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Power Finance Corporation Pfc Explained India Ki Power Funding Giant

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TITLE: “Power Finance Corporation (PFC) Explained | India Ki Power Funding Giant” #podcast CHANNEL: Financeseva DATE: 2026-06-01 ---TRANSCRIPT--- पी सी, किस, मिनिस्ट्री के अन्दर, पीएसी को महारत्न, स्टेटस का पी एफ सी की पोती, ओन सब्सिडी, ट्रिपल, लो, नमस्ते, दोस्तों और स्वागत है आप सभी का फाइनल, बात फाइनल सेव के साथ और धमाकेदार प मैं हूं, आपकी होस्ट, शना और आज का एपिसोड खास तौर पर ओनऑनट्रपरसपॉवर सेक्टर बिजनेस, रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपर्स इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी, एमएस एमी ओनर्स और फाइनेंस प्रोफेशनल स्केल होने वाला है जो अपने बिजनेस को अगले लेवल तक ले जाना चाहते हैं। क्योंकि आज हम बात करने वाले हैं इंडिया की 1 ऐसी फाइनेंसियल पॉवर हाउस के बारे में ज देश के पॉवर इन्फ्रास्ट्रक्चर को फंडिंग देने में बहुत बड़ी, बहुत बड़ी भूमिका निभाता है पॉवर फाइनेंस कॉरपोरेशन यानि कि पी एफ सी इंडिया। अगर आपने कभी सोलर प्रोजेक्ट, ट्रांसमिशन लाइन, ईवी इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिन्यूएबल, एनर्जी, प्लान, फर्म, प्रोजेक्ट, स्मार्ट मीटरिंग, बैटरी स्टोरेज या किसी बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के फाइनेंस के बारे में सोचा है तो आपने पी एफ सी का नाम जरूर सुना होगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है पी एफ सी आर के प्राइवेट सेक्टर बिजनेस को क्या फंडिंग दे है, लोन अप्रूवल कैसे होता है, इंट्रेस्ट रेट कैसे डिसाइड होता है, रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स को कितना सपोर्ट मिलता है, एमएसएमई और स्टार्ट अप्स के लिए अपॉर्चुनिटीज क्या है और पावर सेक्टर में बिजनेस ग्रोथ के लिए स्मार्ट फंडिंग स्ट्रैटेजी क्या हो सकती है। तो दोस्तों आज के इस पावरफुल एपिसोड में हम पूरी डिटेल में समझेंगे पी एफ सी इंडिया में पीएफसी इंडिया क्या है और कैसे काम करती है, प्राइवेट कंपनी को किस प्रकार के लोन मिलते हैं, सोलर विंड और रिनएबलएनरजी प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग अपॉर्चुनिटी, प्रोजेक्ट फाइनेंस, वर्सेस, वर्किंग कैपिटल, फंडिंग, इंट्रेस्ट, रेट्स एलिजिबिलिटी एंड डॉक्यूमेंटेशन प्रोसेस इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनिंग में पी एफ सी क्या रोल है, ग्रीन एनजी एंड ए एस डी प्रोजेक्ट्स को क्या सपोर्ट मिलता है और ऑनटरबरनिोस स्मार्ट फाइनेंस स्ट्रैटेजी से अपने बिजनेस को कैसे तेजी से स्केल कर सकते हैं। लेकिन दोस्तों आगे बढ़ने से पहले 1 छोटा सा इम्पॉर्टेंट अनाउंसमेंट अगर आपको चाहिए प्रोजेक्ट फाइनेंस असिस्टेंस, न्यूएबल एनर्जी फंडिंग, सोलर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लोन, प्रोजेक्ट, लोन, सपोर्ट, डेट्स, इंडिकेशन, वर्किंग कैपिटल, प्लानिंग फाइनेंशियल, मॉडलिंग, एन डी पी आई प्रोपोरेशन, पी एफ सी आर सी और बैंक फंडिंग, गाइडेंस स्टार्ट अप, n m s मी फाइनेंशियल, एडवाइस फ्री। तो विजिट कीजिए फाइनेंस वा कॉम जहां सीए