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Ed Chief On Money Laundering Black Money Raid Hawala Bribe Karnal Singh Raj Shamani

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TITLE: ED Chief On Money Laundering, Black Money, Raid, Hawala & Bribe - Karnal Singh | FO379 Raj Shamani CHANNEL: Raj Shamani DATE: 2025-07-10 ---TRANSCRIPT--- कोई पॉलिटिशन अगर आप उनके प्रेशर में नही रहे तो कुछ कर नहीं सकता है। आप 1 मिनिस्टर साहब का फ़ोन है मेरे पास ही से की तो मेरी पॉवर नहीं जानते, सेक्रेटरी बना 2 तो जनरल सेक्रेटरी बन जाए तब भी मेरे पास भेजना मेक्सिमम क्या होगा? ट्रांसफर हवाला इतना कॉमन लोगों को पता है कहाँ पर होता है, कैसे होता है? तो फिर पकड़ दिल्ली, ऐसी कोई बम्बई भेज रहा है तो ये कोई वॉयलेशन नहीं है, ये ऑफेंस करनैल सिंह ये इडी के 1 चीफ है। थर्टी थाउजन्ड करोड़ रूपीज, ब्लैक मनी इनके अंडर रिकवर हुआ। इस एपिसोड में हम उनसे जानेंगे हवाला एंड मनी लॉन्डरिंग में डिफरेंस क्या होता है, फ्रॉड करने के बाद सब के क्यों भाग जाते हैं। स्विस बैंक का सिस्टम क्या है, रेड मनी और पिंक मानी क्या होता है। क्योंकि ब्लैक मनी वाइट मनी तो हमें पता है सबसे कॉमन तरीका कौन सा है जिससे लोग लोडिंग करते है। मिनिस्टर साहब ने कंपनी बनाई उसके शेयर पड़े हाई रेट में भेज दिए। 10 रुपए का शेयर, 25 हजार रूपए का शेयर वापस खरीद लि है। तो शेयर भी आपके वापिस आ गए। वैसे भी आपके पकड़ा पकड़े गए। जेल में भी गए थे। कौन है बाटला हाउस जी क्या है? वो केस आज तक बातें चलती है। कुछ पॉलिटिशन थे उसमें और कुछ मीडिया के लोग भी थे। देवर क्रिएटिंग कंट्रोवर्सी की मुस्लिम को टार्गेट कर रहे हैं। फासनकाउंटरहैससअकाउंट का लॉजिक क्या है? दे विल नोट डिस्क्लोज टू एनीबडी नाम से नहीं होता था, अकाउंट से होता था। आदमी मर गया तो उसके पैसे भी गए। एडीजी की सैलरी कितनी होती है, किसी ने आपको अप्रोच किया ब्राइट करने के लिए। थर्टी थ्री थाउजंड। करोड़ से भी ज्यादा रिकवर हुए, वैट हैप्पनस दैट। मनी आगे बढ़ने से पहले इस चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिये ताकि हम आपके लिए इसी तरह से और इनसाइटफुल और बेहतर पोडकास्ट बनाते रहे। एंड इस पूरे शो का ऑडियो क्सपीरियंसपअवेलेबल है जहाँ पर आप हमें फॉलो कर सकते है। enjoy the so, अगर कोई poweful जस्ट bigs, power, क्या वो कुछ भी करके can he she get a way सी ये पॉसिबल नहीं है। small crime, im talk you not the big wins। मैं आपको 1 एग्जांपल देता हूँ। जब मैं नॉर्दन रीजन में ज्वाइंट सीपी रेंज में लगा तो कुछ लोग मेरे पास आये जो सीमेंट की इंडस्ट्रीज है। उनके लोग आये कि जी मंगोलपुरी में हमारे ट्रक रोकते है। मंगोलपुरी में से था और वह सीमेंट के कट्टों को ले कर उसमे थोड़ा सिमेंट निकाल लेते और फिर उसकी जो नकली सीमेंट है। थोड़ा सा मिला दिया, बाकी नकली करके बेच दे मार्केट में बेचते हैं। सो मैंने इमिजेटली सर्वे कराया बिल्कुल बंद करा दिया। वो चीज। उसके बाद मेरे पास फोन आने शुरू हुए लोगों के तो मैंने कभी तो सीमेंट है, गलत सिमेंट बन रहा है तो आपके घर में लगेगा आपका, घर टूटेगा। तो भाई शुडआईपरमिटफिर मेरी जो पब्लिक मीटिंग होती है उस में 1 आदमी आया। वन ऑफ द आदमी था जो जिसकी फैक्ट्री थी। पहले अच्छा सही चीज की गलत चीज गलत चीज हे जी, आप ये नहीं करने दे रहे है। आप मन की फैक्ट्री तो नहीं लगेगी, आप नकली सीमेंट बनाते हैं तो पॉसिबल नहीं है। तो एक्शन लूंगा आप। तो 1 दिन वो आ गया 1 कार ले के विजिटर्स कार्ड ले गए और सम पॉलिटिकल पार्टी जनरल सेक्रेटरी ऑफ पॉलिटिकल पार्टी इन पॉवर के from the सेंटर, yes to did not connect the to names। सो ई काल हेम शुड प्लीस गो आउट सो वन डे 1 मिनिस्टर साहब का फोन आया मेरे पास की मैं इस आदमी को भेज रहा हूँ, जस्ट टेक टुक द नेम तो मैंने टाइम दे दिया, आई डिड नोट रिलाइज सेम पीपलके तो सर मैं सुन लूंगा देखता हूँ क्या प्रॉब्लम है? नहीं नहीं प्रॉब्लम आपको कुछ समझ नहीं आ रहा है मैंने की मुझे क्या समझ नहीं आ रहा है कहना इनकी सीमेंट की फैक्ट्री है आप लगने नहीं दे रहे हैं। तो मैंने फिर मैंने कहा मैंने यह नाम है न इनका है मैंने कि ये अपने आप को 1 कार्ड लेकर आया था या अपने आप को आपकी पार्टी का जनरल सेक्रेटरी उस कार्ड पर लिखा हुआ था ही सेट की तो मेरी पॉवर नहीं जानते, जिसको चाहे जनरल सेक्रेटरी बना। 2 तो मैंने का सिर जब जनरल सेक्रेटरी बन जाए तब भी मेरे पास भेजना। उसके बाद वो खत्म हो गया, मेरे पास कभी आया नहीं मेटर एंड हो गया। तो क्वेश्चन है कि आप डील कैसे करते हो लोगों को आपको अपना काम करना है, जो राइट है वो करना है, रोग के लिए झुकना नहीं है। कोई आपको फोर्स नहीं कर सकता। जो पॉलिटिशंस आपका कुछ बिगाड़ नहीं सकते। जैसे मूवीज में देखते हो या रियल लाइफ, इसे पॉसिबिलिटी बहुत सारी है। बट रियल लाइफ इंसिडेंट भी यू ही न की ट्रांसफर हो जाता है। कभी आदिवासी एरिया में ट्रांसफर करते, ते हैं में कर देते हैं। रांसफरहोगा क्या नुकसान होगा, नक्सलाइट एरिया में ट्रांसफर कर दिया है वह और अच्छा काम करेंगे। सी डिपेंड करता है कि वह आपका इंटेंशन क्या है। बट कोई पॉलिटिशन। अगर आप आपका सही काम कर रहे और उनके प्रेशर में दब नहीं रहे हो तो कुछ कर नहीं सकता है। आपका मैक्सिमम क्या होगा ट्रांसफर इससे ज्यादा कोई कुछ क्या कर लेगा हटवा देगा ये सब नहीं, उससे क्या हो गया। अगर हट गया तो क्या फर्क पड़ जाएगा, नौकरी चली जाएगी, नौकरी दी जाती है, आसान नहीं है नौकरी जाना। क्योंकि अगर आप सही काम कर रहे तो लोग रिकॉर्गनाइज करते हैं। आपको इतनी इजिली, कोई पॉलिटिशन नहीं। मेरा डीसीपी था, बहुत पुरानी बात है। डीसीपी नॉर्थ वेस्ट था। तो 1 मंत्री ने कुछ लोग भेजे कि मेरे मेरे लोग हैं, इनको सुन लेना दे। वर बेसिकली लैंड ग्रैबर। मैंने कहा कि आप जाइए नो हeल्pकनबीगिवनसो दैट। मिनिस्टर गॉट अपसेट विद मी आर्गूमेंट हुआ, मैंने उसकी नहीं सुनी ही ट्राइ टू गैट मी ट्रांसफर्ड। what i was in successful, because a home minister union home minister himself through somebody found out, what happen so nothing happen so it is not that, because somebody get get anvide with you things will go, wrong not nessesary see the reputation is very very important, the officer doesnt have good reputation, then it becomes easier। अदरवाइज पॉलिटिशंस थिंक। अबाउट स्ट्रॉंग रेप्रिटेशन वाले कुछ हो नही सकता, नहीं करते हैं, जा ट्रांसफर कर देंगे इससे ज्यादा क्या करेंगे, वैसे आई हैव तो से हमने पॉडकास्ट बात करते थे, कूरियासिटीमें स्टार्ट कर दिया। बट थैंक यू सो मच, फॉर डूइंग दिस। क्यूंकी ये ऑनर है कि मैं आपके साथ बैठा हूँ यू र डेकोरेटेड आई पी एस ऑफिसर 1 डी चीफ मतलब इस रली बिग ऑनर। क्योंकि अभी तो जो बातें होती हैं ईडी के बारे में और जो बातें होती हैं और आपने जो किया है आपके ड्यूरेशन में, इस इनक्रेडिबल आई वाज जस्ट रीडिंग एंड गोइंग थ्रू सोमनी थिंग सो थैंक यू सो मच, फॉर डूइंग दिस इस एन ऑनर की आपने एक्सेप्ट किया और हमसे बात करने के लिए बोला थैंक यू सो मच वेलकम कुछ सालों से ऐसे डर का माहौल हो गया है की कुछ भी होता है लोग बोलते है ईडी यह कर देगा, वो कर देगा। सबको काफी डर लगता है। 