Abhinay Sir On Indias Education Crisis And Youth Reality
read summary →TITLE: Abhinay sir EXPOSES the System | Modi Govt, Education Crisis & Youth Reality | TPS @ABHINAYMATHS CHANNEL: The Prateek World DATE: 2026-02-22 ---TRANSCRIPT--- विकसित होने की राह से मेरा मतलब है की क्या में अभी तक दिल्ली के किसी 1 इलाके को भी ये कह सकता हूँ की ये फ्रांस को टक्कर दे सकता है या किसी भी विकसित देश को टक्कर दे सकता है। देश की राजधानी दिल्ली को विकसित नहीं कर पा रहा हूँ। आता है तो मुझे रिया छुपाना पड़ता है। मैं आपके पोल कास्ट में कैमरे के माध्यम से ये चैलेंज करता हूँ। प्रधानमंत्री जी को तो मुझे ऐसा लगता है की मोदी जी का हमेशा से फोकस बड़ा रील पर रहता है। रील जीबी भी उनको कहा जाता है कैमरे पर बहुत फोकस करते है। बट ऐसा टीचर आपने ऐसा क्या ओबजर्व करा और आपको ऐसा लगा कि देश की हालत बिगड़ गई कब आपका भरोसा टूटा। क्योंकि 2014 में तो हम सब के पास बहुत अच्छा भरोसा था, 2014 के चुनाव में दल के लिए नहीं देश के लिए वोट करिए, वोट फॉर इंडिया, मोदी जी आयेंगे तो शायद देश 1 अलग दिशा में जायेगा। क्योंकि मोदी जी ने इतनी सारी चीजें बताई थी की मैं जानता हूँ पेट्रोल डीजल कैसे बढ़ सकता है, मैं जानता हूँ रुपया नहीं गिर सकता है। ये सब हम लोगों ने सपना जिया था। 2 हज़ार 17 में जब मोदी जी का वो इंटरव्यू सुधीर चौधरी के साथ मैंने सुना था तो मोदी जी ने कहा की जो आपके स्टूडियो के बाहर समोसे या पकौड़े की रेडी लगा रहे है आपके जी टीवी स्टूडियो के बाहर कोई पकौड़े बेचता है और शाम को 200 रूपए कमा कर के घर जाता है उस व्यक्ति को आप रोजगार मानोगे की नहीं मानोगे, मानोगे की नहीं माने। तो मैं उसी दिन समझ गया था। 1 प्रधान मंत्री जो 2000 से तालीस में लोगो को विकसित होने का सपना दिखा रहा है और वो पकौड़े तलने की या समोसे की रिडी लगने को रोजगार कह रहा है। तो इसका मतलब देश सही दिशा में तो नहीं कहीं छोटा समोसा मिलता है, कहीं बड़ा मिलता है। सब कुछ तो नकली पकड़ा जा रहा है। तो आप कैसे कह रे की आप सही दिशा में जा रहे हैं। आप तो गलत दिशा में जा रहे हैं, सो रहा है। मिनिस्टर कौन है नड्डा साहब है नड्डा साहब को तो मोदी जी की चापलूसी करने के अलावा वक्त ही नहीं प्रधान। मंत्री जी का स्वागत करें, अभिनन्दन करें। मोदी जी ने कोशिश की खूब लगाया, बीजेपी पार्टी के लिए, देश से ज्यादा पार्टी के लिए काम किया तो पार्टी ने ग्रोथ की है। 2014 में पार्टी के पास 295 करोड़ थे, आज पार्टी के पास 10 हजार 100, 7 करोड़ है, 30 सौ 26 परसेंट की ग्रोथ है। कोई मंत्री आप मुझे बताइए सोच के जिसको मोदी जी ने चुना है और वो वाकई में अच्छा अब आप कहेंगे की जी थोड़ा सा अच्छा काम कर। गडकरी जी को मोदी जी ने नहीं चुना है, वो तो कभी नहीं चाहते कि गडकरी जी रहे है। सत्ता में अच्छा सर ये मोदी और योगी वाली जो कांस्परेसी चल रही है की मोदी जी चाहते है की भाई योगी जी का जो थोड़ा कैदा पाती में थोड़ा कमी रहे, ये भी सही सिर आजकल मोदी के पीछे पड़े हुए हैं, करण गवर्नमेंट के पीछे पड़े हुए है, सिर नेता बनना चाहते है दूसरा जो 1 तानाशाह के भी बहुत सारे रूप होते हैं, जैसे जब न्याय, सत्ता की, जिनमें चला आप देखिये न, जिस राजस्थान में जिन जज साहब ने अडानी के खिलाफ बयान दिया, उनका ट्रांसफर कर दिया। आप ये छोटी छोटी चीजे सोचिए आप योजना ला रहे हैं, उसमें घोटाला हो रहा है। प्रधानमंत्री विकास कौशल योजना में 10 हजार करोड़ का घोटाला है, 10 हजार करोड़ करोड़ का घोटाला है, सामने तो सामने लाने कहा देते है। अभी ने साफ़ कहा है की जो भी पी एम फण्ड में पैसा है उसका हिसाब किताब नहीं दिया। मेरा तो कोश्चन सरकार मैं पूछूंगा ऐसे गुस्से में रहते है, ऐसे तो आप इतने गुस्से में रहोगे प्रेशर बढ़ जाएगा। ऐसा होता है मैं। मैथ्स टीचर से सुनना चाहता हूँ। प्रेम की परिभाषा के आत्म समर्पण है, प्रेम दया है नहीं, आप गाने वाले थोड़ा शायरी करते रहे। मैंने अपनी लिखी 1 गलत तो उसके दिल पर नाम भी लिखा था जिसे हम कोरी स्लेट समझते रहे। न जाने किस किस से आपका कैसे चालू हुआ चालू। ऐसा कुछ नही होता की इसका कोई बटन होता है की लू की नहीं। मतलब आपकी वाली जनरेशन में नहीं है की नमक का और झट से मेसेज पास कर दिया। हमारे लिए तो यही बड़ी बात होती थी की किसी लड़की ने हमसे कॉपी मांग ली। मैंने अपना करियर स्टेंडअप कॉमेडी से शुरू किया था, अच्छा है। अब देखेंगे मेरे वीडियोज हैं 2000 78 के क्या है बिल्कुल तो आज हमारे साथ अभिनय सिर है जो की मैच के 1 वंडरफुल टीचर है। थैंक्यू थैंक यू वेरी मच काफी सारे लोगों की लाइफ में वैल्यू सर एड करिए। आज के पोडकास्ट में मैं चाहता हूँ एज टीचर आपने अपने बच्चों की लाइफ में उनको डायरेक्शन दिया। मैं चाहता हूँ आज आप उनके माइंडसेट को डायरेक्शन दे की भाई वो अगर देश का पार्ट है, इस कंट्री का पार्ट है तो उनको क्या चीजें पता होनी चाहिए। वर आई थिंक की देश और उसके सिटिजन पैरलल चलते रहते हैं। देश विकसित होगा तो सिटिजंस का भी विकास होगा। बट अगर देश विकसित न हो और विकसित होने की हम बातें करें। कि दैट हम टू थाउजंड, फोर्टी सेवन तक विकसित भारत बन जायेंगे, वो काफी नहीं है। देखिये विकसित होने की बात ही नहीं कर रहा हूँ मैं तो मैं तो अभी मेरा तो 1 ही डाउट है की क्या हम विकसित होने की राह पर है या नहीं। मुद्दा इस डेट। आज मुझे ऐसा लगता है कि विपक्ष को, देश के लोगों को सिर्फ 1 सवाल मौजूदा। सरकार से पूछना चाहिए कि 2047 छोड़िए हम 21 सौ सैंतालिस तक भी वेट कर लेंगे। बट क्या हम विकसित होने की राह पर है या नहीं? क्या कोई अचानक से 1 दिन सुबह होगी और हम सब को पता चलेगा कि भारत विकसित हो गया है। ऐसा तो होगा नहीं, विकसित होने की राह से मेरा मतलब है की क्या मैं अभी तक दिल्ली के किसी 1 इलाके को भी ये कह सकता हूँ की ये फ्रांस को टक्कर दे सकता है या किसी भी विकसित देश को टक्कर दे सकता है। मैं भी अपने देश की राजधानी दिल्ली को विकसित नहीं कर पा रहा हूँ। मेरे देश में ट्रंप आता है तो मुझे सिमरिया को छुपाना पड़ता है। समझ रहे आप। तो मैं अपने देश की राजधानी को विकसित नहीं कर पा रहा हूँ। उसके किसी 1 हिस्से को विकसित नहीं कर पा रहा हूँ। मैं आपके पोडकास्ट में कैमरे के माध्यम से ये चैलेंज करता हूँ। एस एस प्रधान मंत्री जी को की आप भारत विकसित होने की बात को छोड़िए क्योंकि ये सपना बहुत बड़ा है और बहुत लम्बा है। आप किसी भी देश के 1 शहर को विकसित करके दिखाइए जहाँ पर हम कह सके की यहाँ पे आप वाशरूम से, टैप से पानी पी सकते है। जहाँ पर आप यह कह सके कि हम दिन में कभी भी खुली हवा में स्वच्छ तरीके से सांस ले सकते हैं। जहाँ पर हम कह सके की किसी भी गली में कोई कूड़ा करकट नहीं है। जहाँ हम कह सके कोई स्लम एरिया नहीं है, सबके पास विला है। फ्लैट यही करके दिखा दीजिये। तो मुझे ऐसा लगता है कि मोदी जी का हमेशा से फोकस बड़ा रील पर रहता है। रील जीबी भी उनको कहा जाता है और वो कैमरे पर बहुत फोकस करते हैं। आजकल वो ए आई की भी टूटी फूटी बाते हैं कर रहे हैं। तो मुझे लगता है कि यह रील में ही सपना पूरा हो सकता है। जैसे 1 मूवी है। न कोई जिसमे वो रजनीकांत चलता है और पीछे रोड बनती चली जाती है तो वैसा हो सकता है। बट। मुझे अभी नहीं लगता कि हम विकसित होने की राह पर भी है। क्योंकि दिन पर दिन हमारा पानी खराब हो रहा है, पानी पी के लोग मर रहे हैं, हवा खराब हो रही है। दिन, पे दिन, हर साल आप सुनते हैं कि इस साल दिल्ली की हवा और खराब हो गई। रोड्स पर गड्ढे लगातार बढ़ रहे हैं। हालत यह है कि अभी कुछ दिन पहले आपने देखा कि युवराज मेहता नाम का बंदा मर गया, हमारे देश की सरकार या उसकी संस्थाएं उसको नहीं बचा पाई। अभी थोड़े दिन पहले दिल्ली में 1 25 साल का युवक बाइक से गड्ढे में गिरने से मौत हो गई और वहाँ पर हमारे ये सांसद साफ़ थे। मनोज तिवारी जी, वो कह रहे हैं कि पुरानी सरकारें, गड्ढे बहुत छोड़ गई है, छोड़ क्यों गई है, आपने छुडवा दिया है। साहब आप क्यों आए थे, उन्हीं को रहने देते। सिर मैं आपसे चीज पूछना चाहता हूँ, इस देश में बहुत इंटलेक्ट। ये देश में काफी सारे लोग है जो अपने आप को इंटलेक्ट पोटरे करते हैं। बट ऐसा टीचर, आपने ऐसा क्या ऑब्जर्व कर और आपको कब ऐसा लगा की अब देश की हालत बिगड़ गई है या देश गड्ढे की तरफ जा रहा है। आपने बड़ी कमाल की बात पूछी, सवाल किसी ने नहीं पूछा की आपको कब ऐसा लगा कब आपको भरोसा टूटा। क्योंकि 2014 में तो हम सब के पास बहुत अच्छा भरोसा था। मोदी जी आयेंगे तो शायद देश 1 अलग दिशा में जाएगा, क्योंकि मोदी जी ने इतनी सारी चीजें बताई थी की मैं जानता हूँ पेट्रोल डीजल कैसे बढ़ सकता है, मैं जानता हूँ रुपया नहीं गिर सकता है। ये सब चीजें उन्होंने कहीं थी और उनके पक्ष में तमाम लोग आये थे। बाबा रामदेव से लेकर मोदी आएगा तो सब कुछ ठीक हो जाएगा। ये सब हम लोगो ने सपना जिया था। बट 2017 में जब मोदी जी का वो इंटरव्यू सुधीर चौधरी के साथ मैंने सुना था, जिसमें उन्होंने कहा था जब वो बेरोजगारी पर बात कर रहा था, सुधीर चौधरी तो मोदी जी ने कहा कि जो आपके स्टूडियो के बाहर समोसे की या पकौड़ों की रेडी लगा रहा है कि आप उसको रोजगार नहीं कहेंगे, तो मैं उसी दिन समझ आता। 1 प्रधानमंत्री जो 2047 में लोगों को विकसित होने का सपना दिखा रहा है और वो पकौड़े तलने की या समोसे की रेडी लगने को रोजगार कह रहा है, तो इसका मतलब देश सही दिशा में तो नहीं है। आप बताइए न कि यूरोपियन कंट्री में तो इस तरीके से रेडिया नहीं लगती है, वहाँ तो कोई कुली नहीं है, वहाँ तो कितने सारे फाइव स्टार है जहाँ पर वेटर तक नहीं मिलता। आपको आपको खुद रूम साफ़ करना है और आपको उसके बाद कंबल भी लेके आना है तो नीचे रिसेप्शन से खुद लेके आना है। तो विकसित देशों में तो यह नहीं है। यहाँ तो लोग मजबूरी से कुली बने हुए है, मजबूरी सी रेडिया लगा रहे हैं, मजबूरी ऐसी पंचर लगा रहे हैं, सब कुछ तो मजबूरी से ही कर रहे हैं। आप बताइए न की जब हमारे भारत में आपको कैसा लगता है जब आप किसी रेड लाइट पर आये दिन हमारे यहाँ की रेड लाइट खराब हो जाती है। हमारे यहाँ हर चीज नकली है, सोच हमारे यहां रेड लाइट, आय दिन आपको खराब मिलेंगी और वहाँ पर फिर 2 सर्व स्पेक्टर या पुलिस के आदमी ट्रैफिक को इधर उधर कर रहे होंगे कितना रिस्की होता है, वो कोई भी कार तेज लेके आ जाए। वो अपनी जान पे खेल करके चौराह पर खड़े होते हैं और आपने उनकी हालत देखी कितनी धूल उड़ रही होती है। क्यूंकि हमारे यहाँ की रोडे ऐसी नहीं है जहाँ धूल न उड़े बड़ी सफाई है। ऐसा भी नहीं है कितने लोग आपने मास्क देखा है कितने लोग सरकार मास्क ऐसा प्रोवाइड कर रही है। आपको पता है ऐसा नहीं है कि विकसित देशों में लोगों के यहाँ नालियां नहीं होती, नालियों को साफ़ करने वाले नहीं है बट वो भी बड़े शब्द हैं। आप जाकर, देखेंगे, इलेक्ट्रीशियन उनकी 1 प्रॉपर ड्रेस है। आपको पता है की अगर वो गटर में भी उतर रहे है तो उनको ऐसा मास्क दिया जाता है। हमारे यहाँ तो वो अवेलेबल नहीं है कि बंदा खरीद ले। नही, व इको सिस्टम नहीं है और आप विकसित होने की बात कर रहे हैं। यहाँ पर हर चीज का स्तर गिर रहा है। सब्जियों में एडलटरेशन 10 साल पहले नहीं था, आज है। आज से पंद्रह साल 10 साल पहले। इतने लोग नकली पनीर बनाने के बारे में नहीं सोच रहे थे, जितना आज है। सबकुछ तो नकली पकड़ा जा रहे है। तो आप कैसे कह रहे है की आप सही दिशा में जा रहे हैं। आप तो गलत दिशा में जा रहेहैं। फसाई सो रहा है। फसाई को का मिनिस्टर कौन है? फूड कार्पोरेशन का। आपको बताए नड्डा साहब हैं नड्डा साहब को तो मोदी जी की चापलूसी करने के अलावा वक्त नहीं है। कब मोदी जी को माला पहना नहीं है। ऐक्चवली क्या है कि हमने तो मोदी जी को आपने सुना नहीं था। कंगना का वो बयान जिसमे उन्होंने कहा था कि भगवान राम के अपार है। मोदी जी ने फिर खुद भी कहा, सब लोगो ने उनको इतना कह दिया, ईश्वर का रूप हैं। आप देव तुल की उन्होंने खुद भी मान लिया और वो ये कहने लगे कि मैं बायोलॉजिकल नही हूँ। तो फिर प्रश्न ही पूछना बंद हो जाता है। क्यूंकि हमारे देश में चाइना की तरह तो है नहीं कि 90 परसेंट लोग नास्तिक है। और वो सिर्फ यही सोचते हैं की भैया काम करने से ही पैसा आएगा। हमारे देश में तो 90 परसेंट लोग मुझे लगता है, आश्तिहोगेआश्ता वाले लोग हैं। तो अब भगवान में सबकी आस्ता है। तो 1 पार्टी जिसने खुद ही कह दिया कि जी हमारा मुखिया भगवान है और वो आस्था को प्रमोट कर रही है, वो रिलीजन को प्रमोट कर रही है, वो धर्म को प्रमोट कर रही है। हर चीज को तो फिर सवाल पूछना तो बनता ही नहीं। किसी को सवाल नहीं पूछना चाहिए। जीते रहिये, गरीबी में जीते रहिये। आप राशन। पे लोग ये कहते हैं कि भारत का विकास नहीं हुआ, यह भारत के विकास की कोशिश नहीं की जा रही, यह कोशिश की जा रही है, फिर भी विकास नहीं हो रहा। मैं बता दू जब भी कोशिश की जाती है, विकास होता है। आप कहेंगे? कोई भी आदमी जिसने गाँव में थोड़ी ज्यादा मेहनत की, वो आज किसी भी तरीके से अपने परिवार को निकाल के टाउन तक ले आया है। जिसे टाउन वाले ने मेहनत की वो अपने परिवार को निकाल के शहर तक ले आया है, जिले तक ले आया है। मोदी जी ने कोशिश की खूब लगाया, बीजेपी पार्टी के लिए, देश से ज्यादा पार्टी के लिए काम किया तो पार्टी ने ग्रोथ की है। 2014 में पार्टी के पास 295 करोड़ थे, आज पार्टी के पास 10 हजार 100, 7 करोड़ है। तो पार्टी ने ग्रोथ की। सौ 26 परसेंट की ग्रोथ है। अगर मेरी गाड़ी सही है तो डेट सौ 26 परसेंट की ग्रोथ मजाक समझ रहे हैं, ग्रोथ हुई है, जिन्होंने सरकार के साथ हाथ मिला, उनकी ग्रोथ हुई है। अडानी की हजार पर्सेंट की ग्रोथ है। 11 साल, 12 साल में अम्बानी की 800 परसेंट की ग्रोथ है, बाबा रामदेव की 600 परसेंट की ग्रोथ है। और बाकी जो लोग जिन्होंने सच में उनको भगवान मान लिए उनकी भी 5 किलो राशन की ग्रोथ है। अब वो आप देख सकते है अपनी बात। मैं 1 चीज जानना चाहता हूँ। सिर ऐसा टीचर आप बच्चों के आसपास बहुत रहे हो अपने बच्चों के आसपास बहुत समय गुजारा है जिंदगी में उनको डायरेक्शन देते हुए जी, आपने कभी ये चीज नोटिस करे की हमारे जो एजुकेशन सिस्टम है या जो एजुकेशन सिस्टम आज तक चलता है अभी तक 2026 तक चल रहा है वो ऑडिटेड बहुत ज्यादा ऑडिटेड इन्होंने खुद मना है। 2021 में न्होंने कहा न की हम न्यू एजुकेशन पॉलिसी लायेंगे आप बताओ आपको न्यू एजुकेशन पॉलिसी की चर्चा हो चुकी है। आई वान्ट टू नो की न्यू एजुकेशन पॉलिसी में क्या है। क्या नही क्या चेमेंतोकहता हूँ की थोड़ी बहुत भी चेंज किया हो या उसको लागू नहीं कर पाए तो इनकी इनटेंट दिखता नहीं है की एजुकेशन सिस्टम या एग्जाम सिस्टम, इन चीजों पर फोकस भी इनका है, दिखता ही नहीं है वो अब सोचिए संसद में लोग पॉलिसी बनाने के लिए जाते हैं। यहाँ तो 1 ही आदमी पॉलिसी बनाएगा और बिगाड़ेगा। वो भी आजकल डर से। कुछ लोगों ने बड़ी आपत्ति जाहिर की। मैंने 1 पोडकास्ट में कह दिया कि मोदी जी सबसे वीकेस्ट प्राइम मिनिस्टर है। उसके 2 दिन बाद ही क्या हुआ कि मोदी जी संसद में नही आये। बिरला साहब ने घोषणा की कि 34 महिलाएं सांसद हैं जो प्रधानमंत्री साहब के ऊपर अटैक कर सकते थे। अच्छा इसलिए उनको मना किया गया है कि वो आज संसद में न है। 1 प्रधान मंत्री जिसको हमने 56 इंच के सीने का टाइटल दिया या उन्होंने खुद लिया। 