विकास जन और उनके एक्सपर्ट टीम बिसनेस को प्रोवाइड करती हैं, एन टू एन, प्रोजेक्ट फाइनल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग और ग्रोतएडवाइसफ्री सपोर्ट और दोस्तों फाइनलसीवाप्लैटफार्म से जुड़े हैं थर्टीन हंड्रेड प्लस क्यू, बेटर्स और सिक्स्टीन हंड्रेड प्लस ऑल्टरनटिव इन्वेस्टमेंट फंड जिससे स्टार्ट अप्स, इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस और ऑनटरप्रनिसको फंडिंग अपोर्चुनिटी और स्ट्रैटेजिक सपोर्ट मिलता है। कॉल whatsp नाइन, सिक्स, थ्री जीरो टू, जीरो टू, जीरो टू और दोस्तों अगर आप चाहते हैं की ऐसी पावरफुल फाइनल्स नॉलेज आपको रेगुलरली मिलती रहे तो इस एपिसोड को लाइक कर दीजिये, पोडकास्ट और चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए और इस एपिसोड को अपने ऑनर दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिए कॉमेंट में लिखे पी एफ सी इंडिया क्योंकि हमारा मिशन है टेन मिलियन प्लस ऑनर तक स्मार्ट फाइनल्स नॉलेज पहुँचाना तो चलिए शुरू करते हैं आज का ये हाई एनर्जी और नॉलेज पैक्ट एपिसोड और आज हमारे साथ जुड़े हैं इंडिया के लीडिंग प्रोजेक्ट फाइनल, आन इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग, एक्सपर्ट, विकास, वेल्कम विकास, टोडेजपोटकास्ट, हाव, आर, यू, डूइंग फाइनल, शन फाइनल, लिस्ट न। तो आज हम 1 और नए टॉपिक 1 बहुत ही इंट्रस्टिंग टॉपिक के साथ आए हैं। आज हम बात करने वाले हैं पी एफ सी के बारे में। विच पॉवर फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया। बहुत लोगों को पता होगा, कहीं को नहीं पता होगा पॉवर फाइनेंस कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया पॉवर रिलेटेड जो भी प्रोजेक्ट्स होते हैं उनको फाइनेंस करते हैं और काफी जो है मेट्स हैं जो आज हम डीबग करेंगे काफी बहुत सारे कंफ्यूजन है जो लोगों को होते हैं। कई लोगों को नहीं पता होता कि प्राइवेट सेक्टर में पीएफसी जो है वो किन प्रोजेक्ट्स को फाड करता है क्या क्या एलिजिबिलिटी क्या प्रोसेस रहता है तो लोगों को नहीं पता होता आज हम इसी सबके बारे में बात करेंगे और जैसे कि पॉवर सेक्टर जो है बहुत ही जो है ग्रोइंग सेक्टर है जैसे ईवीज आ गए हैं। अब इनके चार्जिंग स्टेशंस हैं बहुत सारी चीजें हैं पॉवर से रिलेटेड स तो ये बहुत ही इमपोर्टंट इम्पॉर्टेंट टॉपिक बन जाता है। 1 हमारे डिस्कशन के लिए तो स्टार्ट करे सेला का डिस्कशन ओके सर। तो सबसे पहले जो मेरा क्वेश्चन है ऑलवेज हम बेसिक से स्टार्ट करते हैं प्लीज बताइए कि जो पी एफ सी है वो क्या है, एग्जैक्टली क्या करती है और जो उसकी जर्नी है अभी तक वो कैसी रही है। देखिये पॉवर ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन। 1 गवर्नमेंट ऑर्गेनाइजेशन है जो बेसिकली प्रोजेक्ट पॉवर से रिलेटेड जो प्रोजेक्ट है उनको फंड करता है चाहे वो रिन्यूअल एनर्जी हो, चाहे विंड हो, 16 हो, थर्मल हाइड्रो है। तो इनके जो टम्स में कंपेयर तो बैंक्स काफी फिलेक्जबल होते। टेन्योर काफी ज्यादा होता है, प्राइजिंग भी काफी रीनेबल होती है और कोई एडिशनल सिक्योरिटी की या हार्ड कोर्ट कोलेटरल सिक्योरिटी की जरुरत नहीं होती है जो इनका ये मेजर यू एस पी आपकी है पी टी काफी है फ्लेक्सिबल का भी बहुत अच्छे ऑप्शंस हैं बिल्कुल ऑल