1 बेसिक लैंग्वेज में अगर कोई 16 साल का बच्चा देख रहा है तो उसको बता ईडी करता क्या है, इन्फोर्समेंट डायरेक्टर का काम क्या है ओरिजिन क्या है, क्यों ये बना और वाट इज द बेसिक रोल सी एन्फोर्समेंट डायरेक्टेड की बिगनिंग अगर देखे जो फौरन एक्चेंज है। इसके एक्ट के ऊपर जो फेरा एक्ट होता था। पहले फॉर एक्सचेंज, रेगुलेशन एक्ट, जो फोर्टी सेवन में आया, फिर अमेंडमेंट हुआ, सेवेंटी थ्री में आया, उसके बाद नाइनटी नाइन में, वो फिर चेंज हुआ फौरन एक्चेंज। मैनेजमेंट या तो बेसिक वर्क जो एयरफोर्स में डायरेक्टेड का शुरू हुआ वो एक्स के ऊपर हुआ। क्योंकि शुरू में जब देखे जब हमारा देश आजाद हुआ तो फौरन एक्सचेंज की बड़ी दिक्कत थी। हमारी कंट्री में 11 पैसे को कैसे यूज करना है, आपको सरकार से परमिशन लेनी पड़ती थी। सरकार का मतलब है कि रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया है फाइनेंस मिनिस्ट्री इन से परमिशन लेकर काम करना पड़ता था। क्योंकि इतने पैसे नहीं थे हमारे पास और इसलिए वो एक्ट आया फॉर रेगुलेशन, फॉर एक्शन, रेगुलेशन एक्ट, वो बेसिकली उसमें जो वायलेशंस थे, फॉर एक्स के वो क्रिमिनल ऑफेंस थे। जब रिफॉर्म शु हमारी इकॉनमी में नाइंटी वन में, फिर सोचा गया कि रिफॉर्म के बाद हमारी फॉरेक्स सिचुएशन इम्प्रूव होने लगे तो यह डिसाइड हुआ कि हमें रेगुलेट करने की जरुरत नहीं है। अब हमें केवल मैनेज करने की जरुरत है की इंडिया के बाहर का पैसा आना जाना। तो फिर इसको फौरन चेंज मैनेजमेंट एक्ट में तब्दील किया गया। ये जो है क्रिमिनल ऑफेंस की वजह सिविल ऑफेंस बन गया। ओके, तो 1 तो एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट जो भी इन्वेस्टिगेशन करती थी। फॉरन एक्चेंज, मैनेजमेंट एक्ट के ऊपर दिस इज वन सेकेंड जो था। जब वर्ल्ड में ये शुरू हुआ कि मनी लॉन्डरिंग इज इम्पोर्टेंट ऑफेंस बेसिकली, अगर हम इसके इसके बैक पर जाएं तो आपने इटैलियन माफिया का नाम सुना होगा। दे वर वेरी पावरफुल इटैलियन लिन माफिया सिसली में मतलब इस एक्सीडेंट तक वो चले जाते थे कि अगर किसी जज ने वारंटी शू कर दिया किसी इटैलियन माफिया को तो जज को भी मार दिया। आम टाकिंग ऑफ़ लेट सेवेंटीज एन अर्ली तो वहां पर 1 जज के मर्डर के बाद व पब्लिक हो। इन क्राई हुआ। काफी एंड देन गवर्नमेंट डिसाइडेड कम वाट में वी हैव टू इन्वेस्टिगेट दीस केसिस। उसके बाद कुछ माफिया मा से भागा भी इधरउधर आमिर अमेरिका में पहुंच गया, कहीं और पहुंच गया तो वह इन्वेस्टिगेशन शुरुआ। उन्होंने कहा कि माफिया को पकड़ना बड़ा मुश्किल है क्योंकि फुट सोल्जर एक्ट करते हैं और जो चेन है। आपने 1 भी बीच में खत्म कर दी। चेन सपोज ऑर्डर दिया ने बी को, बी ने दिया, सी को, सी ने दिया। डी को, डी ने एक्जीक्यूट किया। अब आपने बीच में से 1 को उड़ा दिया। माफिया ने बीच वाले को मार दिया। चैन खत्म हो गया तो टॉप तक पहुंचना बड़ा मुश्किल था तो इटली के जो ऑफिसर थे उन्होंने कहा नहीं हम मनी ट्रेल ढूंढेंगे तो इट इज अरली एंड मनी ट्रेल ढूंढते ढूंढते। अमेरिका भी गए। अमेरिकन पुलिस ने भी उनको को ऑपरेट किया। गवर्नमेंट ने कोआपरेट किया तो 2 ट्रायल हुए। बड़े इम्पॉर्टेंट ट्रायल 1 को बोलते हैं पिसा ट्रायल अमेरिका में और 1 को बोलते हैं मेक्सी ट्रायल इटली में एड दे र वेरी सक्सेसफुल। तो फिर यूनाइटेड नेशंस के जो जिसको हम बोलते है विना कॉन्वेंशन हुई वीना कॉनवे डिसाइड हुआ। इनीशियली इट वाज ड्रग मनी तो की ड्रग लॉट शुड नोट भी अलाउ तो यूस ड्रग मनी उनके पैसे छीन ले हैं। जो प्रोसीट क्राइम है वही छीन ले है। तो उसके ऊपर विएना कॉनवेंशन हुई। उसमें यह भी हुआ कि जो बैंकिंग सेक्टर है दे शुड कॉरपोरेट वित द इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी उनके जो सीक्रेसी लाया वो बीच में निवाले आने चाहिए। इसके बाद जो है 1 फाइनेंसियल एक्शन टास कोर्स बनी है जिसको एफटीए बोल रहे। जिसका काम था कि किस तरह से पीएमएल केसिज को डील किया जाए। क्या रूल्स से रेगुलेशंस होने चाहिए। भारत भी इसका मेंबर बना। 2000 आई थिंक 10 में पीएमएल एक्ट शुरू में केवल ये ड्रग के खिलाफ था। उसके बाद स्लोली इसमें और केस एड किए एंड नाइन इलेवन के बाद इसमें टेरिज्म को भी इनक्लूड कर दिया। तो उनकी फॉट्टी रेकमेंडेशन हैं आज की डेट में उसके ऊपर वो रूलिंग्स देते हैं कि इसमें विदेशों देशों को क्या करना चाहिए। तो इसको देखते हुए इंडिया में भी प्रिवेंशन मनी लॉन्डिंग एक्ट आया। ये 2000 5 से इम्प्लीमेंट हुआ। उस समय सोचा गया इसको किसको दें। तो इस एक्ट को जो है जो एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट है। इनको ऑपरेट करने को दिया गया तो एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट। इसके बाद 2 एक्ट्स को डील करने लगा। प्रिवेंशन मनी लॉन्डरिंग एक्ट। 9 प्रिवेंशन मनी लॉन्डरिंग एक्ट थोड़ा समझ लें क्या है। इस एक्ट में 3 शेड्यूल दिए हुए हैं। उन 3 शेड्यूलोंमें करीब ट्वेंटी नाइन एक्ट्स मेंशन है। डिफ्रेंट क्रिमिनल एक्स मेंशन हे और 159 वन फिफ्टी नाइन सेक्शन्स मेंशंड है। ओके अगर किसी आदमी ने इन इन सेक्शन्स में कोई क्राइम किया है और उस क्राइम से पैसे कमाया है। इसको हम बोलते हैं प्रोसीड सो क्राइम। अब इस प्रोसीड शो क्राइम को वाइट कैसे करें इस प्रोसेस को बोलते हैं। मनीलोनरेग इस इस मनी लॉन्डरिंग के प्रोसेस को इन्वेस्टिगेट करने के लिए एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट तो एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट उन केसिस को लेती है जहां शरूलऑफेंसहैशरुलऑफेंस मिस जो 3 शरुलोंमें केस दिए हुए हैं उनको दूसरी एजेंसी इन्वेस्टिगेट कर रही है। जैसे सीबीआई कर रही है, लोकल पुलिस कर रही है या कस्टम कर रही है, इन्वेस्टिगेट एनआईए कर रही है। सर कोई एजेंसी कर रही है और उसमें कहीं प्रोसीड्स क्राइम का कलेक्शन नजर आता है। तो एनफोर्समेंट डायरेक्टेड प्रोसीड्स क्राइम को ढूंढती है। ओके उसको अटैच करती है। साथ ही जिन लोगों ने मनी लॉन्डरिंग की है उनको अरेस्ट करती है। तो यह पीएम का काम हो गया। इसके बाद कुछ हाई प्रोफाइल लोग विदेश भागे क्राइम करके। तो 2018 में 1 नया एक्ट आया जिसको कहते हैं फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर एक्ट जो विदेश में भाग गए हैं इस एक्ट में उनकी सारी प्रॉपर्टी अटैच हो सकती है। प्रॉसिट्सऑफ क्राइम ने। दूसरी प्रॉपर्टी भी अटैच हो सकती है। तो ये एक्ट भी डील करती है। फोर्समेंट डायरेक्ट्रेट सो ये 3 एक्ट जो है फॉरन एक्सचेंज, मैनेजमेंट एक्ट, प्रिवेंशन मनी एक्ट एंड फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफ़ हंडर। इन 3 एक्ट्स के विदिन जो काम फ्रेम है वो एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट को दिया हुआ है। जो फॉर इंडिया से बाहर पैसा जाता है और बाहर से इंडिया आता है। इलीगली जो भी होता है वो ईडी इन्वेस्टिगेट करता है। इंडिया में जो लोग ब्लैक मनी कमाते हैं अलग अलग तरीकों से में भी इललीगल काम करके, यहां ट्विस्ट लीगल काम करके। लेकिन टैक्स नहीं भर के और उसको इलीगली अपने हाथ रखे अगर उसको वाइट करने की कोशिश करते हैं। दैट्स मनी लॉन्डरिंग नहीं उसको थोड़ा सा समझने की जरुरत है। मनी लॉन्डरिंग में जो शेड्यूल में दिए हुए हैं और फैंस केवल उन्ही ऑफेंस से अगर प्रोसीड्स क्राइम जनरेट होता है। ओके तो पी एम एल जाएगा फॉर एग्जाम्पल। किसी ने टैक्स पे नहीं किया ब्लैक मनी जनरेट की। लेकिन ये ऑफेंस नहीं है। अंडर पीएमएमए प्रैडिकेट ऑफेंस नहीं, शेडूल ऑफेंस नहीं है। अगर शेडूल ऑफेंस नहीं है तो पीएम ने में नहीं आएगा। अच्छा ये प्रॉब्ल टैक्स का है तो ब्लैक मनी बेसिकली टैक्स से कनेक्टेड है रैड मानी बोलते है। म क्राइम से कनेक्टेड है के पिंक मानी ड्रग से कनेक्टेड है। सो डिफ्रेंट शेड्स भी ग्रीन मनी लीगल री मानी कुछ नहीं है। जो ब्लैक मनी रेड मनी और पिंक रेड मनी। किससे रिलेटेड क्राइम से की ट्रैफिकिंग से टेरेस ड्रग से इसका रेड मनी। ड्रग वाली पिंक मनी। बोल अच्छा तो ब्लैक मनी किससे हुआ। ब्लैक मनी जनरल टैक्सेशन से टैक्स पे नहीं किया, किसी ने टैक्स अवाइड कर दिया, टैक्स पे नहीं किया। त ब्लैक मनी हो तो इ डी ब्लैक मनी भी इनवेटब्लैकमनी इन्वेस्टिगेट नहींकरती ब्लैक मनी इनकम टैक्स करती है। ओके सो ईडी का उसमें कोई जी इ डी रेड और पिंक में ज्यादा इंटरेसेडरेडनपिंक मुझे नही रेड और पिंक सो। सबसे कॉमन तरीका कौन सा है जिससे लोग यह यूजुअलली मनी लॉंडरिंग करते है। सर बहुत सारे तरीके हैं। वत्स द मोस्ट कॉमन जो देखने वाला है जो अभी हमारी कंट्री में हो रहा है। 