1 प्रधान मंत्री जिसने हर बार चुनाव से पहले अलग अलग नोकिया की, कभी चौकीदार नाम से पहले लगा लिया, आज वो अपनी सुरक्षा नहीं कर पा रहा संसद के अन्दर और आप कहते हो कि देश सुरक्षित हाथों में, तो इसलिए मैंने वीकेस्ट बोला 140 करोड़ लोग देख क्यों नहीं पा रहे हैं। ये सब, जैसे बहुत से लोग बताते हैं सब आज से पहले। शायद मैंने, ऐसा या तो मेरी उम्र थी, तनी समझ नही थी देखने की। मैंने कभी ऐसा जुनून नहीं देखा किसी इंसान या किसी पार्टी के लिए। क्योंकि पहले ऐसा नहीं था। अरे नही नही, वो जुनून एक्च्वलीआपको दिखाया ज्यादा जाता है। यार आप कैसे कह सकते हो जुनून यार कितने लोकसभा सांसद है, उसमे 240 है। उनके पास। आप जूनून कहते हो कैसे जुनून है? वो क्या है की नहीं इतना पैसा खर्च किया जा रहा है। नहीं सिटीजंस में जुनून होता तो फिर फिर से 600 या 5 सौ सीटें आती है, 600 के बाद 303, सौ के बाद 240। यह बता रहा है की अब जुनून बहुत कम हो गया है। तो ये क्या है कि जो सोशल मीडिया पर लोग हैं, जो लिख रहे हैं, जो लिखवाया जा रहा है, वो हमें ज्यादा दिख रहा है। बोट में कनवर्ट होते हुए, तो वो जूनून नहीं दिख रहा है, समझ रहे हैं। जैसे अभी बिहार का था, बिहार में बीजेपी गवर्नमेंट आई, बट बहुत सारी वो थी, दूसरी पार्टियाँ आयेंगी है आएंगी। फिर इन्होंने बोट भी खरीदे। लोगों ने कहा की भाई इन्होंने 10 हजार लोगो के अकाउंट में पैसा भेजा। फिर उन्होंने लालू जी के उस जंगल राज को बहुत दिखाया कि फिर से वैसा हो जाएगा। 1 डर बनाया लोगों के अन्दर तो उसका इम्पैक्ट था मतलब बिहार में तो आपने 10 हजार लोगों के अकाउंट में डाल दिया तो वहाँ के लोग बेचारे नमक खराब तो नहीं है न, वो सोचते हैं कि सरदार आपका नमक खाया, जब वोट डालने जाते हैं तो तो वोट अगर आप खरीद रहे हो तो फिर लोकतंत्र में तो इसको लोकतंत्र की जीत या लोकतंत्र में आपकी जीत तो नहीं करेंगे। अच्छा ए नेशन इंडिया में सिर आपको अभी सबसे ज्यादा मेजर कमियाँ क्या लगती है एजुकेशन सिस्टम में सबसे ज्यादा कमियां लगती है जिससे की ये जूनून लोगो को पता चले लोग सरकार की अन भक्ति न करे लोग सरकार का फैन न बने लोग सही गलत में अंतर दिखा पाए समझा पाए लोग 22 न हो जैसे आज हमें लगता होगा की कई सारी सर मुझे तो बस आपसे यह जानना है मैं चाहता हूँ आप लोगो को ये समझाओ ये बाइस लोग हो कैसे गए है क्यूँकी मैं ऐसा बहुत जगह देखता हूँ आप कभी डिबेट हो रही हो कहीं पर एंड 1 पर्सन बीजेपी की तरफ से 1 कांग्रेस की तरफ से बट जो उधर के लोग है वो किसी न किसी एंगल की वजह से बीजेपी के साथ है की नहीं बीजेपी नहीं जानी चाहिए वह भी लोगों को ये लगता है कि जैसे उन्होंने ये बता दिया कि हिंदू खतरे में हैं तो लोगों को लगता है की नहीं यार ये वाली चीज सही हो रही है, ऐसा हो रहा है तो लोग इस तरीके से लोगो को लगता है की बीजेपी नहीं जानी चाहिए बट मुझे लगता है की जाने वाली स्थितियां तो है ही जो मैंने अभी आपको कहा 403, सौ 240 बाकी और क्या वजह हो सकती है जो लोग ऐसा सोच रहे कि 22 तो सब तरीके के लोग है जो लोग बीजेपी की आलोचना कर रहे वो दूसरी पार्टियों के लिए बायस्ड है तो अनायस तो कोई नहीं बोल रहा है। जैसे आप कभी नहीं सुनेंगे कि रवीश कुमार ने कभी 2 तारीफें बीजेपी के पक्ष में की हो। जैसे मैं हमेशा करता हूं की बीजेपी ऐसे विपक्षी पार्टी बहुत अच्छा परफॉर्म करती है वो किसी भी सरकार को जैसे आपने दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी जो ये वादा करते थे कि हम बहुत अच्छा चला रहे उनको भी मजबूर करके हटाई दिया और इतनी कमियां दिखा दें कि देखो ये वो 1 कमी ढूंढ लाये की भाई शराब घोटाला इन्होंने किया है। सोचे इतनी सारी अच्छाइयां जो अरविन्द केजरीवाल गिनाते हैं उसके बावजूद बीजेपी 1 कमी ढूंढ लाई और उसी पर अटकी रही और एकदम घमासान करके उसने यह दिखा दिया की नहीं इसको हटा के हमें खुद आना है सोचिए 1 पार्टी जहाँ 3 सीटों पर थी सड़सठ थे आम आदमी के पास और वहाँ से सरकार बनाना 23 चीजें मैं बीजेपी के बारे में हमेशा उनकी तारीफ करता हूँ बहुत ऑप्टिमिस्टिक है बहुत एम बी सी एस है की हमारी हर राज्य में सरकार हो, था पार्टी फॉर पार्टी एम बी सी है बहुत पार्टी एम बी सी एस होना वो किसी भी चीज के लिए हो सकता है तो वो इस चीज के लिए बी सी एस है। लेकिन क्या होता है न की जब आपको देश का प्रधान मंत्री बना दिया गया तब आप पार्टी से अलग है। आप मानते हैं इस बात को अब आपके पास देश की जिमेदारी है। अब आपको लीडरशिप जो करनी है वो सिर्फ अपने 240 एम पी के लिए नहीं करनी है अब 545 के लीडर आप है अगर आपको लगता है कि कोई अपोजीशन पार्टी का एम पी भी सही सजेशन दे रहा है तो आपको उसको लेना है संसद किस लिए बनाई गई थी, सांसद किस लिए बनाये गए थे की भाई पॉलिसी मेकिंग होगी कंगना क्या पॉलिसी मेकिंग करेंगी क्या आता है उनको पॉलिसी मेकिंग के नाम पर तो सर ये मुझे तो ऐसा लगता है की सिस्टम ही बंद करना चाहिए जो राज्य सभा में हम ये देते हैं। एक्टर एक्ट्रेसेस को अरे आप 1 चीज समझिए अगर कोई क्राइटीरिया पैरामीटर होना चाहिए बिल्कुल होना चाहिए अगर आप जिले का आईएस बनना चाहते हैं आपको 1 इतना लंबा चौड़ा प्रोसेस तैयारी का उसके बाद एग्जाम का गुजरना पड़ा है को 10 लाख बच्चों के साथ कंप्लीट करना है कम्प्लीट करना पड़ता है तब जिला चलाने के योग्य समझे जाते हैं और उसके बाद भी समझिये आप उसके बाद कोई दूसरा काम नहीं कर सकते। यहाँ क्या हो रहा है यहाँ रवि किशन जी 2 चुटकुले संसद में सुना कर समौसा छोटा और बड़ा कर के उधर आईफा में नाचने चले जाते हैं। आप समझ रहे है प्रधान मंत्री जी को मौका नहीं मिल रहा है नहीं तो वो बॉलीवुड में भी ट्राई कर ले जिस हिसाब से उनको मेकअप से लेकर सारी चीजों की आदत पड़ गयी है। तो यहाँ पर लोग 22 काम कर रहे हैं की आपने रवि किशन जी को कितने दिन संसद में सुनाया है कि वो बोल रहे हैं। उन्होंने कुछ सजेशन दिए वो पॉलिसी मेकिंग करेंगे, कंगना जी, पॉलिसी मेकिंग करेंगे और आजकल जितना नेताओं में एग्रेशन देखने को मिलता है। मोदी जी, खुद अग्रेशन में आकर कितनी सारी बातें बोलने लगते हैं। इस तरीके से तो देश नहीं चलाया जा सकता। लीडरशिप का मतलब आपने टीम बनानी थी। 1 कोई मंत्री आप मुझे बताइए सोच के जिसको मोदी जी ने चुना है और वो वाकई में अच्छा काम कर रहा है। अब आप कहेंगे गडकरी जी थोड़ा सा अच्छा काम कर रहे है। बट गडकरी जी को मोदी जी ने नहीं चुना है। पहली चीज वो तो कभी नहीं चाहते की गडकरी जी रहे हैं सत्ता में बाकी और कोई आपके दिमाग में तो बताए सा क्यों मतलब उनको शायद लगता है कि आदमी मेरा कंपटिटर है या इसकी भी फैन फॉलोइंग है मोदी जी जो आदमी अपने साथ किसी को कैमरे के फ्रेम में नहीं देख सकता। अच्छा सर ये मोदी और योगी वाली जो कांस्परेसी चल रही है कि मोदी जी चाहते है की भाई योगी जी का जो थोड़ा कहा पार्टी में थोड़ा कमी रहा ये भी सही है। मोदी जी, मैंने कहा इतनी ज्यादा है की वो ये सोचते है। आप इससे पता लगता है न आपका एटीट्यूड की आप कैमरे में किसी और को आने पर आपत्ति जताते हैं। यानि की आप ये चाहते है की मैं अकेला रहूँ बट ये देश 1 अकेले ऐसे नहीं चल सकता। इस तरीके की सोच ऐसी नहीं चल सकता था कि आयंदा हीरो। जब आप प्रधानमंत्री हो, आपके पास 500 पैतालीस एम पी है, आप उसमे से 24 अच्छे लोगों को निकाल कर के अच्छे विभाग नहीं दे पाये हैं। शिक्षा मंत्री की बात कर लेते हैं। क्या शिक्षा मंत्रालय सही हाथों में है? बिल्कुल भी नहीं सुना कभी। शिक्षा मंत्री ने शिक्षा पर बहुत अच्छे से बात की हो। यहाँ परीक्षा। पर चर्चा मोदी जी कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री का घास चलेंगे, फिर अगर परीक्षा पर चर्चा। इतनी ही जरूरी थी। मोदी जी करेंगे भी कैसे चर्चा। अभी जैसे क्या होगा? जिस राज्य में चुनाव होगा, सिर्फ परीक्षा में चर्चा वहीं होगी। दिल्ली का बच्चा एग्जाम नहीं दे रहा, उत्तर प्रदेश का बच्चा एग्जाम नहीं दे रहा। इससे पता चलता है न कि मोदी जी के बारे में की जो सोच है वो यहाँ से पता चलती है। रेल मंत्रालय के सही हाथों में। रेल मंत्री को आपने देखा होगा। कभी कंबल का उद्घाटन करते हैं रेल मंत्रालय की वेबसाइट जो रिजर्वेशन किया जाता है, वो आज भी अटक रही है। हालत यह है कि आप कभी भी रिजर्वेशन कर लीजिये। वेटिंग वेटिंग का चक्कर, ये सब कंफर्मेशन का मतलब बहुत ही रेयर चांस है। कि आपको मिले फिर ये कहते हैं, हमने इतनी ट्रेनें चला दी, हमने ऐसा कर दिया। रेलवे के खाने में भी थोड़े दिन पहले मैं 1 न्यूज पढ़ रहा था कि कितने गन्दे तरीके से रेलवे में खाना परोसा जा रहा है, बनाया जा रहा है। रेलवे में क्या सुधार हुए। अगर आप से मैं पूछूं की। पिछले 10 सालों में अगर आप देख के बता पाए हैं कि रेलवे में, सच में, वाकई में कुछ बहुत अद्भुत सुधार हुए हैं। कुछ इंस्टीट्यूशनल रिफॉर्म तो होने ही हैं। कुछ कुछ चीजें तो होनी है, उन्हें आप नहीं रोक सकते। अब आप इसको भी रिफॉर्म में जोड़ेंगे की। मोदी जी आज से 10 साल पहले 65 साल के 75 के हो गए। तो कुछ चीजें तो अपने आप हो नही है। उनको छोड़ दीजिये। बाकी ऐसा कुछ अद्भुत काम नहीं किया है स्वनीवेश्नफजी ने। सेवाएं सके मोदी जी के नेतृत्व में। आज हमारी रेल भारत से नेपाल में घुसते हुए चाइना पर अटैक कर ही है। ऐसा तो कुछ उन्होंने कर नहीं दिया है। कि बहुत पटरियां बिछा दी है, बहुत अच्छे टनल बना दिए हैं। बहुत सफाई होने लगी है। अब लोगो को इतना वेटिंग नहीं करना पड़ता। फिर लोग कहते हैं अरे नहीं, तुम बेवकूफ हो। क्या? भारत की जनसंख्या देखो, जनसँख्या चाइना की भी बहुत ज्यादा आज देखो चायना। कहा निकाल रहा है। चाइना ने अपनी इमेज पलट के रख दी है। कल जब मैंने अपने इंस्टाग्राम पर अनाउंस कर आने वाले है मेरे पोडकास्ट पर तो मैंने 1 क्वेश्न बॉक ड्रॉप कर दिया था, मैंने जो आपको कोन पूछ ये बहुत आसान है, आजकल जितने भी पोडकास्टर है वो कहते है की हम क्यूँ रिसर्च करे, क्यों मेहनत करे, अरे हम बता देंगे की भैया ये रहा आपने कुछ पूछना है तो बता। 2 अब लोग नहीं बट, मैं अपनी जनता से चाहता हूँ, वो भी सवाल पूछे, इसलिए मैंने पूछा ठीक है तब ठीक है। मैंने रिसर्च करी ब उनसे पूछा की आप क्या पूछना चाहते हो? तो। 1 भाई साहब ने मेरे को बड़ा कमाल का क्वेश्चन भेजा तो मैं पूछ रहा हूँ आपसे वो कह रहे है की सर आजकल मोदी के पीछे पड़े हुए हैं, सर आजकल विपक्ष के पीछे पड़े हुए हैं, सर करंट गवर्मेंट के पीछे पड़े हुए है, सिर नेता बनना चाहते हैं, सर आप चाहते हैं, वाकई में की राजनीति में उतरे नहीं, राजनीति में उतरे भी तो किस पार्टी से उतरे मुद्दा इजेक्ट मुझे, आज इतनी चिंता देश की नहीं होती है, अगर मुझे लगता कि ठीक है कोई बात नहीं अच्छा लोकतंत्र चल रहा है 4 साल की तो बात है मोदी को हटा कर दूसरी सरकारें आ जायेंगी, कोई दूसरा अच्छा पीएम आ जायेगा, देश फिर तरक्की से पड़ेगा, मुझे आज यह है कि इन लोगों ने जो जो बेंच मार्क सेट कर दिए, इन लोगों ने जो जो चीजें घटिया की वो आगे आने वाली सरकारें भी दोहराएंगे तो क्या होगा मेरा डर इस बात का है तो मैं भी किसी को भी ऐसा नहीं देखा रहा हूँ, भगवान करे कोई ऐसा है कि आय जो इनके जैसी चीजें न करके सच में के लिए पूछ रहा है की भाई आप अगर आपको मौका मिले तो आप राजनीति में आगे सिर मौका कौन देगा। तब मैंने तो सारी बारे में बता दिया मौका मुझे खुद ही लेना है है कि मुझे जाना है या नहीं जाना है। तो मुझे ऐसा लगता है कि मैं यहाँ बैठे बैठे भी ठीक काम कर रहा हूँ, मैं सवाल पूछ रहा हूँ, बता रहा हूँ की देश सही दिशा में नहीं जा रहा, मिलियंस लोग तक यह बात पहुँच रही है तो मैं अपना काम बढ़िया कर रहा हूँ, बाकी आप देखेंगे जैसे की ये नकली वाला काफी पहले उठाया और लगातार उठाया तो उसके बाद वही मुद्दा राघव चड्ढा जी ने पर्लियामेंट में उठाया तो पारलियामेंट तक बातें तो पहुँच रही है। हम लोग यह कोशिश भी करते हैं जो और भी बहुत अच्छे अच्छे एमपी जो उन तक अपनी बात पहुँचा के और उनको कहते हैं कि आप ये चीजें संसद में उठाओ तो यह मेन काम ही होता है, आपको क्या लगता है सिर पॉलिटिक्स में यंग लीडर्स क्यों नहीं आ पा रहे हैं यहाँ पर, मैं अपने हिसाब से बोल लेता हूँ, मेर को 10 मिनट बोलना है, पंद्रह मिनट बोलना है वहाँ तो मरला जी कर देंगे, 3 मिनट है आपके पास, फिर बोलेंगे आप इस टॉपिक पर नहीं बोल सकते हो, फिर बोलेंगे आप इस टॉपिक पर नहीं। बोल सकते, फिर बोलेंगे आप बैठ जाओ, मैं आपका माइक ऑफ कर दूंगा, फिर बोलेंगे की आपको रिकॉर्ड में नहीं रखा जायेगा, यहाँ तो कम से कम मैं बोल रहा हूँ तो रिकॉर्ड में जा रहा है तो यहाँ ज्यादा अच्छा काम कर रहा हूँ, बाकी वक्त बताएगा जैसे आप बात कर रहे हो। वैसे भी मैंने जस्टिस मारकंडे जी का कास्ट करा था तो उन्होंने यही बताया देश में लीडरशिप है या नहीं मुझे नहीं पता डिक्टेटर शिप स्टेम पूरी चल रही है, सहमत हो डिक्टेटर से पूरी चल रही है तो नहीं बोलूंगा मैं ऐसे बहुत नहीं बोलता हूँ, मतलब बहुत तानाशाही चल रही है, बट हाँ ये है की अगर कोई भी सरकार की आलोचना कर रहा है तो सरकार उसे सुन नही रही है। सरकार का कहना है हम सोशल मीडिया देखते नहीं है मैं। तो इस बीच में भी जब यह प्रोटेस्ट हुआ तो कई सारे लोगों से मुलाकात हुई सरकार के से उनका साफ़ कहना हम नहीं देखते हैं। सोशल मीडिया क्या हो रहा है। अब कितना कौन चीख रहा है, चिल्ला रहा है तो और टीवी देखते है, वो टीवी पर गुणगान हो रहा है। मैंने आपको विकास दर बताना भूल गया था, मीडिया की भी विकास दर साढ़े 600 परसेंट क्यूंकि सब मोदी जी का गुणगान कर रहे हैं और अच्छे से कर रहे है। सब विभाग बेखौफ बिज सरकार की तरफ दारी कर रहे है, वो सरकार का नेरेटिव चला रहे है। बेसिकली पत्रकार से ज्यादा सरकार के प्रवक्ता बने हुए है, अगर 25 परसेंट टैरिफ है तो 25 परसेंट टैरिफ के फायदे गिनाने लग जाती हैं, जिन का अगर अट्ठारह परसेंट हो जाता है तो 18 परसेंट के फायदे गिनाने लग जाते है। लेकिन ऑनलाइन की दुनिया है यहाँ पर क्या होता है न कि आपने 1 घंटे बुलाया है तो उसकी कोई भी 30 सेकेंड या 40 सेकंड से आप किसी को भी गुमराह कर सकते है, मैनुपुलेट कर स कते है जैसे की राहुल गाँधी की आज भी बहुत लोगो को नहीं पता होगा की वो जो आलू और सोना डालने वाली बात है वो ये है जैसे मैं भी आपके पोडकास्ट पर ये बोलूं आप ऐसा नहीं करना, मैंने ये बोला की आपने जैसे कहा न की आपने नाम लिया मार्केंड काजू साहब का, तो मैं ये कहूँ की उनका ऐसा मानना है कि भारत में तानाशाही रही है, उनका मानना हटा कर क्या लिख दिया भारत में। तानासाही चलरहैबिनेशशर्मा ने कहा तो वो लोगों के पास चला गया और वो मिलियन लोगों ने देख लिया कि क्लियर करते रहे, मैंने नहीं बोला था, उन्होंने बोला था, मैं कोर्ट कर रहा था इस बात को जैसे आपने बोला आपने कोर्ट की वो बात तो ये ये बड़ी प्रॉब्लम है की आप किसी भी तरीके से उस चीज को मेनुप्लेट कर देते है, सोशल मीडिया के दौर में लोग वो चली जाती है, मतलब देश का मैक्सिमम, युवा, ब्रड सब सोशल मीडिया की गुलामी में ही तमिल 12 लाइन रील शाटऐसीहमारादिमाग घूम जा रहा है, दिमाग चेंज हो जा रहा है। आपने सवाल पूछा कि ताना सही चल रही है, नहीं चल रही है। तो मैं उसे कहा हाँ ये नही कह सकते की पूरी सदर रही है, बट हाँ इतनी जरूर चल रही है कि आज आप गलत अगर आवाज उठाएंगे तो सरकार ढीट हो गई है। वो उसको ठीक करने पर नहीं सोचेगी, उसका कोई जवाब नहीं आएगा कि अगर ऐसा कुछ हुआ है, किसी ने गलत बोला है, सही बोला है। पहले ये होता था कि किसी सरकार के मंत्री ने कुछ भी बात बोल दी तो सरकार ये कहती थी पार्टी यह कहती थी कि हम इससे रिश्ता तोड़ रहे है, नाता तोड़ रहे हैं, इनके अपने बयान है। अब वो सब भी बंद हो गया, आप देखो न मनोज, तिवारी जैसे लोग कुछ भी बोल के चले जाते हैं, कभी नहीं आता की नहीं भाई ये अब हमारी पार्टी के नहीं रहे, इनको बोलना नहीं आ रहा है, अब ये सब कुछ भी नहीं होता है। तो ये भी 1 तरीके से तानाशाही का ही रूप है की आप अपने लोगो का बचाव कर रहे हैं। वो गलत है, सही है कोई मतलब नहीं, देश की जनता परेशान है, किसी भी बात से तो आपका कोई जवाब उसे नहीं आ रहा। जैसे स्टूडेंट इतने परेशान थे। एग्जाम सिस्टम को लेकर, पेपर को लेकर दूसरा जो तानाशाही के भी बहुत सारे रूप होते हैं। जैसे जब न्याय सत्ता की जेब में चला जाए, जो चला गया है, बहुत हद तक चला गया। आप देखिये न जिस राजस्थान में जिन जज साहब ने अडानी के खिलाफ बयान दिया उनका ट्रांसफर कर दिया। आपने संबल जो डी एस पी थे उनके खिलाफ एफ आई आर की उस जज का ट्रांसफर हो गया। यानि आप ये चाहते हैं कि न्यायपालिका आपके हिसाब से न्याय दे। यही तो हो रहा है। आज बहुत बुरा लगेगा सुन कर के कि मुझे ऐसा लग रहा है कि भारत में सभी न्यायपालिकाओं को बंद कर देना चाहिए। आप सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही रखिये मैं वजह बताता हूँ। 