राइट। अब सर अगर हम बात करें प्राइवेट सेक्टर की तो ये जो पी एफ सी हैं इनके पास प्राइवेट सेक्टर के लिए क्या क्या प्रोडक्ट्स अवेलबल है, क्या क्या फण्डिंग प्रोडक्ट्स हैं, पीस बताइए है देखिये सबसे पहले तो हमको 3 कैटेगरी में डिफाइन कर सकते है ह फैली कैटेगरी फण्ड बेस फैसिलिटी जिसमें ये शॉर्ट टम और लॉन्ग टम फंड देते हैं। तम लोन के फार्म में देते हैं। सेकेंड कैटेगरी आती है नॉन फंड कैटेगरी जिसमें ये लोग लैटर ऑफ़ कम फंड देते हैं, बैंक गारंटी देते हैं और इसके अलावा डिफर्ड पेमेंट गारंटी भी देते हैं। तीसरी कैटेगरी आती है सर्विस बेसिकली स्पेशलाइज, सर्विस स्पेशलाइज, सर्विस एक्चुलेजैसेकीमान कंसल्टिंग चाहिए, पॉवर से रिलेटेड है या कुछ तो वो उसमे भी सपोर्ट करते हैं। जी मतलब ये 3 प्रोडक्ट्स हैं बेसिकली के प्राइवेट से, प्राइवेट सेक्टर। अब सर अगर हम बात करे एलिजिबिलिटी की की क्या लिजिबिलिटी क्राइटेरिया है जो पॉवर सेक्टर बॉरोअर अगर आप हो जी। तो आपका क्या एलिजिबिलिटी होनी चाहिए। वो क्या है? प्लीज बताइए देखिये सबसे पहला तो है की रजिस्टर्ड यूनिट होना चाहिए। जैसे की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है या लिमिटेड कंपनी है है। पहला तो ये क्राइट दूसरा जो प्रमोटर है स्पोंसर कंपनी है उनकी रेटिंग वगैरह एक्सटरनल रेटिंग होनी चाहिए मिनिमम ट्रिपल भी होनी चाहिए। मतलब बहुत ही बेसिक क्राइटेरिया है जो आपने बताया है एलिजिबिलिटी है। अब सर यहाँ तो है रूपी टर्म लोन। जी। तो ये जो रूपी टर्म लोन है इसके बारे में थोड़ा डिटेल में हम डिस्कस करेंगे तो कितना अमाउंट तक मिल सकता है। आप प्लीज थोड़ा बताइए और किस पर्पस के लिए मिलता है। बाज जैसे की एलिजिबिलिटी होती है किसी चीज में ऐसी ही थोड़ी नहीं आपको। कोई भी लोन दे देगा बड़े तो किस परपस के लिए मिलता है, कितना मिल सकता है। जी। बिल्कुल देखिये पी एफ सी जनरली पॉवर से रिलेटेड प्रोजेक्ट या उससे लाइट लाइट सेक्टर। जैसे ट्रांसमिशन है डिस्ट्रीब्यूशन वगैरह है या उससे रिलेटेड जो भी सेक्टर है उनमे यह फंडिंग करता है। और इसमें जो टेन योर जनरली पंद्रह साल से लेकर 20 साल तक के बीच का हो सकता है। इसमें डेट क्यूटी रेशो मतलब 70 से 30 के बीच हो सकता है जो फंडिंग अमाउंट हो सकता है। मान लो कोई प्रोजेक्ट सौ करोड़ का है तो 70 करोड़ फंडिंग पी एफ सी सी मिल सकता है। लेकिन हाँ जनरली इनका क्रैटेरिया होता है पचीस करोड़ तक 70 परसेंट तक फंडिंग करते हैं। अगर 25 करोड़ के ऊपर है तो वो फिफ्टी परसेंट फंडिंग करते। इसमें अमाउंट तो ये बेसिक क्रैटेरिया है जो की पी एफ से लोन लेने के लिए जरूरी है। मतलब अलग अलग लिमिट है। इनमें जी जी बिल्कुल। अब सिर अगर हम बात करे फॉरेन करेंसी टर्म लोन की तो उसमे क्या क्या बेनिफिट्स है। प्लीज थोड़ा बताइए है। देखिये फॉरेन करेंसी में अगर कोई टर्म लोन लेता है तो उसके लिए फायदा है की उसका जो कॉस्ट ऑफ फंड है वो काफी कम होता है। यह आज की सी में देखे तो 45 परसेंट पैसा मिल सकता है। लेकिन हाँ उसमे रिस्क 1 फैक्टर होता है जिसके पास अपनी नेचुरल हेजिंग है वो ही फॉरेन करेंसी में लोन ले। दरबाई न ले। क्योंकि अदरवाइज क्या हुआ कि अगर मान लीजिये डॉलर की प्राइजेज बढ़ते गए तो वो उल्टा इम्पैक्ट पड़ेगा जो हैजिंग कॉस्ट है वो काफी ज्यादा