1 तो बैंकिंग सेक्टर के थ्रू आपने प्रॉपर्टीज में लगाए पैसे या विदेश में पैसे लेके। विदेश में पैसे ले जाने के कई तरीके हैं। हवा का 1 तरीका हो गया। दूसरा तरीका है ट्रेड बेस्ट मनी लोन रिंग यानी आपने ओवर इनवाइजिंगअंडरनवाइजिंग करके विदेश में पैसे ज्यादा भेज दिए है। दूसरा तरीका विदेश में ले जाने का ये है। अगर हम इंडिया में देखें तो 1 तो प्रॉपर्टीज में दूसरे बेनामी प्रॉपर्टीज में किसी और के नाम इंडस्ट्री लगवा दी। उस तरह से लोग करते हैं। तो फिर ये लीगल हो जाता है। पैसा बाद में देखिये लीगल करने के तरीके हैं। इस इस सेंस में मैं आपको एक्जाम्पल देता हूँ। सपोज कर लो किसी के पास प्रोसीड्स क्राइम आया उसने क्या करा ये भी मैं बैंक से लोन लेता हूँ और 1 फैक्ट्री लगाता हूँ। जब बैंक से लोन लेता हूँ और 1 कोई बिजनेस शुरू करता हूँ तो बैंक से लोन लिया। बिजनेस शुरू कर। अब बिजनेस काम तो कर नहीं रहा है लेकिन आप रिवेन्यू जनरेशन कर रहे हैं। उससे जूठी इनवाइस बना दिया आपने और अपना जो वो ब्लैक का पैसा है उसके थ्रू उसमें इशूज करना शुरू कर दिया। यह तरीका वो लीगल हो गया। बिजनेस कुछ भी नहीं हो रहा है। बस पैसे आते जा रहे हैं। अकाउंट में दूसरा और लोग करते हैं। महाराष्ट्र में थे पॉलिटिकल पॉलिटिशन। उन्होंने अपनी 1 कंपनी बनाई है और अपने पैसे। फिर 1 शेल कंपनीज होती है। शैल कंपनी वो होती हैं जिनमें काम कुछ नहीं होता। केवल पैसों का ट्रांजेक्शन होता है। शेल कंपनी जरूरी नहीं है। इल्लीगल हो कुछ शेल कंपनी सपोज आपने अपनी नई कंपनी बनानी है। उस नई कंपनी से बनाने से पहले कुछ खर्चे होंगे। तो आपने 1 छोटी कंपनी बना ली। बैंक अकाउंट खोल लिया उसके नाम से। अब उसमें भी केवल कैश ट्रांजेक्शन सी होंगे। पैसे इधर से जा रहे है। उधर जा रहें। कोई काम तो हो नहीं रहा है उसमें भी। इसलिए शैल कंपनी ऐसा नहीं है। सारी शेल कंपनी इल लीगल है। बट कैलकटा में बहुत शैल कंपनी से बनती है। तो इस मिनिस्टर साहब ने कैश जो था करप्शन का कैश कैलकटा भेजा। तो वहां जिसको भेजा 304 सौ शेल कंपनीज उनमें वो कैश इंट्रड्यूस करते हैं। अब अगर आप 50 से हजार से ज्यादा कैश इंट्रड्यूस करते हैं ए वन पाइंट टाइम तो उसकी रिपोर्टिंग हो जाती है। फइनेंसियरक्शनटासफोर्स को तो आपने 45, 45 हजार रूपए डिफ्रेंट अकाउंट्स में जमा कर दिए। 304 सौ अकाउंट में, 304 सौ, 506 सौ जो भी अकाउंट्स में उससे फिर वो ट्रांजेक्शन किया। कम अकाउंट्स में भेज दिए है। उससे। फिर कंसॉलेडेटेड करते गए। अकाउंट्स में दीज आर द ट्रांजेक्शन जो इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन है तो इसमें कोई डाउट नहीं करेगा न इसे कहीं रिपोर्टिंग है। उसके बाद उसने अपनी जो कंपनी बनाई उसके शेयर बड़े हाई रेट्स में भेज दी है। 10 रुपए का शेयर, 25 हजार रुपए का बेच दिया। 1 साल बाद वो शेयर वापस खरीद लिया है, जो 25 हजार का शेयर बेचा था। 2 रूपए में वापिस खरीद लिया तो शेयर भी आपके वापिस आ गए। वैसे भी आपके वापस आ गए। सो वेरियस मैथड्स लोग उस करते हैं। मनी पकड़ा ये मिनिस्टर की नही है। ये पकड़े गए, जेल में भी गए थे। कौन है ओके? तो आपको वहाँ से महाराष्ट्र साहब को पता होगा। मैं तुम्हारा रीसेंटली गया हूँ। बट इंट्रस्टिंग ली। उसके बाद दोबारा मिनिस्टर बन गए। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता जनता को। हमने 1 नाइनटी नाइन में 1 राजन तिवारी पकड़ा था। हार्डकोर क्रिमनल ड्रग्स नहीं क्रिमनल मर्डर ओके सुपारी लेकर मर्डर करता था। बिहार में 1 मिनिस्टर का हॉस्पिटल में मर्डर किया। इन सिक्योरिटी थी उसके बावजूद मर्डर किया उसने। तो उसको हमने सीबीआई उसको ढूंढ रही थी। तो सी बी आई में जो सीनियर ऑफिसर थे, उन्होंने मेरे से कहा कि मैं उस समय क्राइम ब्रांच में था कि इसका फोन नंबर है। को पकड़ना है। तो नी बेबी कॉटन मान मिनिस्टर बना बिहार में। और ये किस्सा है नाइनटीन 2017 में उसके खिलाफ गवाई देने का कितना गैप हो जाता है। कई बार केस में दिल्ली कोर्ट में तो क्योंकि नंबर नहीं आया था कि काम आगे सीट पर बैठ गया। तो मेरे पीछे 1 वाइट कुर्ता पर जमा बैठे। 1 आदमी बैठा था। उसने कहा नमस्ते सर। मैंने कहा नमस्ते मैंने कोई बैठा होगा, जानकार होगा। फिर कहता सर आपने। मुझे फंसा दिया तो मैंने घूम कर देखा राज तिवारी बैठा तो अब सी दी। अवर सिस्टम इस सच क्योंकि दिक्कत है कि जब तक कनविक्शन न हो तब तक वो पार्टिसिपेट कर सकता है। पॉलिटिक्स में एंड लोगों को शायद फर्क नहीं पड़ता कि ये आदमी क्रमिनल है या यह आदमी अच्छा है। वोट डेट, टाइम, कंसिडरेशन कुछ और ही होते हैं और जिस वजह से बहुत से क्रिमिनल बैकग्राउंड के लोग पॉलिटिक्स में आ जाते हैं। वत्स द मोस्ट क्रिएटिव वे जहाँ पर आप ने देखा, किसी ने पैसा मनी लॉंडरिंग का मतलब सारे क्रिएटिव कह सकते अलग अलग। क्रिएटिव जादा। शौकिंग क्या लगा था आपसी ये कैसे कर सकता है। बैंकों बडौदा का केस 2 फॉर एग्जांपल 36 सौ करोड़ रूपए इंडिया से बाहर गए, पैसा गया था एडवांस अगेंस्ट इम्पोर्ट वो इम्पोर्ट हुआ नहीं कभी। तो जब उनको पता लगा हमारे 36 सौ रुपए, 36 सौ करोड़ करोड़ रुपए गायब हो गए गए है तो फिर केस हुआ। हमने भी इनवेस्टिगेशन शुरू करा। अब उसमें 13 अकाउंट खुले थे। बैंक ऑफ़ बड़ोदा में 13 अकाउंट कंपनियों के थे। जब उसको एग्जामिन किया गया तो कंपनी किसी एड्रेस पर खुली उसमें जो शेयर होल्डर्स डायरेक्टर्स बने हैं। वो जोगियों में मिले तुम से जब पूछा गया तो कहा जी, हमें 10 हजार रूपए पर मंत्र लेकर रखा गया था। उन्होंने क किराये पर ली, जगह ऑफिस बनाया। जब केवाईसी हो गया ऑफिस बंद कर दिया तो तब तक इन लोगों को 10 हजार रूपए बर्मन देते तो 1 आपका डेड लॉक। यह पैसे कहां से आये। उन अकाउंट्स को बैक ट्रैक किया गया। जब उन अकाउंट्स को बैक ट्रैक किया, कुछ लोग पता लगे यहाँ से पैसे आये। अल्टीमेटली केस क्या था केस यह था कि हमारी स्कीम में गवर्नमेंट की ड्यूटी ड्राव जिसमें अगर आप कुछ पर्टिकुलर आइटम को एक्सपोर्ट करते हो तो उसमें गवर्नमेंट आपको कंसेशन देती है, कंसशनमींसआपको पैसे वापिस देती है, कहीं किसी केस में 4 पर्सेंट है किसी केस में 8 पर्सेंट है। तो इसमें ये जो कुछ एक्सपोर्टर्स थे जो पकड़े गए इस केस में, वो वो क्या करते थे कि जैसे कोई सौ रुपए का सम्मान है उसकी इनवाइस बनवा ली 5000 रूपए के, अब वो एक्सपोर्ट कर रहे हैं। ओवरवैल्यूड एक्पोर्ट विदेश में अपनी कंपनी खोल ली अपने किसी आदमी को भेज के विदेश में वाली ये एक्सपोर्ट हुआ उसको अब वो आदमी 5000 रुपए कैसे भेजेगा इंडिया में माल तो सौ रुपये का है आपको 4900 रूपए एक्सट्रा चाहिए देश में, तो वो ये एडवांस करके यहाँ से भेजते थे, वहाँ से पैसे आ गये, आपको 5000 रुपए में मिल गया, 4 परसेंट मिल गया या 5 पर्सेंट मिल गया माल की वैल्यू बहुत सारा पैसा आपको वहाँ से आ गया। तो फिर वो ड्यूटी ड्राइव के केस में पकड़े गए जबकि शुरू में समझ नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है 1 और इंट्रस्टिंग था 1 केस है बॉम्बे का है। तो इस केस में क्या किया जो कंपनी जिसकी थी उसने लोन के लिए अप्लाई किया आई थिंक 6000 करोड़ का लोन फॉर इम्पोर्ट ऑफ डायमंड्स मेनवाल उसने दुबई में अपनी कंपनी खुलवा ली वहां यह होता है कि आपका कोई दुबई का भी आदमी साथ में होता है वहां कंपनी खुलवा ली और उनसे एडवांस भेज दिया अगेंस्ट रिपोर्ट के खुद अपनी कंपनी को छोड़ दी और यहाँ अपने जो सर्वेंट थे उनको डायरेक्ट्रेस बना दिया और ये भाग्य दुबई 6000 करोड़ 6000 करोड़ लेकर गायब और उसने किसी छोटी मोटी कंट्री की सीटें शिप भी ले ली है। प्रोसेस चल रहा उसको लाने का तो एक्सट्रेडिशन प्रोसेस बिकम्स डिफिकल्ट इतना आसान नहीं है एक्सट्रेडिशन पॉलिटिकल कम जूडिशल प्रोसेस है। will talk extrेdiशion ल दीस थिंग फेल ई डी वाला चैप्टर जी क्योंकि एक्टेशन स्वीडन से 1 बार हुआ था हमारे पास उसके ट्रेडिशन हुए लोगो के बट अगन सी एक्रेडिशन इस पॉलिटिकल प्रोसेस एंड जूडिशल प्रोसेस कम्बाइंड कैन किसी कॉमन इंसान पे ईडी कर सकती है कुछ संबंध कर सकता है ईडी सी पहले तो केस होना चाहिए अगर हम पीएमएलए की बात करे तो पहले तो 1 शरूलोफेंस होना चाहिए या कोई और एजेंसी उसके किसी क्राइम को इन्वेस्टिगेट कर रही है बिना उसके कभी रिना उसके पीएमएलए का केस नहीं बनता और दूसरा अगर किसी आदमी ने फॉरेक्स की ट्रांजेक्शन नहीं की हो तो फेमस का केस नहीं बनता तो फिर ईडी नहीं बुला सकते। ओके तो मतलब ईडी डायरेक्टली किसी कॉमन इंसान पर नहीं जा सकती अंटिल उसके ऊपर किसी और एजेंसी का केस नहीं चल ह। इतना डरते क्यों है लोग अभी ऐसा क्या ईडी के पॉवर्स क्या क्या है जिसकी वजह से ज्यादा डर है। 