1 बच्चा अगर परेशान हो कर कैट जाता है की जी मेरे साथ गलत हुआ है, एग्जाम सिस्टम में तो कैट 1 फैसला दे देती है। ठीक है अब वो फैसले से बच्चा ना खुश है, वो हाई कोर्ट चला जाता है। हाई कोर्ट ने वो फैसला पलट दिया। अगर कैट ने लगातार ऐसा हो रहा है कि कैट ऐसे फैसले दे रहा है जो हाई कोर्ट को पलटने पर रहे है तो फिर कैट की क्या जरुरत है या फिर हाई कोर्ट लगातार ऐसे फैसले दे रहा है जो सुप्रीम कोर्ट को पलटने पर रहे हैं तो फिर हाई कोर्ट की क्या जरुरत है। 1 केस में अलग चलता है आपका हर फैसला ऐसा हो रहा है और आज सुप्रीम कोर्ट के हालात ये हो गए है माननीय सुप्रीम कोर्ट के हालत की अगर कोई मुद्दा बहुत चर्चाओं में है, मीडिया में है तो वो उसे गहनता से सुन रहे हैं, तब तक सुन रहे है जब तक मुद्दा चर्चाओं में है। उसके बाद आपको पता चलेगा। अभी आपको पता होगा ये एस एस सी वाला जो मुद्दा था रिफॉर्म वाला। यह सुप्रीम कोर्ट गया और उस टाइम एस एस सी का मुद्दा बहुत गरम था, पीआईएल हो गए, पीपल सरप्राइज सुप्रीम में हुई तो फॉर्म होके रहेंगे। आपको पता है पिछले, वीक 34 हेरिंग होने के बाद उसको डिसमिस कर दिया गया, ये कहते हुए कि ये तो बहुत बड़ा मुद्दा है, सुप्रीम कोर्ट इसमें कुछ नहीं कर सकता। आप एस एम बली में उठाइए, ओके ये कर दिया गया। 2023 का रिजल्ट आता है और उसमें 78 सवाल एस एस सी गलत पूछती है, गलत आंसर देते है, बच्चे इसको लेकर के कैट चले जाते है, कैट में कुछ फैसला आता है, उसके बाद हाई कोर्ट चले जाते हैं। जब पक्ष में फैसला नहीं आता, कैट कह देता है कि नहीं नहीं ये एस एस सी का एकेडमिक मामला है, हम कुछ नहीं कर सकते, बच्चे हाई कोर्ट जाते हैं, हाई कोर्ट 1 साल तक सुनता है और ये फैसले पर पहुंचता है कि 1 सवाल पे। वो एग्री करता है कि 1 सवाल का आंसर वाकई गलत दिया, 1 सवाल मतलब, 4 नंबर कितने सारे लोगों की नौकरी गई होगी। और वो कहता है कि एस एस सी आप इस रिजल्ट को रिवाइज करिए। 2023 की बात कर रहा हूँ। एस एस सी रिवाइज नहीं करते। 1 तरफ बच्चे कंटेम्ट ऑफ कोर्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट जाते हैं, ये बेंच ने दिया था, फैसला की भाई एस एस सी कम्पलाई नहीं कर रही। दूसरी तरफ एस एस सी उसको चैलेंज करने के लिए जाती है कि हम ये नहीं कर सकते। अब रिजल्ट रिवाईज और फिर ये मामला सुप्रीम कोर्ट में लगभग 1 साल चलता है। 1 वीक पहले डिसमिस कर दिया गया की बेस्ट ऑफ लक। जो लोग कोर्ट में थे, पिटिशन उनको बेस्ट ऑफ़ लक बोला गया, सोचिए जिस बच्चे का आखिरी अटेम्ट था, जिसकी आखिरी उम्मीद थी, जिसके परिवार का आगे आने वाला जीवन इस पर निर्भर था, आपने बेस्ट लग बोल के डिस्मिस कर दिया की अब कुछ नहीं हो सकता, क्यूंकी प्रोसेस बहुत आगे बढ़ गया है हो इस रेसपंसिबलकीप्रोसेस आगे कैसे बढ़ गया, आपके नाकामियों की वजह से की कैट ने 6 महीने चलाया, हाई कोर्ट ने 1 साल चलाया और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में लगभग 1 साल चला, कैसे आगे बढ़ गया, प्रोसेस आप ले लेते, पहले दिन ये डिसीजन आज कैट यह क्या देता है। अगर कोई कमीशन गलत सवाल पूछता है की हमारे हाथ बंधे हुए हैं, एकेडमी में कुछ नहीं कर सकते, 2024 में से हुआ, 19 सवाल गलत पूछे गए, बच्चा कैट गया, कैट में डिसमिस हो गया, कैट में हो गया की भाई नहीं हो सकता, कुछ बच्चा हाई कोर्ट गया, हाई कोर्ट ने ये तो पता होगा की कैट ने डिसमिस कर दिया, तभी बच्चा हाई कोर्ट आया है, मामला भी पहले ही रिंग मे ही पता चल जाता, इतना सिम्पल ही है की गलत सवाल है। हाई कोर्ट ने सोना 78 महीने और अब डिसमिस कर दिया कि आप कुछ नहीं कर सकते कितने दुख की बात है, क्या कर रहे हैं, माननीय कोर्ट आपने क्या किया इससे आपने एस एस सी को यह लाइसेंस दे दिया की तुम 25 में और 40 सवाल गलत पूछा, तुम 26 में, 50 पूछना, हम तुम्हारे साथ खड़े हैं। 1 बच्चा आज अपनी ही चुनी हुई सरकारों से, उनके आयोगों से लड़ रहा है, आप सोचिये और कोर्ट क्या कर रहा है, सुनने के बाद डिसमिस कर दे रहा है। मैं चाहता हूँ की मेरी आवाज हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचे। आज हम ये सोच रहे है की हम सी जी आई के साथ सामने पिटिशन लगाए की अगर ये ही होता है। हर बार ये कह देंगे की प्रोसेस आगे बढ़ गया, अब कुछ नही सकता, प्रोसेस आगे बढ़ गया, अब कुछ नहीं हो सकता। तो इसमें हजारों लोगों का जिनके भविष्य के साथ गलत हुआ, उनको न्याय कहाँ मिलेगा। अब आदमी सुप्रीम कोर्ट से ऊपर कहा जाए। भगवान कहाँ जाने का रास्ता बता दीजिये। ये जो एस एस सी में गलत, सवाल पूछने का जो ये चलता आ रहा है, चलता आ रहा है। यह सिर्फ इसलिए है कि पैसे कमा सकते। पहले पैसे कमाने के लिए था, अपने लोगों को भर्ती करने का तरीका होगा। कुछ तो है न की 1 पेपर ठीक नहीं बना पा रहे। अगर आप सौ सवाल ठीक नहीं बना पा रहे हैं, आप 90 सवाल ठीक नहीं बना पा रहे तो लानत है। ऐसे कमीशन पे भंग कर देना चाहिए। उसको और मेरी समझ में नहीं आता। हाई कोर्ट ने भी 2024 वाले मामले में बोला कि हमें मालूम है, कैट ने भी बोला कि बहुत गलत हुआ है, चेयरमैन साहब ने भी बोला बहुत गलत हुआ है, कैट ने भी बोला बहुत गलत हुआ है, हम कुछ नहीं कर सकते। हाई कोर्ट ने भी बोला बहुत गलत हुआ है, हमारे हाथ बंदे हुए है। आज कैसे यह कह रहा है हाई कोर्ट की, हमारे हाथ बंदे हुए हैं। चलो मैं हाई कोर्ट की बात मान लेता हूँ। सुप्रीम कोर्ट के हाथ क्यों बंधे हुए थे कि उसने ये सरकार के खिलाफ जो बच्चे केस लेके गए थे, आयोग के खिलाफ जो बच्चे केस लेके गए थे, उसको डिसमिस कर दिया। मैं चाहता हूँ कि लोग इस मुद्दे को उठाया है। और यह बहुत चिंता का विषय है कि आज अब आप सोचिए ये हिम्मत टूट गए की बच्चा आज की बात नहीं, सोचेगा की या गलत होगा। तो वो सह के बैठ जाएगा। किस देश में रह रहे है हम और हम विकसित भारत और 1 अच्छे भारत की कल्पना कर रहे हैं, जहाँ हज़ारों लाखों लोगों के साथ हर साल अन्याय हो रहा है, तो ये बड़े दुख के विषय है। और 1 बच्चा कैसे कैसे पैसा जमा करता है। चलिए अभी कुछ सालों से तो मैंने इतने सारे केसेस लड़े पैसा लगाया जो सेम गल्ती एसएससी ने पिछले साल की, हम कैट में गए, रिजल्ट रिवाइज कराया, इस साल फिर सेम गलती की, फिर बच्चों को मौका दिलाया मेंस देने का। ये लगातार गलती कर रहे हो करेंगे। इनको तो कैट से क्लिनचिट मिल जा रही है। ठीक है, गलती हो गई। कोई बात ही थोड़ी सी फटकार सुनी क्या फर्क पड़ रहा है। हाई कोर्ट से थोड़ी डांट फटकार सुनी क्या फर्क पड़ रहा है, सुप्रीम कोर्ट ऐसी डाफटकरसुनीक्या फर्क पड़ रहा है। 1 बच्चा जो ले बैठा था की अगर 1 सवाल पर भी फैसला आता तो शायद हो सकता है, कुछ बच्चे। और हम तो ये कहते है की जो सेलेक्ट हो गए, मत छेड़िए उनको सरकार के पास ऐसा तो है नहीं की वेकेंसी बहुत कम है, आप कहीं उनको कहीं तो एडजस्ट करिए क्यूंकि उनका आखिरी अटेम्ट था, उनकी आखिरी उम्मीद थी, आपने उस आखिरी उम्मीद के लिए क्या करा। आज वो बच्चों के पास कोई ऑप्शन ही मुझे कॉल करते हैं। अभी देखिये इस बच्चे का भी जो कॉल आ रहा है, सिम कहानी है की सर अब क्या हमें करना चाहिए। अब जिन बच्चों का 2024 वालों का हाई कोर्ट से डिस्मिस हुआ है, वो सुप्रीम कोर्ट जाने में डर रहे है, उनको दिख रहा है कि यार 23 वालों का कुछ नहीं, हमारा क्या होगा यानि गलत हो रहा है। गलत सह के रहो मैं जैसे देखता हूँ की में भी ऐसी बात करता रहता हूँ, तो बड़ी बहस होती है, गर्मा गर्मी होती है, कभी दोस्तों से बात हो गयी तो गर्मा गर्मी हो जाती है। ऐसा लगता है की सरकार की जितनी गलती है, उतनी ही गलती शायद सिटिजेंस की भी है की हमें अपने हकों के बारे में भी नहीं पता, पुलिस स्टेशन जाते हैं, मैं खुद देखता हूँ लोगों का बिहेवियर अभी मेरे भाई का थोड़े दिन पहले एक्सीडेंट हो गया था, मेरे फादर ने मेरे भाई ला कर रहा जाकेट। मैंने अपने फादर ऐसे बोला कर देते है। मेरे फादर का जो आंसर था, उसको सुनकर भी मुझे ऐसा ही लगा। उन्होंने यही बोला की जाएंगे उधर, एफ आई कौन करेगा, किसी से फ़ोन करवाना पड़ेगा, किसी को मैसेज करना पड़ेगा, और क्या होगा? यानी उन्होंने उस खराब सिस्टम को इतने साल देखा है। हिम्मत हार गए। वो की ये सिस्टम कभी ठीक होगा। मैंने उनसे सिर्फ यही बोला। मैंने कहा यह हमारा हक है, जो उस इंसान जो रिप्रेजेंटेशन है, जो रिप्रेजेंटेटिव थाने, का, उसका हक हमारा हक बनता है कि वो हमारे लिए काम करे, वो हमारे लिए बैठा है, सरकार उसको हमारे लिए सैलरी दे रही है न कि हमारे को डराने के लिए। बिल्कुल बिल्कुल ऐक्चवली मुझे ऐसा लगता है की ऐसा होता है न की आप आपके घर में चोरी हो जाए, आपको उसके एफआईआर कराने के लिए 45 चक्कर थाने, के काटने पड़ेंगे ये हालत है हमारे यहाँ, सिस्टम में, ये प्रॉब्लम है, हमारे सिस्टम में, तो इसलिए आपके पिताजी को लगता है, और ये आपको आपका हक पता होना चाहिए था, ये सारी चीजें ठीक चले। हमारे यहाँ क्या है, हर चीज में करप्शन है। आपको पैसा पकड़ना, आपके दिमाग में सेट है की आपको पैसा पकड़ाना है तो आपका काम होगा, पैसा पकड़ना है तो आपका काम होगा। हर चीज के लिए। अब सोचिए आपको जाति प्रमाण पत्र बनवाना है, आपको ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना है, हर जगह पैसा है, सरकारों को नहीं पता है की पैसा है, आप तो ये कह रहे थे डिजिटल इंडिया कैशलेस इंडिया है सब कुछ खत्म कर देंगे, फिर भी रिस्ते खत्म नहीं हो रही। आप ये छोटी छोटी चीजें सोचिए आप योजना ला रहे हैं, उसमे घोटाला हो रहा है। प्रधानमंत्री विकास कौशल योजना में 10 हजार करोड़ का घोटाला है, 10 हजार करोड़ का घोटाला है। आप पढ़िए गूगल करिए। अच्छा सामने तो आता नही आया है, का की रिपोर्ट करी है, सी जी की रिपोर्ट सामने लाने का देते है ने साफ़ कहा है की जो भी पीएम फण्ड में पैसा है उसका हिसाब किताब नहीं दिया जा सकता। मना कर दिया। ये वही फण्ड है जो जब कोबिड आया था तो रिलीफ के नाम पर हम लोगो ने प पीएम फंड में पैसा डाला था की देश के हित में लगेगा अब ये कह रहे है की वो हिसाब नहीं दिया जा सकता, यह तानाशाही का ही रूप है यानी कल को आप ये कहो कि सुनो मैंने पैसा कमाया है। इनकम टैक्स को इतनी हिम्मत ही है कि वो मेरा स्टेटमेंट मांग सके। आज इनकम टैक्स आपसे आपका स्टेटमेंट मांग सकता है, जीएसटी से आपका स्टेटमेंट मांग सकता है। आप कितना कमा रहे है। 11 रुपए का हिसाब सरकार को रखने का हक आपका और पी एम फण्ड का नहीं है। क्यूँ भाई पीएम फण्ड का हिसाब क्यों नहीं मांगा जा सकता। मैं नहीं सीएजी की रिपोर्ट में आना चाहिए था, कहा पैसा वो ये कह रहे है कि लोगो ने अपनी स्वच्छ से दिया था। अगर लोग किसी को भी अपनी स्ेच्षाऐसीपैसा दे तो वो बंदा हिसाब नहीं देगा, ये तो कमाल का मजाक है। फिर आप कैसे कह रहे थे अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी को विदेश से फंडिंग मिली है। लोगों ने स्वेक्षा से ही दी। आज कोई मुझे ये लड़की बैठी है। 3 करोड़ रूपए दे दे आप, 6 करोड़ रूपए दे, 2 आप, 10 करोड़ रूपए दे, 2 मतलब। और इनकम टैक्स का सुनो आपको हिसाब नही मिलेगा क्यों न अपनी स्वेक्षा से दिया है। ये कौन सा लॉजिक है ये दिया। पीएम ने लॉजिक अभी जो ये लॉजिक दिया है सेम लॉजिक, वोट चोरी में भी दिया था। से की जब उन्होंने कहा कि हमें ये पूरा इसका इनक्वैरी चाहिए, जितनी भी मशीनें है सारी चीजें तो उन्होंने मना कर दिया की हम नहीं दे सकते है। वो जो ये सी सी टी, वी मांगने की जो बात सी सीटी उधर औरतें आती हैं वो वोट देती है। ट्रांसपेरेंसी आप बढ़ाने आये थे, ऐसा कहा गया तो इतना ट्रांसपेरेंट सिस्टम कर देंगे की 1 रूपया इधर से उधर नहीं होगा, हम चौकीदार की तरह काम करेंगे। और यहाँ तो सब कुछ इधर से उधर हो गया। अभी यू जी सी भी ला रहे थे, वो तो सुप्रीम कोर्ट ने भी रोक लगा दी है, अब वो ये ऐक्चवली क्या होता है न कि इनको पता है की यह सब वोट बैंक का मामला है। हम यू जी सी लायेंगे तो हम ओ बी सी एस सी एस टी का दिल जीतेंगे। अब हमें लग रहा, अपरकास्ट भारी हो रही है तो हम उधर से सुप्रीम कोर्ट से रोक लगा देंगे तो सब ये आपस में ही कर रहे हैं। ये जिस चीज पर चाहेंगे उसी पर रोक लगेगी ऐसा नहीं है। क्या आप यह सोच रहे है की किसी भी चीज में खुद से इंटरव्यू होकर रोक लग गयी तो वो कहने वाली बात रह गई है। अरावली पर्वत पे फैसला आया, खूब गलत आया और तमाम सरकार और सरकार के लोग लगातार ये मीडिया तक की ये फैसला अरावली को बचाने के लिए है। जब लोग बहुत अड़ गए लोग उसकी एक्सप्लेनेशन देते रहे परफेक्सिलिटीऔरचैट जी बी डी सी निकाल निकाल गए की ये हित में नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट ने इंटरव्यू किया और उस पर रोक लगा दी। मैं कहता हूँ की ऐसे लोगो से दोबारा सवाल पूछो की भैया अब आप बताइए ये सवाल पूछने वाली जो चीज है ये खत्म हो गई है। मुझे ऐसा लगता है जिस हिसाब से शायद 1 अच्छा कदम जरूर हुआ की डिजिटल इंडिया मूवमेंट चली। उसमें सबके हाथ में इन्टरनेट का एक्सेस आया और ये ने सुनो सुनो। फिर आप गलत जा रहे हो। ज की मतलब डिजिटल इंडिया नाम देने से भी आप दुसरे लोगो की बात कर रहे थे। अब आपका कहना है कि मोदी जी ने डिजिटल इंडिया नाम दिया था इसलिए सबके हाथ में एक्सेस आ गया। इंटरनेट का ही। इसमें मोदी जी का कोई योगदान मोदी जी को इंस्टीट्यूशनल रिफॉर्म भाई सा आना ही था मैं मोदी जी को ही आप बताओ न आप। 