होता है। वो भी ज्यादा है, अगर हैजिंग भी करता है तो ये एडवाइजेबल उन्हीं के पास है जिनके पास डॉलर का रेवेन्यु हुए तो वो डॉलर में लोन ले सकते हैं। तो अदरवाइज एडवाइजेबल नहीं। अब सिर अगर हम बात करे जनरेशन जो प्रोजेक्ट्स होते हैं उनके क्या नॉर्म्स रहते हैं थोड़ा बताइए जैसे जो थर्मो और हाइड्रा और जो रिन्यूएबल प्रोजेक्शन में क्या डिफ्रेंस आते हैं। देखिये अभी जो थर्मल पॉवर में तो थोड़ा सा अभी उतना इंटरेस्ट नहीं है पी ए सी का। लेकिन इसमें जो टेनोर जनरली 12 साल तक का होता है, 16 में पंद्रह से 20 साल तक का एग्जाम टेनर होता है। ऐसे ही अगर विंड पॉवर से रिलेटेड प्रोजेक्ट है तो उसमे 20, 20, 22 साल तक का ट जनरल पी एफ सी देता है लोन देने के लिए अलग अलग के लिए अलग अलग अलग अलग है ये आल राइट अब सर अगर हम बात करे जो ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स होते हैं तो इनको कैसे फंडिंग मिलती है प्लस जैसे जो इंडिपेंडेंट अगर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट्स हैं तो क्या इनको भी फंडिंग मिल सकती है। हाँ बिलकुल है इसमें भी 12 से पंद्रह साल तक के लिए मैग्जिम लोन मिल सकता है और 70 परसेंट तक फंडिंग होती है अगर प्रोजेक्ट का किसी की 50 करोड़ है तो 35 करोड़ रूपए तक का 30 से डिस्काउंट के बीच पी एफ सी सी लोन इसमें मिल सकता है। और आजकल जो है ट्रांसमिशन में भी गवर्नमेंट प्राइवेट प्लेयर्स आ रहे हैं तो गवर्नमेंट उनको भी सपोर्ट कर इंडिपेंडेंट फंडिंग भी है है है बिल्कुल ऑल राइट ओके सर हम थोड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स की बात करते हैं क्योंकि जैसा की आपको पता है कि रिन्यूएबल एनर्जी जो है जो सस्टेनेबल डेवलप आजकल के टाइम में बहुत इम्पोर्टेंट है सी क्लाइमिटेडबिल्कुल फेक्टर्स और जितने भी ऑन गोइंग पॉलिटिक्स है जियो पॉलिटिकल इसको लेकर भी जो रिन्यूएबल सेक्टर है टॉक अबाउट सोलर या हमारा हाइड्रो हो गया या फिर हमारी विंड एनर्जी हो गई तो क्या इनके लिए भी कोई स्पेशल प्रोविजन है। और अगर है तो जो एप्लीकेशन प्रोसेस है कैसे रहते है ऑनलाइन कर सकते हैं ऑफलाइन है प्लीज बताइए है इसमें आधार विंड से रिलेटेड हो या पॉवर से रिलेटेड कोई भी सेलर कुछ भी हो तो उसके लिए ऑनलाइन एप्लीकेशन का पूरा ट प्रोसेस है कोई भी बोर्ड जो लोन लेना चाहता है हाँ जी वो ऑनलाइन इनकी एप्लीकेशन को पूरा अच्छा ऑनलाइन है एलेबल है ऑबिल्शलअबसिरएक टॉम आता है विच इस आर एन एम रेनुएशनएनमॉडेनाइजेशन जी ही तो ये जो आर एन एम प्रोजेक्ट्स हैं इनको पी एफ सी कैसे फंड करती है। देखिये कोई माली पुराना प्रोजेक्ट चल रहा है अब उनको लगता है कि कमेंट पुराने हो गए हैं उनको रेनोवेशन की जरुरत है या उनको मॉरडनाइजेशन की जरुरत है तो उस केस में भी प्रोजेक्ट कॉस्ट का 70 परसेंट तक पी एफ सी फण्ड कर सकता है। अब सिर 2 टम्स आती हैं वन इस फण्डिंग लिमिट और दूसरी है डेट इक्विटी रेश्यो जी जो प्लीज इनको थोड़ा इनके जो कॉन्सेप्ट है दोनो के थोड़ा डिटेल में समझा है। देखिये जो फंडिंग है जो फंड वे फैसिलिटीज हैं वो 2 कैटेगरी में हो सकती है 1 तो लॉन्ग टर्म फंडिंग हो सकती है 1 शॉर्ट टर्म फंडिंग हो सकती है लॉन्ग टर्म में टन और पंद्रह 20 साल तक का होता है और जो शॉर्ट टर्म फंडिंग होती है वो अगर कई बार