2 पावर हैं ईडी के जो इम्पोर्टेंट है 1 तो पॉवर ऑफ। अटेचमेंट अगर किसी ने प्रोसीट सो क्राइम कमाया वो ही चला गया तो फिर बचा क्या उसके पास क्राइम क्यों किया था उसने सेकेंड ली इसमें जो अरेस्ट है उसमें बेल मिलना बड़ा डिफिकल्ट है इसका जो सेक्शन फॉट्टी फाइव है उसमें 2 ट्विन कंडीशन जिनको बोलते हैं। पहली कंडीशन यह कि अगर किसी को बल देना है या बेल की सुनवाई करनी है तो जज को पब्लिक प्रोसिक्यूटर को अपोर्चुनिटी देनी पड़ेगी कि वो क्या कह रहा है। सुने दूसरा ये कि कोर्ट तभी बेल देगा जब वो सेटिसफाई है की प्राइम ऑफिस केस नहीं बनता तो यह बड़ा डिफिकल्ट है इसलिए इसमें होनी बड़ी डिफिकल्ट होती है। एंड अधिकतर लोग 2 साल के लोग 3 साल जेल में रहते हैं तो इससे बहुत डरते हैं कि सीधे जेल डाले एंड क्या ईडी किसी को भी अरेस्ट कर सकती है। नहीं जिसके पास जो मनी लॉंडरिंग में इनवाल् होगा उसी को अरेस्ट कर सकत हवाला इतना कॉमन है लोगों को पता है कहाँ पर होता है, कैसे होता है, क्या होता है। अलग अलग एजेंसीज बनी है जिससे लोग बात करते हैं। बहुत सारे बिजनेस मैन ओपनली बात करते हैं तो फिर ई डी पकड़ क्यों नहीं लेती। क्या हवाला रोक नहीं पाते हैं तो बताता हूँ हवाला होता क्या है? सपोज कर लो आपको दिल्ली से बम्बई पैसे भेजना है। 1 तरीका कोई आदमी यहाँ से बम्बई ले कर जाए, दूसरा तरीका आप बैंक से भेजे, बैंक से भेजने में जो कट है वो थोड़ा ज्यादा लगता है। 1 तरीका है थर्ड तरीका जो है आप किसी के पास गए जो हवाला ऑपरेट करता है और उसको आपने काफी पैसे लो और मुझे फलाने आदमी को बम्बई में डिलीवर करना है वो वहाँ बम्बई में किसी को फोन करेगा और उससे कहेगा की इतना अमाउंट मेरे पास आ गया है तुम डिलीवर कर। 2 तो हवाला में पैसे नहीं जाते। 1 जगह से दूसरी जगह केवल रेफरेंस जाता है न, ये हवाला विदिन कंट्री भी हो सकता है। अक्रॉस द कंट्री व्यू हो सकता है यह ना अगर विदिन कंट्री है तो ये हवाला की डेफिनेशन में नहीं आता। ठीक है यह समझने की जरुरत है। जी, हवाला आता है फॉरन एक्चेंज, मैनेजमेंट एक्ट में तो अगर डेल्ही से बॉम्बे गैरा कोई ऑफेंस नहीं है। यह ऑफेंस ही नहीं न। यह ऑफेंस इसलिए नहीं है कि हवाला जो ट्रांजेक्शंस है वो वायलेशन है। फॉरन एक्सचेंज, मैनेजमेंट एक्ट ओके यानि जब पैसा 1 कंट्री से दूसरी कंट्री में इस तरीके से भेजा जा रहा है। इंडिया से अमेरिका चले। तो अगर दिल्ली से कोई बम्बई भेज रहा है तो यह कोई वायलेशन नहीं है। अंडर लॉस। तो फिर ये यह क्राइम नहीं है। नहीं, यह क्राइम नहीं है। विदिन इंडिया क्राइम नहीं है। क्या बात। तो ये तो सारे लोग यही करते हैं। जो आपने सवाल पूछा कि लोग बात करते हैं तो ये समझने की जरुरत है। अगर कोई यहाँ से सपोज कर लो दुबई पैसे भेज रहा है, यहाँ से हवाला के थ्रू सपोज को ही सिंगापुर पैसे भेज रहा है। या सिंगापुर से इंडिया भेज रहा है। वो एक्चुअली वायलेशन है, वहाँ पर फौरन एक्सचेंज का इशू आता है। वो वायलेशन है एंड। अब तो हवाला की भी जरुरत नहीं भेजने की ओर इनवाइस करो। अंडर इनवाइस करो तो पैसा आपका विदेश पहुँच जायेगा। तो वो भी तरीके हैं लोगों के पास, तो ये कोई क्राइम नहीं है। अंडर डी नहीं है की किसी भी एजेंसी के अंडर और किसी में नहीं है और और किसी उसमें नहीं है। ये जो कहानियां सुनते हैं। 10 रुपए का नोट ले के आधा नोट दिखा। 2 ये कर, 2 दैट क्राइम नहीं है? नहीं नहीं इंडिया, अगर इडिया से इंडिया भेजे तो वो क्राइम नहीं है। तो कोई भी इंसान जैसे डेल्ही से बॉम्बे 5 करोड़ बेचने 10 करोड़ बेचने को भेजे और कुछ नहीं होगा उसका कोई क्राइम नहीं है। बट कौन सा पैसा भेज रहा है। सी इनकम टैक्स प्ले कर सकती है। इनकम टैक्स का रोल आ सकता है। अगर ये पैसे ब्लैक मनी के है। ओके, अगर किसी ने अपने बैंक से निकाले और किसी को दिए तब तो वो ऑफेंस भी नहीं बनाएगा। तो इसके ऊपर तो कितने सारे लूपोल्स हो सकते हैं कि अगर आपकी कंपनी है और आपने उसमें से कैश दिखाया निकाला कि आपने पंद्रह लाख रुपए निकाल के रखे, फॉर एग्जामपल, 50 लाख रूपए निकाल के रखे डेफिसिट में ही रखा है। फाइनेंशियल एंड होने से पहले और वही 50 लाख घुमा पकड़ा गए तो बोले की ये 50 लाख। तो कंपनी से यह अंगडिया सुना आपने। जो पैसे एक्च्वलीलेजाते है वो यही करते है। 1 बार बैंक से निकाल लिए पैसे। अगर लोग बताते हैं हमने अंगडी को डील नहीं करा, अगर पकड़े जाए तो कहते तो पैसे हमारे बैंक से निकाले पॉसिबिलिटी हो सकती है। बट बहुत सारी लूपोल्स भी हैं। सिस्टम में तो बड़ा लूपहोल है देन टेक्निकली और सेफ नहीं पकड़े जाते हैं। इनकम टैक्स पकड़ता है। ऐसा नहीं है। इनकम टैक्स को आप प्रूफ कर सकते हो न कि सर ये 50 लाख रूपए। तो वो देखेगा। इनकम टैक्स भी। आपने कितनी बार घूमे हो। आपने कितनी बार ट्रैवल किया है। बहुत सारी चीजें हैं ट्रैवल नहीं कर रहो। आप सिर्फ ये कर रहे हो। इंटरनली ट्रांसफर दूसरी जगह दूसरी जगह दे। वो हवाला हो गया। मैं अंगडिया की बात कर रहा हूँ जो दूसरी जगह जा रहे है। आंगडिया जब इतना बड़ा टम है, इतनी बड़ी एजेंसी हर किसी को पता है, वो को नहीं पकड़ते। फिर नहीं देखो। बहुत से जो ट्रांसफर है जरूरी नहीं है कि क्राइम हो। कुछ ट्रांसफर क्राइम हो सकते हैं। क्राइम मींस नोट क्राइम इंकम टैक्स वॉयलेशन हो सकते हैं। तो सर्टललीइंकमटैक्स एक्शन लेती है पर और जो आपने बोला ई डी में भी हवाला इंडिया से नंगा भेज दिया। जी तो बहुत लोग करते होंगे। बहुत एक्शन लेती है। अच्छा। तो यू वुड नो क्यूँ इतना ईजी ली। अगर लोगों को पता है तो फिर हो जाता है। नहीं एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट काफी एक्शन लेती है। उसमें बट स्टिल हो रहा है। बहुत हो रिये सारी एजेंसी है। बहुत सारी जो क्राइम कंट्रोल कर रही। है। लेकिन क्राइम हो रहा है। सी दीज आर थिंग्स बेसिकली दे आर कमिंग फ्रॉम दी सोच eकोनमिकफैक्टरस र कमिंग फ्रॉम द कल्चर समटाइम्स। अब दुबई से लोग केरला में पैसे भेजते हैं। जो काम कर रहे हैं हवाला के थ्रू भेजते हैं। अधिकतर। तो फिर पकड़ाते नहीं है। बहुत से पकड़े जाते हैं ब बड़े बड़े केसेस करते हैं। उसके बाद भी लूपोल्स तो हैं लोग जो एक्सप्लॉयट करते हैं। वाट इज द बिगेस्ट लुपोल। जो लोग एक्सप्लॉइट करते हैं। आज इंडिया में लूपहोल यही है कि जो लोग भाग गए। क्योंकि इंटरनेशनल कॉरपोरेशन, इज प्रॉब्लम, इंटरनेशनल कॉरपोरेशन में 1 चीज तो है कि फौरन कंट्री में इन्वेस्टिगेशन करना वह आप डायरेक्टली नहीं कर सकते। उस इन्वेस्टिगेशन के लिए आपको लेटर रोगेटरी कोर्ट के थ्रू भेजना होगा। उसको वो कंट्री कैसे डील करती है उस कंट्री पर डिपेंड करता है। फॉर एग्जाम्पल सपोज कर लो प्रोसीट सौ क्राइम सुर्जर्लैंड काए। और जो आदमी ले गया उसने बैंक से कैश निकाल लिया तो जलन से है और कैश निकाल कर किसी और अकाउंट में जमा कर दिया। अगर हम ये कहते है की इस आदमी ने किस बैंक में कैश अकाउंट जमा किया तो वहां से कोई जवाब नहीं आएगा वो कहेंगे अकाउंट नंबर बताओ जिसमें जमा किया वो आपके पास है नहीं अगर वह चीज इंडिया में की होती तो हम निकाल सकते हैं। तो जो लूप बोल आता है वो इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन का बहुत ज्यादा आता है। और हाई प्रोफाइल लोग हैं भाग जाते हैं कंट्री से नीरव मोदी केस रजिस्ट्रेशन होने से पहले भाग गया पता चल जाते है को बैंक से नेगोशिएशन चल रहा होता है। जब बैंक के देती नहीं जी आपको तो गड़बड़ सारा तो उसके बाद वह कम्प्लेन करेगी उससे पहले आप भाग गए लोग। तो फिर इनको इंडिया लाना बड़ा मुश्किल हो जाता है। एक्रेडिशन का 1 प्रोसेस है आप यहाँ से रिक्वेस्ट भेजोगे दूसरी कंट्री को वो पहले पॉलिटिकली एग्जामिन करेंगे की भाई इसको हम करें या नहीं करें दूसरा कांसेप्ट ड्यूल क्रिमिनलिटी है वो क्राइम जिसके लिए हम मंगा रहे हैं उसको वो क्राइम उस कंट्री में भी क्राइम होना चाही है। अगर उस कंट्री में वो क्राइम की डेफिनेशन में नहीं आता तो एक्सट्रेडिशन नहीं होगा। अगर वो कंट्री एग्री कर जाती है एक्ट्रेडिशनके लिए देन फिर जूडिशल प्रोसेस शुरू होता है वो कोर्ट में ले जायेंगे कीजिए हमें इसको एक्स्ट्राइड करना है इंडिया में और उसको अपॉर्चुनिटी है