2014 में हम और आप बैठ के पोडकास्ट कर रहे होते तो क्या हम ये कहते है की मनमोहन सिंह जी को इस चीज का तो क्रेडिट देना पड़ेगा की 2000 5 के बाद सबके हाथ में मोबाइल फ़ोन्स आ गए। वो आने ही थे, आने ही थे, कुछ चीजे तो आनी ही थी। बात 1 चीज सर इस 1 चीज में बता रह हूँ सर इसका 1 फायदा हुआ जो इन्टरनेट का एक्सेस आया है। लोगों के हाथ में चाय इन्टरनेट हमारे देश में बहुत सस्ता है। मैंने काफी सारी फौरन कंट्रीज में ट्रेवल कर। इन्टरनेट बहुत एक्सपेंसिव है। बहुत ज्यादा बात हमारी कंट्रीज में कम्पिटिटिव बहुत ही सस्ता है। नाक के बराबर है इससे 1 फायदा। तो मुझे लगता है सिर होगा की जब से पॉडकास्ट बनेंगे या ऐसे काफी सारे लोगो को वो देखेंगे तो मुझे लगता है उनके लिए इंटेलिजेंस आएगी क्यूंकि पेइंग। टैक्स में गवर्नमेंट को इनकम टैक्स दे रहा हूँ। मैं गवरनमेंट को जी एस टी दे रहा हूँ। मैं तमाम तरीके के जितने भी टैक्स देता हूँ। मुझे बदले में कहीं पर भी बहुत अच्छी सुविधा नहीं मिलती है। न मेरे को अच्छा क्वालिटी इंडेक्स है मेरे पास। लेकिन आपने बड़ी सही बात कही है मैं इसे थोड़ा सा बोल आप कुछ कह रहे हैं तो कैलीजेसनहींनहींआप बोलो है। ठीक है। मैं ये कह रहा हूँ कि 2014 पंद्रह 16 में हम लोग इन्टरनेट कम यूज करते थे, करते थे तो इन्टरनेट थोड़ा महंगा था। अभी बहुत यूज कर रहे है और लोगो को भी पता है कि इतना पैसा तो लोग नहीं दे पाएंगे। इंडिया में जितना जी ये लड़की दिन भर का 12 जीबी का रील देख लेती है। अगर आप इसको उस टाइम 2014 पंद्रह के हिसाब से 300 रुपए पर जीबी मांगोगे 36 सौ रूपए नही द तो अब 2 ही ऑप्शन है। मेरे पास किया तो ऐसी कंपनियां है जो इन्टरनेट सस्ता कर दे तो विदेशों में लोग इन्टरनेट के लिए पागल भी नहीं है। मैं आपको बता 2 ठीक है। अब बात क्या है कि इन्टरनेट सस्ता हुआ, सरकार के बी एस एन एल ने सस्ता नहीं किया यह बात मानता है। अब मानी जी ने सस्ता किया हो क्या रहा है कि ये जो प्राइवेटाइजेशन का दौर है जिसमें आप देखते होंगे की बहुत सारे लोग प्राइवेटाइजेशन के खिलाफ रहते है। मैं नहीं हूँ बट मैं भारत के प्राइवेटाइजेशन के खिलाफ पूरा हूँ। अच्छा क्यूँ क्यूँकि प्राइवेटाइजेशन अच्छी चीज है लेकिन तब तक जब तक की सरकार का कंट्रोल उस शेष पे है। आज भारत का, भारत सरकार का कंट्रोल नहीं है। वो हमने देख लिया, इंडिगो वाले में है। इंडिगो ने जैसे चाहा वैसे जनता का काटा सरकार आँख नहीं दिखा पाई। इंडिगो को है आग दिखा देती। सरकार कैंसिल कर देती है, उसका लाइसेंस कुछ और कर देती है। क्या कर रहा है सरकार मोनोपोली तो ये जो भारत में प्राइवेटाइजेशन हो रहा है, यह मोनोपोली वारा हो रहा है। आप कहेंगे कैसे सरकार सिर्फ अडानी को बहुत सपोर्ट कर रही है। थोड़ा बहुत अंबानी को क्या आपने देखा की बीजेपी सरकार में कुछ और भी बिजनेस मैन पनप पाये आपको नोएडा का 1 बड़ा अच्छा बिजनेसमैन। अब मैं अच्छा आदमी बता रह हूँ, भाई आप लोग कहें कि उसने बिजनेस मैं खराब किया, अच्छा किया नहीं पता। अच्छा आदमी जे पी गौर आज बिकाऊ है। सरकार ने कितने उसके लोन माफ किए। सरकार चाहती तो उस बिजनेस मैन को भी पनपने देती। बट। आज हालत यह है कि उसकी 1 कंपनी की बिड डाली गई और उस बिड में अडानी सहित ज्यादा पैसे भी भरे थे। उसके बावजूद भी अडानी को वो बिड मिली है। अच्छा अडानी ने टेक ओवर कर लिया। जेपी का आधा साम्राज्य नोयडा ग्रेटर नाडा के अन्दर यानि यहाँ क्या हो रहा है कि जो पुराने बिजनेसमैन भी है, जो निबटते देख रहे हैं उनको सरकार का सपोर्ट न दिख रहा है। सरकार चाह रही है कि अडानी को ही ये भी ले ले। उधर अडानी की मोनोपोली हो रही है। इन्टरनेट आप बताइए। आज के बाद जिस हिसाब से जियो है, अभी जियो थोड़ा और सस्ता कर दे, थोड़ा सा सस्ता कर दे। 20 30 परसेंट अमानी जी, आपके फायदे की बात सुन लीजिये तो एयरटेल और बी एस एन एल और ये सब रोड पर आ जायेंगे और इनको बंद करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं होगा। हो सकता है जिओ एक्वायर कर ले यानी आप सोचिए देश का प पूरा इन्टरनेट सिस्टम कौन हैंडल कर रहा है। अम्बानी न, जिस दिन भी चाहेगा न आपकी लंका लगा देगा। आप कुछ नहीं कर पाएंगे। पूरा देश रोक देगा पोली हो गई। आज पूरे देश में बिजली 1 ही आदमी बना रहा है। सबसे ज्यादा और सबसे बढ़िया वो है गौतम। जिस दिन चाहेगा उस दिन आपके घर में 1 साथ अंधेरा कर देगा। तो ये जो मोनोपोली हो रही है और प्राइवटाइजेशन जो हो रहा है। लेकिन सरकार की जो इससे कंट्रोलिंग जा रही है ये चिंता का विषय है। सर ये ये, ये तो है ही क्योंकि इस देश में जितने इस देश के 10 सबसे बड़े बिजनेस मैन उनके पास उतना पैसा है, जितना इस देश के 140 करोड़ लोगों के पास नहीं है। मैं तो हमेशा कहता हूँ की भारत में तो बिजनेस मैन अपने आप से बनी नही, गौतम बड़ा नीम बहुत बुद्धी है। आपको लगता है की इन्होंने बहुत कुछ काम किया, टेक्नोलॉजी में बहुत काम किया, चलो देश की सरकारें नहीं कर पाए, यही लोग टेक्नोलॉजी में कुछ अच्छा कर लेते है की उन्होंने कुछ बहुत नया कर दिया, भाई ऐसा कुछ नहीं है तो वह गरीबों से सस्ती सरसों खरीदी उन्हीं को महंगा। तेल बेच अडानी ने इसके अलावा कोई बहुत अच्छा काम अडानी नहीं किया और अडानी की ग्रोथ बता रही है। हमें यहाँ लगता है बैठे बैठे अडानी की बहुत ग्रो हो रही है, बहुत हो रही है। लेकिन जब आप एलन मस्क को देखेंगे तो बच्चा है न, वो होती है की बंदे ने स्पेस में जाने का सोच लिया, वहाँ रहने की व्यवस्था बना रहा है। अगला यहाँ हमारे देश में लोग जमीन पर मकान नहीं ढूंढ पा रहे है, वो लोग चाँद पर मकान ढूंढने की बात कर रहे हैं कि कितना बड़ा अंतर है। आप सोचिए हम यहाँ और हम भी बात कर सकते हैं, बहुत की यार हम सोच सकते हैं। आज हमें तो एलन की बात करते हुए शर्म आनी चाहिए क्योंकि हमारे यहाँ तो दिल्ली हमारी राजधानी है, वहाँ मेट्रो स्टेशन से लेकर के और कश्मीरी गेट अड्डे पर तमाम लोगो को आप जमीन में ठंड गर्मी में सोता हुआ देखेंगे है। हम तो अभी अपने सारे देश वासियों को घर नहीं दे पाए हैं। है 80 करोड़ जनता गलत तो नहीं बोला 80 करोड़, 80 करोड़ जनता आज भी हमारे यहाँ राशन पर पल रही है और हम अचानक ऐसी सोच रहे है की विकसित हो जायेंगे तो ये बड़ा खराब लगती है। ये सब बात है की हमारे देश की सरकारों की, नीतियां की वो सस्ती जमीन पार्टी फंड में पैसा। जो ये करप्शन हो रहा है उसी से तो पार्टी फंड 33, सौ 26 परसेंट की ग्रोथ पर आ गया। क्वाली सब पार्टी का तो दूसरा मोटी भी यही है की इन 5 सालों में ऐसा कुछ करना है ताकि अगले इलेक्शन को जीत पाए। सिम्पल सी बात है उनका मोटो यही है उनके लिए तो ये गेम लेकिन आप देश खोकला कर रहे, आप जीतते रहोगे, जीते रहोगे और ये देश की जनता आंख बंद करके देखती रहेगी, आप देश को खोखला करते जाओ। हर देश की, देश की, जनता की हार है, सिर है जो वोट दे रहे हैं वो भरोसे पर वोट देता है, हर आदमी, हर आदमी भरोसे पर वोट देता है। बट इन्होंने जैसी इमेज बना ली। जिस तरीके की नोकिया इन्होंने करना चालू किया हमारे देश के प्रधानमंत्री को। आप देखिये न कि किसी देश के प्रधानमंत्री को आप नहीं देखेंगे। जो इतना ज्यादा मंदिरों में है और ये रहता है और रहते ठीक है यार आपको वक्त मिला आपने महीने में 1 ट्रिप लगा लिया, हम लोग भी जनरली यही करते हैं। महीने में 1 तीर्थस्थल चले गए, दर्शन कर लिए ये नहीं की उसका प्रचार प्रसार में 34 दिन लग रहा है, अलग अलग एंगल से फोटो खींचा जा रही है, अलग अलग ड्रेस अप किया जा रहा है। आप देश के बारे में सोच कर रहे हो भैया 1 डिसीजन तो आप बताओ कि आपने देश के बारे में यह सोचा है। आप कुछ नया ले आये हो। आज आप सोचिए जो पुरानी आई आई टी थी आपको बता कुछ नई आई आई टी खुली है आप उनकी इमेज बताओ आपके दिमाग में क्या है क्या आई ई टी कानपुर को टक्कर आई ई टी इंदौर दे पा रहा है। लोग कहते है अच्छा ऐसे देखेंगे आपको जो बात आई टी कानपुर की तो हम जो आई टी हमारे पास पहले से थी, जो हमने नई बनाई है वो हम उस स्तर की नहीं बना पाये। तो हम नीचे गए या पीछे बताइए आप पीछे ही गए हम मतलब वही मैं कह रहा हूँ की एम्स नहीं बना पाया सर जो पहले थे 26 बने हुए उतने हम आज नहीं बना पाए। आज भी में कैसी लाइन लगती है। अरे विकसित देश के लिए सबसे जरुरी एजुकेशन और हेल्थ है। आप एम्स की बात कर रहे हो आप किसी भी यहाँ के लोकल बड़े हॉस्पिटल में चले जाना। मैक्स फोटिस बहुत सारे लाइट हॉस्पिटल है। हॉस्टल इतने महंगे इस मजबूर है, है जाने के लिए सही बात है क्योंकि प्राइवेट हॉस्पिटल में आपको मौका ही नहीं मिलेगा, उसमे तो बहुत तगड़ी जुगा सब चाहिए एम्स की। आज भी हालत यह है, मोदी जी आप आये हो, आपको शर्म आनी चाहिए आप कभी एम्स की तरफ से निकल के देखो की बंदा रात के 2 बजे से आकर रोड पर सोता है, लाइन लगती है, गरीब दूर से आ रहा है, रुकने के पैसे नहीं है। तब शायद कहीं मौका मिलेगा और एम्स में भी आजकल बड़ा करप्शन चल रहा है, वहाँ भी अगर आपको सस्ता इलाज कराना है तो डॉक्टर्स करप्शन कर रहे है। ऐसी सी चीजे सामने आई है की डॉक्टर पैसे ले ले के ठीक है। आपको ऑपरेशन की डेट मिलेगी आपको नहीं मिलेगी क्यूंकि आपने वैकेंट पे थोड़ा पैसा भर दिया है। वहाँ अलग लेवल का करप्शन चल रहा है। और ये तो करप्शन रोकने आए थे, ये तो ट्रांसपेरेंसी लेने आये थे इसलिए उन्होंने नोटबंदी की थी, पर कुछ हुआ नहीं है, कुछ हुआ नहीं, बिल्कुल कुछ नहीं। यार हेल्थ में कोई सुधार नहीं है भारत में। आपने देखा की वो एच आई बी का बलि चढ़ा दिया था, कितने सारे लोग एचआईवी पॉजिटिव हो गए। मध्य प्रदेश में। तो ये तो ऐक्चवली मुझे लगता है इंस्टीट्यूशन का क्लब्स बहुत है, इंस्टीट्यूशनल जो सर्विसेज चल रहे हैं, कमीशन वो वो वो कोलाब कर गए। है, बात क्या है यार हमारा मीडिया भी उस तरीके से सवाल नहीं रखता है। नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है की भारत में सिर्फ 6 परसेंट लोग ही टेप से निकला पानी पी सकते हैं। इतनी बड़ी जनता में 6 परसेंट लोग पूछते हैं, कभी किसी मिनिस्टर से सवार हो रहा है इसमें 70 परसेंट वाटर। कंटेमटेटेहै आपको पता है सिंगापुर की हालत बहुत खराब थी, हम क्या सीखते है मोदी जी बड़ी बड़ी बातें करते हैं, परीक्षा पर चर्चा और ये वो फलाना डिम का क्या सीखा? आपने सिंगापुर से की भाई सिंगापुर ने कैसे अपनी नदियां पवित्र की। मैंने तो यहाँ तक पढ़ा रिपोर्ट में सुर्जललैंडकीभीबहुत बुरी स्थिति थी, 1 टाइम पे, उनका भी काली नदिया थी, उन्होंने कितना शुद्ध कर लिया सब कुछ, हम तो उस डायरेक्शन में नहीं है, हमारी तो गंगा सोचिए, ये वो देश है जहाँ पर नदियों को पवित्र नहीं कहा जाता, जहाँ पर नदियों को माँ नहीं माना जाता। हमारे यहाँ गंगा माँ है, यमुना माँ है सोचिये वहाँ हमारी नदियों की हालत यह है, इतनी गन्दी हैं की वो तैरने लायक तक नहीं है, उसका एम पी एन 82 हजार से ज्यादा है जो कि 25 सौ से ऊपर ही होना चाहिए। तैरने के लिए सर मुझे तो उसे ऐसा लगता है कि एजुकेशन का उसमे बहुत बड़ा लैक है। क्यूँकी सौरी तो से ये तो मेरे अन्दर भी होगा, आपके अन्दर भी होगा, हमने करा होगा, कभी न कभी मैं ये नहीं बोलूंगा, हमने नहीं करा होगा। इंडियन लैक सिविक्स इंडियन आप कहीं पर भी देखोगे लकनसविकसकआरस्ते में गाड़ी हो, आपकी गाड़ी में कुछ गिर गया, हम ये जरूर करते है, अपनी गाड़ी तुरंत साफ़ कर लेते हैं, पर बाहर फेंक देते हैं। वो चीज आपने गलत नोटिस किया है, बाबू मैं आपको बताता हूँ, आप जाइए। यूरोप के किसी भी देश में, हर पंद्रह कदम 10 कदम पर आपको, 2 डस्टविन मिलेंगे, 1 केला, 1 सूखा यहाँ मिलते है, क्या लोग क्या करे सर लोगों की मजबूरी है आपने दी क्या वो सुविधा, आपने सिखाया, क्या वो सिविक्स, स्कूलों में डस्टविन इतना ज्यादा होने चाहिए। आप बच्चा तो स्कूल से ही सीख के आगे बढ़ता है न कुछ नही गा कहाँ ऐसी वो सिविक्स 11 चीज मैं आपसे बात करना चाहता हूँ, 1 चीज तो है की कम भी है, यह तो है ही देखो सिर कम है, बट मैं तो 1 चीज ये देखता हूँ, चलो सरकार लगा भी देती है, सरकार कहीं न कहीं मैं देखता हूँ की कुछ न कुछ कर रही है, लगती है कुछ करे आपको। 1 एग्जांपल ऐसी समझाता हूँ आप एग्री करोगे। मेरी बात सुनो आप जिस दिन अपना रूम साफ़ करते हो, बहुत साफ होता है, क नम्बर दिन आप अगर 1 कागज भी फोड मोल्ड करके फेंकना हो तो कहाँ फेंकते हो उस दिन 1 दिन जिस दिन आपका रूम बहुत गंदा पड़ा है। 34 दिन से आपने तैयारी की होगी तब आप सब कागज को कहाँ फेंकते हो। मैक्स तो गन्दा पड़ा ही है। तो प्रॉब्लम इस डेट की जब आप नोएडा से ग्रेटर नोएडा जा रहे हैं तो उस रोड पर रास्ते में खुद इतनी गंदगी है। तो आपको लगता है की मेरे 1 बोतल से क्या होगा। आलरेडी इतनी धूल है, उतना कंस्ट्रक्शन का सामान पड़ा हुआ है, कोई रोड बनी है तो तो बात क्या है कि जिन देशों की हम बात कर रहे हैं वो देश खुद इतने साफ और स्वच्छ है की हमारी आँखों में खुद शर्म आ जाती है। नहीं भाई ये यहाँ तो नहीं फेंकना, फिर तुरंत दष्टि दिख जाता है। तो यहाँ पर हमें यह चीज, यह अंतर भी समझना होगा। आज ये बहुत चल रहा है, मैं देख रहा हँ सोशल मीडिया पर की बहुत सिविक सेंस, सिविक सेंस चल रहाहै की भारत के लोगों में से ऐसा नही, भारत के लोग सबसे ज्यादा इंटेलीजेंट, सबसे ज्यादा इमोशनल और अच्छे लोग हैं। भारत के ऐसे ही हमने मोदी साहब को इतने साल से बर्दाश्त नहीं कर लिया और अभी भी मौका दे रहे है की नीनी कुछ सुधार करो, अभी भी उन्हीं से रिक्वेस्ट कर रहे हैं तो ऐसा नहीं कर सकते कि आप भारत के लोगो के पास अच्छे लोग हैं, अच्छा कर रहे हैं। बात बहुत सारी जगह वो परेशान है, वो फ्रस्टेट है की काम नहीं हो रहा, बी ए करके खाली घूम रहा है, बेरोजगार है, उसको गुस्सा आता है भाई साहब देश के सिस्टम पर, उसको बाद में समझ में आता। 1 बच्चा जो ट्वेल्थ के बाद बी ए करता है मैं सच बता रहूँ, उसको नहीं पता होता की वो बी ए करके बेरोजगार घूमेगा। अब तो चलिए इतना सोशल मीडिया हो गया, प के दौर में बी ए हो जा रहा है, एम ए हो जा रहा है। आज उसको पता चलता है यार बी, एम ए वालों के लिए कहीं कोई जॉब नहीं है, है नहीं तो सरकार बी ए और एम ए बंद क्यों नहीं कर देती। ये प्रॉब्लम है की आज बहुत सारी ऐसी डिग्रियां हैं जो बिल्कुल काम नहीं आ रही है, क्यूकि हमारी डिग्रियों में कोई स्किल नहीं है, कोई नोवेशन नहीं है। रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर सरकार पैसा नहीं खर्च करते, उनको पता है की 5 साल बाद सरकार चेंज हो गई तो इसका क्रेडिट कोई और ले जाएगा। इस क्रेडिट कोई ये लोग कहते हैं देश भक्त है। मैं नहीं मानता कि मोदी जी भी देश वक्त है, मैं एकदम नहीं मानता, मैं आपको बता दू, मै बीजेपी पार्टी के कार्ड कोई हो क्योंकि मैं भोटोंऐसीमिला नहीं, लेकिन जो मैं दूर से देख कर सोच पाता हूँ। तो मैं नहीं मानता कि लोग देश भक्त है, देश वक्त की ये परिभाषा नहीं है। देश वक्त मतलब आप जहाँ हर चीज। आज मोदी जी अपने भाषण में चुनाव में रो देते है। आज आपको बता दूं कोविद में मोदी जी बोलते थे, देश सुनता था, मोदी जी ने बोल दी थाली, बजाओ तो लोगों ने बजाई सब कुछ किया, आज समझ में आता है की आप हमारा काट रहे थे, आज समझ में आई न ये बात तुम मोदी जी चाहते तो हर 1 स्थिति बता सकते थे की देश आज यहाँ हैं, देश आज यहाँ है जो मोदी जी दूसरी सरकारों को क्रिटिसाइज कर के जब सत्ता में आये थे की मैं जानता हूँ ऐसा होता है, मैं जानता हूँ ऐसा होता है। वो पार्टियों का डेटा, मैं आपको बताता हूँ। पढ़ के आप देखिये, 2000 4 में कांग्रेस के पास अड़तीस करोड़ रूपए थे और बी जे पी पी के पास अठासी करोड़, 2000 9 में कांग्रेस के पास 221 करोड़, उन्होंने भी फंडिंग ली होगी। और बी जे पी के पास डेढ़ सौ 2014 में 390 करोड़ तक पहुँची थी। कांग्रेस और बीजेपी 295। 2019 में कांग्रेस तो खत्म ही हो गया सुपड़ा सब उसकी बात नहीं करते। बी जे पी की सुनिए 35 सौ 62 करोड़, 2024 में 10 हजार 100 7 करोड़। तो मोदी जी को ये नहीं दिखा। ओगा की पार्टी फंड में इतना पैसा कहाँ से आ रहा है और क्यों आ रहा है। मोदी जी ने ये नहीं कहा। पार्टी फंड में बहुत ज्यादा पैसा आ गया है। यह पैसा 10 हजार 100 7 करोड़ की तो बिल्कुल जरूरत नहीं है, क्यूँ ही जरुरत है, पूरा देश मेरा है, सब मुझे चाहते हैं, प्रधान मंत्री तो मैं ही चुटकी बजा के डब्लू बजाके बन जाऊंगा। मैं यह 10 हजार 100 7 करोड़ में से 8000 करोड़ इस चीज के लिए दान करता हूँ या 2 यूनिवर्सिटी बनाता हूँ या 2 एम्स बनाता हूँ कर देते है। वो भी कुछ तो ऐसा नहीं दिखा कि देश भक्ति में लगा दिया। वो पैसा लोग कहते है की मोदी जी ने 18 18 घंटे काम किया, उस 18 घंटे में 14 घंटे। तो उनके यहाँ पर कमल के फूल का बैनर लगा हुआ होता है। इसका मतलब है कि आप छुट्टी पर और लोग कहते है प्रधानमंत्री जी ने कभी छुट्टी नहीं दी। अगर आप अपनी पार्टी के लिए काम कर रहे, मतलब ही छुट्टी पे जो आप ये चुनावी रैलियां करने जाते हो। ये छुट्टी पे ही तो होता है। प्रधान मंत्री वो देश की भलाई के लिए जा रहा है क्या उनको तो देश की दादी न यह कहा गया था कि नहीं हर राज्य में तुम सरकार बनाना ऐसा तो नहीं कहा गया था। तो मोदी जी खुद के लिए इतने एम बी सी एस खुद जब कि मोदी जी को सोचो सब कुछ मिल गया। 