गैप आ जाता है की डिले हो रहा है हमारे डिस्काउंट से पैसा नहीं आ रहा है लेट आ रहा है तो वो टेम्परेरी फंडिंग भी पी एफ सी कर सकती है। तो ये होता है इसमें डेट क्यूटी रेशो सेवेंटी थरटी का रहता है जनरली अब सिर जो अगर हम बात करें इसमें इंटरेस्ट रेट स्ट्रक्चर की वो कैसा रहता है। कैसे काम करता है प्लीज थोड़ा बताइए और कोर जो टर्म पी एफ सी के रिकार्ड्स पर सुनने में आता है, व इस कैटेगराइजेशन मैकेनिज्म। यह क्या है प्लीज यह भी समझाइए देखिये। इसमें जो इंट्रेस्ट रेट है वो कस्टमर की रेटिंग पर डिपेंड करेगा। अगर रेटिंग ब्रेकेट में है तो ऑबवियसली रेट कम होगा। और अगर मान लो रेटिंग कम है मतलब ट्रिपल बी वाले ब्रैकेट में हैं तो ऑबवियसली इंटरेस्ट रेट थोड़ा सा ज्यादा रहता है। ओके मतलब ये बेसिकली प्रमोटर या स्पोंसर रेटिंग पर डिपेंड करेगा, स्टेंट पर डिपेंड करेगा और पी पी ए जो है वो किसके साथ है, गवर्नमेंट के साथ है त ऑवियसली उसमे थोड़ा सा रिस्क फेक्टर कम है। अगर किसी कॉरपोरेट के साथ है, प्राइवेट के साथ है तो उस में रिस्क ज्यादा रिस्क ज्यादा है। ऑल राइट। अब सर। अगर हम बात करें ट्रिपल ए डबल ए कैटेगरी की। जी। तो इनमे जो एक्चवल फर्क पड़ता है वो कितना पड़ता है, क्या रहता है। इंटरेस्ट रेट पर प्लीज बताइए देखिये। इसमें लगभग 1 से डेढ़ परसेंट का इंटरेस्ट रेट का फर्क रहता है। के की 1 कैटेगरी वाले बरवर ऐसे कंपैरटटअगरहमकरते है तो ट्रिपल रेटेड कंपनी के लिए तो 1 से डेढ़ परसेंट का डिफ्रेंस रहेगा। ओके मतलब अराउंड ऑन ऑन पॉइंट। अब सिर जो प्राइवेट सेक्टर हैं, जो पी एफ सी से फंडिंग ले रहे हैं, जो प्राइवेट सेक्टर के लोन्स हैं। इनमें सिक्योरिटी या कोलैटरल रिक्वायरमेंट क्या होती है, मतलब होती है, नहीं होती है, अगर होती है। तो क्या रिक्वायरम देखिये यही 1 यू एस पी हम कह सकते हैं पी एस सी के साथ में ये लोगों को हार्ड कोल कोलेटरल सिक्यूरिटी की जनरली रिक्वायरमेंट नहीं होती। ये जो प्रोजेक्ट की एसेट्स हैं उन्हीं को हाइप्रोटिगेट करते हैं। इसके अलावा जो प्रमोटर्स हैं या स्पोंसर्स है उनकी अपनी पर्सनल गारंटी लेते हैं। इसके बाद जो कैश फ्लो है प्रोजेक्ट के उसका असाइनमेंट अपने फेवर में कराते हैं। एस्क्रो एकाउंट उनका खोला जाता है। और फिर अगर जरुरत पड़ी त वो जो शेयर होल्डिंग होती है उस पर भी अपना लियर मार कर देते हैं। सो दैट की पूरा प्रोजेक्ट सेफ रहता है, सिक्योर रहता है तो ये जनरली रिक्वायरमेंट सी रहती है। मतलब बहुत बेसिक रिक्वायरमेंट है। अब अगर हम बात करें जो लोन टेन्योर है वो कितना रहता है। मोरेटोरियम पीरियड जो है वो कितना रहता है। प्लीज हमारी ऑडियंस हो। इस तरह के प्रोजेक्ट में मोरिटोरियम ऑबवियसली होता ही है। जी। तो मतलब 1 साल 2 साल जितना प्रोजेक्ट। इम्प्लीमेंटेशन में लगेगा टाइम और उसके बाद भी और 6 महीने का टाइम दिया जा सकता है। टेनोर डिपेंड करता है लाइफ ऑफ द प्रोजेक्ट। अगर माली पीपीए किसी का 25 साल का है तो 20 साल तक का लोन जनरली दे देते है। अगर अगर माली पी पी ए 20 साल का है तो पंद्रह साल तक के लिए लोन मिलेगा। यह मतलब जो प्रोजेक्ट का ड्यूरेशन है, दीरेसनोकाडिपेंड करता है टी फाइव परसेंट और प्रोजेक्ट का जो या जो एग्रीमेंट है उसका जो लाइफ साइकिल है उसका एटी फाइव। अब सर अगर हम री पेमेंट