डिफेंड करने की। फिर वहां के हास कोट तक जाएगा और हाइएस्कोर्टभीजब कह देता है कि उसको भेजो उसके बाद भी वो कंट्री हो सकता है। न भेजे बट यू एस कर लेते हैं। इतनी आसानी से हर किसी को एक्सटेडिड वो प्रेशर बना के निकाल लेते हैं। लोगों को है यू एस प्रेशराइज कर लेता है। हम नहीं कर पाते लाखों ग्रिकडनेशनऑफवर एजेंसी नो। ये नहीं कह सकते। ओके सी यू हार तो वर्क विथ इन फ्रेम वर्क ऑफ ला। अब जो सुपर पॉवर है उनकी थोड़ी पॉवर ज्यादा हो जाती है। लोगों के उस देर मसलन बी ये तो हमको चाहिए बिल्कुल वेन यू डील वित सchाip्रोfाइल र आप जाते हो तो ये लोग ब्राइब ऑफर नहीं करते है। आपको रेपोटेशन ऑफिसर, ईवन, अदर टॉप लेवल जो 10 हजार पंद्रह हजार गुरु की कितने, एवरीबडी नोज कौन कैसा है तो ये है नहीं करते हैं। अगर किसी को पता हो ये ऑफिसर है उसको कभी अप्रोच नहीं करता है। किसी ने आपको अप्रोच किया ब्राइट करने के लिए, मुझे कभी नहीं किया आज तक इन या केस दे डोंट डीन बिक दे नो। फिर जिसकी जैसी रेपोटेशन है अगर रेपोटेशन अच्छी है तो उसको कोई अप्रोच नहीं करता है। इन योर टेन्योर थर्टी थ्री थाउजंड से भी ज्यादा थर्टी थ्री थाउजंड, करोड़ से भी ज्यादा रिकवर हुए ईडी ने कवर आज तक की ईडी की हिस्ट्री में 50 परसेंट से ज्यादा अमाउंट तो आपकी सिफ्ट टेन्योर में ही रिकवर हुआ दैट्स रिमार्केबल। अब वो 33 हजार करोड़, अब आपने रिकवर करे वो पैसे जाते। क्या है what happens दैटमनीसीइसकाजो है ये प्रॉपर्टी अटैच हो गई। जब केसिस का फाइनल होगा तो प्रॉपर्टी सरकार में वेस्ट हो जाएगी। सेंट्रल गवर्नमेंट में तो 1 इशू आया था क व रोल ऑफ विक्टिम मतलब 1 आदमी के पैसे गए। जिसने जिसके पास गए उससे अटैच कर लिए हीडी ने जब कोर्ट का डिसिन पैसे चले गए सरकार में तो विक्टिम को क्या मिला। तो फिर 1 अमेंडमेंट किया गया है पीएमएलए में जिसको सेक्शन 8 पार्ट 8 बोलते हैं कि जब कोल्ड कन्विक्शन करेगा किसी केस में तू जो विक्टिम होगा उसको भी कम्पनसेट करेगा। फिर कुछ केसेज आये जैसे बॉम्बे का था इन्वेस्टर्स प्रोटेक्शन एक्ट है वहाँ पर बॉम्बे में नव इन्वेस्टर्स प्रोटेक्शन एक्ट में जिसको महाराष्ट्र प् प्रटेक्शन और इन्वेस्टर स एक्ट बोलते हैं। प्रोविजन है कि ट्रायल के दौरान भी विक्टिम को कंपंसेट किया जा सकता है। अब 1 केस ऐसा आया जिसको महाराष्ट्र पुलिस भी इन्वेस्टिगेट कर रही थी पोंजी स्कीम का और ईडी भी इन्वेस्टिगेट कर रही थी। अब जो ईडी ने टैस्ट किए वो वापिस नहीं मिल सकते लोग कनविक्शन पर मिलेंगे और जो महाराष्ट्र पुलिस ने अटैच किए वो मिल सकते हैं। लोगों को। तो फिर 1 और अमेंडमेंट लाया गया सेक्शन 88 में 1 और अमेंडमेंट लाया कि ट्रायल के दौरान भी विक्टिम कम्पनसेट हो सकता है। तो ये पैसे या तो सरकार के पास जायेंगे या विक्टिम के पास जाएंगे। तो सरकार जो कलेक्ट करती है रेवेन्यू उसमे ये एड होता है। फिर जो सरकार अपनी स्कीम में लगाती है वहाँ वहाँ पर उस हो गए। जिस लाइक रेवेन्यू, जेनरेशन, ये वाई डू, ऑल ऑफ 10 पीपल। ये लोग सब यूके क्यों जाते हैं इंडिया सब क्राइम करके भाग के यूके चले डिशन थोड़ा डिफिकल्ट है क्यूँ वहाँ पर क्या ऐसा है हिस्ट्री 1 लोग ही वहां से एक्ट्ररा हो पाए हैं। कुछ तो होगा उधर क्यूंकि सारे इकॉनोमिक ऑफेंडर्स लिस्ट जो हाई प्रोफाइल जो ईडी जिसमें बर्ड डे वो सब यूके भाग जाते हैं। अगर आदमी को महसूस होता है ये जगह सेफ है पास्ट एक्सपीरियंस ऑफ़ अदर पीपल तो लोग वही भागते हैं। व ट्राइ टू, फाइंड, आउट आउट ऑफ़ क्यूरियोसिटी की ये लोग सब यूके इसलिए जाते है क्यूंकि यूके में यूमन राइट्स के लॉस बहुत स्ट्रोंग है। यूके एक्टर डिट नहीं करता अगर वो ये प्रूव कर दे की मेरा केस पॉलिटिकल है प्योरली फेयर ट्रायल नहीं होगा मेरे साथ। दोनो चीज प्रूफ नहीं कर पाया यह उन्होंने ये सारे इशू उठाये थे जेल के, अगेंस्ट भी इशू उठाए थे कि जेल इंडिया के कंसिव नहीं है। वो भी उठाया था उसका, का जवाब दिया गया था उसके बावजूद यूके कॉल डिसाइडेड की एस टू भी एक्ट्रेडाइटेड नीरव मोदी का क्या केस था, उसका भी सेम है क्या नीरव मोदी का केस यह था कि उसका पंजाब नेशनल बैंक में अकाउंट था। तो यहाँ से उसने लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग होती है, वो इशू कराई यहाँ बैंक से एंड इन्ही का जो बैंक का विदेश में है, वहां से उसने पैसे लिए उस लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग से न ये लेटर ऑफ़ अंडरस्टिंगजो इशू कर रही जो इंटरनेशनली पैसे का ट्रांजेक्शन हुआ। तो उस समय जब हमने चैक किया पंजाब नेशनल बैंक में करीब थर्टी डाटा बेसिस थे और वो डाटा बेसिस अनकनेक्टेड थे। बहुत सारे उसमें तो 1 होता है कोर बैंकिंग सिस्टम कोर बैंकिंग सिस्टम में जो चीज आगे वो ऊपर तक नोटिस में रहती है, सबके नोटिस में रहती है। तो ये जो लेटर ऑफ अंडरस्टैंडिंग यूज किया इसको कोर बैंकिंग सिस्टम में नहीं डाला में वो से मिला हुआ था। और पहले उन्होंने जैसे 4000 करोड़ भिजवाया फिर उसके एवरग्रीनिंग कराई 6000 करोड़़ गए, फिर 8000 करोड़ गए, पहले वापिस कर दिए, नए ले लिए। तो हुआ क्या कि जो ऑफिसर जिनकी हेल्प कर रहा था वहाँ पर आई थिंक उसका ट्रांसफर हो गया या रिटायर हो गया उसकी जगह नया ऑफिसर आ गया। उसके बाद इन्होंने अप्रोच किया तो उसने कहा ये तो गलत है तो करते आये हैं, उसने कंप्लेन कर दी। तो यहाँ से इसका केस शुरू हुआ। हू डू यू रिपोर्ट। तो आप किससे बात करते होगे? आज aneडीचीफ हमारे जो रिवेन्यू सेक्रेटरी थे ओके सो फिनांस मिनिस्टर या नहीं मिनिस्टर कहीं से भी नहीं रिवेन्यू सेक्रेटरी आप मिले हो कभी किससे प्राइम मिनिस् सबसे मिला हूँ ओके रिलेटेड टू केसिस वह यू लव अबॉउट ऑफ़ प्राइम मिनिस्टर सी सबसे बड़ी क्वालिटी है। इज वेरी गुड लिस्नर एंड यही नहीं है कि मतलब कई आदमी आप बोल रहे होते हैं, लग रहा है, सुने है नहीं सुन रहे होते। बट ऐसा नहीं है इस वेरी अटेंटिव। तो ये क्वालिटी कम लोगों में होती है। और मैंने जो पढ़ा है किसी भी लीडर की सबसे बड़ी क्वालिटी है इस लिस्टिंग कैपेसिटी। तो आई लाइक दैट की वो आप से सुनते हैं। कभी ऑर्डर नही की, आप सुन लिया। और पे ऑर्डर यही है कि अपना काम करो नोट बी ऑन देर हैव। यू दन इंटरगेशन योर सेल्फ मैनी मैनी सबसे ब्रूटल इंटिगेशन कौन सा किया आपने बिकलीदी क्वेशचन इंटरोगेशन इज नौट लाइक की आप मेंटल प्रेशर कर दोगे और कोई बता देगा आपको सी क्यूजन कम क्लीन टो यू दर स वेरी यू हर टू अंडरस्टैंड किंग कमिंग क्लीन टो यू। अगर आप उसको अपने कवेश्शंस में ये प्रूव कर देते हो कि वो झूठ बोल रहा है, then he start telling the truth given example नाइंटी सिक्स नाइनटी सेवन में दिल्ली में फोर्टी टू ब्लास्ट हुए थे, तो मई टीम वाज इन्वेस्टिगेटिंग दैट केस, तो उसमें 1 लड़का पकड़ा था, काम रन तो इनिशियली ही कनफेस, एटीन ब्लास्ट सो it was on eleमetडaऑफसरिमांड मैंन वास क्वेश्चन नहीं है, देर आर फाइल सॉफ पेपर ऑफ सीड काल डिटेल्स फ्रॉम इंडिया तो पाकिस्ताnandall that सो i told टेलिंग झूठ बोल रहे हो केतजकैसेमैनदेखे सारे रिकॉर्ड हैं, सारा चेक कर लिया तुम्हारे अलावा पाकिस्तान में अब्दुल करीम चुनाव र कोई फोन नहीं करता था तो तुम कुछ झूठ बोल रहे हो तुम्हे मालूम है बाकी ब्लास्ट किसने किए है, सकपका गया सर मेरी किसी मोलवी से बात कर तो रेंट उसने क्या सवाल पूछा मोलवी से कि अगर मैं इनको बता देता हूँ मेरे साथी कौन है तो क्या यह कुरान के हिसाब से गलत होगा तो जो तुम कर ही गलत है में आप क्या कर रहे हो लोगों को मार रहे हो तो गलत टोल्टअबाउट सारे केस साल हुए और करीब 22 मॉड्यूल आल ओवर इंडिया से पकड़े गए। so it is not a question of interrogation, always feel is an art and you have to very पेशेंट in inटrोgaशioन 1 को हम इंटरोगेट कर रहे थे i was सस्pेctटटोबीक्लोज तो दाऊद क्लोज दाऊद दाऊद एंड मतलब मैं भी था, इंटरवेशन में सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसीज के लोग भी थे, उसको एंड वो हमें हाथ में धरने दे रहा था, किसी भी चीज में मतलब सिंग आई डोंट नो अच्छा ओके देन 1 जगह वो ट्रैप हो गया कि ये झूठ बोल रहा है, देनी कoनफेस्टevरीथिंग नेपाल जा के दाऊ से जब बात करता