं। और 1 लेमेंट जो अपर मिडल क्लास है की हम जो टैक्स दे रहे हैं उसके बदले में हमें बेसिक चीजें नहीं मिल रही हैं हमारी हवा, हमारा पानी दिल्ली के पानी में यूरेनियम है कहीं कहीं तो हमारी हवा पानी और बेसिक सिक्योरिटी वो सब कुछ चला गया है। तो अगर हम सिर्फ लॉ इन ऑर्डर को अपनी सड़कों को अपने हवा पानी पर अगर हमारी सरकार काम करे तो ये जो वेल्थ ड्रेन है इसको रोका जा सकता है। ब्रेन ड्रेन तो हो ही रहा था उसको ट्रंप ने रोक दिया है और दूसरे मुल्कों ने रोक दिया है वेल्थ ट्रेन को कैसे रोका जाए उस पर हमें काम करना होगा। यूथ को आपको डेमोग्राफिक डिविडेंड बनाना होगा। यूथ को आपने जो डेमोग्राफिक लाइबिलिटी बना दिया है सिर्फ इस 1 फोकस के साथ पूरे देश की इकॉनमी और सोसाइटी बदली जा सकती है। यू थी, उम्मीद है बहुत शुक्रिया, थैंक यू।