2 बार प्रधान मंत्री किसी भी प्रधान मंत्री से ज्यादा बार प्रधानमंत्री रहने का सपना पूरा हो गया। ट्विटर पर सबसे ज्यादा फॉलोवर हैं, इतने नहरू के नहीं थे और इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा फॉलोवर विराट कोहली के ज्यादा थे, उसने अपना डी एक्टिवेट कर दिया। तो अभी इन्ही के सबसे ज्यादा है तो मेरा मतलब यह है और भी 1 आद के होंगे। अब श्रद्धा कपूर को मैं नहीं जोड़ रहा हूँ यहाँ पर, ठीक है, मैं लड़कों की बात कर रहा तो मेरा मानना यह है की सब कुछ तो मिल ही गया था इस देश ने, इस देश की जनता ने दिया था। अब किस चीज का इंतजार है। आप देखो इनके 62, 2015 में मुझे 2 साल दे, 2, फिर की मुझे 50 दिन दे, 2, 2019 में फिर क्या मुझे 2026 तक दे। 2, 26 आ गयी, मुझे 27 तक दे। 2 अरे हमने तो सब 29 तक दिया हुआ है। आपको आपको सिर्फ। 1 दिल्ली बहुत बड़ी लग रही है, राज्य है, कैपिटल है छोड़ दीजिये आप किसी जिले को विकसित करके दिखा दीजिये, यहाँ पर शुद्ध हवा है, शुद्ध पानी है, हेल्थ फ्री है, एजुकेशन फ्री है, स्कूल का स्ट्रक्चर और हेल्थ का स्ट्रक्चर। किसी भी प्राइवेट स्कूल जैसा है। बस इतना करके दिखा दीजिये। हम समझ जायेंगे की वाकई में हम विकसित भारत की राह पे ओपन चैलेंज है। ये एकदम ओपन चैलेंज बिल्कुल आप इतना करके दिखा दीजिये। दिल्ली के स्लम रि या तो अभी तक ठीक हो नहीं पाये, आप गोपालपुर चले जाइए। मुखर्जी नगर के पास है, इतना इतना पानी भरा रहता है कितने सारे एरिया है जहां इतना इतना पानी भरा हुआ है। ऊपर से ये लोग कहते हैं अरे पुरानी इनको सिर्फ बहाने बाजी करनी है। सारी सरकारों को पुरानी। सरकार ऐसा करके चलेगी थी इसलिए कुछ नहीं हो पा रहा है। सच्ची तो यह है ही नहीं, सच इनके अन्दर ऐसी खत्म हो गया है। सिर्फ देश का बेड़ा ग्रह कर रहे है। और जो लोग इनकी अंधभक्ति में बिजली है मैं उनको भी कहना चाहता हूँ वो भी देश भक्त नह, उनको देश नहीं दिख रहा है, उनको भी देश नहीं दिख रहा है। वो आगे जाके कभी उनको देखे तब समझ में आएगा क्योंकि देश वक्त तो नहीं हो सकते। और जो देश भक्त है वो अंधभक्ति कभी नहीं कर सकता। वो जब भी चाहेगा तो ये जरूर एनालिसिस करेगा, इवैलुएट करेगा की हम सही दिशा में है या नहीं। कोई आपने डायरी ऐसी 1 नहीं पूछा, इससे भी तो नहीं जो पहली बार में 1 टीचर को इतना क्रांतिकारी स्पीच देते हुए सुन रहा हूँ या ऐसी बातें करते हुए है। बाकी तो क्या है सरकारों से अवार्ड ले कर के और सरकारों की तारीफ कर रहे हैं, बस लगे हुए हैं सरकारों की तारीफ करने में। सब यहाँ पैसा बना रहे हैं। बस और कुछ नहीं है कि बस पैसा बनाओ किसी को न। देश की चिंता है। जो लोग हैं बड़े बड़े बिजनेस मैन, जो टीचर थे वो भी बड़े बड़े बिजनेस मैन बन गए तो उनको भी पता है की कंपनी को प्रॉफिटेबल रखना है सरकारों की ई, डी, सी, बी, आई इन सब से बचना है। तो आप सरकार की तारीफ करते हैं, बे बजे सरकार की तारीफ करते है। मैं देख रहा था कोई 1 अटैक के बड़े टीचर है वो पता क्या करे की सरकार ने जब जब हमें जरूरत पड़ी तब तक हमारी मदद की है। आप सोचिए ऑनलाइन एजुकेशनल सर्विसेज देने वाले प्लेटफार्म जो टैक्स से चलते हैं उनको सरकार क्या हेल्प करेगी। आप बताओ सरकार तो खुद टैक्स बाहर से खरीद रही है। आईटी सर्विसेज बाहर से एक्वायर कर सरकार क्या मदद करेगी। अच्छा सरकार ने यही मदद करी की कभी हमें छेड़ा नहीं, कभी उसके इनकम टैक्स ने हमें टॉर्चर नहीं किया, कभी उसकी इडी ने हमें टॉर्चर ही। शायद यही होता होगा मदद का मतलब। मैं जो समझ पा रहा हूँ, हम बेवजह सरकारों की तारीफ कर रहे हैं। सोचिये वैकेंसी जो आती थी सरकारी एग्जाम में भी, वो भी साल के बाद आनी चाहिए थी, और आती थी आज 77 साल बाद आ रही है, 7 साल बाद कोई एग्जाम होता है। फिर लोग कहते है की आप सरकारी नौकरी के पीछे क्यों पड़े रहते हो, भाई सरकारी नौकरी लोगों को क्यों मिले? अरे तो प्राइवेट दे। 2 भाई आपने कोई स्किल दिया है स्किल योजना में, तो आपके हाँ 10 हजार करोड़ का घोटाला हो जाता है। ट्वेलमिलियनलोगपासआउट होते हैं ट्वेल्थ क्लास, से एंड ट्वेल मिलियन में से हाफ मिलियन जॉब क्रिएट होती है इलेवन प्वाइंट फाइव मिलियन। हर साल जो है वो बेरोजगार हो जाता है, अनइम्प्लॉयड हो जाता है, अनइम्प्लॉयड हो जाएगा। वही मैं कह हूँ अक्चललीकाहैकीप्राइवेट इंडस्ट्री नहीं आ रही है, प्राइवेट इंडस्ट्री आये तो उस हिसाब से सरकारी नौकरियां भी बढ़ती है, जॉब क्रिएट नहीं हो पा रही है। किसी भी डायरेक्शन में क्यूँकी सिर उसके पीछे भी 1 रीजन है। मैं आपको बताता हूँ, मैंने ये महसूस कर, मेरे पास जिंदगी में थोड़े पैसे है, मुझे लगा मुझे बिजनेस करना चाहिए, मैंने बिजनेस खोला तो मैंने ऐक्चवली पहली बार फील करा की आज तक जो मेरे घर में लोग थे वो क्यों मना करते थे। मुझे बिजनेस में जाने के लिए क्यूँकि जो बिजनेस का इको सिस्टम है। यहाँ पर बहुत टफ है, आप कल कंपनी चालू कर सकते है, आपको कंपनी चालू करनी है, आपको पहले उससे जाकर परमिशन लेनी पड़ेगी, उससे जाके परमिशन लेनी पड़ेगी और जो उधर बैठा है वो आपको कहेगा परमिशन ले के आओ क्यूँकी वो चाहता है की उसको कुछ बिल्कुल ऑफर करो। तब खुलेगा सही सही बात है सही बात। उसके बाद इतनी सारी। अब तो लाइबिलिटी आ गई है की आप प्रॉफिटेबल बिजनेस बनाने की सोचने के लिए बहुत मुश्किल हो गया है। 2 और ट्रेड 1 सिम्पल ट्रेड मार्क लेने के लिए 2 साल का वेट 2 उसके बाद थ्रेड मार्क, 1 बार में आज तक किसी को मिला तो बताओ वो पहली दूसरी बार में कैंसिल होता है। उसके लिए आपको 1 वकील खड़ा करना पड़ता है। और वैसे आप कहते हो डिजिटल इंडिया सब कुछ डिजिटल हो गया है। अब बाहर से कोई कंपनी सिर, आना भी चाहे, यहाँ पे कुछ करना भी चाहे। उसको पहले 10 चीज तो तामझाम करना पड़ेगा, पहले अपना तब बाहर से कंपनी आने के लिए प्रधान। मंत्री जब विदेश यात्राओं पर जाता था तो वो यही बताता था कि हम ये विदेश से डील करके आए हैं, ये करके आय। इससे इतने सारे लोगो को रोजगार मिलेगा। आप बताइए न हमारे प्रधान मंत्री ने 10 12 साल में कभी आँखे किसी विदेशी दौरे के बाद बताया की यहाँ से इतनी बेरोजगारी दूर बेरोजगारी का नौकरियों का सपना। इन लोगो ने बेचा। जो लोग कहते है की क्यों नौकरी चाहिए। तो फिर नौकरी का सपना बेच क्यों रहे हो। तो आप नौकरी का सपना रहे हो। 1 10 हजार कमा लेगा भाई इनकम टैक्स वसूल ने पहुँच जायेंगे और ये उसी इनकम टैक्स का इस्तेमाल कैसे कर देखा। मुंबई में वो रोड कैसे बनाये। पहले लाइन 2 लाइन होगी। ये को हमारे टैक्स के बाद आप हमें दे रहे हो। स्कूलों में बच्चे, मिट्टी में खेल रहे हैं, गवमेंट स्कूलों में प्राइमरी, स्कूलों में मिड, डे, मील में खाना, बच्चों को ठीक से नहीं मिल रहा, बीमार, पड़ गए बच्चे यह सब हमारे टैक्स भरने के बाद चलो। टैक्स का इस्तेमाल भी सही तरीके से होता हो तो भी ठीक था है। टैक्स का पैसा भरने के बाद युवराज लड़का एन डी आर एफ के बाद रस्सी न होने की वजह से मर गया। तो टैक्स लेने आप। तुरंत आ जाओगे। टैक्स के पैसे का इस्तेमाल कैसे होगा वो आपको नहीं पता है, ठीक करना है, सही करना है। तो आजकल एजुकेशनल सर्विसेज या एजुकेशन सेक्टर में भी क्या हो रहा है। स्कूल व पड़े तो हमारे देश के सोचा की टूशन ऐसी पैसा कमाना शुरू करते है। आज टीचर स्कूल में अच्छा नहीं रहा, मैं टयूशन में अच्छा पढ़ा ऐसा क्यूँ है हमारे यहाँ कोई ऑफिसर सैलरी से ही करप्शन से चलेगा सर। आप 1 चीज देखते होगे। आजकल आप बच्चों को पढाते हुए करते हो। एक्च्वालली इंटेलिजेंस तो मुझे लगता है लोगों के अंदर काफी ज्यादा आती है। बट जो 1 इंटलेक्ट माइंड होता है वो नहीं डेवलप होता है। क्यूंकी हमारा एजुकेशन सिस्टम वैसा नहीं है? आपने क्या देखा है ऐसा एजुकेशन सिस्टम में दैट, इंटेलीजेंट माइंड तो हम बना देते हैं। बट इंटेलेक्ट माइंड हम नहीं बना पाते। इंटेलीजेंसी तो खैर बाई बरती होती है और भारत के लोग इंटेलीजेंट हैं। इसमें कोई 2 राय नहीं है। बट वो जो आपने कहा कि हमारे बेसिक एजुकेशन में स्किल नहीं है, जो किताबें हमारे पिताजी ने पढी वो हमने पढ़ी कुछ अपडेट नहीं हो रहा। सिस्टम थोरी थोरी बहुत प्रैक्टिकल नहीं है। जहां सिंगापुर के एजुकेशन सिस्टम को देखे आप और चाइना के एजुकेशन सिस्टम को देखें तो यही बेसिक अंतर है कि वहाँ पर लोगों को पांचवी क्लास में प्लास पेचकस। पकड़ा के वो प्रैक्टिकल उसको इंट्रेस्ट भी आ रहा है। हमारी थौरी जो बेसिकली है, बड़ी बोरिंग होती है तो 1 तो वो पहले से ही बोरिंग है और ऊपर से प्रैक्टिकल है, नहीं तो कहाँ से स्केल। और ये सब चीजें डेवलप हो, नहीं हो रही है। तो आप प्रमोट करते है अपनी क्लास में स्किल्स वगैरह को। मैं तो बिल्कुल करता हूँ। हमारे स्किल कब दे रहे हैं। जब बच्चे ने कर लिए, ट्वेल्थ कर ली, 14 वी पास कर ली, फिर आप ये कह रहे है की बेटा तुम स्किल लो, फिर स्किल सीखने जा रहे है, जा रही है। अच्छा आप क्या देखते हो जैसे टी टी थ्री के बच्चे आते है पढ़ने के लिए उनके क्या स्किल जो मिसिंग होती है उनके अन्दर जैसे आपको लगता है की यार ये होती तो फिर भी यह कर लेता कुछ नहीं। यार आप मल बच्चे की बात कर रहे। यहाँ आप देखो की जो इंजीनियरिंग करके आ रहा है वो बच्चा। आज एस एस सी और यू पी एस सी की तैयारी कर रहा है यानी हम अपने या इंजीनियर्स के अन्दर वो स्किल नहीं डाल पाए या वो एबिलिटी नहीं बना पाये कि वो अपने करियर ऑप्शन खुद से चूस कर सके। उसको इंजीरिंग करने के बाद पता चलता है शिट मेरको तो इंजीनियरिंग करनी ही नहीं थी, यानी ट्वेल्थ क्लास तक तो इतना भी डेवलप नहीं हो पाया था की वो डिसाइड कर सके की उसको इंजीरिंग करनी है या नहीं करनी है। सर हर इंजीनियर को ऐसा क्यों लगता है जितना मेरे दोस्त है कुछ और कर रहा है, कुछ और कर रहा, मैक्सिम यही कर रहे। वही रह। तो यहाँ पर क्या होता है। आप टें ट्वेल्थ करेंगे तभी आपको ये कोचिंग इस्टीट्यूट और इतना इंजीनियर्स और डॉक्टर्स का सपना बेच देंगे। आप बड़ी बड़ी होर्डिंग। पाएंगे ग्रेटर नोएडा नोएडा के अन्दर। यहाँ पर लिखा होगा। फोर सी आर एल पी वो बड़ा अट्रेक्ट करता है जो की 90 यूनिवर्सिटी में 90 बच्चों के बैच से किसी 1 बच्चे को भी नहीं मिल पाता। पैकेज उसको ये लगा देते हैं। बड़ी बात है वो बच्चा जब इंजन में जाता है तो 90 लाख उसके दिमाग में चल रहा है। वो अपना पैकेज सेट कर लेते है। 90 लाख पा किस तरीके से खर्च करने है, गाड़ी लेनी है क्या करना। तो ये जो जितने भी ऑनलाइन एजुकेशन एजुकेशनल सर्विसेज देने वाले लोग है, बेसिकली कोचिंग इंडस्ट्री ऑनलाइन कोचिंग इंडस्ट्री क्या कर रही है। आज डॉक्टर बनने का सपना बेच रही है, टेंथ क्लास से ही बच्चों के माइंड को हाईजेक कर ले रही है। हम तुम्हारा फ्यूचर डिसाइड करेंगे, वी आर द और ऑफ़ योर फ्यूचर, अब तुम्हें टेंथ हमसे पढ़ाहै। अब इलेवन ट्वेल्व पढना। और इसी के साथ आई आई टी की कोचिंग करना। पहले आई आई टी की कोचिंग के लिए भी 1 टेस्ट होता था। वो टेस्ट पास करोगे तो कोचिंग आईआईटी की तैयारी कराती थी, आप कर सकते थे। नहीं अब कोई ऐसा टेस्ट नहीं है, आप छठी लासमें बस आपने पेमेंट करनी है। रेजर के थ्रू आप भाड़ में जाए, उसके बाद आप बन रहे, नहीं बन रहे। कोई मतलब नहीं है। 2 लाख बच्चे आये तैयारी करने के लिए 10 बच् का सलेक्शन हो गया। ए आई आर वन नहीं आई तो उनके पास इतना पैसा आ गया है कि वो आई आर वन को खरीद लेंगे और फिर वो धिंडोरा पीटेगा इस कोचिंग से आई आर वन आई रिक्शा चलाते थे। इसके पापा ओ भाई साहब। फिर जो होगा लाने न तो यहाँ घास छील रहा है, बच्चा डिप्रेशन में आप देख रहे होगे, लगाते बच्चे नीट और जे की तैयारी करने वाले सुसाइड कर लेते हैं। तो ये क्या हो रहा है की सिर्फ सरकार ही गलत नहीं कर रही है और प्यार कर रही है। आप तो खुद ही उस फील्ड में आप लोग नेगेटिव पियार कराने भी आते होंगे। जो नहीं है वो दिखाओ हमें वो ही कोचिंग इंस्टिट्यूट कर रहे है। ये सब लोग भी प्यार कर रहे हैं। सबने भी मोदी जी से बहुत अच्छा सीखा। एक्चवलीएक्च्वल लोगो को तो पता नहीं हमारे यहाँ कंजूमर सर्विस कुछ है ही नहीं, हमारे यहाँ कंजूमर डिपार्टमेंट क्या कर रहा है। 1 बच्चा फीस दे दे उसके बाद फीस रिफंड नहीं हो सकती, ऐसे से रूल्स है। 1 बच्चा भी कोर्ट भी चला गया था। 1 इंस्टीट्यूट के खिलाफ तो ये लोग क्या कौन जाएगा। 1 कोई बच्चे को किसी का सपोर्ट मिल गया तो कोर्ट चला गया। बच्चा सोचता है छोड़ो यार पैसे डूब गए तो डूब गए, कोई रिफण्ड का प्रोसेस नहीं है, बस लूटे जाओ, लूटे जा, पॉवरफुल कहा ही जाए। 9 है तो पता लोग आज ये सोचते है, पता है कि छोटी छोटी बातों पर परेशान हो जाते है, हमारा एजुकेशन सिस्टम खराब है वो शीट आप थोड़े परेशान आपको पता है कौन सा सिस्टम ठीक है वो बताओ कौन सा सिस्टम ये जो ऑनलाइन कोचिंग दे रहे है इनका खुद का सिस्टम खराब है। यह एआई का इस्तेमाल करके सोच रहे है की कैसे बच्चे को लूटा जाए तो हमारे यहाँ ऑनलाइन कोचिंग इंडस्ट्री पर सरकार का कोई कंट्रोल नहीं है, कंजूमर को कुछ भी नहीं कर रही है, आप देखेंगे कि कुछ इनको डर पैदा हो। आपने देखा होगा ये कोचिंग इंस्टीट्यूट है। उसने क्या किया कि उसके यहाँ से पूरी कोचिंग नहीं ली थी। 