है तो नेपाल जाता है, नेपाल से फ़ोन करता है। then gave as description of is house and everythiंgbut took almost eight cesinotsainghim anything es सी जो बहुत से लोग सोचते हैं न कि शॉर्टकट मैथड्स अपनाते हैं, देर नोट गुट, नोट यूसफुल शॉट कर, मतलब मार दिया टौर्चर डिगी कोई फायदा नहीं है, बट देते हैं थर्ड डिग्री, टार्चर और ये सब बहुत से लोग करते होंगे, पकड़े भी जाते हैं, केस भी होते हैं, पुलिसवालों के लाभ भी केस होते हैं। बट मेरा एक्सपीरियंस यह कि अगर आप प्रॉपर्ली क्वेशनिंगकरो लोगों की विद योर nolegeautthe case, then you can crack the people by just weston। क्या डिफरेंस होता है टैरेस इंटिगेशन में और इसमें the enforcmentdirेctे investigation व इस बेसिकली इन्वेस्टिगेशन ऑफ वाइट कॉलर क्राइम यहाँ पर ट्रांजेक्शन जो हैं वो बैंकिंग ट्रांजेक्शन है। मोस्टली आपको यही पता करना है कि इस ट्रांजेक्शन का परपज क्या था और वो भी कई बार पता लग जाता। आप पैसे ले गए, आपने कई चेन से पैसे ले जाके, प्रॉपर्टी खरीद ली तो यू नो इस ने प्रॉपर्टी खरीदी है। तो it is easier to ntroकatoनtoslाns, जब आप टेरिस्ट केसिस को करते हो 1, तो बहुत से जो टेरिस्ट होते हैं the र ideयoलॉजiकलवेरी स्ट्रोंग 1 टेरिस्ट एक्साइट हुआ था और शायद बैंगलोर पुलिस ले जानी थी, इन बिटवीन दिल्ली पुलिस में इंटरोगेट कर रहा था, मैं भी उसको क्वेश्चन पूछ रहा था, तो मैं उसकी ट्रेनिंग की बात कर रहा था किस किस तरह की ट्रेनिंग ने की है, उनको। 1 ट्रेनिंग होती है और फाइनल ट्रेनिंग। हाऊ टू पर स्वेड टेरेस की फाइनल ट्रेनिंग में। तो मैंने कहा कि क्या फायदा है, इसका कहता सर मैं आपको मुझे टाइम 2 आधे घंटे का मैं, आपको अपनी आइडियोलॉजी में विश्वास दिलाने लगूंगा, सुना, आपने गो होरी सुना। आधा घंटा सुनने की तुक नहीं दी। she is confidence secondly, sometimes dont tell you anything, but then you have to question। then आप उस दिन यहाँ गए थे। यह एविडेंस है बस एविडेंस bastcnicclेकशन एविडेंस बिकम वेरी वेरी इम्पोर्टेंट एंड व कलेक्शन ऑफ एविडेंस। आपको बहुत छोटे पीसी में मिलेंगे कहीं कहीं, उनको कैसे आप उसको फ्रेंड करोगे? किसी सीक्वेंस ऐसे कफर्ड करोगे दैट, बिकम वेरी इम्पॉर्टेंट कोई आपको पता हो की गिल्टी है। और फिर भी उसको छोड़ना पड़ा। क्योंकि लेकऑफ एविडेंस सी लैक ऑफ एविडेंस तो कोर्ट में होता है, पर आपको केस छूट गया या एंड में, उसको कोर्ट से हो सकता है, छोड़ दिया। कोर्ट ने। आपने केस बनाया, न्यू की किया है, उसने पॉसिबिलिटी है आई कांट से बीज कन्विक्शन रेट, कितनी है थर्टी नाइन परसेंट और समथिंग कन्विक्शन रेट तो कुछ लोग तो छूटते ही है, जैसे कभी गुस्सा है, बुरा है कि यार, ये तो मुझे पता है कि क्रिमिनल निकाल लिया तो सिस्टम है यहाँ पकड़ा जायेगा, दूसरे केस में पकड़ा जाएगा, क्रिमिनल है तो क्राइम करेगा, क्रिमिनल, करेगा कहीं और करेगा कहीं और पकड़ा जाएगा। बहुत सारी चीजें होती हैं सिस्टम में, जो है तो ऐसा नहीं होता कि 1 बार क्राइम के और फिर वो नहीं करेगा। वापस कभी नहीं, बहुत से लोग हैं, कुछ ऐसे होते हैं कि क्राइम ऑफ पैशन जिनको हम बोल सकते हैं। गुस्से में कर दिया, किसी वजह से कर दिया। तो वो क्रीम क्रिमिनल नहीं बनेंगे। 1 जो है दिनेश ठाकुर था किडना पर दिल्ली बिजनेसमैन को वो एक्टशन पैसे मांग रहा था। मैं उस समय डी सी बी था, नॉर्थ वेस्ट का ओके। तो वे सैड की भई तुम उसको बुला लो। पैसे देने के लिए तो उनका टाइप टाई अप हुआ। शोक बिहार में मार्केट में मार्केट के बराबर में मेरा ऑफिस था। तुझे उसको पकड़ने की कोशिश की तो फायरिंग होगी पुलिस। और उसके बीच में मैं ऑफिस में बैठा था। मैं निकल के मार्केट में पहुँच गया। वन द फायरिंग वाज गोइंग न ओके तो सब मार्केट पीपल पॉइंटेड मी ऑन समथिंग। तो मैंने देखा 1 आदमी भाग रहा था तो आई चेस्ट, फिर आगे जाके 1 सिपाही 1 गाड़ी ले आया, हमने गाड़ी से उसका पीछा किया, बडू गलियों में घुस गया, फिर गलियों में पीछा किया, उसको पकड़ लिया। पकड़ते ही उसने 1 कार निकाला मैं जनरलिस्ट हूं एनी वे जब उसकी तलाशी ली, रिवॉल्वर निकाली उसके पास से उसको लेय थाने में वो बंद हुआ, आम सेक केस में, उसका नाम था आफताब अंसारी। जेल से छूटने के बाद जेल में ये मिला कुछ 1 टेरिस से मिला और 1 वन टिंग टू बी टेरिस से मिला के निकलने के बाद इसने जो ऑनटिंगटूवीटेयरिस से, उसके साथ मिलकर गैंग बनाया। kidnaping फॉर रेnसमकीएंड। फिर टेरिज्म में पार्ट्सिपेट किया। इंडियन मुजाहिदीन, इन लोगों ने बनाई थी जो बाद में बाटल हाउस में एनकाउंटर हुआ। जिससे ये आफता बंसारी जो था। क्रिमनलसे टेरिज्म में टर्न कर गया जो अमेरिकन सेंटर पर अटैक हुआ था। इंडियन मुझे है। दिन नहीं कराया था, उसमें आफ्ताबिंसारी पकड़ा गया। दोबारे एक्ट्रा डाइट हुआ था सऊदी बिया से। अब उसको फांसी की सजा सुनाई गई है कैलकटा में तो मेंस पॉसिबिलिटी की कौन आदमी क्या करने लगे हैं। यू मेंशन बाटला हाउस जी क्या है। वो केस इतना ज्यादा उसके आज तक बातें चलती हैं। हुआ क्या था कि 1 ऑर्गेनाइजेशन बनी थी इंडियन मुजाहिदीन टेरिस ऑर्गेनाइजेशन। तो सबसे पहले उन्होंने ईमेल किया। जब उत्तर प्रदेश में कोर्स में ब्लास्ट हुए जस्ट जैसी ब्लास्ट हो रहे थे, उसी समय ईमेल किया अपनी ऑर्गेनाइजेशन का नाम बताया इंडियन मुजाहिदीन है। और हमारे इसी समय कोर्ट्स में ब्लास्ट हो रहे हैं। हम कर रहे हैं। और बेसिकली अगर किसी में हिम्मत हो तो हमें पकड़ के दिखा दिस। इस फर्स्ट टाइम बट। इससे पहले इन्होंने ब्लास्ट किए। सबसे पहले इन्होंने किया। आई थिंक 2000 4 में या 5 में बनारस में है जो वहाँ का हनुमान जी का टेम्पल है। उसमें ब्लास्ट किया। उन्होंने। फिर डिफ्रेंट प्लेसिस पर किए, फिर उन्होंने बंगलोर में भी कि ब्लास्ट जयपुर में जो ब्लास्ट किया इन्होंने तो इन्होंने, फिर 1 ईमेल किए। ब्लास्ट के अगले दिन उसमें क्लिप लगाइए। क्लिप में वो साइकिल थी जिसमें बम रखा हुआ था। एक्सप्लोजन होने से पहले उसमें फिर के भई हमने की है। ब्लास्ट एंड आपको कोई क्लू नहीं लगेगा। हमारा तेनु गुजरात में ब्लास्ट किया। गुजरात में 2 जगह लगाए थे अहमदाबाद में और सूरत में। सूरत में। वो बम फटे नहीं। उसका रीजन बेसिकली यह था कि प्रिंटेड सर्किट बोर्ड जो था, उसमें कैपेस्टर लगाना रह गया था। ओके। तो फॉर्चुनेटली अराउंड ट्वेंटी नाइन बम प्लांट किए थे, सूरत में, वो नहीं फटे। अहमदाबाद में वो फटे थे, जो है अहमदाबाद पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ा जो सिमी के लोग थे। लेकिन ये लॉजिस्टिक सप्लायर थे। इंडियन मुजाहिदिन के लोग कौन थे, इनको भी नहीं पता था। जिन्होंने लॉजिस्टिक दिया। तो इन्होंने यह बताया कि वो लोग 4 फ़ोनों का यूज करते थे। लेकिन वो आपस में फ़ोन करते थे। फ़ोन नंबर भी गुजरात पुलिस को मिले। गुजरात पुलिस ने सबके साथ वो नंबर शेयर किए। हमारे साथ भी शेयर किये। बम्बई पुलिस के साथ भी शेयर किए। आईबी के साथ भी शेयर किया। जब गुजरात पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो उसके बाद फिर उन्होंने 1 ईमेल किया कि आपने गलत लोग पकड़ लिए। आपके बस की नी पकड़ना एंड इंटेलिजेंस वीरो को कहा जाए। तो इग्नोरेंस वीरो है। जो भी बोल सकते थे पुलिस के बारे में, नेगेटिव में कमेंट। अब वो 4 फ़ोन जो थे, उसका, वरीबडीवदनलईजिंग तो उसमें क्या हुआ। इनमें से 1 फोन दिल्ली में भी आया था। बाटलाउसएरिएमें वो रुका था कुछ दिन बीच में और इनमें से 1 फोन पर बम्बई से काल आई थी। 1 सेकेंड की, 1 सेकंड सेकंड की नाव, 1 सेकेंड की काल का मतलब क्या है कि अगर आपके पास कॉल आए और आप अपना फ़ोन कट कर? 2 उस कॉल को रिसीव न करो। 