की बात करें तो जो री पेमेंट दिल है पूरा वो कितना रहता है बुरा टेन कितना रहता है प्लस अगर कोई प्री पेमेंट कर रहे हैं तो क्या उसकी कोई पेनल्टी है। ह हाँ अगर कोई माल प्रीपेन करता है तो जनरली ये क्लॉज होता है 1 परसेंट 2 पर्सेंट तक का फोरक्लोजर चार्ज लग सकता है अगर कोई पी एफ सी सी लोन लेता है सर अब जैसे कोई भी जब हम डॉक्यूमेंटेशन की तरफ बढ़ते हैं तो डॉक्यूमेंटेशन में 1 टर्म आता है व इस यूनिफाइड एप्लिकेशन फॉर्म जी तो मतलब ये हमारी ऑडियंस को बताए की जो यूनिफाइड एप्लीकेशन फॉर्म है आखिर क्या है और मतलब मैंने सुना इसको स्टेप बाई स्टेप जो है हमें सबमिट करना पड़ता है जी ये क्यूँ इतना इम्पोर्टेंट है और क्या प्रोसेस है। प्लीज बताइए देखिये पहले क्या था कि जो एप्लीकेशन फॉर्म था वो अलग अलग था मालिक को सोलर में प्रोजेक्ट है कोई सोलर उसकी अलग एप्लीकेशन थी, हाइड्रो में था तो उसकी अलग एप्लीकेशन थी। बिड में है तो अलग एप्लीकेशन को उससे क्या होता बोर को बड़ी दिक्कत आती तो उसकी जगह उन्होंने 1 क कॉमन एप्लिकेशन फॉर्म बना दिया है जिसमे किसी भी सेक्टर की आपकी रवाेंटहवपूरीएक जगह सी हो जाएगी ओके मतलब आप किसी भी सेक्टर के के लिए हो तो फॉर्म 1 ही राइट। अब अगर हम बात करे यहाँ पर के वाई सी रिक्वारमेंटकी क्या क्या सी रिक्वार्मेंटस होते है कैसे फुलफिल करना होता है प्लीज बताइए नहीं यह डिपेंड करता है एल एल पी है या कोई प्राइवेट लिमिट कंपनी है कंपनी है उनके जो डायरेक्टर प्रमोटर के उनके अपने आधार पैन की रिक्वायरमेंट होगी उसी तरह से जीएसटी रजिस्ट्रेशन है उसके मेंबर में आर्टिकल है कंपनी का उस सबके रिक्वायरमेंट होगी तो जनरल के चीज होती है जो बोरवर्केरिक्वायरमेंट होती है मतलब डेपेंड्स टाइप ऑफ़ कंपनी हम बात करे अलग अलग टाइप की, कंपनी के लिए अलग अलग आपकी रिक्वायरमेंट रहेंगे के अगर हम पी एफ सी फंडिंग के बारे में बात करते हैं तो 2 टोन बहुत सुनने में आती है स एल आई पी ए तो ये दोनों क्या हैं और जो इंस्पेक्शन प्रोसेस है इनका कैसे रहता है प्लीज बताइए एल आई का मतलब होता है लेंडर्स इंडेपेंडेंट इंजीनियर और पी एम ए का मतलब होता है प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी ये दोनो पीएफसी के लिए कार्य करते हैं और प्रोजेक्ट को इम्प्लीमेंटेशन न लेवल तक और ईवन उसके बाद भी मॉनिटरिंग करने में पीएफसी की हेल्प करते है टैमडूटाइमसाइड विजिट करते है अपनी रिपोर्ट टाइम हर महीने सब्मिट करते हैं प्रोग्रेस प्रोजेक्ट क्या है वो सब्मिट करते रहते है जिससे टाइम ली रिपोर्टिंग पी एफ सी को हो पाती है। अब सिर जैसे आपने मॉनिटरिंग की बात करे तो यहाँ पर 1 कम आता है प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग मॉड्यूल यह क्या होता है और कैसे काम करते हैं। प्लीज एक्सप्र ऐक्चवली क्या है की ऑनलाइन प्लेटफार्म है यह पी एफ सी का यहाँ पर जो एल आई है और जो पीएम जो एजेंसी है जो हमने पहले बात करे वो अपनी टाइम रीटाइम रिपोर्ट और प्रोग्रेस और द प्रोजेक्ट समिट करते रहते है जिससे रियल टाइम ट्रैकिंग प्रोजेक्ट पॉसिबल हो जाती है। ओके मतलब यह बेसिकली जो है मॉनिटरिंग करने के है पूरी प्रोजेक्ट की ज्या अपडेट है का बिल्कुल ऑल राइट। अब सिर ट्वेंटी ट्वेंटी में 1 रोल आया था। विच व लेट पेमेंट सरचार्ज