1 बच्चे ने प्री निकाल दिया मेंस निकाल दिया, सिर्फ इंटरव्यू गाइडेंस ली थी, यू पी एस सी की कोचिंग है। दृष्टि आई तो उन्होंने क्या है की बच्चों को ये दिखा दिया की भाई ये बच्चे हमारे यहाँ से सेलेक्ट हुए हैं, किसी ने शिकायत की तो उन पर 3 लाख का जुर्माना हुआ, आपके ऊपर जुर्माना हो जाएगा का मतलब क्या। पहली बार तो 3 लाख का जुर्माना बहुत कम था, आप जिस हिसाब से करोड़ों में कमाते हैं अभी उनका 390 करोड़ का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा था कि उन्होंने इस साल 360 करोड़ का धंधा किया है तो उसके हिसाब से 3 लाख कुछ भी नहीं है। ठीक है का मतलब होता है जब कोई गलती होती है कि आप भविष्य में ऐसा नहीं करेंगे। यह भी लिखा ही रहता हुआ लेकिन उन्होंने नेक्स्ट फिर से किया फिर उनको 5 लाख का जुर्माना पड़ा, इससे पता होता है की ठीक है छोटे छोटे जुर्माना देते रहो, अपना धंदा बड़ा करते रहो और सोचे उस कोचिंग के अन्दर इथिक्स भी पढ़ाया जाता है। जिस कोचिंग के अन्दर इथिक्स पढाया जा रहा है वो इतनी अनिथिकलहैकी कैसे बच्चों को लूटा जाए। यही दिखा के की हमारे यहाँ से इतने सलेक्शन हो। आप कैसे बचेंगे अपना प्रोडक्ट ऐसे ही बेचेंगे आपका ये कोन जिस दिन भी विकास देवी रहेंगे मैं बिल्कुल पूछेगा की 1 बार जब आपके ऊपर जुर्माना हुआ था तो वो सेम गलती आपने दोबारा क्यों की थी, इसका मतलब की आपका लालच में हित था, आपको मालूम था की इस चीज से बहुत पैसे आते है और ये काम हमें करना होगा, क्यूँ किया आपने तो सारी कोचिंग सी कर रही है, अभी भी कोचिंग का हमने एक्सपोज किया था कि उन्होंने टॉपर्स के अकाउंट में पैसे भेजे तो कोचिंग से भी कर रही है, टॉपर्स के अकाउंट में सीधे पैसे भेज रहे है क्या आपको हम दिखाएंगे कि आप हमारे स्टूडेंट को अपने बस ये बोल रहा हो तो ये जो देश के अन्दर हो, ट्रैक शन मार्केट 1 ही। लेकिन ये अनिथिकलहैएजुकेशन के अन्दर ये और ज्यादा घातक है कि जहाँ बच्चों ने आपको गणित पढने के लिए, फिजिक्स प पढ़ने के लिए, फिक्स पढने के लिए फॉलो किया था और भगवान मान लिया था, आपने उसकी भावनाओं के साथ धोखा कर दिया, आपने उसे इमोशनल अरेस्ट कर लिया। आप जब दिखाते हैं कि गरीब का बच्चा हमारे यहाँ पढ़कर सेलेक्ट हो गया, तब आप वो नहीं दिखा रहे हैं, आप उसकी गरीबी बेच रहे हैं। आपको मालूम है कि इस गरीब को दिखा के आप और कितने गरीबों को अपने जाल में फंसा लेंगे। बेसिकली यह हो रहा है। एजुकेशन सिस्टम के अंदर भी। अच्छा सिर, एज टीचर 1, बेस्ट, एडवाइस बच्चों के लिए लोग बड़ा कंफ्यूज रहते है। अपने करियर को लेकर करियर से ज्यादा तो अरे आज हालत ये है कि टेंथ क्लास के पास होने के बाद बच्चा ये नहीं डिसाइड कर पाता कि उसको कॉमर्स लेनी है। क्या आप टेंट की बात कर रहे है? आप कॉलेज खत्म हो जाते हैं, पी जी हो जाती, जी हो जाता तो डिसाइड नहीं हो ही करूँ क्या यही कर रू, यह नहीं पता हो पाता। वही तो ये वही कमी है जो ये नहीं सिखाया गया की आपको किस स्किल में इंटरेस्ट आता है। जब आप टेंथ क्लास में आपके पास बहुत सारे ऑप्शन्स होंगे तो बच्चा देखता है। अच्छा मैं ये कर सकता हूँ, नहीं कर सकता हूँ और इसमें मुझे मजा आ रहा है, इसे नहीं रहा है। आपने क्या? आपका क्या थॉट है? अगर कोई डिसाइड करने जा रहा है अपने करियर को तो किस बेसिस पर डिसाइड करे? क्या सोचे आज के दौर में किस स्टेज पर पूछ रहे है? आप टेंथ के बाद ट्वेल्थ के बाद सिर कभी भी 1 करियर गाइडेंस नहीं मैं तो 1 ही चीज। कहूँगा की सोशल मीडिया पे भरोसा करके। तो बिल्कुल न करें कि आपने किसी टॉपर्स की स्ट्रैटेजी देख ली, आपने किसी सक्सेसफुल बिजनेस मैन की स्ट्रैटेजी देख ली। क्यूंकी मैक्सिमम लोग सोशल मीडिया पे, क्या बोलेंगे 1 बहरूपिया का फेस रखकर बैठे हैं, चपरासी से लेकर के, प्राइम, मिनिस्टर से, मतलब, ऑलमोस्ट सब कि वो आप नहीं देख सकते कि कैमरे के पीछे की स्थितियां क्या है और कैमरे के सामने की क्या। कैमरे के सामने यह होगा कि तुम मेरे, मैं तुम्हारे लिए हर चीज सोच रहा हूँ, वो सब कुछ झूठा है। आप सोच नहीं सकते हो की कैमरे के पीछे सिर्फ आपको काटने की प्लानिंग की जा रही है। तो इस देश के युवा को, सरकारों, ने, आयोगों, ने, कोचिंग, इंस्टिट्यूट्स में उसके पार्टनर ने, सबने उसका बेचारे का काटा यह तो कट रहा है। वो तो अपने हिसाब से जो आपको ठीक लगता है, हो सकता है कि इस चीज में आपको थोडा वक्त लगे, आप कहीं 1 जगह सफल हो जाए। कोई बात नहीं, 12 साल लेट आप सफल होंगे चलेगा बट आप अपने हिसाब से इन्फ्लूएंस हो के न करे और सोशल मीडिया पर तो आँख बंद करके बिल्कुल भरोसा न करें। जो भी चीजें आप सोशल मीडिया पर देख रहे हैं, जितनी भी चीजें आप देख रहे हैं वो बिल्कुल वैसे ही है जैसे बचपन में बोरो प्लस का देखते थे। करीना को। हमें लगता था करीना कपूर बोरो प्लस लगा के इतनी सुन्दर हो सकती है। तो मैं क्यों नहीं। वो बिल्कुल वैसा ही है। क्योंकि आप खुद ही देख लीजिये जो कार्तिक कार्य स्केचर की सूच पहन रहा है वो वास्तव में तो एलबीगचीकेपहनरहा है। तो सच्चाई कुछ और है। आप जिन मास्टर्स को देख रहे है की सर बहुत गरीब हैं। ये, वो तो आप इमोशन्स में आ जा। ह ै सर ने एक्च्वललीआपको दिखाया यह जरूरी है कि वो ऑटो चप्पल पहन के चल रहे है। बट उसके पीछे सर के पास इतना है की आपकी इमेजिनेशन से परे 1 तो बड़ी अच्छा आपने कोन बना दिया मेरे लिए बड़ा अच्छा कोश्चन है। मैं 1 चीज देखता हूँ जो इंडिया में टीचिंग प्रोफेशन है, इसमें पैसा बहुत कम है, टीचिंग प्रोफेशन में पैसा बहुत कम है। ये अगर मैं टीचर मैं सोचता हूँ, मैं टीचर बनूंगा तो मैं यह नहीं सोच सकता की मैं 1 बहुत हाई फाई लग्जरी, जिंदगी जी सकता हूँ उसके लिए मुझे साइड में बिजनेस बनाना पड़ेगा। बट ऐज प्रोफेशनल। अगर मैं टीचर बनना चाहता हूँ तो ज्यादा पैसा ही नहीं, नहीं नहीं ठीक है जितना पैसा जीने के लिए पर्याप्त है उतना पैसा है किसने कहा देखो टीचर्स या 50 हजार करोड़ की कंपनी बना ले रहे हैं। आप के की टीचर्स नहीं है सिर मैं प्रोफेशनल की बात कर रहा हू, नहीं तो उनके यहाँ जो टीचर पढ़ा रहे है उनके भी अच्छे पैकेज है। 3 करोड़ 4 करोड़ 5 करोड़ टीचर्स के पैकेज ने है। सर वो तो प्राइवेट इंस्टिट्यूशन है। अगर मैं गवरआनंट गवरनमेंट गवरमेंट, अरे मैं तो हमेशा कहता हूँ कि रटीटर्कॉलेजसरऐस है। मैं तो हमेशा कहता हूँ की गवर्नमेंट को टीचर्स को एप्रीशिएट करना पड़ेगा जो उनको एप्रीसिएशन नहीं मिल रहा है। बल्कि आपने तो उनका एप्रीसिएशन छीन लि। 10 से 2 की नौकरी थी 4 घंटे की, ताकि टीचर घर पे जाके। बैठ के पढ़ पाए है। लेकिन आपने कह दिया कि नहीं तुम अब एस आई आर का काम करोगे, तुम अब बोट्स का काम करोगे। हम तुम से पूरे 8 घंटे का काम लेंगे तो हम टीचर्स को टीचर्स रहने कहाँ दे रहे है। ऑफलाइन ये जो ऑनलाइन एजुकेशन इंडस्ट्री है इसमें भी बहुत ऐसा हाल की टीचर से 66 घंटे 88 घंटे काम कराया जा रहा। अगर वो बहुत फे नहीं है तो शोषण तो प्राइवेट में भी हो रहा है, सरकार में भी हो रहा है, दोनो जगह टीचर्स का हो रहा है। लेकिन आपने जैसे कहा की टीचर में पैसा नहीं है। तो मैं आपसे पूछना चाह रहा हूँ की बाकी जगह आप बता सकते हैं। आपको पता आर्मी की जॉब में 4 साल की नौकरी है अगनी वीर में उसके बाद आपको बाहर कर दिया जाएगा। जीएसटी इंस्पेक्टर को भी 70 हजार रूपए मिलते है और 1 टीचर। को भी 70 80 हजार की सैलरी मिलती है। तो ये खाली कहने वाली बात है की टीचर के पास नहीं है और बाकी टीचर्स को कब है। मेरा तो कहना सिर ये है की उनको मतलब ऐसा टीचर जो 1 गाइडिंग फोर्स है हमारी सोसाइटी के लिए, उनकी तो उनको इतना नर्चर करना चाहिए ताकि वो अपना और कॉन्ट्रीब्यूशन अिलकेआाेस्तदे सके। यही मैं कहता हूँ की आपको उनको फ्री माइंड देना होगा की 6 घंटे स्कूल आ रहे, बाकी टाइम आप पढ़ो आपके लिए स्पेशल किताबें भेज रही है सरकार की आप ये किताबें भी देखिये, आपके लिए स्पेशल सेमिनार हो रहे आपको भेजा जा रहा है कि सिंगापुर के एजुकेशन सिस्टम को देख के आइये, आपको भेजा जा रहा आप चाइना के एजुकेशन सिस्टम को देख कर आइये तो सरकारों का ध्यान नहीं है, वो क्या करे, उनका 1 ही काम है, हर आदमी को इसी पर लगा। 2 कैसे रैलियों में लोगों को लेकर आना है, कैसे लोगों को उसको उसका काम मत करने, 2 प्रधान को बोल, 2 तुम्हे लोगों को रैलियों में लेके आना है, कैसे भी लेके आओ, हमें नहीं पता और टीचर्स को बोल। 2 तुम भी बोट में इनवॉल हो, बस 1 राजनीति का ही काम रह गया है, और कुछ है ही नहीं करने के लिए इस देश में खैर छोड़। हमने बहुत बातें की, मेरा मुद्दा यह कोश्चन मैं पूछूंगा कि सर से गुस्से में रहते हैं, अच्छा नहीं, मैं बिल्कुल भी नहीं रहता हूँ, मैं बहुत रिलैक्स रहता हूँ। लोग अब यहाँ पर कमेंट करके भी कह सकते हैं कि 2014 से पहले तुम क्या कर रहे थे, तुम सो रहे थे, या तो उससे पहले मेरे पास प्लेटफार्म नहीं था, मैं तो तब भी बोलना चाहता था। ठीक है 2014 से पहले। ऐसा नहीं है कि मेरे को तब देश की चिंता नहीं थी, उतनी समझ नहीं थी। अब दुनिया भर के देश देखे हैं, दुनिया भर की एजुकेशन पॉलिसी देखी है, देखा है कि चाइना 800 बिलियन डॉलर खर्च कर रहा है, भारत अब जा के सहित पंद्रह 16 मिलियन पर पहुँचा है। एजुकेशन पर खर्च करेगा तो बुरा लगता है, सोचके कि चाइना में भी बहुत पॉपुलेशन है, लेकिन वो उस पॉपुलेशन को सही दिशा दे रहे हैं, और चाइना आगे बढ़ रहा है। हम उस पॉपुलेशन को सही दिशा नहीं दे। या रहे है, हमने सा कर रखा है। हम तुलना करेंगे तो पाकिस्तान से करेंगे की पाकिस्तान में क्या हो रहा है। हम तुलना करेंगे तो भूटान से कर रहे है, नेपाल से कर रहे हैं, बांग्लादेश से कर रहे है। तो हमें तुलना किससे करनी चाहिए, वो खुश रहने के लिए कर सकते हैं। हम की भाई, अच्छा, और ये पाकिस्तान तो नीचे जा रहे हैं। तो मैं ऐसा नहीं सोचता की पाकिस्तान नीचे जाने से मुझे खुशी है। मुझे खुशी इस बात से है की मैं चाइना को कप्पा छाड़ रहा हूँ, जो की अभी देश की दिशा बिल्कुल भी नहीं है। पिछले 34 सालों में हमने सिर्फ, हमारी सरकार है, धर्म की बात कर रही है, धर्म बेच रही है, धर्म को प्रमोट कर रही है, जो उनका काम नहीं है। मेरी श्रद्धा होगी, मैं हर दिन मंदिर जाऊंगा, मैं मंदिर का पुजारी बन जाऊंगा। सुबह सा मैं अपने घर में किस भगवान की पूजा कर रहा हूँ। ये सरकार की इन्ट्रेस्ट की ब बात नहीं है, सरकार ने तो पूरा इंट्रेस्ट बना रखा है, पूरा इंटर बना रखा है। इसी चीज में ये रैलियों में क्या अनाउंस कर रहे है। मैं सुन रहा था, साहस आपकी रैली वो करे थे, यहाँ पर 8000 करोड़ का जान की, माँ का मंदिर बनाया जाएगा, 8000 करोड़, 8000 करोड़ का मैंने सुना के पता नही आजकल आई, वीडियोज भी आ जाते हैं, तो बड़ा बोलने में डर लगता है। ये मैंने सुना की मंदिर यहाँ पर बनाया जाएगा। कभी आप नहीं। अनाउंस नए एम्स बन गए और लोग पता कहते हैं कि बन रहे है, तुम्हे नहीं पता चल रहा है। अरे मुझे नहीं पता चलता। अरे ये वो सरकार है जो 10 रूपए दान करेंगी, लोगों की भलाई में उसका 40 जगह ढिंढोरा पीट देंगे, ये 2 काम करेंगे, उसका सौ जगह पीट देंगे। तो जब कुछ अच्छा बनेगा तुम्हें जानने की जरुरत ही होगी, अपने आप पता चल जाएगा कि देश में सही हो रहा है कुछ, तो अब ये भूल जाओ की सही हो रहा है, सही होगा तो वो सही करने से पहले आपको बता देंगे की क्या सही हो रहा है, ये क्या कहते हैं, रोड्स बनी है। देश में, इस्टिट्ूनलोरोड्स बनाना, सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। क्या मैं इसके लिए तारीफ करूँ। सरकार की जो नहीं हो रहा है उसपर बात करूंगा। जहाँ रोड्स नहीं है, मैं उस पर बात करूँगा, जहाँ रोड्स में गड्ढे हैं, लोग मर जा रहे गिर के। मैं उस पर बात करूँगा। या मैं ये कहूँ की सरकार ने ऐसा किया था जो सरकार की जिम्मेदारी थी, जिसके लिए सरकार को चुन कर भेजा था, उसमें भी सरकार ने जेब से किया था और जेब से करती है। तो सरकार बताये की। मै ये सरकार को चैलेंज करता हूँ कि सरकार अपने पार्टी फण्ड से स्कूलों के लिए कितना दान कर रही है। वो बता दे सरकार। सरकार ने 18 हजार स्कूल बंद कर दिए क्योंकि बच्चे नहीं आ रहे थे। सरकार ने सोचा की हमारे गवर्नमेंट स्कूलों में बच्चे क्यों नहीं आ रहे। बच्चे क्यों प्राइवेट स्कूलों की तरफ भाग रहे हैं। क्यूँ? क्यूँकि हम उसको सरकारी स्कूल में वो इन्फ्रास्ट्रक्चर वो फैसिलिटी नहीं दे पा रहे। गरीब का बच्चा भी सोचता है कि यार बच्चों को पढाने पर तो ध्यान लगा देते हैं। तो आपने सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने पर ध्यान दिया। भारत टैक्स लेते है, सिटीजन सर्विसेस प्रोवाइड हेल्तएजुकेशन फ्री है। अगर आप टैक्स ले रहे हैं, आप तो टैक्स बढ़ाये जा रहे हैं, टैक्स बढ़ाए जा रहे हैं, टैक्स बढ़ाये जा रहे। और मोदी जी जब इस मनोस्थिति से नहीं निकालेंगे कि सब कुछ उन्हीं को करना है। उनका काम ही है कि नीनी रेल का उद्घाटन करेंगे। 1 अच्छे सीओ बेसिकली ही सी ऑफ द। कंट्री उसका काम यही होता है कि उसने अच्छे लोग अच्छी पोजीशन पे बैठा दी और उनकी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय कर दी कि यह तुमको करना है। ये काम बेसिकली मोदी जी का था, जो बिल्कुल भी नहीं दिखता, फाउंडर बन गए। वो कंपनी दिखते हैं। हाँ, वही है, यही डर है कि वो सा फाउंडर नहीं होते हैं। न कहीं जो कंपनी को बेच कर कब निकल जाते हैं। और एम्प्लॉय की क्या हालत होती है, पता नहीं चल रहा। सर ऐसे तो आप इतना गुस्से में रहो सिर बीपी ब्लड प्रेशर बढ़ जायेगा। सर, ऐसा होता है। क्या? कुछ है? अरे नहीं, नहीं, मेरा ऐसा कुछ नही है, मै नार्मल रहता हूँ। मेरा तो बस ये है कि देश सही दिशा में जाए। और मेरा काम यही है कि मैं कोई सत्ता बदलने की बात नहीं करता हूँ। कभी मेरा किसी पार्टी विशेष से ही आओगे, मेरा किसी पार्टी विशेष से मोह है। ऐसा बिल्कुल ही मेरा काम सत्ता को जगाना है। और हम जैसे लोग अगर सत्ता को नहीं जगायेंगे तो ये और अत्याचार लोगों पर करेंगे। क्योंकि बहुत मासूम लोग होते हैं, हम भी बहुत मासूम थे, हमने देखा गाँव से निकल के आ, तब हमें समझ में आया। ये चीजें जब बचपन में क्या होता था, हमारे घर वाले कहते थे इस पार्टी को, तो हम भी उसी पार्टी के हो जाते थे। जब हम पढ़े लिखे, समझा देश, दुनिया जाने तो समझ में आया न कि मेरा व्यू ये है, मेरा ओपिनियन, यह है। तो मैं लोगों को भी यही कहता हूँ की आप अपना इंडेपेंडेंट व्यू रखिये, आप अपना इंडेपेंडेंट ओपिनियन रखिये। ऐसा नहीं है कि किसी ने कह दिया है कि नहीं। हम इसी पार्टी की चालू करते रहेंगे। आप उन नेताओं से सीखे न जो पार्टी बदल रहे है। इतनी जल्दी जल्दी। आप। तो उनको आइडियल मानते हैं, न है बताई उन्हीं ऐसी सीखिए की। देखिये वो कैसे पार्टी बदल के आ रहे हैं, इधर या उधर जा रहे हैं। आप वही रटे हुए हैं, अभी की नहीं। हम तो इन्हीं के पीछे रहेंगे। बाकी मेरा ऐसा सत्ता में आने का अभी कोई प्लान नहीं है, न ही मुझे दिखती है, ऐसी कोई राह दिखती है। अच्छी सॉलिट की मुझे जाना चाहिए। लेकिन यह जरूर है की मैं जब जाऊंगा तो मैं इस तरीके ऐसी नहीं की मैं पढ़ा भी रहा हूँ, फिर मैं सब कुछ छोड़ के राजनीति में जाऊंगा तो उसी दिशा में काम करूँगा। अभी तो बेसिकली मैं दूध वाला काम कर रहा हूँ कि जो भी जनता की समस्या है, उनपर मैं बोल के सरकार तक की कोशिश करता हूँ की हमारी आवाज पहुँच। मैं बोलता हूँ और 4 लोग भी बोलते हैं, या 4 लोग बोलते है, तो मैं भी बोलता हूँ, सब मिलके बोलते हैं, आवाज पहुंचती है तो पता चलता है की ऑलेजनोटवेलऑलेज है, कॉलेज है, है, है, कमाल बात है, सर आप। 1 चीज बताइए इस देश के टीचरों के लिए कोई एडवाइस टीचर्स को मैं यही कहूँगा कि जो जो भी पढ़ा रहे हैं तो वाकई में उन टीचर्स की बात कर रहा है जो स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। जो ऑनलाइन आजकल यू ट्यूब पर जो हमें दिख रहा है कि यू ट्यूब टीचर्स और रीशेपिंग द इंडियन न्यू तो वैसा बिल्कुल भी कुछ नहीं है क्योंकि व्यूज कैन नोट डिसाइड लाइव, वॉचिंग कैन नोट डिसाइड कि दे, आर डूइंग बेस्ट पहली चीज आज वायरलिटी का कॉन्सेप्ट है हर आदमी वायरल होने के लिए काम कर रहा है तो वायरल तो दीपक कलाल भी है, उर्फी जावेद भी है और राखी सावन भी है लेकिन उनको फिल्मों में अच्छा काम नहीं मिला तो वायरल होना सब कुछ नहीं है। वायरल आप किस चीज के लिए है ये मायने रखता है। तो आज यू ट्यूब टीचर्स तो बेसिकली इसी चीज के लिए काम कर रहे हैं कि वायरल ही हो तो अच्छा है किस चीज के लिए हो रहा है इससे मायने नहीं है मैं 2 ही चीजों के लिए सोचता हूँ की वायरल हो या तो मेरा कोई गणित पढ़ाया हुआ चीज वायरल हो की मैंने कुछ नया खोजा तो मुझे बहुत खुशी मिलती है या फिर मैंने आपके पोडकास्ट में कुछ बातें बोली है और ये वायरल हो तो मुझे लगता है कि देश की सरकार तक बात पहुंचेगी शायद उनके कान में कुछ आवाज आएगी कि नहीं कुछ गलत हो रहा है सही हो इसी चीज के लिए मैं सोचता हूँ कुछ ऐसा नहीं है कि मैंने 1 ऑडियंस कमाई है मैंस पढ़ा कर के और अब मैं उसको नोटंकी करके बिहाइंद सीन दिखाऊं या कुछ भी ऐसा करूँ तो मुझे पता है कि वो अट्रैक्ट होगी बट मुझे यह भी पता है इनरप्दाकुरकी मैं उसका टाइम वेस्ट कर लूँ। तो मैं यह कहूँगा हर टीचर जितने भी स्कूल में है वो ईमानदारी से अपना काम करे और वो भी ये कोशिश कर सकते हैं कि यू ट्यूब चैनल बना के लोगों को अच्छा पढ़ाएं अच्छा से जिंदगी में कामयाब होने के लिए जैसे आप 1 टाउन से निकले फिर आपने अपनी जर्नी तय करे और आपने वो जर्नी काफी जगह बताई भी है लोग को पता जी बढ़ ई वांट टू नो की कोई आप एडवाइस दे जरूर जो लोग सपने देखते है जो लोग बड़े सपने देखते हैं जिंदगी में उनको आगे बढ़ने के लिए एडवाइस है देखिये पता नहीं होता है आप यह नहीं सोच सकते हो आज का जो है वो ये सोचते हैं कि यार मैं उसे टारगेट बना ले रहा हूँ मैं वहाँ क्यो नहीं पहुँच रहा हो आप 1 संग से नहीं पहुंच पाओगे आपको दर रखना पड़ेगा बस आपको ये देखना है की आप सही ट्रैक पर हो या नहीं हो तो आप चलते रहो और अपना काम जो भी है वो ईमानदारी से करते रहो। इफ यू आर एन टेंथ तो आप पूरी जान लगा 2 कि मुझे टेंथ में अच्छा करना है आप यू आर एन ट्वेल्थ तो आप ट्वेल्थ में जान लगा 2 ये जो एप्रोच आप रखते हो की यार मेरे को तो आईएस की तैयारी करनी है तो टेन ट्वेल्थ से मार्क से फर्क नहीं पड़ता तो ये नहीं क्योंकि जीतना 1 आदत है अच्छ करना 1 आदत है तो वो आपको धीरे धीरे डेवलप करनी पड़ेगी अपने अन्दर और ये प्रैक्टिस लोग होते है जो पढने में इतना तेज नहीं होते हैं जिनका मन नहीं लगता है पढाई में उनके लिए क्या तो कुछ भी, आपको जो भी लगता है की आप जैसे कोई भी धंधा या कुछ भी आप शुरू करना चाहते हैं तो आपको वो अपने कंफर्ट जोन से निकल कर। मुझे ऐसा लगता है कि कम उम्र में स्टार्ट कर देना चाहिए क्योंकि अगर आपने 1 टाइम पर 24 साल का ब्रेक ले लिया या आप उस कंफर्ट में चले गए जहाँ आप पूरी तरह बेरोजगार हैं तो उसका भी अपना अलग मजा अलग आनंद है फिर आप उससे बाहर नहीं आ पाओगे और फिर 1 के बाद छोटे काम करना भी बहुत मुश्किल होता है। तो मुझे ऐसा लगता है कि जब आपका खून गर्म है 21 22 साल जब आप कुछ कर सकते हो क्योंकि 2 स्थितियों में आदमी बढ़ा कर पाता है। जब किसी चीज का अभाव हो या आपको बेसिकली खोने के लिए कुछ है ही नहीं तब आप कर पाते है। 