1 तो हो गया कि बिल्कुल रिसीव न करो। तो मिस काल में आज अगर आप कट कर, 2 तो 1 सेकेंड की कॉल रिकॉर्ड होती है? ओके, तो एवरीबडी मोस्टली इग्नोर दैट तो हमारे जो इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा था, जो इसको इन्वेस्टिगेट कर रहा था ही डि नोट इग्नोर। उसने देखा कि ये आदमी कौन था, जिसने कॉल किया तो यह देखा कि आदमी बम्बई से कॉल हुई थी, गुजरात नहीं गया था, यह लखनऊ का रहने वाला था, फिर उसने देखा की इसने कहीं दिल्ली में तो किससे कॉल नहीं करता है। तो दिल्ली में 1 नंबर को इसने कॉल किया था। तो उस नंबर पर इसने काम करना शुरू कर दिया और इसकी काल द्वारा एनालाइज की गई, क्या हो सकता है क्या नहीं हो सकता। उसमें कुछ सस्पेशन लगा, मैं इस तरह की 1 कॉल थी जो वैसे तो बड़ी इनोसेंट कॉल लगती है कि मैं यहाँ पर कहीं आठों खड़ी करने की जगह नहीं है, यह काल पहले थी, 13 सितम्बर से पहले की थी। तो फिर कैसे होगा नहीं न मैं कर लूंगा इस इनोसेंट काल बट दुबारा। जब इसको एनालाइज किया तो पता लगा जिसने कहा था कि यह आटो खड़ी करने की जगह नहीं, वो उसकी लोकेशन करोलबाग थी उस समय और करोलबाग में, आटो में ब्लास्ट हुआ था। फिर इनके नंबर्स हमने चेक करने शुरू करे कि ये ब्लास्ट जब हुए गुजरात में, जयपुर में, दिल्ली में, तो यह नंबर कहां थे, ये पर्टिकुलर नंबर और इसके कनेक्टेड नंबर। तो पता लगा ये उस समय फ़ोन बंद थे, जयपुर में ब्लास्ट हुआ तो फोन बंद थे, अहमदाबाद में ब्लास्ट हुआ तो फ़ोन बंद थे, दिल्ली में ब्लास्ट हुआ तो फ़ोन बंद थे, डाउट बढ़ा बेसिकली मेनवाल 18 सितम्बर को 1 इन्फॉर्मेशन आई, थ्रू इंटेलीजेंस व्यूरो हुआ क्या कि टेरिस्ट ने 4 कार यूज की थी, 2 कार अहमदाबाद में हॉस्पिटल में लगाई थी, 2 कार सूरत में हॉस्पिटल में लगाई थी, बम के साथ उनका परपस यह था जब इंजर्ड हॉस्पिटल में आये उनके फैमिली मेंबर्स, हॉस्पिटल में, इन कार में ब्लास्ट हो जाए ताकि और लोग, इंजर्ड, तो ये कार जो है। 1 चोर ने सप्लाई की थी, जिसको बम्बई पुलिस ने पकड़ लिया। तो वो उसने बताया कि कहां सप्लाई की थी, अहमदाबाद में, वो जगह दिखाना या की कहां सप्लाई की थी। तो उसने बताया कि मुझे इतना बताया कि जो लोग बम जिन्होंने लगाए थे, वो उसी दिन जिस दिन 26 जुलाई को, 2000, 8 को अहमदाबाद में ब्लास्ट हुए थे, उसी दिन वो राजधानी से दिल्ली ट्रेन में दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। 13 लोग थे नो, दिस वाज, द इंफॉर्मेशन, जो आई बी ने दी। तो हमने सोचा कि इंस्टीटूट चैकिंग की, वहां से कितने रिजर्वेशन हुए, कितने लोग चढ़े ऑन दैट डे। हमने कहा कि यह देखते हैं दिल्ली से कितने लोगों के रिटर्न रिजर्वेशन हुए हैं। तो हमें मिल गए। 13 लोगों के रिटर्न रिजर्वेशन हुए थे दिल्ली से। लेकिन वो 13 के 13 एडरेसिजफाल्स थे। तो 1 डाउट और उस में बढ़ गया। तो जब ये इन्वेस्टिगेशन हम कर रहे थे उसी दिन 18 सितम्बर को। तो मैंने मोहन सन से पूछा मैंने कि देखो जो हमारा सस्पेक्टेड नंबर है। दिल्ली वाला। ये क्या ट्रेन का रिजर्वेशन हुआ। यह वहां था क्या रेलवे स्टेशन पर। तो निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से रिजर्वेशन हुआ था। तो देखा इसकी पोजिशन हो आ रही थी ओह गिव्स मोर इंडिकेशन। फिर 1 और इनकी कल हमने पुरानी देखी जिसमें वो लखनऊ से कोई सामान मंगवा रहा है। यह और बड़ी अजीब थी, वो कह रहा था किस चीज से ला, ट्रेन से नहीं, ट्रेन से मत लाना। बोल वो में बैठ के लाना सारी रात फ़ोन कर रहा है। उसको समान ठीक ठाक है, सामान ठीक ठाक, बट, इट वाज डाउट स्टिल। तो फिर ये डिसाइड हुआ कि लोकेशन हमने सर्च कर लिए किस जगह टीन भाटला उसे उसमें फोर्थ फ्लोर पे। इस घर में थे। यह तो डिसाइड हुआ कि वहाँ सर्च की जाए। रात को डिबेट भी हुई की रात को करना चाहिए। तो उस समय रमजान का महीना था। तो यह डिसाइड हुआ कि दिन के टाइम में सर्च करेंगे। लेकिन यह भी था कि इतना कंजस्टिड एरिया है। बाटल हाउस अगर आप गए वहां पर इन पुलिस यूनिफॉर्म या ब्लेड रूप जैकेट पहन के अगर वो वहां नहीं हुए। तो फिर आएंगे नहीं दोबारा पीपल विल नो की भई इस घर में पुलिस चैक कर रही थी। पता चल जाएगा, पता चल जाएगा। तो 2 टीम बनाई गई, 1 को मोहनचंद शर्मा लीड कर रहे थे, 1 को एसीपी संजीव यादव लीड कर रहे थे। तो मोहन शर्मा जब वहा एंटर हुए वो टेरिस से फायरिंग मे उसमे मोहंचनशर्मा को गोली लगी। 2 टेरिस्ट भी वहाँ मारे गए। मौके पर। 1 पकड़ा गया एंड मोहन शर्मा की डेट बाद में हो गई। 1 हमारा हेड कांस्टेबल था खड़क सिंह, उसके भी फ्रैक्चर हुआ ब्लेड से सो दिस वाज, द बेसिक इंसीडेंट। और इसके बाद जो उनके लैपटॉप से इनफॉर्मेशन मिली लैपटॉप से पूरे रिकॉर्ड मिले की जैसे गुजरात में जो बॉम्ब ब्लास्ट किए थे बॉम्ब्स को उन्होंने ब्लास्ट करने से पहले 1 पैन में लगाया आई एम करके और पीछे 1 पर्दा लगाया हुआ था उसमें गुजराती में लिखा था इंडियन मुजाहदीन एमदाबाद, उसका वीडियो बनाया हुआ था कार में जो फटने से पहले कार में जो बम थे, उनकी फोटो थी। वीडियो थी बहुत सारे मोटीवेशनल सोंग से टू कनवर्ट पीपल इंटू टेरिज्म, बहुत सारी डिफ्रेंट। कंट्रीज की क्लिप्स थी इंडिकेट की। वो कहता था कि मुस्लिम पर अत्याचार हो रहे हैं, जगह जगह हमें फाइट करना चाहिए। तो मोटीवेशनल काफी मेटरियल में मिला इनकी इनफॉर्मेशन के बाद जो मिली तो काफी लोग पकड़े गए ऑलमोस्ट इंडियन मुजाहिदिन। उसके बाद 23 महीने में टोटल ही खत्म हो गया। बट उसमें कंट्रोवरसी 1 कुछ लोगों ने क्रिएट की आई वुड से, कुछ पॉलिटिशन थे उसमें और कुछ मीडिया के लोग भी थे। देव सपोर्टिंग दिस देवर क्रिएटिंग कंट्रोवर्सी की फाल्स एनकाउंटर है, झूठा एनकाउंटर है, मुस्लिम को टारगेट कर रहे हैं। इस तरह की जो है क्यों कर रही थी, आपको गता है मीडिया। और ये पॉलिटिशन पॉलिटिक्स तो जो मेरी अंडरस्टैंडिंग है। 4 स्टेट्स में इलेक्शन आ रहे थे दिस वाज इन सेप्टेम्बर और नवम्बर दिसम्बर में 4 स्टेट्स में इलेक्शंस थे एंड 2000 9 के शुरू में पार्लियामेंट इलेक्शन भी थे। तो सम पीपल वार प्लेइंग वोट बैंक पॉलिटिक्स के। ये हमारे वोर्ड्स हैं, ये टारगेट कर रहे हैं। but media why were the playing? रूट बिकाज वे पॉलिटिशन स स्टार्ट लिंग। फिर वो स्टोरी शुरू हो जाती है। बड़ी अजीब अजीब स्टोरीज आई थी, क्या स्टोरी आई कि मोहन चंद शर्मा को क्लोज रेंज से गोली लगी है, उसके साथियों नहीं मार दी है। इस तरह की स्टोरी प्लांट करी गई है। 1 ये जो थे इनोसेंट लड़के थे, इन्होने तो गोली नहीं चलाई। तो 1 होता है डर्मल नाइट री टेस्ट। अगर कोई आदमी फायरिंग करता है तो उसके हैंड्स पर बारूद जम जाता है। तो जब ये जो 2 टेरिस्ट भरे थे मौके पर उनको एम्स में पोस्टमार्टम के ले जाएगा तो एम्स के डॉक्टर ने उसका हैंडवाच लिया, सीएफएसएल को भेजा, वहां से कनफर्म हुआ कि इनके हेंड पे, वो पॉजिटिव आया है, डरमर नाइट री टेस्ट। फिर इनके पास से जो वैपन मिले थे और जो गोलियां वहां मिली थी वो मैच कर गई। फिर 1 एलिगेशन था कि वो क्लोज रेंज का जो वो भी पोस्ट मार्टम की रिपोर्ट में आ गया। कहते हैं जी पीछे से गोली मारी है और सामने से गोली लगी थी, क्लोज रेंज से नहीं लगी थी तो वो एविडेंसीज आए है। फिर 2 आदमी वहां से मौके से भाग गए थे, कैसे भाग सकते हैं, पॉसिबल ही नहीं है। अल्टीमेटली 2 आदमी भी पकड़े गए है। ओके दोनों को सजा हुई, लोअर कोर्ट ने दोनों को 1 को फांसी की सजा सुनाई है और 1 को उम्र कैद की वो अभी हाई कोर्ट में पेंडिंग है, उनकी अपील जो है तो सारी चीज जो है। फिर एनएचआरसी ने इंक्वायरी की, एनएचआरसी ने एनकाउंटर जन्मे उन्होंने पूरा डिटेल में किया, फिर भी कुछ लोग हाई कोर्ट गए, सुप्रीम कोर्ट गए और जब वहां से सब खारिज हो गया तो फिर लोगों को थोड़ी चुप हुए। फिर भी जब कभी इलेक्शन आते हैं तो कोई न कोई बोलता है। बट बड़ा स्ट्रेंज था जैसे अमर सिंह थे, वो बाटला उसके एरिया में जाकर बोल रहे हैं। कमेंट जो उन्होंने किया की मोहनचंद शर्मा यहाँ क्या मरने आया था, इस तरह का कमेंट किया। तो लुक्स यू फील सो बैड। अबाउट सजे कमेंट ममता बनर्जी। वो भी बाटला बोल रही थी। समटाइम्स आई फील की। 