जी जी तो ये क्या है प्लीज बताइए और जो प्राइवेट सेक्टर है स्पेशली उसपर इसका क्या इम्पैक्ट पड़ता है। क्योंकि मैंने सुना था कि प्राइवेट सेक्टर पर इसका थोड़ा इम्पैक्ट पर जी है। जी ये जो सरचार्ज है। प्लीज बताइए देखिये पहले क्या दिक्कत थी कि जो डिस्कॉम है वो टाइम ली पेमेन्ट नहीं कर देते ह जो प्राइवेट कंपनी थी जो उनको इलेक्ट सम्मिट करे जिससे डिफॉल्ट होते थे बोरर्स को भी मतलब प्रॉब्लम होती थी और जो लैंडर है उसको भी प्रॉब्लम होती तो गवर्नमेंट न्यू रूल लेकर आइए। अगर आपने डिस्कॉम ने टाइम ली पेमेन्ट नहीं किया तो उसको पेनाल्टी चार्ज के रूप में एडिशनल देनी पड़ेगी जिससे आप पेमेंट स्मूद हो गया है। जिससे जो बारवर है उ उसको टाइम ली लैंडर को पेमेंट करने में आसानी वगैरह कम हो गया। ओके राइट सर पी एफ सी की 1 शॉर्ट टन लोन फैसिलिटी भी है यह क्या है और कब और कैसे लेना चाहिए प्लीज यह भी बताइए देखिये जब कभी कोई बोर का लोन चल रहा है उसको टेम्परेरी करें आ गया, कोई क्रास आ गयी हो गई। डिस्क पेमेन्ट टाइम नहीं रहा है प्रोजेक्ट को चलाना है जो कोस्टर तो इस केस में पी एफ सी जैसे ऑर्गेनाइजेशन शॉर्ट तम लोन भी दे देते हैं। जिससे उनकी टाइमली जो शॉर्ट तम जो रिक्वायरमेंट है वो पूरी होती जाएगी। ओके मतलब ये केवल शॉर्ट टम में लोन कोई भी रिक्वायरमेंट की जो है पूरी करने के लिए सर आपने स्टार्टिंग में जो है डिस्कस करीत नॉन फंड बेस प्रोडक्ट्स भी जो है पी एफ सी ओ देती है तो प्राइवेट काम है जैसे लेटर कम बैक गारंटी। तो ये क्या है थोडा डिटेल में एक्सप्लेन करिए प्लीज बिलकुल 1 लेटर ऑफ कंफर्ट बेसिकली क्या होता है पी ए सी इशू करती है जिसको भी उसका रिक्वायरमेंट होती है कि भई इस बार ने हमसे लोन लिया है या 1 कमिटमेंट है कि हम इनको लोन देंगे सो प्रोजेक्ट जो आगे बढ़ पाए। ऐसे ही बैंक गारंटी रिक्वायरमेंट जब होती है जब कोई इक्यूमेंट सप्लायर जो है कोई कमेंट उनके लिए बना रहा है या सप्लाई कर रहा है तो वो 1 शॉर्ट ऑफ गारंटी ले लेता है तो ये भी पी एफ सी प्रोवाइड करती है। तीसरी डिफर्ड पेमेंट गारंटी भी देती है पी एफ सी। अगर मान ली 3 साल 5 साल डक्यूमेंट का यह प्रोजेक्ट की पेमेंट करनी है तो उसकी गारंटी भी पी एफ सी से लेकर सप्लायर को दी जा सकती है। मतलब ये थ्री टाइप्स के जो है हमारे नॉन फंड बेस प्रोडक्ट पर जो पी एफ सी देते है प्राइवेट कंपनी को तो सर हमने लगभग सब कुछ कम्पलीट करा है। आज पी एफ सी से रिलेटेड की। पी एफ सी कैसे कैसे प्राइवेट सेक्टर को फंडिंग करने में हेल्प करता है, कआकेइनकेथ्रीमेजर प्रोडक्ट्स हैं प्राइवेट सेक्टर अपने सब डिटेल में एक्सप्लेन करा। तो अब हम बढ़ते हैं हमारी नेक्ट सेक ें की ओर, व इस रपट कुछ क्वेशन पूछेंगे और आपको शॉर्ट वोड्समेआंसरकरना टार्ट करें रैपिडफायर ओके। तो सबसे पहला क्वेशन पी एफ सी का फुल फार्म क्या है, पॉवर फाइनेंस, कॉरपोरेशन, पीएफसी का हेड क्वार्टर, कहा पर डेली पी एफ सी, किस मिनिस्ट्री के अन्दर मिनिट, पॉवर, पी एफ सी को महारत्न, स्टेटस, कब मिला, ट्वेंटी, ट्वेंटी, वन पी एफ सी की होल्ली, ओ सब्सिडी कौनसी है, आर सी मंथली जो री पेमेंट है उसकी स्टैंडर ड्यू डेट क्या है, फिफ्टीन सबसे हाईएस्ट क्रेडिट रेटिंग, कैटेगरी, कौन सी है, ट्रिपल माइनस और ट्रिपल ले को लोस मिलता