1 होता है की खोने से कुछ फर्क ही नहीं पड़ रहा आप बहुत बड़े उस स्थिति में तो आप हैं नहीं आपको खोने से कुछ नहीं है तो आप कुछ स्थिति में बहुत अच्छा कर सकते हो और पता किसी को भी नही होता है की आप आगे चले जाओगे लेकिन अगर आप ईमानदारी से 245 साल लगे रहते हो किसी भी चीज में तो उसका फल मिलता जरूर है। मैंने देखा 1 क्वालिटी जिसने आपका साथ अभी तक दिया है जिंदगी में जिसने आपको आगे बढ़ने में हेल्प कर हमेशा कोई 1 क्वालिटी आपके अन्दर स्ट्रॉंग यह में आप ऐसे मत बोलो आगे बढ़ने में, ये कहो की जिसने आगे बढ़ने में और वो न करने पर नीचे गिरने में भी मदद की है तो वो 1 ही क्वालिटी है टाइम वेस्ट में, में आगे बढ़ा हूँ तब वो दौर रहा है जब मैंने अपनी सिंगल सेकेंड भी खराब नहीं किए और मैं जब जब में नीचे गया वो वो दौर रहा है। जब मैंने खूब बैठ के इधर उधर की बातें कर रहा हूँ, समय खराब कर रहा हूँ तो समय से ज्यादा कीमती कुछ भी नहीं है इफ यू वांट तो अचीव एनीथिंग इन योर लाइफ तो यू हैव। टू रेस्पेक्ट टाइम आपने समय पर बात करी है समय ऐसी 1 चीज होती है कि जब आप स्टूडेंट लाइफ में होते हो, जब आप कॉलेज में होते हो तब आपको पहली बार प्यार मोहब्बत होती है और बहुत सारे टीचर बहुत जगह ऐसा बोलते हैं लोग ये सब तो टाइम वेस्ट है ऐसे सब बकवास चीजें है आपका इस पर क्या टेक है सर वो ही तो देखो। 1 मौका होता है जब जिंदगी में इंसान दूसरा पर्स्पेक्टिव भी देखता है वह वही मुझे ऐसा लगता है की वहाँ से भी आप बहुत सारी चीजे सीखते हो। जब आप किसी के साथ रिलेशनशिप में जाते हो तो आप बहुत कुछ सीखते हो, वह आपको हाऊ टू डील विद थिंग्स नहीं सिर जाना चहिए, आपके फेवर में नहीं चल रही है और हाऊ टू मैनेज थिंग्स की। अब आपको 1 डिसीजन किसी दूसरे के इन्फ्लुएंस के साथ भी लेना है। तो मुझे ऐसा लगता है की जाना चाहिए, टार्गेट नहीं बनाना चाहिए। नहीं सर अगर जाना री बात नहीं है, बट मैं ये मानता हूँ की ये चीजें कैरियर में बाधक है, अच्छा बिल्कुल बाधक है। अगर आपको लाइफ में 1 या मुझे दिन रात मेहनत करनी है, आगे बढ़ना है तो उस सोच के साथ आप रिलेशनशिप को हैंडल नहीं कर पाओगे या रिलेशनशिप के साथ आप इस अप्रोच को की। मुझे बहुत कुछ करना है, दिन रात मेहनत करनी है, नहीं हैंडल कर पाओगे। दोनो चीज वैसे कोई 1 ही हो पाएगी, क्योंकि आप बेसिकली सीधी सीधी बात कहिए की प्रेम करना चाहिए। नहीं करना तो प्रेम आती है, उसमे डूबना पड़ता है, बहुत डूबना पड़ता है, मतलब या तो अगर आप नहीं उतना डूबोगे तो आप प्रेम में असफल हो जाओगे। तो फिर अलग रोना मेरा ब्रेक या सुनना चाहता हूँ। प् प्रेम की परिभाषा क्या है? व 7 समर्पण है, प्रेम दया है प्रेम, बहुत खूबसूरत चीजें जहाँ अहंकार खत्म हो जाता है, प्रेम, वो चीजें जहाँ टाइम लेसनेस हो जाती है, वक्त का पता नहीं चलता प्रेम। वो चीजें जो इंसान को प्रेजेंट में जीना सिखाती है कि जब आप किसी के साथ प्रेम में होते हो और आपको वक्त का पता नहीं चलता, आप सिर्फ उसी चीज पर फोकस कर रहे हो, आप साथ खा रहे हो, बैठ के आप कॉफी पी रहे, आपको नहीं पता कि कल क्या हुआ था, आपको नहीं पता आप किस दोस्त से उधार पैसे ले के आए हो, किसकी जीनस, पैन के किसकी बैल्ट, पहन के उधर बाइक उसको लेके घुमा रहे। कुछ नहीं पता होता। वो प्रेम है जहाँ आपका विवेक 0 हो जाता है, आपको पता नहीं चलता है कि आप सही दिशा में आपको पता नहीं है कि आपने अपनी सारी सेविंग उड़ा दे। वैलेंटाइन डे। वीक आया तो मतलब वो प्रेम है जहाँ दिमाग लगना बंद हो जाता है। अच्छा वो स्थिति है प्रेम की बाकी। तो आजकल प्रेम वो जहाँ 1 और 11 हो गए, बल्कि 0 हो गए। वो वो प्रेम है। लेकिन आजकल वो सब चीजें निभाने में बहुत कुछ लगता है। घर, परिवार सब से मैथ्स पढ़ाते पढ़ाते है। इतना ज्यादा कैसे आपको इन सब चीजों को गहराई का पता चला कि दैट प्रेम शून्यता का है। आप इन चीजों में बहुत ज्यादा मुझे लगता है। आप उन चीजों को ऑब्जर्व करते हो, ऑब्जर्व करता हूँ। मैंने किताबें नहीं पढ़ी है। जैसे आज मैं ये बात क्लियर करना चाहता हूँ। बहुत से लोग लगता है मैंने बहुत किताबें पढ़ी नहीं, गाने वाले में थोड़ा शायरी करते रहे। मैंने अपनी लिखी जो भी लिखी है बड़ी अच्छी अच्छी कमाल की सायरी 1 सारिको 1 मैंने लिखी थी मतलब मैं ऐसे मोमेंट्स पर ही लिखता हूँ। मैं बोर्ड पर मैंने कुछ गलत लिख दिया था, तो वो मैंने मिटाया और उसके बाद फिर 1 सायरी। मैंने उस वक्त लिखी थी की गलती या गलत तो उसके दिल पर नाम भी लिखा था, जिसे हम कोरी स्लेट समझते रहे उसे जाने किस किस ने लिखे मिटा र तो मैंने जितनी भी शायरियां लिखी है वो मैक्सिमम प्रेम पर ही है की अब मुझे डर नहीं, किसी गुमराह का हर रास्ता तुझ तक जाता है, मेरी ऑलमोस्ट सायरी मैस से रिलेटेड ही है। जैसे की मैं ये कहता हूँ की मैस में आप इतने सारे सोलूशन सीख लीजिये कि हर सोलूशन आपको यह डर न की मैं कोई भी तरीका लगाऊंगा उत्तर नहीं आएगा, आपको पता है कि हर रास्ता उत्तर तक जा रहा है, ऐसी लाइफ में भी आपको यही होता है की मुझे अब डर ही नहीं है, मुझे पता है की मेरा हर रास्ता तुम तक जाएगा। मैथमेटिक और बच्चे को क्यों पढ़नी चाहिए, क्यूँकी लाइफ सिखा देती है जैसे प्रेम सिखा देती है। आपने देखा न कितना कुछ सीखा है वो गड़तसीसीखागड़तसीमैने रिले प्लस माइनस डिवाइहाक्यूंकी जब हम किसी भी सवाल को देखे इसका उत्तर कैसे नहीं आ सकता, जरुर कोई न कोई इसका शार्ट मेथड होगा, अच्छा तरीका होगा। तब मैंने लिखा था की कौन कहता है की उसका पता ही नहीं ढूंढने की हद तक कोई गया ही नहीं तो उस हद तक जाना पड़ता है, सब कुछ मिलता है या खुदा मिल जाता है लोगों को क्या बात है। 1 वो है गम मेरे साथ बड़ी दूर तक गए पाई जब मुझमें थकान तो वो खुद थक गए तो बहुत मजा आया लेकिन आपके साथ डिस्कशन करके और जेनी तो आप हैं न, बेसिकली नहीं है नहीं नहीं जी सर जी आपके साथ बात करके ऐसा बहुत मजा आ रहा है, मेरे को बहुत मजा आ रहा है आई लाइक दिस पार्ट जो इंसान की इनर कोर पर्सनैलिटी होती है। ओके अभी हमने गुस्से वाली की थोड़ा ये कर लेते हैं आप बताओ और क्या नहीं किसी भी टॉपिक पर जानना है या आई लाइक यू इनर कोर पर्सनैलिटी वाला पार्ट जैसे आपने बताया की 1 परस्पेक्टिव आपका लाइफ इधर भी है आप प्यार मोहब्बत के बारे में ऐसा सोचते हो, मैंने राज के साथ वोट कास्ट किया 10 मनी के साथ है तो हमने वहाँ भी प्रेम पर बड़ी चर्चा की फिर आफ्टर द पोडकास्ट, राज ने कुछ कुछ चीजें मेरे साथ शेयर की और मैंने बोला तो राज का भी सेम जैसे आपका ये है रिएक्शन तो राज का भी बिल्कुल वैसे ही था और फिर मुझे एयरपोर्ट जाना था बड़ा अच्छा किस्सा है तो राज ने कहा यार चलो मैं साथ चलता मैं छोड़ता है एअरपोर्ट और हम यह वाली बातें करते हुए गए और मैंने मतलब वहाँ पर 1 फोटो भी क्लिक की और मैंने अभी कुछ दिन पहले वो फोटो इंस्टाग्राम पर डाली भी तो राज ने उस पर कमेंट भी किया की आई हैव लर्न मतलब अनफिल्टर्ड वाली चीज जो मैंने उस दिन सीखी थी तो मजा आता है लोगों के साथ बात करने में, इस पर बात करते है। मुझे बड़ा इंट्रस्ट आ रहा आपसे बात है अच्छा इस पर बताओ सर आपका कैसे चालू है लव अफेयर एन एवरीथिंग स्कूल लू ऐसा कुछ नही होता की इसका कोई बटन होता है की नहीं चालू कर दे। नैन मटक्का हुए थे न नहीं मतलब। हम देखिये हम आपकी वाली जनरेशन में नहीं है न मटका और झट से मैसेज पास कर दिया। हमारे लिए तो यह बड़ी बात होती थी की किसी लड़की ने हमसे कॉपी मांग ली। तो 10 की हमारे लिए ये बहुत बड़ी बात है, हम इसको सोच के ही खुश है। फिर जब उसने कॉपी रिटर्न की तो उसमे हमारा नाम लिख दिया। तो हमारे लिए नैन मटक का इत्ता होता था कि हमारे लिए यह मतलब 1 महीने खुश रहने वाली बात होती थी कि यार उसने कॉपी मेरे ही क्यों मांगी हमारे उसने मेरे ही क्यों मांगी कॉपी। फिर उसने अपने हाथों से मेरा नाम लिख दिया, कॉपी पर नाम नहीं लिखा हुआ था और जनरल लड़के उस टाइम पर मतलब मैं तो करता था कभी कॉपी पर नाम नहीं लिख के रखते थे और हम उस ज़माने के लोग भी है पता है न की जो क्लास में और ज्यादा इसलिए पढ़ कर ही जाते थे टूशन में। ऐक्चवली मैं तो बॉयज स्कूल से ही पढ़ा हूँ ऑलमोस्ट टूशन में। इसलिए पढ़े पहले ऐसी ही जाते थे। शायद इसलिए भी हम पढाई में अच्छे रहे की हमें इससे बहुत फर्क पड़ता था की लड़कियों के सामने हमारी इमेज क्या है। हमे बताए टूशन में 3 लड़के लगना चाहिए को सब पहले से पता रहता तो बड़ा पड़ते थे यार रहना चाहिए और फिर किसी लड़की ने कोई सवाल पूछ ले यार मेरे को ये सवाल बताना। तो आपको ये घटना बताओ बताओ है की 1 लड़की ने सवाल पूछते वक्त मेरे कंधे पर हाथ रख दिया। मैं आपको बता नहीं सकता। मेरे को कई साल लग गए थे इस को कई स साल। ये इतनी बड़ी बात थी कि मतलब में इमेजिन नहीं कर सकता। उस दौर में बहुत बड़ी बात थी, आज का दौर बहुत बदल गया है, बहुत ज्यादा है। अब थोड़ा सोसाइटी पन है। आज शायद प्रपोज करना बहुत जरूरी हो गया है कि आप नहीं करोगे। हमारे दौर में नहीं था। मतलब बस नजरे मिली। कुछ दिन अच्छा लगा फिर शायद दूर हो गए, उसने अपनी मौसी के है कहीं स्कूल में एडमिशन ले लिया फिर भी बात नहीं हुई। मतलब हम दिल की बात पहुंचा पाना। हमारे ज़माने में ये फैसिलिटी नहीं थी। बहुत बड़ी बात थी कि अगर घर वालों को पता चल गया कि इसने ऐसा किया या किसी को बोला। बहुत मुश्किल बात तो सर मोहब्बत करके क्या मैं ला। मोहब्बत का मोहब्बत करके मोहब्बत का सच क्या पता नहीं। मिलती उनको फोसिनेशनमेहबेबत। एक्चवली मैंने जो भी कहा था की प्रेम की बहुत आती है और किसी चीज की भी नहीं रहती। तो अगर आप ये सोच रहे है की हमेशा रहने वाली चीज तो नहीं आ गए, कभी का पार्ट बने है। मैं तो अति का पार्ट बना और मैंने कहा की ही नहीं आती रहती ही नहीं किसी भी चीज की अति कर लीजिये, आप नहीं रहेंगे तो जीना चाहिए। जिंदगी के हर हिस्से में आपको हर 1 चीज जीनी चाहिए। मुझे ब आप प्रेम के मायने आपकी वाली जनरेशन में अलग हो गए हैं, क्या अलग। मुझे। अब रिश्ते सिर्फ प्रेम से ही नहीं चलते। अब आज बहुत से टर्म्स आ गए है, यू हैव टू रेस्पेक्ट च। दर आज लड़की की अपनी सेल्फ रेस्पेक्ट है, आ गई हमारे टाइम पे। ये चीजें नहीं होती थी, प्रेम में कोई सेल्फ रेस्पेक्ट नहीं होती थी। आपको बताए कि प्रेम तो 1 वो चीज है जहाँ अहंकार 0 हो जाता है। क्या हुआ है आप से आप वो वो चीजें प्रेम में कर देते हो। लोग कनेक्ट करेंगे जो आप नहीं कर सकते हो। मतलब सोचमे भी नहीं होती है। वो चीजें आप प्रेम में कर देते हो का मतलब ये है की अहंकार खत्म हो जाना, अहंकार खत्म होने का मतलब होता है कि आप प परमात्मा को महसूस कर रहे हो। परमात्मा को ये नहीं है की भगवान श्री कृष्ण आयेंगे आपके सामने बंसी बजाते हुए खड़े हो जायेंगे कि बेटा वर मांगो और आप कहोगे वर्तों मैं खुद कन्या दे। 2 वैसा नहीं है मतलब कबीर दास ने कहा था कि जब मैं था तब हरि नहीं, अब हर है ना, जब मैं था तब हरि नहीं और अब हर है। मनाई हर मिल जाना, परमात्मा महसूस करना मतलब जब म मतलब, अहंकार खत्म हो जाना। तो प्रेम जो है वो परमात्मा से मिलता है। आपको जो मैंने टाइम लेसनेस वाली बात कही वो थी जहाँ आप अपने सोल को फील कर पाते। सो मन आत्मा को फील करना कितना सुखद होता है। वो प्रेम में सम्भव है। जो लोग कहते है की भगवान श्री कृष्ण अगर गरम दूध पीते थे और राधा जी की जीप जल जाती थी। आप सोचिए मैं इस बात को सत्य मानता हूँ। ऐसा सम्भव है। प्रेम ऐसी चीज है कि ऐसा सच में सम्भव है। प्रेम बहुत ऊपर की चीज है। आज के दौर की चीज में। आज के दौर का प्रेम इस चीज पर भी खत्म हो सकता है कि आपने इस लड़की से चिल्ला कर कैसे बात की। प्रेम विल बी एंड। आज प्रेम में लोग अंडरस्टेंडिंग की बात कर रहे हैं, लड़कियां या लड़के अंडरस्टेंडिंग की बात कर हैं। बट अगर दोनों में से कोई गलत कर दे रहा है, तब अंडरस्टैंडिंग नहीं है। आप उसके गलत को अंडरस्टैंड क्यों नहीं कर पाए कि उसने किस परिपेक्ष में, किस सिचुएशन में, किस माइंडसेट में गलत किया होगा। 1 लड़के के ऊपर समाज, परिवार और तमाम तरीके की जिमेदार होती है। उसको आज कोई भी लड़की है, उसको मालूम है कि ठीक है, वो अपनी लाइफ में सफल होती है। अच्छी बात नहीं, सफल होती है तो कोई न कोई सफल लड़का उसके लिए मेहनत कर रहा होगा। लेकिन लड़के के पास ये ऑप्शन नहीं है, बिल्कुल नहीं होता, बिल्कुल नहीं है। उसको सफल होना ही है। हर हाल में, नहीं तो कोई उसके दाम देखने। नहीं। आएगा तो आज का प्रेम बहुत मतलबी हो गया है। आज आप बताइए उसके सपनो का राजकुमार दिहाड़ी होगा। नहीं कोई लड़की नहीं करी न। वो अपने सपने में भी क्या सोच रही है। वो तो यह सोच रही है। 12 करोड़ पैकेज, वही मैं कह रहा हूँ तो प्रेम में पैसा है। आज आज हम प्रेम पैसे को मतलब हो गया है। थोड़ा सा प्रेम मतलबी हो गया है तो इसको प्रेम नाम इसलिए नहीं दिया जा सकता। आज के दौर के प्रेम को प्रेम नहीं कहा जा सकता। फिर हम लोग कहते हैं की प्रेम टिकता नहीं है, प्रेम है नहीं तो आपने जो बातें बताई ये इतनी डीप है की इसको इंसान या तो पड़े या तो उसको महसूस करे, आपने पढ़ा नहीं तो आप तो आपने सारी चीजे मतलब। मेरा ऐसा मानना है की प्रेम में स्टैंडिंग और सेल्फ इन सब चीजों को बोलने की जरुरत नहीं होती है। 1 पिता अपने संतान को पालने के लिए कितनी जगह अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट को गिरवी रखता है, यह वही जानता है जब आप बाहर किसी कंपनी में सबके पास आप बिजनेस मैन हैं। हम हो गए या हमने कोई काम कर लिए। आज हमारे पास ये अपॉर्चुनिटी है, बट मैक्सिमम जनता तो जॉब कर रही है न, वो अपने मैनेजर की सुन रही है। वीक में 1 दिन बॉस की सुन रही है, क्या हालत है उसकी, कितनी बार ऐसा इंसान जिसकी शादी हो गई है का मन नहीं होता होगा कि आज बौस ने इतने खराब तरीके से डाटा है। मैं आज नौकरी छोड़। 