1 नेशनल पॉलिसी होनी चाहिए ऑन टेरिज्म की। अगर आप इस तरह के कमेंट करते हैं और आपके पास एविडेंस नहीं है तो आपको भी केस होना चाहिए। आपके खिलाफ शौर क्योंकि उस समय मेरे ऑफिसर आये, 1 बार मेरे पास देर। वेरी इमोशनल कहते हैं सर, हम तो देश के लिए काम कर रहे हैं, हमने तो टैरिस को पकड़ा है तो क्या उसके लिए हमें फांसी पर लटकाएंगे देन। टोल दम मैंने की डोंट। वरी हमने सही काम किया है और हमारे पास एविडेंसीज हैं हम प्रूव करेंगे हम सहित। तो बट सर्टेनली डीमोरेलाइजेशन कहीं न कहीं आता है। उनको लगता होगा कि आप क्यों कर रहे हैं हम इतनी जान पर खतरा डाल के ऐसी जीत कर है। और फिर बदले में मिल का डीमोरेलाइजेशन होता है। इससे सिस्टम को भी लगता है। क्या हो रहा है क्या रिजल्ट निकलेगा से सारे जो मनी लॉन्डर्स होते हैं उनके लिए सबसे बेस्ट कंट्री कौन सी होती है सी। जिस कंट्री में मनी लॉडरिंग लॉज रिलेक्स होंगे। कौन सी कंट्री होंगी ये जो कहैवेजहैजिनको टैक्सेस बोलते हैं द बेस्ट जैसे टैक्स से हवाई है। मतलब समय तो मुझे सारे नाम भी याद नहीं है। बड़ी करेबियन जायलैंड के में वहाँ टैक्सिस कम है तो आप पैसे वहाँ ले जाओ टैक्स कम लगेगा कहीं और ले जाओ। तो बासी बंदी जो एक्चुवल कंपनी है वो भी क्या करती है की अपना प्रॉफिट शेयर इस तरह से डिवाइड करते हैं कि टैक्स सेवन में ज्यादा प्रॉफिट हो ताकि आपका ओवरआल टैक्सेशन कम हो जाए। तो अभी मिनिमम टैक्स का भी कांसेप्ट लाई है जो जी सेवन है मिनिमम टैक्स तो लगाना पड़ेगा चाहे टैक्स सेवन कहीं भी कर लो और कहीं भी कर लो। तो देखिये क्या होता है डी जीव की सैलरी कितनी होती है जितनी गवर्नमेंट समेंट क्या कितनी होती है। आपके टाइम की करीब ढाई लाख के करीब और क्या वर्क्स होते है सेम वर्क्स है आप कार होगी। आपके पास घर सरकारी है बस और कुछ मिलता है नी। सिक्योरिटी सिक्योरिटी डिपेंड करता है सिक्योरिटी परसेप्शन क्या है थ्रेट परसेप्शन क्या है आप ऐसे कंपलसरी नहीं कंपलसरी नहीं है। और उसके बाद फोन पेट्रोल, एजुकेशन। इन सब में कुछ मिलता है। नहीं नहीं एजुकेशन में फॉर किड्स। तो सरकार जब तक ये ईडी डायरेक्टर बनते है न तब तक बच्चे पढ़ चुके होते है। अं रिटायरमेंट के बाद क्या प्लान होते है वो डिपेंड करता है पर तू पर्सन कुछ लोग रेस्ट करना चाहते हैं। नहीं सरकार की तरफ से क्या मिलता है। उसके बाद सैलरी मिलती है पेंशन मिले मिलती है घर देती है। सरकार फोरएवर नहीं नहीं नहीं जो वो गया तो गया आप देख लो अपने रा ंड टू प्वाइंट फाइव लाइक। इस द बेस सैलरी टो को है मतलब इससे बेसिक तो ऐसा नहीं होता बस सैलरी बेस सैलरी तो इससे कम होती है। टोटल इतना मिलता अच्छा एंड देन। जब आप 1 बार रिटायर होगे उसके बाद पेंशन आती है लाइफटाइम की। नहीं अभी तो लाइफटाइम पेंशन है थिंक 2000, 6 या 7 के बाद जो सर्विस में हैं उनके लिए पेंशन स्कीम डिफ्रेंट टाइप की है पेंशन जो सैलरी ती है उतनी ही होती है कि उसकी हाफ हो जाती है की हार हो जाती है उसे एंड दैट स्टेज फॉर एवर। अगर आप अपना पर्सनल को उसके बाद काम करना चाहते हैं कहीं जॉब करते हो फिर भी रहती है वो अगर सरकारी जॉब करते हो तो शायद वो कम्पनसेट हो। जाती है कि जितना अगर वहाँ आपको 2 मिलना है और आपको सपोज डेल पेंशन मिल रही है तो पचधारतोवोएकएडिशनन मिल जाएगा आपको ओके और अगर प्राइवेट करते हो तो उसमे रस्टिक 1 या 2 साल की रेस्ट्रिक्शन है प्राइवेट करने के लिए अगर उस दौरान करना है तो आपको गवर्नमेंट से परमिशन लेनी पड़ेगी कोई भी काम और उसके बाद करना है तो यू कैन डू। स्विस अकाउंट का क्या सी स्विस स्विस अकाउंट का लॉजिक क्या है देखो स्विस अकाउंट लॉजिक था उनके सिकrेciलॉsबैंक सिकrेसylॉtेवil नो डिस्कlोse तो एनीबडी बट स्लोली ना दे आर डिस्क्लूजिंगअपनी हो गया है। अब इतना अपनी सिक्रेसी अब नहीं है जो पहले थी तो पहले यहाँ से पैसे अगर किसी तरह स्विजल ले जाओ और वहाँ के बैंक में डाल दिए तो फिर किसी को नहीं पता चलेगा कि आपने कितने पैसे डाले और किसने डाले। हाँ नहीं पता लगेगा और वहाँ वैसे भी वह नाम से नहीं होता था अकाउंट से होता था। 1 को आपका अकाउंट बन गया और और 1 और बड़ी इंट्रस्टिंग बात करते है अगर आदमी मर गया तो उसके पैसे भी गए स्विस अकाउंट में गए, खत्म हो गया कौन लाएगा उसको। 1 आदमी था हसन ली है वैद बिगेस्ट कॉनमैन और द बिजनेस मैन मतलब डिफिकल्ट तो से कौन था क्या था उसके बारे में ये एलिगेशन थी कि स्विस बैंक में उसके काफी पैसे उस समय में हिसाब लगाते जब मैं डी में था कनवर्जन कर के करीब 48 हजार करोड़ बनते थे इंडियन इंडियन एस आई टी जो बनी थी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ऑन ब्लैक बनी उसी के केस पर बनी थी। लेकिन उसका मोडरसॉपरेंडी बड़ा अजीब था क्या लोगों को कहता था कि मेरे स्विस बैंक में पैसे निकाल नहीं रहे हैं लोगों से। उसने उस हिसाब से भी बहुत पैसे लिए कि मुझे डायमेंट दे। 2 ये दे 2 मैं पैसे दे दूंगा। सुस बैंक में मेरा अकाउंट है इतने पैसे हैं एंड ईवन ही वहाँ पर 1 वो आई थिंक होटल खरीदना चाह रहा था स्विजरलेंड में और उसने बैंक में मीटिंग कराई थी स्विस बैंक में और बैंक वालों ने कहा कि इसके पास सफिसिएंट मनी है इसको खरीदने के। उसके पैसे ट्रेस नहीं हो पाया हैवी। नहीं थे मतलब मिस्ट्री एरिया पूने पूना में है उसका। पहले घोड़े भी थे उसके पास। कुछ पूने के सन अड़तालीस हजार करोड विदरैंडमें किसी को नहीं पता है कि नहीं है है की नही है मतलब और होटल खरीद लिया नहीं खरीदा मैंने बिलीव है मैंने नोट बिलीव ईडी की रेड्स कैसे होती है इसका सर्च ऑपरेशन है जो सेक्शन सेवंटी का उसमे होती है। सबसे पहले तो डिप्टी डायरेक्टर लेवल का वो एग्जामिन करता फाइल को और फिर वो लिखता है रीजन टू बिलीव की मेरा रीजन टू बिलीव है की इस जगह पे पीएमएल के एविडेंस होने के पॉसिबिलिटीज है एंड। फिर वो सर्च वारंटी शू करता है ओके देन इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर खुद या दूसरी टीम के थ्रू उस जगह सर्च करता है सर्च करने का प्रोसीजर है वो सी आर पी सी में दिया हुआ है क्रिमिनल प्रोसीजर कोर्ड में अब जो बी एन एस एस बना है उसमें दिया हुआ है की किस तरह से सर्च प्रोसेस करना है आप जनरली क्या होता है भी तो सेंट्रल एजेंसी क्या करती हैं कि दूसरे डिपार्टमेंट से विटनेस ले जाती है 2 मौके से भी विटनेस ले सकते हैं मोहल्ले पड़ोस के और फिर वह सर्च करते हैं अगर कोई डॉक्यूमेंट मिलता है उसको सीस करते हैं कोई प्रॉपर्टी मिलती है जिसपर आपको डाउट है कि यह मनी लॉन्डरिंग में इनवॉल हो सकती है तो उसको सीज करते हैं कोई अकाउंट आपको वह नजर आता है कि इस अकाउंट में पैसे रखे हुए इन्होंने सीट्स क्राइम को तो उस अकाउंट को फ्रीज कर देते हैं सो दैट इज प्रोसेस ऑफ़ सर्च फिर 1 सर्च बीमा बनता है फोन्स अलाउड नहीं होता ये सब कंफेस्टिगेटकरलेते जाते थे फ़ोन की डिपेंड करता है की फ़ोन को कनफ्िसिकेट कर भी सकते हैं नहीं भी कर सकते अगर फ़ोन को सपोज कर लो एनालिसिस करना है बट ड्यूरिंग द टाइम ऑफ़ रेड क्या फ़ोन लगा सकते हैं लोग जो अंदर होते लोग लगते हैं अलाव करती डी डिपेंड करता है सर्च तो सर्च और आना जाना बाहर ये सब वो जनरली अलाव नहीं करते जो बाहर भारी जो अंदर जनरल अलाऊ कर सकते हैं ओके सच लेके तलाशी लेकर की सामान तो नहीं ले जा रहा कोई किसी के घर में अगर आपने रेड मारी एस डी देन क्या उसमें घर वालों को अलाव करते हैं फोन लगाना इस लीगल टू कॉल मतलब कोई मना नहीं है बट अगर ईडी ऑफिसर ने बोला की फ़ोन नहीं लगना तो अलाव न सी जनरली अगर कोई प्रेशर करने के लिए फ़ोन लगा रहा तो नहीं लगना करना चाहिए लेकिन सपोज अपने एडवोकेट को कम्यूनिकेट करने के लिए लगा रहा तो अलाव करते हैं परफेक्ट थैंक यू सो मच सर थैंक यू आई नो यू हैव टू गो मीटिंग बट थैंक यू सो मच फॉर गिविंग टाइम सिर प्लेयर नहीं कम टारगेट किया ग्रेडिट क्रिमिनल को ड्रेडेड क्रिमिनल है जिससे लोग डरते हैं मुझे बताओ कोई जो बहुत टेरिस को मैंने सबको किया तो ग्रेडिट क्रिमिनल जो मतलब सबसे होते है सबसे डरपोहोते क्यूँ वो सब कुछ बता देते है थैंक यू सो मच एपिसोड एंड तक देखने के लिए अब आपको 3 चीजें करनी है सबसे पहले इस चैनल को सबस्क्राइब कर लो क्योंकि जितना आप सब्स्क्राइब करोगे उतने ही बेहतर और वैल्युबल गेस्ट हम ला पाएंगे आपके लिए नंबर टू मुझे कमेंट्स में बताओ इस एपिसोड में आपको क्या अच्छा लगा और क्या गंदा लगा ताकि हम वो मिस्टेक रिपीट न कर पाये एंड कौन से ऐसे गेस्ट हैं जो आप देखना चाहते हो वापिस हमारे पोडकास्ट पे ताकि हम उन्हें लेके आये और आपको ज्यादा ज्यादा वैल्यू दे पाए एंड नंबर थ्री यह एपिसोड किसी 1 इंसान के साथ जरूर शेयर करना क्योंकि वन कॉन्वरसेशन कैन चेंज समवन लाइफ आल सी यू नेक्ट टाइम अंटिल देन की फिगरिंग a।