है। ओके सिर। तो यही हमारा रैपिडफायर राउंड था हमने ऑलमोस्ट सब कुछ जो डिस्कशन था का शार्ट वर्ड्स में भी आपने काफी क्रिस्प आंसर दिए है। आज तो क्वेशन तो आज का हमारा पॉडकास्ट यही था वी हैव कंप्लीटेड डिस्कशन अराउंड पी एफ सी, यह बहुत ही इम्पोर्टेंट टॉपिक था और हम आयेंगे 1 और नए टॉपिक के साथ अगले पोडकास्ट में थैंक यू, फॉर कमिंग, थैंक यू, थैंक यू। तो दोस्तों आज हमने क्या क्या सीखा चलिए क्विकली रिकाब करते हैं, पी एफ सी इंडिया क्या है और कैसे काम करती है? पॉवर सेक्टर फाइनेंसिंग में पी एफ सी की क्या भूमिका है, प्राइवेट सेक्टर बिजनेस को कौन कौन से लोन्स मिलते हैं, रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए क्या फंडिंग, अपॉर्चुनिटीज हैं, सोलर विंड और इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कैसे मिलता है, प्रोजेक्ट फाइनेंस, वर्सेस, वर्किंग कैपिटल, फंडिंग डिफ्रेंस, ऑन्टरप्रनि, स्मार्ट, फंडिंग स्ट्रैटेजी से बिजनेस कैसे स्केल कर सकते हैं। और दोस्तों आज का ये एपिसोड हर ऑनट्रप्रनिएमएसमी ओनर, रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपर इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी, सी ए सी, एफ ओ और फाइनेंस प्रोफेशनल के लिए 1 प्रैक्टिकल फाइनल मास्टर क्लास साबित होने वाला है। अगर आपको चाहिए प्रोजेक्ट फाइनेंस, असिस्टेंस फ्रीनीएबलएnजी, फंडिंग, सोलर, प्रोजेक्ट, लोन, सपोर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस, एडवाइस फ्री, डेट्स ंजिकेशन, वर्किंग कैपिटल, प्लानिंग, डी पी आर एंड फाइनेंशियल, मॉडलिंग सपोर्ट, पी एफ सी, आर ए सी, बैंक लोन गाइडेंस। तो विजिट कीजिए फाइनेंस व कम। जहां एक्सपीरियंस चार्टेड, अकाउंटेंट, प्रोजेक्ट, फाइनेंस, एक्सपोर्ट्स और बैंकिंग प्रोफेशनल, बिजनेस, को, एन, टू, एन फंडिंग और स्ट्रैटेजिक फाइनेंशियल सपोर्ट प्रोवाइड करते हैं। और दोस्तों फाइनेंसिय प्लैटफॉर्म के साथ जुड़े हैं थरटीन हंड्रेड प्लस, इंचुेटर्स सिक्टीन, हंड्रेड प्लस, ऑल्टिनेटिव इनवेस्टमेंट फंड, जिससे स्टार्ट अप्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजनेस और स को फंडिंग और ग्रोथ पॉर्चुनिटीज मिलती है। call whats in six, जीरो, जीरो टू, जीरो टू और अगर आप चाहते हैं सीए विकास जन से एक्सक्लूसिव प्रैक्टिकल गाइडेंस, प्रोजेक्ट, फाइनेंस सपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग कंसल्टेशन तो फाइनेंस व प्लेटफार्म जरूर विजिट करिए। अगर आपको एपिसोड वैल्युएबल लगा तो लाइक, बटन जरूर दबाए, चैनल को सबस्क्राइब कीजिए और बैल आइकन जरूर प्रेस करिए। इस एपिसोड को अपने ऑंट्रप्रिनिबिजनेस ओनर और फाइनेंस प्रोफेशनल दोस्तों के साथ शेयर कीजिए और कमेंट में लिखिए आपका। सबसे बड़ा टेक वे क्या था और कमेंट में जरूर लिखे पी एफ सी पॉवर। अगर आप अपने बिजनेस को नेक्स्ट लेवल तक ले जाने के लिए रेडी हैं। दोस्तों हमारा मिशन है स्मार्ट फाइनल्स कॉलेज को टेन मिलियन ऑंटरपरनिास तक पहुँचाना। और ये तभी पॉसिबल है जब आप सपोर्ट करेंगे तो मिलते हैं अगले एपिसोड में 1 और फुल गेस्ट और गेम चेंजिंग, फाइनल्स टॉपिक और बिजनेस ग्रोथ की नई स्ट्रैटेजीज के साथ, तब तक के लिए keep लॉनिंग कीप ग्रोइंग की बिल्डिंग पॉवरफुल बुसनसज आन की पावरिंग इंडियाज ग्रोथ।