2 लेकिन वो नहीं छोड़ सकता। उसको पता है की बच्चे की अगले महीने की फीस कैसे जाएगी। उसने भी रखा है अपना आत्म सम्मान गिर भी आप नहीं महसूस कर पा रहे है, आप नहीं अंडरस्टैंड कर पा रहे। आज आप अगर घर में बाहर से परेशान हो कर के अपने पार्टनर के ऊपर चिल्लाना भी शुरू कर देते हैं तो दिस इज वेरी हो जाएंगी, सिचुएशंस आप नहीं चला। आज लोग ये कह रहे है की मत को इतने हार्ड अटैक क्यों आ रहे हैं। वो अपने अन्दर चीजें दबा रहा है, समय रहा है वो घर में भी 1 प्रेशर झेलता है, माँ बाप की भी उससे उम्मीदें थी। अब वो जब शादी हो गई है तो यह नहीं समझ पाता है कि मैं कितनी चीजें, माँ बाप के लिए करूँ कितनी पत्नी और बच्ची के लिए करूँ। 1 मर्द का जीवन आसान नहीं है। और फिर हम ये कह रहे है की नहीं आजकल मर्दों को प्रेम करना नहीं आता, आज ये एग्जाम है मर्दों के ऊपर की मर्दों को प्रेम करना नहीं आता। मर्द इमोशनल नहीं है उसको इमोशनल होने का, वक्त कहाँ है, कब हो वो इमोशनल? आज 1 पुरुष कमा रहा है तो वो सारी जमेदारिउठारहा है। ये बात बड़ी कड़वी होगी। वो अपने माँ बाप की जरूरत पड़ रही है तो अपने भाई बहन की भी और पत्नी बच्चों के साथ अगर जरूरत पड़ रही है तो पत्नी के घरवालों की भी हर तरीके से मदद करने को। लेकिन अगर आप देखेंगे किसी घर में अगर महिला कमा रही है तो बड़ा रियर आप यह सुनेंगे कि वो उस पुरुष के अपने पति के माँ बाप का भी खर्चा उठा ले रही है न, वो कमा रही है तो वो सिर्फ अपने लिए। कमा रहा है। का वो डायलॉग जहाँ न्होंने, ये तो मेरी कमाई पर पल रहा था। पुरुषों ने कभी कोई मेरी कमाई पे कभी नहीं कहा। बल्कि महिलाओं के अन्दर ज्यादा कंपैशन होता है, मर्दों से उनके अंदर ज्यादा करुण भाव होता है। चीजों को लेकर। ये कहा जाता है की भाई उनके अन्दर ममता है, उनके इमोशन्स है सब कुछ। लेकिन आज पता ये कह दिया जाता है। बहुत सारी लड़की देख रहे होंगे, बहुत सारे लड़के देख रहे। वो बड़ी आसानी से ये कह देते हैं। अगर आप आज किसी को भी पैसे से मदद करते हैं, प्रतीक बाबू तो लोग यह कह देते हैं, तुमने किया क्या है। लेकिन कोई इस दर्द को नहीं समझ पाता कि मैंने पैसा अपना बहुत कुछ खो कर कमाया है। जिस वक्त लोग क्रिकेट खेलने में मस्ती कर रहे थे, जिस लोग बाजीराव पेशवा देख रहे थे, मैं बैठ के कमरे में पढ़ रहा था, उस लैम्प की रौशनी में मैंने अपनी आँखें खोई हैं, मैंने अपना शरीर खपाया है, तब 2 पैसा कमाया है। तो अगर मैं आज आपको वो 2 पैसे से मदद कर रहा हूँ तो आप उसको पैसा न समझे। आप यह समझें कि मैं आपको अपनी सालों की मेहनत का कुछ हिस्सा दे रहा हूँ, आप उसको वो समझ कर, रेस्पेक्ट करे। वो चीज खत्म हो गई है। लोगों के अन्दर पैसे को लेकर लगता है की पैसा इस नोट सपोर्ट मनीज नथिंग आप। मैक्सिमम लोगो को आज यह कहते हुए सुनेंगे मनीज न थिंग, पैसा कुछ भी नहीं है, पैसा कुछ भी नहीं है, ऐसा नहीं, पैसा बहुत कुछ है, बहुत कुछ क्या है, ऑलमोस्ट सब कुछ है। आज कोई आपके पास आ रहा है, कोई आपसे बात करना चाह रहा है, तो वो यह देख रहा है की आप किस पद पर हैं, पद मतलब, आप कितना कमाते हैं। आप रिश्तेदारों को देख लीजिये की वो आपसे तब कनेक्ट करते हैं, आप किस लेवल पर है, किस मुकाम पर और गलत है। ठीक है, आप सेल्फी से है, अच्छी बात है, समाज है तो उसमें ऐसा चलेगा, ऐसा चलेगा, ये गलत नहीं है। लेकिन उस चीज को एक्सेप्ट करने में बुराई नहीं है। मानिए भी इस बात को कि आप भी तो इसी लिए हमें सम्मान दे रहे हैं। या आप लड़की किसी को इसीलिए सम्मान दे रही है कि ऐसा है। मैंने आपको 1 वीडियो देखा तो उसमे आप कह रहे थे, हम तो फकीर आदमी हैं न। मोदी जी के बारे में बोला, उन्होंने कहा था कि वो फकीर आदमी और झोला लेकर चल देंगे। मैंने नहीं कहा फकीर का मतलब क्या मुझे, एग्जेक्ट पता भी नहीं। फकीर का मतलब 1 इंसान जिसको किसी चीज से होने या न होने से परवा नहीं है। अच्छा है मतलब टाइप के ओके। इसके लिए इंग्लिश में 1 और वर्ड होता है। क्या होता है? नहीं, नहीं, नहीं, मेरी भी इंग्लिश बड़ी कमजोर। फकीर को अगर आप बोलोगे तो सेंट है। फकीर को तो सेंट बोलेंगे। बट इसको जिसको होने या ना होने से फर्क नहीं पड़ता, जो उदासी नहीं। इसके लिए 1 वर्ड होता है याद नहीं। रह में लोग बता देंगे जो कहता हूँ आपको बता रहू एक्च्वली क्या होता है जो आप कह रहे हैं, मैंने प्रेम किया और प्रेम में कोई बुराई नहीं है, और मैं सबसे प्रेम करता हूँ। प्रेम करना अच्छी बात है। और प्रेम ये नहीं अपने बच्चों के लिए अच्छा सोचता हूँ और मेरा उनके प्रति दया भावना है। वो तो गाय की भी होती है। तो मैं सबके लिए ही वो भावना रखता हूँ, प्रेम वाली सबकी मदद का सोचता हूँ। जो बच्चे मेरे पास पढ़ने आते हैं, उनके साथ गलत हो जाता है। तो मैं सोचता हूँ की मैं उनके लिए क्या कर सकता हूँ, तो ये सब चीजें हैं, मेरा मतलब है कि मैं प्रेम की बात की जो स्थिति है मोह, तो मैं बहुत बार मैं चला जाता हूँ, उस स्टेट में ऐसा नहीं मैं, कहूँगा मोह मतलब कि जहाँ पर डिटैच होने का डर है, इतनी ज्यादा अटेचमेंट होगी तो मैं भी उस स्थिति में चला जाता हूँ। और लाइफ में बहुत बार गया हूँ। बट मुझे ये चीज महसूस होती है की अब मैं सही दिशा में नहीं हूँ, मोह का मतलब ही होता है प्रेम जहाँ पे आप स्वतंत्र नहीं हैं। राइट आपकी इंडेपेंडेंस चली गई, चली गई है या आपने किसी की इंडिपेंडेंसी ले लिए, दोनों ही स्थितियाँ हैं मोह के। अन्दर। तो मैं मुंह में जाना नहीं चाहता हूँ, बहुत बार चला जाता हूँ, मुझे महसूस होता है। तो फिर मैं यूटन लेकर वापस आता हूँ। तो फकीर का मतलब बेसिकली ये ही होता है कि आप मोह में न पड़े, आपके पास कुछ है तो आप ठीक है, बहुत खुश है, और कुछ नहीं भी है तो भी आप परेशान नहीं ह। और मैंने देखा आप रील्स भी आजकल डालते हो, अपने इंस्टग्राम पर हैं, 245 ही डाली। अभी भी मैं देख रहा था, उससे पहले की आपको कपड़ों को बहुत शौक है, आपको गाड़ियों का बहुत शौक है, ये सब चीजें थी 1 टाइम पर, आप तो कह सकते हैं की अब उतना मैं ध्यान नहीं दे, आपके ज्यादा है। यह चीज ज्यादा थी, जब नई नई सफलता मिली तो लगता था या नहीं, ऐसे जीवन जीना है। फिर धीरे धीरे करके और चीजें और प्राइवेट पे आ गई तो ये चीजें पीछे जाती रही। अभी ऐसा नहीं लगता, अच्छा अभी ऐसा नहीं लगता की कोई बहुत गाड़िया 1 लिस्ट होती थी, इतनी गाड़िया लेनी है। अभी बहुत बार ऐसा होता नहीं, कपड़े चेंज नहीं करने हैं, कई बार ऐसा होता कि 2 पोड कास्ट 1 ही दिन में है, तो सेम कपड़े में कर दिया। अब शायद उन चीजों से मन थोड़ा सा दूर भाग रहा है, आपको चीजें मिल गई, इस वजह से अब आपको समझ आ गया की ज्यादा नहीं नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, अभी भी मुझे ऐसा लगता है कि दोबारा फिर कभी करेंगे और चीजें प्रायरिटी पर है। मैंने कहा आपको अच्छा लाइफ में जब 30 क्रॉस कर लेते हो तो आपको पता चलता है की लाइफ में 1 बहुत कम टाइम बचा है, जिसमे बहुत कुछ करना है, हमें बहुत कुछ देखना भी है तो आप उसके बारे में आप क्या सोचते है। मैं ऐसा बिल्कुल नहीं सोचता क्योंकि मैंने जिस स्टेज पर जब जो हुआ है वो मैंने तब किया है और अगर मेरे पास 2 रुपए रहे तो 2 रुपए में जितनी बेहतर जिंदगी जी जा सकती है मैंने मैंने कभी ऐसा वक्त पे नहीं छोड़ा तब ऐसा होगा तब कर लेंगे। कभी भी मैं ऐसा नहीं करता हूँ, मैं हर चीज अपने हिसाब से ही करता हूँ अपने मन के हिसाब से। क मन को दबा के कुछ चीजें होती है जो घर में ही करता हूँ। बाकी कहीं नही बाकी। तो आपने देखा की पोडकास्ट के लिए आपका काफी दिनों से इनविटेशन था, मै मन हुआ तभी मैं आया। ठीक है प्रेजेंट मोमेंट जीते है ऐसा जीत हूँ। ऐसा कुछ ही है कि कुछ अधूरा रह गया है जो करना है नहीं किया है, जितना भी किया है तो भी बहुत अच्छा है अभी तक किया है और अभी भी ऐसा कोई अफसोस नहीं है की राज आ जाए और कहीं की आपको चलना होगा स और मैं कहूँ अभी कुछ करना रहेगा जितना मैं कर सकता था माँ बाप के लिए, बच्चों के लिए, घर के लिए, भाई बहन सबके लिए जिसके दोस्तों के लिए जो भी मैं कर सकता था, जितना मैंने अभी तक के हिसाब से किया है। आगे जितनी लाइफ है तब तक करेंगे तो क्या होता है, क्या करते हैं। एक्टर बनना था, शुरू से था कि एक्टर बनेंगे बट मुझे नही लगता कि शायद बन पा। क्यों की उधर भी हर जगह मैंने ये देखा की बहुत सारी चीजें इसलिए भी मैं अभी भी अपनी लाइफ में कहता हूँ। कोई मुझे पूछता है कि आप कितना सफल है तो मैं कहता हूँ कि नैतिक मूल्यों पर चलते हुए जितना जीवन में सफल हुआ जा सकता था, जितना आगे जाया जा सकता था, ईमानदारी के साथ छल कपट ना रखते हुए चालाकी ना रखता है। उतना आगे गया हूँ मैं मुझे इस बात का तो भी एक्टर हो सकते ह, हा हो सकते थे मैंने अपना करियर स्टैंड अप कॉमेडी से शुरू किया था। अच्छा है हाँ मैंने स्टैंड अप कॉमेडी किया आप देखेंगे मेरे वीडियोज हैं 2000 78 के क्या यूट्यूब पर है तब लोग सोचते नहीं थे तो कोई भाव नहीं देते स्टैंड में जाता था यह तब पता नहीं था लोग इतना सब तो उसमें मैं मतलब टाइम मुझे लगता है कोई भी एंकर बहुत ज्यादा ही मजाक नहीं करते थे। तो मैं उस टाइम अपनी एरिया में ऐसा 1 एंकर था जो हंसी मजाक कर रहा है और एंकरिंग कर रहा है। सब किया है भाई पैसे वहीं से शुरू किए थे पंद्रह सौ मिल रहे है, कहीं 2000 मिल रहे है तो वहाँ से फिर ये कैमरा फिर स्टेज खत्म हो डर नहीं लगता बोलने में अभी भी सच बोलता हूँ मैं बहुत सारी बातें मेरी लोगो को बहुत हर्ट कर जाती है, मैं आपके पोडकास्ट में भी आपने इतना रिलैक्स कर दिया। मैं बताना चाहता हूँ क मेरा दिल एकदम साफ है और मैं किसी के लिए गलत नहीं रखता, बट गलत होते हुए जहाँ दिखता है वहाँ मैं बोलता हूँ। मेरे घर में भी मेरे पिताजी अगर खाना बनाने वाले बंदे पर गलत तरीके से ज्यादा चिल्ला देते हैं। तो मैं इस चीज का भी विरोध करता हूँ कि यह सही नहीं है, भले ही मैं उन्हें अकेले में कहता हूँ या समझाता हूँ। 4 बार, समझाना पड़े 5 बार, तो मैं हमेशा गलत चीज का विरोध करता हूँ, और गलत सही कुछ होता नहीं है, सिर्फ 1 ऐसा है आज की जो जेंजी जनरेशन है, मुझे कोई शिकायत नहीं सेवा उसको आप कुछ भी सजेशन दीजिए, कुछ भी कहिए, वो पूछती है या कुछ भी वो कर रही आप मना करिए। वो कहते है इसमें गलत का मैंने सिर अभी तक लाइफ में जो बेटर 1 चीज सीखी is the एबिलिटी टू आस्क केशन आस्क केशन एवरीथिंग जो भी आपके आस पास है, जो भी आपके सामने हो रहा है, जो पढाई में पढ़ाया जा रहा है, आस्क क्वेश्न टोरिंग बिकाज ये 1 एबिलिटी है जो आपको जानने में मदद करेगी। क्योंकि ओशो कहते है की मानो मत जानो जी लोग मानने पर डायरेक्ट बिलीफ करते हैं, वही वही नहीं और वही है कि मतलब, लेकिन आज की जो जनरेशन है, जिसकी मैं बात कर रहा हूँ या आप बात कर रे है उसमें उसको कुछ बताते हैं। में 1 एग्जाम्पल लेता हूँ, ला वो वाशरूम गया, आप वाशरूम गया, ये लड़की वाशरूम गयी, इसके हाथ में मोबाइल है, उसके बाद ये वाशरूम से नहाके निकली और इसके बाद यह वही मोबाइल लेके। मंदिर में बैठ गई, फॉर एग्जाम मैं इसको बोलूंगा यार यह गलत है, तुम यही वाशरूम में भी मोबाइल लेके जाते हो, मंदिर में भी ऐसे तुमने रख दिया पूजा के आले में तो ये बोलेगी इसमें गलत क्या है। अब आप इसे कैसे प्रूव करेंगे की गलत। तो मैं ये बताना चाहता हूँ आपकी वाली जनरेशन को की देखिये गलत सही कुछ भी नहीं होता, सिर्फ अहसास का गेम है। आप मानेंगे तो गलत तो नहीं है, नहीं तो कुछ भी गलत नहीं है, इस संसार में कुछ भी सच नहीं है, कुछ भी झूठ नहीं है। आज मैं आपको 1000 का नोट दिखा कर कहूँ की ये 1000 का नोट है, कुछ बाहर से ले आइएगा, आप कहेंगे मजाक कर रहे हो क्यों की अभी 1000 का नोट नहीं आता, बट ये बात 2014 में सच थी। तो कुछ चीजें वक्त के हिसाब से सच झूठ में बदल जाते हैं और कुछ झूठ सच में बदल जाते है। सच झूठ, गलत, सही जैसा कुछ भी नहीं होता, सिर्फ अहसास है, दाल में नमक कम है, गलत है, थोड़ा डाल दिया, सही हो गयी, थोड़ा ज्यादा डाल दिया, फिर गलत हो गई। तो कई बार किसी चीज का ज्यादा हो जाना भी गलत हो जाता है, कम होना भी गलत हो जाता है। लाइफ में सर इतनी फिलोसॉफी एड कब हुई, कैसे में पता नहीं अभी आपके सामने निकल जा, मैं तो किसी पोडकास्ट में यह नहीं कि मैंने फिलोसॉफी वाला नहीं नहीं मैंने आपको देखा रात में ऑब्जर्व कर रहा था आपको अच्छा जब आप वो गाना न गा रहे थे और गाने भी ऐसे सुनते फिलोसॉफिकल टाइप हा मतलब मेरे गाने ये रहते है, मैं तो लाइफ पे गाने ज्यादा सुनता हूँ, हाँ थोड़ा रिलैक्स ने नहीं मतलब रिलेट होते हैं जैसे कुछ चीजे पसंद नही आती। आज कल 1 गाना चलरह की हमने दिल वहाँ लगाया जा, दिल लगाना मना किसने किया था सरकार ने, नोटिस निकाला था, मना था क्या उसकी छाती पर लिखा था कि यहाँ दिल मत लगाना माना था, और हम फिर भी मन पे चले गए। पता थोड़ी होता है, किसी को दिल लगाने, पर वो तो आप अफसोस ही कर सकते हो की दिल लगा लिया, गलत जगह भी लग जाता है भी है आपको लगा गलत जगह मतलब, ये कैसे आप मुझे थोड़ा गलत जगह की डेफिनेशन बता, गलत जगह मतलब किसी ऐसी गलत जगह लग गया हो की आप आप लगे पड़े भी सामने वाला नहीं तो वो तो फिर बेवकूफ तो फिर लगता नहीं है, वो तो झूठ बोलते हैं लोग ऐसा कुछ नही है, वो तो आप अट्रैक्ट होते, अट्रेक्शन टेम्प्रेरी लव, इज द पर्मानेंट ट्रेक्शन पर शुरू तो अट्रेक्शन से ही होता है, लोग तो कहते हैं की अट्रेक्शन से कोई फर्क नहीं पड़ता, ऐसा तो नहीं है, सर पड़ता तो नही पड़ता है, बट मैं हूँ टेम्प्रेरी लव है। तो आप अट्रैक्ट हो गए और सामने वाले ने कह दिया की नहीं हो सकता कुछ तो वो टेम्प्रेरी ही न खत्म हो जाएगा, 245 दिन बाद वो अट्रेक्शन कम हो जाएगा, वो तो ऐसे आप फिल्मों में भी देखते होगे। तो आप बता 2 कि आपको बचपन में क्रश नहीं हुआ था कितनी सारी हीरो तो आप क्या टीवी में निकल सकते थे। ये तो छोड़िये हम तो हमेशा कॉपी लेते थे, कॉपी वही लेते थे जिसे एसर राय की फोटो छपी होती थी। तो लगा था क्या मतलब आप उसके साथ ही प्रेम में पड़ जायेंगे। तो वो जिसकी बात आप कर हे वो तो बिना देखे कॉपी पेन और टीवी से भी हो जाता है। सर बहुत अच्छा लगा, मुझे आपसे बात करके थोड़ा टाइम होता तो मैं आपके साथ फिलोसॉफी का 1 पोडकस्ट करना चाहता हूँ, अगली बार टाइम दोगे मेरे को, हा अरे बिल्कुल बिल्कुल एकदम देंगे कैमरा मे है, एकदम मैं इसको काटूंगा नहीं और बहुत ऐसे ही मुद्दों पर चर्चा करेंगे लाइफ पे चर्चा करेंगे की जब बचपन थे तो कैसी फीलिंग थी। मैं भी चाहता हूँ कि सही बात लोगों को पता चलने चाहिए। जो लोग भी देखे की जब हम टेंथ क्लास में हो, कैसी फीलिंग होती है और कैसे कैसे वो दिमाग चेंज होता रहा हमारा परसेप्शन कैसे चेंज हुआ हमारे लिए सवाल उसमे ऐसे हो सकते हैं कि 2010 में प्रेम क्या था, 14 में क्या सम, 19 में क्या समझ, 55 साल के अंडरस्टैंड थैंक यू नेक्सट टाइम पक्का हुई है। जी जी जी, अगर ये एपिसोड आपको पसंद आया है तो अपना फेवरेट पार्ट कॉमेंट कर देना। अगले गेस्ट आप कौन सा देखना चाहते हो, वो भी मुझे लिख कर जरूर बताना और सबसे बड़ी बात अगर तुम यहाँ तक आ गए हो और तुमने अभी तक मुझे सब्स्क्राइब नहीं करा तो यार बड़ी गलत बात चैनल को सब्सक्राइब कर 2 फटाफट से एंड बेल आइकॉन हिट कर देना ताकि कोई भी विडियो में सुनाओ मैं मिलता हूँ किसी अगले पोडकास्ट में और हाँ इसको शेयर जरूर कर देना। अगर आपको लगता है ये शेयर करने से अवैरनेस बढ़ती है और लोगों को पसंद आएगा तो उसको शेयर करना मैं मिलता हूँ किसी अगले पोडकास्ट में टिल द टाइम अपना ध्यान रखे जय हिन्द वंदे मात्रम।